Homeमध्यप्रदेशजरा सम्भलकर उबाल खाने लगा चम्बल का खून

जरा सम्भलकर उबाल खाने लगा चम्बल का खून

लो जनाब “आइटम” “रखैल” और अब “कतल है जावेगो”  चोंकिये नहीं जनाब हम सही लिख रहे हैं । मध्यप्रदेश में ग्वालियर चम्बल अंचल की 16 सीटों के उपचुनावों में इमरती देवी को कमलनाथ ने आइटम की संज्ञा क्या दी पूरा उपचुनाव अब इसी के इर्दगिर्द नजर आता दिखाई दे रहा है। कहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया भाषण में डायस पर ऐसे हाथ पटकते चिल्लाते दिखाई दे रहे हैं जैसे की दुश्मन को युद्द के लिए ललकार रहे हों तो कहीं मुख्यमंत्री शिवराज शाब्दिक हमले करके कांग्रेस को लज्जित कर रहे हैं। गुरुवार को मुरैना में इसी आइटम पर चम्बल की आन बान शान और स्वाभिमान की ऐसी बात कही गई की पानसिंह और मोहरसिंह की याद ताजा हो आई। यह हुंकार किसी और ने नहीं बल्कि अपने कमलदल अर्थात इमरती देवी की पार्टी के दिमनी प्रत्याशी गिर्राज दंडोतिया ने भरी वैसे इसी हुंकार में उन्होंने चम्बल में जातिवाद को दरकिनार कर दलित की बेटियों को अपनी बहन कहकर समरसता की अदभुत मिसाल प्रस्तुत की इसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है लेकिन इसी हुंकार के बीच चम्बल के पानी की ठसक भी श्री दंडोतिया दिखा गए। उन्होंने खास मुरैना भिंड की भाषा में कमलनाथ को समझाते हुए कहा वो तो बढ़िया रही की डबरा में तुमने यह बात कही अगर चम्बल में दिमनी मुरैना में यह कहा होता तो मूढ़े ले लेते ( सर काट लेते) कतल है जातो , लाश घर जाती। अब इस धमकी पर कांग्रेस भी कहां चुप रहने वाली थी यहां भी चम्बल के मुरैना से ही  पलटवार किया यह प्रतिउत्तर आया मुरैना से कांग्रेस किसान मोर्चा के दिनेश गुर्जर का उन्होंने कहा यह 35 लाख की गर्मी बोल रही है कमलनाथ तो छोड़िए कांग्रेस के अदने से भी कार्यकर्ता को छूने की कोशिश भी की तो पता चल जाएगा इसका खामियाजा क्या होता है।

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