Homeप्रमुख खबरेंअंतरजातीय विवाह करने पर लाखों देगी सरकार

अंतरजातीय विवाह करने पर लाखों देगी सरकार

इंटर कास्ट मैरिज को बढ़ावा देने और समाज में फैली जातिप्रथा को खत्म करने के लिए सरकार दलित के साथ इंटरकास्ट मैरिज अर्थात अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए सरकार आर्थिक मदद भी कर रही है। केंद्र सरकार ने इस योजना को कफल करने के लिए इसमें कुछ सुधार भी किए हैं। अब आर्थिक मदद पाने के लिए 5 लाख रुपये सालाना आय की सीमा भी खत्म कर दी है। यह आर्थिक मदद दलित लड़का या लड़की, दोनों ही मामलों में दी जाएगी। इसमें राज्य सरकारों द्वारा भी अलग से आर्थिक राशि दी जाती है। गौरतलब है कि डॉ. अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज स्कीम 2013 में शुरू की गई थी।

इस योजना का उद्देश्य जातिगत आधारित समाज से अलग सभी को एकजुट करने का प्रयास है। इस योजना में यह शर्त है कि योजना का लाभ विवाहित जोड़े में से एक युवक या युवती अनुसूचित जाति की होनी चाहिए। एक सर्वे के अनुसार भारत में इंटरकास्ट मैरिज का आंकड़ा मजह 11 फीसदी है। जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मेघालय और तमिलनाडु में 95 फीसदी शादियां अपनी ही जाति में की गईं। पंजाब, सिक्कम, गोवा, केरल में यह आंकड़ा 80 फीसदी है। इस स्कीम के तहत हर राज्य को अलग टारगेट दिया गया है। इसके अलावा कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान को अधिक से अधिक मामले दर्ज कराने के लिए कहा गया है। इस योजना का विचार बाबा साहेब अंबेडकर की शिक्षाओं से लिया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक ख़बर के मुताबिक, हर साल कम से कम 500 इंटरकास्ट मैरिज होने का लक्ष्य रखा गया था। इंटरकास्ट मैरिज के लिए आर्थिक मदद पाने के लिए पांच लाख सालाना आमदनी की सीमा रेखा तय की गई थी, लेकिन सरकार ने इसे अब समाप्त कर दिया है। अब पांच लाख रुपये सालाना से अधिक कमाने वाले युवा भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसमें भी आधार नंबर वाला बैंक खाता देना होगा। केवल अनुसूचित जाति वर्ग के युवक से यदि पिछड़ा या सामान्य वर्ग की युवती विवाह करेगी तो ही योजना का लाभ मिलेगा। इसी तरह अनुसूचित जाति वर्ग की युवती से पिछड़ा या सामान्य वर्ग के युवक द्वारा विवाह किया जाता है तो भी योजना का लाभ मिलेगा। साथ ही योजना के तहत कोर्ट मैरिज करने पर ही आर्थिक मदद मिलेगी।

इसका मतलब समाज के बड़े बदलाव को प्रोत्साहन देना और ऐसा कदम उठाने वालों को विवाह के शुरूआती दिनों में अपने जीवन को व्यवस्थित करने में मदद करना है। इसकी एक अन्य शर्त यह भी है कि यह इंटरकास्ट मैरिज युवक-युवती की पहली शादी होनी चाहिए और यह हिंदू मैरिज एक्ट के तहत रिजस्टर्ड भी होनी चाहिए। और इसका एक प्रस्ताव सरकार को शादी के एक साल के भीतर भेज देना होगा। कई राज्यों में भी इस तरह की स्कीम चल रही है। राज्यों की पहल पर ही केंद्र सरकार ने इनकम की सीमा को खत्म करने का निर्णय लिया है।

केंद्र सरकार ने जिस उत्साह के साथ इस स्कीम को शुरू किया था, उतना उत्साह जनक परिणाम नहीं मिला। सामाजिक न्याय मंत्रालय में पहले साल 500 जोड़ों के लक्ष्य में महज 5 जोड़ों ने ही रजिस्टर्ड किए गए। 2015-16 में 522 आवेदन आए लेकिन 72 ही मंजूर किए गए। 2016-17 में 45 मामले दर्ज किए गए। और 2017 में अब तक 409 प्रस्ताव आए हैं। उनमें से केवल 74 जोड़ों को ही आर्थिक राशि देना मंजूर किया गया है। कम मामले ही मंजूर होने की वजह पर अधिकारी बताते हैं कि ज्यादातर जोड़े स्कीम की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments