Homeदेशराजमाता की स्मृति में प्रधानमंत्री ने जारी किया 100 रुपये का सिक्का

राजमाता की स्मृति में प्रधानमंत्री ने जारी किया 100 रुपये का सिक्का

 

 

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को विजया राजे सिंधिया के जन्म शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में 100 रुपये का स्मृति सिक्का जारी किया। वीडियो कांफ्रेंस से आयोजित इस समारोह में सिंधिया परिवार के सदस्यों के साथ-साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपालों सहित देश के अन्य भागों से कई गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उनके व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए कहा कि पिछली शताब्दी में भारत को दिशा देने वाले कुछ एक व्यक्तित्वों में विजयाराजे सिंधिया भी शामिल थीं. विजया राजे केवल वात्सल्य की मूर्ति ही नहीं थी, वो एक निर्णायक नेता थीं और कुशल प्रशासक भी थीं.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्र के भविष्य के लिए विजया राजे ने अपना वर्तमान समर्पित कर दिया था. देश की भावी पीढ़ी के लिए उन्होंने अपना हर सुख त्याग दिया था. विजया राजे ने पद और प्रतिष्ठा के लिए न जीवन जीया, न राजनीति की.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ऐसे कई मौके आए जब पद उनके पास तक चलकर आए. लेकिन उन्होंने उसे विनम्रता के साथ ठुकरा दिया. एक बार खुद अटल जी और आडवाणी जी ने उनसे आग्रह किया था कि वो जनसंघ की अध्यक्ष बन जाएं. लेकिन उन्होंने एक कार्यकर्ता के रूप में ही जनसंघ की सेवा करना स्वीकार किया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आजादी के इतने दशकों तक, भारतीय राजनीति के हर अहम पड़ाव की वो साक्षी रहीं. आजादी से पहले विदेशी कपड़ों की होली जलाने से लेकर आपातकाल और राम मंदिर आंदोलन तक, विजया राजे के अनुभवों का व्यापक विस्तार रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हम में से कई लोगों को उनसे बहुत करीब से जुड़ने का, उनकी सेवा, उनके वात्सल्य को अनुभव करने का सौभाग्य मिला है. विजया राजे एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व थीं. साधना, उपासना, भक्ति उनके अन्तर्मन में रची बसी थी. विजया राजे के आशीर्वाद से देश आज विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है. गांव, गरीब, दलित-पीड़ित-शोषित-वंचित, महिलाएं आज देश की पहली प्राथमिकता में हैं.

केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल ने इस मौके पर कहा कि राज परिवार में जन्म लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षण करने वालीं राजमाता विजया राजे सिंधिया विरल व्यक्तित्व थीं। उन्होंने कहा, ‘‘वे वात्सल्य की प्रतिमूर्ति थीं। अपने सार्वजनिक जीवन में उन्होंने गरीबों, वंचितों, पीड़ितों के लिए निरंतर कल्याणकारी कार्य किए।’’ विजयाराजे सिंधिया ग्वालियर राजघराने की राजमाता होने के साथ-साथ भाजपा की संस्थापक सदस्यों में से एक रही थीं। वह पांच बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा की सदस्य निर्वाचित हुई थीं। विजया राजे सिंधिया का जन्म 12 अक्टूबर 1919 को मध्य प्रदेश के सागर में हुआ था। उनके बेटे माधव राव सिंधिया कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे थे। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया उनकी पुत्री हैं। माधव राव के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद अब भाजपा में शामिल हो गए हैं।

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