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कनिष्क ने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा में किया टॉप

सफल परीक्षार्थियों में 182 लड़कियां ,टॉप 25 में से 15 लड़के और 10 लड़कियां शामिल

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2018 के नतीजों की घोषणा कर दी है.

इस परीक्षा में कनिष्क कटारिया ने टॉप किया है. इस परीक्षा में सफल परीक्षार्थी आईएएस, आईपीएस और कई केंद्रीय सेवाओं के लिए चुने जाते हैं.

आईआईटी बॉम्बे से ग्रेजुएट कनिष्ट राजस्थान के जयपुर के रहने वाले हैं. उन्होंने पहले प्रयास में यह सफलता प्राप्त की है.

यूपीएससी की मुख्य परीक्षा में इस बार 10,468 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिसमें से 759 ने अंतिम सफलता हासिल की है. सफल परीक्षार्थियों में 182 लड़कियां हैं.

टॉप 25 में से 15 लड़के और 10 लड़कियां शामिल हैं.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में कनिष्क ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वो परीक्षा में टॉप करेंगे.

उन्होंने कहा, “पेपर और इंटरव्यू अच्छे हुए थे और यह मेरा पहला प्रयास था लेकिन टॉप करूंगा ये उम्मीद नहीं थी.”

सिविल सेवा परीक्षा में कनिष्क का ऑप्शनल पेपर मैथ्स था.

क्या परीक्षा की तैयारी के लिए कोई कोचिंग ली थी, इस सवाल के जवाब में वो कहते हैं, “मैंने 7-8 महीनों के लिए दिल्ली में कोचिंग की थी. तैयारी से पहले मैंने साढ़े तीन साल तक नौकरी की थी और मुझे परीक्षा का कोई आइडिया नहीं था, इसलिए कोचिंग करना पड़ा.”

“कोचिंग की मदद से मैंने बेसिक नॉलेज हासिल की. उसके बाद पिछले साल मार्च से लेकर परीक्षा तक घर पर सेल्फ स्टडी की थी.”

दक्षिण कोरिया में की थी नौकरी

कनिष्क ने इस सफलता के लिए मेंस परीक्षा के पहले 8 से 10 घंटे और परीक्षा के नजदीक आने पर 15 घंटे तक की पढ़ाई की थी.

कनिष्क सिविल सेवा ही करेंगे, इसको लेकर वो बहुत स्पष्ट नहीं थे.

वो कहते हैं, “मेरे पिता सिविल सेवा में ही हैं. उनका मन था कि मैं भी सिविल सेवा में ही आऊं, लेकिन मैं बहुत श्योर नहीं था कि मैं करूंगा ही.”

“मैंने पहले अपनी जिंदगी जीने की कोशिश की. आईआईटी बॉम्बे से ग्रेजुएट होने के बाद तीन साल नौकरी की. इस दौरान मैंने अपनी सोच बदलनी शुरू की.”

शांत स्वाभाव और आम युवाओं की तरह शौक रखने वाले कनिष्क ने आईआईटी से पढ़ाई के बाद दक्षिण कोरिया में देढ़ साल तक काम किया.

वहां की जिंदगी ने उन्हें देश की व्यवस्था बदलने की प्रेरणा दी.

वो कहते हैं, “मैंने दक्षिण कोरिया में डेढ़ साल तक काम किया था. उसके बाद एक साल बेंगलुरू में था. जब मैं विदेश में था तब भारत के जिंदगी को वहां की ज़िंदगी से तुलना कर रहा था, तब मुझे लगा कि भारत में सिस्टम को बदलने के लिए वहां से सिस्टम में घुसना जरूरी है.”

“पिताजी की वजह से मुझे थोड़ी जानकारी थी कि प्रशासनिक काम कैसे होता है.”

कोई रॉकेट साइंस फॉर्मूले से नहीं की थी तैयारी

कनिष्क ने बताया कि इसी प्रोफाइल से परीक्षा पास करने वाले कुछ सीनियर से उन्होंने मदद ली थी और एक रणनीति से तहत तैयारी की थी.

वो कहते हैं, “सीनियर ने मेरी मदद की और मैंने उनसे उनकी रणनीति पूछी और उसमें अपने हिसाब से थोड़ा बदलाव कर तैयारी की. यह कोई रॉकेट साइंस नहीं था.”

सिविल सेवा परीक्षा के टॉपर ने 2010 में आईआईटी जेईई परीक्षा में 44वां रैंक हासिल किया था. इसके अलावा 10वीं और 12वीं में भी उन्होंने 90 फीसदी से ज़्यादा अंक हासिल किए थे.

कनिष्क को क्रिकेट और फुटबॉल देखना काफी पसंद है. सचिन तेंडुलकर, विराट कोहली उनके फेवरेट क्रिकेटर हैं.

क्रिकेट का शौक रखने वाले कनिष्क के फिल्में देखना बहुत पसंद नहीं है.

साभार

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