क्या महामारी के इस दौर में स्वास्थ्य सहायता में यह वर्गभेद ठीक है मुख्यमंत्री जी ?

कोरोना महामारी के इस संकटकाल में बहुत सी दुखभरी खबरें लगातार आ रही हैं। लेकिन इस समय तमाम सेवाभावी लोग,संगठन और संस्थाओं ने जरूरतमंद लोगों के लिए जो कार्य किये हैं उन्हें देख आंखों से आंसू छलछला आते हैं। अपनी व अपनों की चिंता छोड़ दूसरे की प्राणरक्षा करने से बड़ा कोई मानवधर्म नहीं कहा जा सकता।

 कोरोनकाल में पूरे देश ने ऐसे तमाम देवदूतों को देखा है। मेरा दृढ़ विश्वास है चुपचाप रहकर सेवाकार्य करते इन  महामानवों के सहारे ही भारत कोरोना से जारी यह जंग जल्द ही जीतेगा। 

विश्वास रखिए हमारे बाजारों में फिर से चहल पहल लौटेगी, मंदिरों से ॐ जय जगदीश हरे के सामूहिक गान फिर सुनाई देंगे, मांगलिक कार्यों में गूंजने वाले मंगल गान और हास परिहास करते घर परिवारों का वह खुशनुमा माहौल जरूर लौटेगा।
 जरूरत है तो केवल धैर्य की जरूरत है तो केवल इस बात की हम दृढ़ता के साथ कोविड प्रोटोकाल का पालन करें अपना और अपने निकट सम्बन्धियों ,शुभचिंतकों का मनोबल न गिरने दें
,घबराएं नहीं व समाज के हर जरूरतमंद की हम अपने स्तर पर कैसे मदद कर सकते हैं इसके लिए चौबीस घण्टे तैयार रहें। 
चूंकि हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है हर पांच साल में हम अपने मनपसंद जनप्रतिनिधियों को चुनते हैं। सरकार बनाते हैं । इसके पीछे यह उद्देश्य भी निहित होता है की जब देश और यहां के जन पर कोई आपदा या मुसीबत आए तो यह चुनी हुई सरकार व जनप्रतिनिधि हम सबकी मदद कर सकें। वर्तमान की बात की जाए तो महामारी के इस दौर में सरकारें व जनप्रतिनिधि अपना कार्य कर रहे हैं। इससे जनता को कोरोना से लड़ने मेंआसानी भी हो रही है

 लेकिन इसके साथ ही यह लिखने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए की ऐसे समय में भी हमारी सरकारें व हमारे जनप्रतिनिधि  अमीर गरीब अगड़ा पिछड़ा देखकर सरकारी सुविधाएं प्रदान करने की बात करते देखे जा रहे हैं। यह किसी भी तरह से उपयुक्त नहीं कहा जा सकता है। कोरोना यह देखकर संक्रमण नहीं फैला रहा है की यह अगड़ा है यह पिछड़ा है यह गरीब है यह अमीर है
 वह तो सभी को मौत के घाट उतार रहा है। ऐसे समय में सरकारों का धर्म केवल स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करना व हर जरूरतमंद को मदद पहुंचाकर उसकी जान बचाना होना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। इसका एक ताजा उदाहरण मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का एक ताजा वीडियो है। जो कल से बेहद वायरल है। मुख्यमंत्री शिवराज जी इस वीडियो में बेहद सख्त लहजे में प्रदेशभर के कलेक्टरों को आयुष्मान कार्डधारकों के सभी परिवारजनों  व गरीबों के आयुष्मान कार्ड तत्काल बनाए जाने के निर्देश दे रहे हैं। वे कह रहे हैं की गरीबों व आयुष्मान कार्ड वालों को एम्बुलेंस सीटी इस्केन से लेकर इलाज की सारी सुविधाएं मुफ्त प्रदान की जाएंगी
 मुख्यमंत्री जी यह बहुत अच्छी बात है की किसी गरीब को अथवा आयुष्मान कार्डधारकों को चिकित्सा सुविधाएं निशुल्क देने का आपने निर्णय लिया है ।लेकिन यह भी कटु सत्य है की इस महामारी के एक साल से अधिक समय से जारी विपदा काल ने बड़े से बड़े अमीर को भी गरीबी के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
 इसकी सबसे बड़ी मार तो मध्यम वर्ग पर पड़ी है। आज लाखों परिवार ऐसे हैं जो कोरोना की चपेट में हैं और उनके पास इलाज को पैसे नहीं हैं वे प्राइवेट चीकित्सा केन्द्रों की हवस को पूरा करने की क्षमता नहीं रखते। क्या वे सरकारी चिकित्सा सहायता के हकदार नहीं हैं ?क्या उनका केवल यही अपराध है की वे आयुष्मान जैसी सरकारी योजनाओं के दायरे में नहीं आते । 
मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की सरकार की आयुष्मान योजना में ऐसे तमाम कार्डधारी शामिल हैं जो पूरी तरह से सम्पन्न हैं  और गरीबों जरूरतमंद न होकर भी इसके लाभ के हकदार बने हुए हैं। वे इसमें शामिल हैं। इसके पीछे क्या गड़बड़झाला है यह चर्चा कभी बाद में करेंगे। 
कितना अच्छा होता की मुख्यमंत्री शिवराज वर्तमान के महामारी वाले दौर में निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं  के लिए किसी सरकारी योजना अथवा अमीरी गरीबी को केंद्र न मानकर कोरोना के कारण दुख दर्द में कराहती प्रदेश की सम्पूर्ण जरूरतमंद जनता को केंद्र में रखकर घोषणा करते तो ज्यादा अच्छा होता।
dubeypraveen8152@gmail.com

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