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जानिए पूजा की उन चार चीजों के बारे में जो कभी बासी व पुरानी नहीं मानी जातीं

पूजा-पाठ करने के लिए हमेशा ताजी सामग्री का उपयोग किया जाता है। जैसे, फल, सब्जियां, फूल, भगवान को ताजे ही अर्पित किए जाते हैं लेकिन स्कंदपुराण में ऐसी चीजों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें कभी बासी नहीं माना जाता यानी इनका इस्तेमाल कई दिनों बाद भी पूजा में किया जा सकता है। जानें, कौन-सी हैं वे चीजें-

गंगाजल
गंगाजल को सबसे पवित्र जल माना जाता है.  भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि इसके अलावा वायुपुराण में भी यह बताया गया है कि गंगाजल भले ही सालों पुराना हो लेकिन वह कभी भी खराब नहीं होता। ऐसे में हर पवित्र कार्यों में गंगाजल का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा वायुपुराण में भी यह बताया गया है कि गंगाजल भले ही सालों पुराना हो लेकिन वह कभी भी खराब नहीं होता, इसलिए आप पूजा में गंगाजल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

बेलपत्रभगवान शिव बेलपत्र चढ़ाया जाता है। शिवरात्रि पर शिव को बेलपत्र चढ़ाने का पौराणिक महत्व है। बेलपत्र को अमर फल भी माना जाता है। केवल शिव को चढ़ाए जाने वाले इस फल को एक बार चढ़ाने के बाद भी शिव को चढ़ा सकते हैं।

कमल का फूल 

वैसे, तो कमल का फूल आसानी से नहीं मिलता लेकिन पूजा-पाठ में इसका प्रबंधन कर लिया जाता है। ऐसे में दुर्लभ माने जाने वाला कमल का फूल भी दुबारा पूजा में उपयोग किया जा सकता है।  इसकी बासी होने की पांच दिनों की अवधि बताई गई है। एक बार प्रयोग करने के बाद इसे पांच दिनों तक नियमित रूप से धोकर पूजा में प्रयोग किया जा सकता है।

 तुलसी के पत्तेपौराणिक कथाओं में तुलसी को देवी माना जाता है इसलिए तुलसी के पत्तों का पूजा में विशेष महत्व है। तुलसी को पूजा में फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इसे धोकर ही दुबारा पूजा में रखें। 

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