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उच्च न्यायालय ने मध्यप्रदेश की चार हजार से अधिक कालोनियों को पुनः किया अवैध

 

   

 ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने तत्कालीन शिवराज सरकार को एक बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने शिवराज सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत अवैध कॉलोनियों को वैध किया जा रहा था। हाईकोर्ट ने ये आदेश उमेश बोहरे के द्वारा लगाई गयी जनहित याचिका पर दिया है। जिसमें कहा गया था कि शिवराज सरकार ने धारा-15A का दुरूपयोग कर अवैध कॉलोनाइजरों को फायदा पहुंचाने का काम किया है।

दरअसल मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में एक याचिका दायर की गयी थी। जिसमें कहा गया था कि सूबे की शिवराज सरकार ने 2018 में अपना वोट बैंक बनाने की नियत से कई सारी योजनाओं को नियमों के विपरीत लाभ लेने के कोशिश कर रही है। जिसके तहत प्रदेश भर की अवैध कॉलोनियों को वैध किया जा रहा है। जबकि इन कॉलोनियों को किसी भी नियम के तहत वैध नही किया जा सकता है। जिस पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने इस मामले में प्रदेश सरकार के साथ-साथ मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव राजस्व सहित पांच लोगों को इस मामले में पार्टी बनाया था। इस बीच याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में ऐसे सरकारी सर्वे नंबर पेश किए है… जिन्हें नियम विरूद्ध वैध कॉलोनियों में शामिल कर दिया गया है। ऐसे में हाईकोर्ट ने शिवराज सरकार की धारा-15A को खत्म कर दिया है। जिसके बाद अब फिर से अवैध से वैध हुई कॉलोनी…. फिर से अवैध हो गयी है।  

 की जाए। आपको बता दें कि 8 मई 2018 को प्रदेश भर की अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण का काम की शुरूआत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर से की थी। ग्वालियर नगर निगम सीमा की 690 अवैध कॉलोनियों में से पहले चरण में 63 अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण (वैध) करने की घोषणा की थी। साथ ही मध्य प्रदेश की चार हजार से अधिक कॉलोनियां वैध करने का एलान किया था। लेकिन अब हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद फिर से अवैध हो गयी है।

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