मध्यप्रदेश के छोटे शहर के सरस्वती विद्या मंदिर की इस बेटी ने कर दिखाया बड़ा काम

खरगोन /भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस अधिकारी गरिमा अग्रवाल मध्यप्रदेश के खरगोनकी रहने वाली हैं। सरस्वती विद्या मंदिर से शुरुआती पढ़ाई करने वाली  29 वर्षीय गरिमा ने यूपीएससी के अपने पहले ही प्रयास में आईपीएस की रैंक पाकर सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन उनका लक्ष्य कुछ और था। उन्होंने फिर से तैयारी की और दूसरे ही प्रयास में आईएएस बनने का अपना ख्वाब पूरा किया। आइए जानते हैं आईएएस गरिमा की सफलता की कहानी …

इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में पैसा, शोहरत, रूतबा और दबदबा सब कुछ है। लेकिन पहली बात तो यह कि सिविल सेवा परीक्षा को क्लीयर कर पाना सबके बस की बात नहीं है। दूसरा आपने क्लीयर भी कर लिया तो अच्छी रैंक पाकर आईएएस बनना बड़ा मुश्किल काम है।
हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान गरिमा ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कई अहम टिप्स दिए हैं। गरिमा अग्रवाल अभी तेलंगाना में प्रशिक्षण के लिए सहायक जिलाधिकारी के पद पर तैनात हैं। यूपीएसपी की सिविल सेवा परीक्षा देने के पहले गरिमा आईआईटी हैदराबाद से ग्रेजुएशन कर चुकी हैं। गरिमा ने दिल्ली में दिििएए एक साक्षात्कार में अपने आईआईटी से लेकर आईपीएस और फिर आईएएस बनने के सफर की कहानी साझा की।

खरगोन के सरस्वती विद्या मंदिर से शुरुआती पढ़ाई करने वाली गरिमा शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं। उनकी बड़ी बहन प्रीति अग्रवाल ने भी 2013 में भारतीय डाक सेवा की परीक्षा पास की थी। गरिमा ने स्कूल लाइफ से लेकर यूपीएससी सिविल सेवा तक जिस क्षेत्र में भी कदम रखा, वहां सफलता जरूर पाई है।
गरिमा यूपीएससी सीएसई एग्जाम में पहली बार 240वीं रैंक पाकर आईपीएस अधिकारी बनी थीं, लेकिन अगले ही प्रयास सीएसई एग्जाम में 2018 में उन्होंने अपनी अधिक मेहनत के बलबूते न केवल 40वीं रैंक हासिल की बल्कि अपने आईएएस ऑफिसर बनने का ख्वाब भी पूरा किया।  इसके बाद उन्होंने 2019-2020 में एलबीएस अकादमी, मसूरी में अपना प्रशिक्षण पूरा किया।

गरिमा ने अपनी सफलता के मंत्र बताते हुए यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को कई अमूल्य सुझाव दिए। गरिमा के अनुसार, सबसे पहले तो इस बात को दिमाग में रख लें कि प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी अलग-अलग न करके संयुक्त तौर पर करनी चाहिए।
गरिमा के अनुसार, यूपीएससी प्री परीक्षा में आने वाले प्रश्न भी कई बार मुख्य परीक्षा में आ जाते हैं। इसीलिए रिवीजन करना जरूरी है। सिर्फ बहुत सारा स्टडी मटैरियल जुटाने से ही सफलता नहीं मिलती, उसे पढ़ना होता है। याद करना होता है। मॉक टेस्ट देने चाहिए। साथ ही साथ आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस कर स्पीड भी बढ़ाएं।

निराश न हों, धैर्य रखें 
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को टिप्स देते हुए आईएएस गरिमा ने कहा कि इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी धैर्य और निरंतरता है। अपने मन को ऐसे तैयार करें कि जिस दिन पढ़ने की इच्छा न हो उसी दिन अच्छे से पढ़कर दिखाएं और देखें कि कैसे आपके अंदर नया साहस पैदा होता है।
जिन लोगों से आपको प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है उनके संपर्क में रहें। नकारात्मक विचारों वाले लोगों से दूरी बनाना ही ठीक रहता है। विफलता या फिर सफलता दोनों हमारे दिमाग में होती हैं, अगर हम ठान लें तो कुछ भी हासिल कर सकते हैं।

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