नए बजट में टेक्स व्यवस्था में एक तरह से एक गणित तैयार किया गया है. नई स्कीम का लाभ उन्हीं को मिलना है, जिनके पास कोई निवेश नहीं है. अमूमन ये देखा गया है कि जो भी इस आयकर की सीमा में है, दस लाख या 15 लाख रुपये की सालाना आमदनी के दायरे के भीतर आते हैं, उनके पास कुछ बचत योजनाएं पहले से होती हैं.
सरकार ने बदलाव के रूप में एक नई वैकल्पिक व्यवस्था दी है, उस वैकल्पिक व्यवस्था में ये कहा गया है कि अगर आप सारी छूट जो पहले लेते थे, वो छोड़ दें तो आपको कम टैक्स देना होगा. नई वैकल्पिक व्यवस्था में चार से पांच टैक्स स्लैब बना दिए गए हैं.
पांच लाख रुपये से साढ़े सात लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर पहले 20 फ़ीसदी टैक्स देना होता था, अब उसको घटाकर दस फ़ीसदी कर दिया गया है. इसी तरह से साढ़े सात लाख रुपये से दस लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर पहले 20 फीसदी की दर से टैक्स देना होता था, अब उसे 15 फीसदी की दर से टैक्स देना होगा.
दस लाख से 15 लाख के लिए जो स्लैब पहले 30 प्रतिशत का था, अब उसे दो भाग में बांट दिया गया है. दस लाख से 12.5 लाख रुपये की सालाना आमदनी वालों को 20 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होगा, और 12.5 लाख से 15 लाख रुपये की आमदनी तक वालों को 25 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होगा.
15 लाख की आमदनी से ऊपर पहले भी 30 प्रतिशत था, उन्हें अभी भी 30 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होगा लेकिन इन सबके लिए कुछ शर्तों का पालन करना होगा. ढ़ाई लाख तक की आमदनी पर पहले कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था, अब पांच लाख तक की आमदनी पर कोई टैक्स नहीं देना होगा.