मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक निजी नर्सिंग होम के चिकित्सकों की लापरवाही से एक मासूम मोत का शिकार बन गया,बच्चे की हालत खराब देख उसकी मां सुधबुध खो चुकी थी, मां कभी बच्चे के पैरों के तलवों को मसलती तो कभी उसके नन्हें पैरों को दबाती। एक घंटे बाद परिजनों को समझ आ गया कि बच्चा अब कभी नहीं खिलखिलाएगा। डॉक्टरों के रवैए पर गुस्साए परिजनों ने हंगामा शुरू किया तो पुलिस और सीएमएचओ भी मौके पर पहुंच गए।
परिजनों ने चेतावनी दी कि हमने कोई तोड़फोड़ नहीं की है, लेकिन लापरवाह डॉक्टर के नर्सिंग होम को सील किया जाए। पहले तो सीएमएचओ ने मामला टालना चाहा, लेकिन लोगों के गुस्से को देखते हुए जिंसी नाला स्थित मुस्कान नर्सिंग होम को सील कर दिया गया।
आयुष पुत्र ध्यानेन्द्र सिंह उम्र साढ़े तीन माह निवासी नवग्रह कॉलोनी गोल पहाड़िया को गुस्र्वार को सर्दी जुकाम हुआ था। जिंसी नाला नंबर दो स्थित मुस्कान नर्सिंग होम पर डॉ. अनिल कुमार जैन ने चेकअप के बाद जो दवा लिखी थी, उसको देने से बच्चे ने दूध पीना बंद कर दिया। परिजन शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे दोबारा मुस्कान नर्सिंग होम पहुंचे। वहां डॉक्टर ने बच्चे को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया।
बच्चे के दादा भाजपा मंडल अध्यक्ष गिर्द अमर सिंह कौरव का आरोप है कि बच्चे को ड्रिप के साथ एक इंजेक्शन भी दिया गया था। इससे बच्चे की मौत हुई है। परिजनों का कहना था कि डॉक्टर बार-बार बयान बदल रहा है। पहले कहा कि कोई इंजेक्शन ही नहीं दिया, बाद में कहा कि ओनो की .05 एमएल डोज दी है। जब बच्चे को उल्टी नहीं हो रही थी तो ओनो क्यों दिया गया।