कहते हैं आदमी के जीवन पर संगत का बेहद असर होता है। कई बार खराब संगत के कारण अच्छे से अच्छा व्यक्ति बिगड़ जाता है तो कई बार बुरे से बुरे व्यक्ति के जीवन को अच्छी संगत सही रास्ते पर ले आती है। किसी ने ठीक ही लिखा है संगत ही गुण ऊपजे संगत ही गुण जाए …. अब राजनीति में भी संगत का एक बहुत अच्छा उदाहरण सामने आया है इससे पहले यह उदाहरण आपके सामने प्रस्तुत करूँ देश के सबसे बड़े व केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी के बारे में कुछ शब्द लिखना चाहूंगा इस दल के बारे में दो बातें बहुत मशहूर हैं पहली इसे अनुशासित दल होने का दर्जा प्राप्त है तो दूसरा इसके बारे में कहा जाता है “पार्टी विद डिफरेंट” अर्थात दूसरों से अलग हटकर । अब आपको बताते हैं वह उदाहरण जिसकी हमने ऊपर चर्चा की है। यह उदाहरण है भाजपा नेता व राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से जुड़ा हुआ । उन्होंने गुरुवार को अपने ग्वालियर प्रवास के दौरान पत्रकारों के सवालों के जवाब जिस चतुराई और शालीनता से दिए उसे देखकर यह साफ नजर आया की अब उनके व्यक्तित्व व कृतित्व दोनों पर ही भाजपा का असर दिखाई देने लगा है। पत्रकारों ने जब उनसे भाजपा के प्रदेश प्रभारी के मुरलीधर राव द्वारा इंदौर में कही बात की “सिंधिया समर्थकों के कारण हमारे लोग वंचित रह गए” के बारे में स्पष्टीकरण चाहा तो श्री सिंधिया ने भाजपा की परंपरा को परिभाषित करने वाला जवाब देकर पत्रकारों की बोलती बंद कर दी। उन्होंने कहा की मुरलीधर जी ने कुछ नहीं कहा। उन्होंने तो मीडिया को नसीहत देते हुए कहा की आप लोग देश में लोगों को जोड़ने का काम कीजिये । सिंधिया ने बड़ी चतुराई से कहा की यहां कोई सिंधिया गुट नहीं है न कोई गुटबाजी है।आप लोग बहुत दिनों से भाजपा को कवर कर रहे हैं यहां सिर्फ भारतीय जनता पार्टी है। उन्होंने बड़ी ही शालीनता के साथ विशिष्ट अंदाज में कहा की ज्योतिरादित्य सिंधिया कौन हैं ? में नहीं जानता मैं सिर्फ भाजपा का कार्यकर्ता हूँ। उन्होंने उमाभारती के शराबबंदी वाले बयान को भी यह कहकर टाल दिया की यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह व उमाभारती के बीच का संदर्भ है। संसद में दिग्विजय सिंह के कटाक्ष पर भी ज्योतिरादित्य ने राजनीति में एक स्तर मेंटेन करने की बात कहते हुए कहा की जो उन्हें कहना था उन्होंने कहा और जो मुझे कहना था मैंने कहा। साफ है ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पत्रकारों की मंशा को भली प्रकार भांपते हुए सारे सवालों को निर्मूल कर दिया। यहां निश्चित ही पत्रकारों को जो करना चाहिए था उन्होंने वही किया सवाल पूछना उनका काम है। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है की इन सवालों के जवाब देते वक्त श्री सिंधिया ने अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस की रीतिनीति की बजाए अपने नए दल भाजपा के अनुशासन व उचित प्लेटफार्म पर अपनी बात कहने की परम्परा का निर्वहन किया। यह इस बात का संकेत है की ज्योतिरादित्य सिंधिया पर भाजपा का रंग अब केवल बाहर ही से नहीं भीतर से भी चढ़ने लगा है। यह भाजपा और ज्योतिरादित्य दोनों के ही लिए अच्छी बात है। इस घटनाक्रम को इस कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है की ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा जॉइन किए व सांसद बने अब काफी समय गुजर चुका है। जब वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आये थे तब यह कहा जा रहा था की उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया जाएगा लेकिन अभी तक पार्टी ने ऐसा नहीं किया उल्टे मुरलीधर राव की सीधी सीधी चुभने वाली टिप्पणी भी चर्चा में आ गई। ऐसे में पत्रकारों को यह लगता था की श्री सिंधिया अपने स्वभाव के मुताबिक कुछ विपरीत टिप्पणी अवश्य करेंगे । लेकिन उन्होंने धैर्य बनाये रखा है। यह इसलिये भी आश्चर्यजनक है क्योंकि देशवासियों ने पिछले अनेक वर्षों में ज्योतिरादित्य सिंधिया में तेज तर्रार और सीधी चुभती बात कहने वाले नेता की छवि देखी है। फिर चाहे वे कांग्रेस में रहे हों या अब भाजपा में चुनावी मंच हो या पत्रकार वार्ता वे मुखर ही नजर आए हैं और इसी तेजतर्रार स्वभाव के चलते उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। यहां यह बात भी अब महत्वपूर्ण हो जाती है की भले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा में आने के बाद वहां के अनुशासन व रीतिनीति को अंगीकार कर लिया है लेकिन भाजपा उनकी व उनके समर्थकों की इच्छा को कब तक पूरा करती है अब इसपर सभी की नजर है। निःसन्देह ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस की केंद्र सरकार में एक सफल केंद्रीय मंत्री रहे हैं, उनमें इसकी योग्यता भी है,वे ऊर्जावान हैं, युवा हैं साथ ही वे एक ऐसे परिवार से भी आते हैं जहां से जनसंघ और भाजपा को छोटे बिरवे से वर्तमान के बड़े बटवृक्ष बनने तक बहुत सहयोग मिला है और सबसे बड़ी बात तो यह है की उन्होंने अपनी चिरपरिचित शैली और स्वभाव को भी भाजपा के अनुरूप ढाल लिया है अतः अब भाजपा को देर नहीं करना चाहिए।
अब तो ध्यान दो भाजपा वालों कहीं देर न हो जाए
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