उन्होंने कहा, ”मैं खुद से यही कहता हूं कि भाई तुम इस बात से दुखी मत हो कि तू अपने देश के लिए फिर नहीं खेलेगा. पर इस बात की खुशी अपने पास रख कि तू अपने देश के लिए खेला. और ये मेरे लिए सबसे बड़ी बात है कि मैं खेला
शिखर धवन ने इंटरनेशनल और डोमेस्टिक क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला कर लिया है। 24 अगस्त की सुबह-सुबह सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो पोस्ट करते हुए उन्होंने रिटायरमेंट का ऐलान किया। ‘गब्बर’ के नाम से मशहूर बाएं हाथ का यह बल्लेबाज लंबे समय से टीम से बाहर चल रहा था। शुभमन गिल सरीखे युवा ओपनर्स के आने के बाद से उनकी टीम में वापसी मुश्किल नजर आ रही थी। वह आईपीएल खेलेंगे या नहीं इस बारे में फिलहाल कोई अपडेट नहीं है। लगभग 39 साल के हो चुके शिखर धवन ने भारत के लिए सबसे पहली बार 2010 में वनडे क्रिकेट खेला था, इसके बाद टी-20 और फिर टेस्ट फॉर्मेट में डेब्यू का मौका मिला।
धवन ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो डालकर संन्यास का एलान किया है.
इस वीडियो में वो कहते दिख रहे हैं, ”आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा हूं जहां से पीछे देखने पर सिर्फ़ यादें ही दिखती हैं और आगे देखने पर पूरी दुनिया. मेरी हमेशा से एक ही मंज़िल थी, इंडिया के लिए खेलना और वो हुआ भी. जिसके लिए मैं कई लोगों को शुक्रगुज़ार हूं.”
“सबसे पहले मेरी फैमिली. मेरे बचपन के कोच तारक सिन्हा जी, मदन शर्मा जी, जिनके अंडर मैंने क्रिकेट सीखी. फिर मेरी टीम जिसके साथ-साथ मैं सालों खेला. मुझे एक परिवार मिला. नाम मिला और आपका सबका प्यार मिला.”
उन्होंने कहा, ”लेकिन कहते हैं ना कहानी में आगे बढ़ने के लिए पन्ने पलटना ज़रूरी है. तो बस, मैं भी ऐसा ही करना जा रहा हूं. मैं अंतरराष्ट्रीय और डोमेस्टिक क्रिकेट से अपनी रिटायरमेंट का एलान कर रहा हूं.”
शिखर धवन ने कहा, ”और जब मैं अपनी क्रिकेट जर्नी को अलविदा कह रहा हूं तो मेरे दिल में एक सुकून है कि मैं अपने देश के लिए बहुत खेला. मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूं बीसीसीआई और डीडीसीए का, जिन्होंने मुझे मौक़ा दिया और मेरे सारे फैन्स का, जिन्होंने मुझे इतना प्यार दिया.”
उन्होंने कहा, ”मैं खुद से यही कहता हूं कि भाई तुम इस बात से दुखी मत हो कि तू अपने देश के लिए फिर नहीं खेलेगा. पर इस बात की खुशी अपने पास रख कि तू अपने देश के लिए खेला. और ये मेरे लिए सबसे बड़ी बात है कि मैं खेला.”
अब नहीं गरजेगा गब्बर का बल्ला
मौजूदा कप्तान रोहित शर्मा और शिखर धवन ने मिलकर कई साल तक भारतीय टीम के लिए ओपनिंग की। दोनों टीम को तूफानी शुरुआत दिलाने के लिए मशहूर थे। शिखर धवन ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर डेब्यू करते हुए किसी पदार्पण खिलाड़ी द्वारा सबसे तेज टेस्ट शतक लगाकर सिलेक्टर्स को चौंका दिया था। दिल्ली के रहने वाले धवन एक आक्रामक बल्लेबाज थे, जो गेंदबाजों के परखच्चे उड़ाने में मशहूर थे। अपनी घुमावदार मूंछों से नया स्टाइल स्टेटमेंट बनाने वाले धवन का कैच लपकने के बाद जांघों पर हाथ मारने का सिग्नेचर स्टाइल हमेशा याद रखा जाएगा।
2003-04 के अंडर-19 विश्व कप में तीन शतकों के साथ 84.16 की औसत से 505 रन बनाकर वह प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट थे। इसके बाद रणजी ट्रॉफी में धवन का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। आईपीएल और पांच वनडे मैच में निराशाजनक प्रदर्शन और टेस्ट सलामी बल्लेबाजों के अच्छे प्रदर्शन के बाद, ऐसा लग रहा था कि धवन को घरेलू क्रिकेट और टी-20 लीग तक की समेट दिया जाएगा, लेकिन किस्मत पलटी और सहवाग-गंभीर दोनों का फॉर्म अचानक बुरी तरह गिर गया, जिसके बाद 27 साल के धवन को मौका मिला और उन्होंने पीछे पलटकर नहीं देखा।