Homeदेशजानिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट के अगले...

जानिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बोबडे ने

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शरद अरविंद बोबडे का इंटरव्यूप्रकाशित किया है.

इंटरव्यू में टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शरद अरविंद बोबडे का इंटरव्यूप्रकाशित किया है.

इंटरव्यू में जस्टिस बोबडे ने कहा है कि भारत में कुछ लोगों के पास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुत ज़्यादा है और कुछ के पास बहुत कम.

उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी की बहस के दो पहलू हैं.

जस्टिस बोबडे ने कहा, ”इस बहस का एक वो पहलू है जहां कुछ लोग सार्वजनिक और सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म्स पर कुछ भी कहकर निकल जाते हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती. दूसरा पहलू ये है कि कुछ लोगों को अपनी बात रखने के लिए प्रताड़ित किया जाता है.”

संवैधानिक अदालतों में महिला जजों की कम संख्या के बारे में पूछने पर जस्टिस बोबडे ने कहा, ”मैं पूरी कोशिश करूंगा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों को चुनने में निष्पक्ष रवैया अपनाया जाए लेकिन दिक़्कत है महिला जजों की उपलब्धता. हाई कोर्ट में जज बनने के लिए के लिए कम से कम 45 वर्ष उम्र होनी चाहिए. हम रातोरात महिला जजों की संख्या नहीं बढ़ा सकते. इसके लिए एक तय प्रक्रिया अपनानी होगी.”

उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी की बहस के दो पहलू हैं.

जस्टिस बोबडे ने कहा, ”इस बहस का एक वो पहलू है जहां कुछ लोग सार्वजनिक और सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म्स पर कुछ भी कहकर निकल जाते हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती. दूसरा पहलू ये है कि कुछ लोगों को अपनी बात रखने के लिए प्रताड़ित किया जाता है.”

संवैधानिक अदालतों में महिला जजों की कम संख्या के बारे में पूछने पर जस्टिस बोबडे ने कहा, ”मैं पूरी कोशिश करूंगा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों को चुनने में निष्पक्ष रवैया अपनाया जाए लेकिन दिक़्कत है महिला जजों की उपलब्धता. हाई कोर्ट में जज बनने के लिए के लिए कम से कम 45 वर्ष उम्र होनी चाहिए. हम रातोरात महिला जजों की संख्या नहीं बढ़ा सकते. इसके लिए एक तय प्रक्रिया अपनानी होगी.”

साभार

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments