मध्यप्रदेश भाजपा में महासंग्राम संघ को सम्भालना पड़ी कमान, ग्वालियर में राजमाता की पुत्री यशोधरा राजे के टिकट पर भी संशय

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी में लगभग पूरे मध्यप्रदेश में बगावत के सुर तेज हो रहे हैं। टिकट के लेकर कई सीटों पर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। शहडोल, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, सीधी, टीकमगढ़, खजुराहो और भोपाल में तनाव की स्थिति निर्मित हो चुकी है।अपुष्ट सुत्रोंके मुताबिक  इन सीटों पर भारी भितरघात और बगावत की स्थिति को टालने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी सक्रिय हो गया है। संघ के सर कार्यवाह भईया जोशी अचानक भोपाल पहुंचे और भाजपा के प्रांत संगठन मंत्री सुहास भगत विनय सहस्त्रबुद्धे द्वारा कमान सम्भालने की खबर है। 

ग्वालियर संभाग में भाजपा नेता एवं सांसद अनूप मिश्रा व अशोक अर्गल घनश्याम पिरौनिया जैसे जनाधार वाले नेताओं के बगावत की आशंका है।सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि वो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ सकते हैं। हालांकि इसपर खुलकर कोई नहीं बोला है। ग्वालियर लोकसभा सीट की बात की जाए तो यहां के सांसद नरेंद्र सिंह तोमर पहले ही हार के भय से मुरैना कूच कर गए हैं ,उनके जाने के बाद ग्वालियर में ही महल से स्वर्गीय राजमाता विजयाराजे सिंधिया की पुत्री यशोधरा राजे जैसा सशक्त प्रत्याशी उपलब्ध होने के बावजूद उनका नाम सिर्फ इस वजह से घोषित नहीं हो पा रहा है क्यों कि प्रदेश के संघ और भाजपा पर मजबूत पकड़ रखने वाले   महाराष्ट्रीयन धड़े द्वारा  महापौर विवेक शेजवलकर को प्रत्याशी घोषित कराने पर्दे के पीछे से नागपुर तक जोरदार लॉबिंग करने की खबर है। कमोवेश कुछ ऐसी ही स्थिति इंदौर से सुमित्रा महाजन को लेकर निर्मित किये जाने की खबर है। उधर भिंड से संघ के पूर्व प्रचारक रहे भांडेर के पूर्व विधायक घनश्याम पिरौनिया का टिकट कटने से उनके भी बगावती तेवर सामने आ रहे हैं।
शहडोल में कांग्रेस से दल बदलकर लाईं गईं हिमाद्री सिंह को टिकट दिए जाने के बाद ज्ञान सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। टिकट कटने के बाद सांसद ज्ञान सिंह ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला खोलते हुए पार्टी के नेताओं पर टिकट बेचने का आरोप लगाया है।  छिंदवाड़ा में भाजपा के नीति निर्धारक गौड़वाना गणतंत्र पार्टी से जुड़े मनमोहन शाह बट्टी को पार्टी में लाकर नकुलनाथ के मुकाबले चुनाव में उतारना चाहते हैं। भाजपा ने इसका तीव्र विरोध शुरू कर दिया है। यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है कि विरोधी भाजपा के निष्ठावान नेता हैं या कमलनाथ में निष्ठाएं होने के कारण कुछ लोग विरोध कर रहे हैं।
सीधी से प्रत्याशी बनाई गई रीति पाठक और केन्द्रीय मंत्री वीरेन्द्र खटीक का विरोध नहीं थम रहा है। जिले के नेता उनकी खुलकर मुखालफत कर रहे हैं। सीधी में विधायक केदारनाथ शुक्ल और रामलल्लू वैश्य के समर्थक रीति के खिलाफ हो गए हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता आरडी प्रजापति का कहना है कि टीकमगढ़ से बीजेपी चुनाव हार जाएगी।
छतरपुर से आरडी प्रजापति समर्थकों ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को फैक्स कर प्रत्याशी बदलने और स्थानीय व्यक्ति को टिकट देने की मांग की है। वीरेन्द्र खटीक मूल रूप से सागर के निवासी हैं। ललिता यादव, पूर्व मंत्री रामदयाल अहिवार पूर्व से ही उनके खिलाफ हैं।
कांग्रेस द्वारा खजुराहो लोकसभा सीट से कविता सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद बीजेपी अब रीवा राजघराने से जुड़े पुष्पराज सिंह को यहां से मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। पुष्पराज के नाम पर विचार के बाद विवाद शुरू हो गया है। खजुराहो से नंदिनी पाठक, संजय नगाइच, कुसुम मेहदेले, ललिता यादव, अभिषेक भार्गव समेत एक दर्जन दावेदार हैं।
भोपाल सीट पर बाहरी दावेदार वीडी शर्मा, प्रज्ञा ठाकुर का नाम सामने आने के बाद स्थानीय नेताओं बाबूलाल गौर, कृष्णा गौर, उमा शंकर गुप्ता, आलोक शर्मा ने विरोध दर्ज कराने के साथ हारने की चेतावनी तक दी है। भोपाल सीट पर भितरघात हर हाल में सुनिश्चित है। यदि बाहरी नहीं लाए तो गुटबाजी के कारण भितरघात होगा।

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