जन्मदिन विशेष : वर्तमान की दुर्गंधयुक्त राजनीतिक माहौल में सुगन्ध बिखेरता एक उज्ज्वल व्यक्तित्व

   प्रवीण दुबे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक परम्परा में कार्यकर्ता को देवदुर्लभ की संज्ञा देकर इंगित किया जाता है। सच पूछा जाए तो यहां कार्य करते करते एक कार्यकर्ता कब और कैसे देवदुर्लभ बन जाता है शायद उसे खुद भी इसका पता नहीं चल पाता । व्यक्तित्व निर्माण की इस पाठशाला में तैयार वह देवदुर्लभ कार्यकर्ता जब राजनीति के क्षेत्र में अपनी आभा बिखेरता है तो उसके व्यक्तित्व कृतित्व को देख समाज न केवल हतप्रभ होता है बल्कि उसके प्रति श्रद्धानवत भी होता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला में तैयार ऐसे ही देवदुर्लभ कार्यकर्ता है ग्वालियर के सांसद विवेक नारायण शेजवलकर  उनकी बात इसलिए निकली है क्योंकि आज उनका 74 वां जन्मदिन है। सहज ही यह प्रश्न किया जा सकता है वे तो एक बड़े नेता हैं उन्हें कार्यकर्ता

का सम्बोधन क्यों ? बात सच भी है लेकिन हम जिस विचारधारा की बात कर रहे हैं शायद वहां एक नेता से ज्यादा कार्यकर्ता को सम्मानित माना जाता है यही वजह है की नेता को नहीं कार्यकर्ता को देवदुर्लभ की संज्ञा दी गई। हम जिनकी बात कर रहे हैं उनका स्वभाव भी नेता कम कार्यकर्ता जैसा दिखाई देता है। राजनीति में लंबा वक्त सांसद विधायक महापौर के अलावा तमाम संगठनात्मक दायित्व निर्वहन के बावजूद वे सदैव अपनों के बीच नेता कम कार्यकर्ता ज्यादा नजर आते हैं।

पूरा ग्वालियर संसदीय क्षेत्र ही नहीं सम्पूर्ण मध्यप्रदेश उनकी सहजता सरलता सादगी का कायल है। कई बार उनकी सहजता सरलता को उनकी कमजोरी मानकर उन्हें उलाहना देते लोग भी दिखाई देते हैं, कईबार उच्च नोकर शाही भी इसका लाभ लेकर कामचोरी करती है लेकिन श्री शेजवलकर ने कभी भी सिद्धान्तों से समझौता नहीं किया । कितनी ही विपरीत परिस्थितियां क्यों न हो वे कभी भी न तो उत्तेजित दिखे न कभी पद के घमंड में रौब झाड़ते नजर आए। अपनों का ही नहीं विपक्ष व अपने धुर विरोधी नेताओं का भी
उतना ही सम्मान उन्हें वर्तमान के दुर्गन्धयुक्त राजनीतिक माहौल में भी दूसरों से श्रेष्ठ दर्शाते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली कहते हैं कि आज की राजनीति में विवेक शेजवलकर जैसे नेता विरले ही नजर आते हैं। वे अपने कार्य व्यवहार से भारतीय राजनीति की मूल अवधारणा को जीवंत करने वाले नेताओं में शामिल हैं। शुचिता, सहजता,ईमानदारी के साथ वैचारिक कट्टरता होने के बावजूद अपने विरोधियों से भी संवाद रखना उनका स्वभाव है। वे राजनीति के अजातशत्रु हैं । शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी और चेंबर ऑफ कॉमर्स ग्वालियर के सेकेट्री डॉ प्रवीण अग्रवाल का कहना है की विवेक शेजवलकर जैसे नेताओं के कारण ही राजनीति के उच्च आदर्श कायम हैं। खुद का लंबा सामाजिक राजनीतिक जीवन और परिवार की सम्पन्न राजनीतिक विरासत के बावजूद विवेक जी को लेशमात्र अभिमान नहीं है वे सादा जीवन उच्च विचार के साथ सहज सरल हैं जो उन्हें समाज में बेहद लोकप्रिय बनाता है। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप मांढरे कहते हैं की विवेक जी दो बार महापौर रहे,सांसद रहे,जीडीए अध्यक्ष रहे साथ ही उनके पिता जी भी जनसंघ के समय कईबार सांसद, महापौर सहित कई पदों पर रहे लेकिन उन्होंने कभी भी घमंड  नहीं किया। वे इतने सरल व सहज स्वभाव के धनी हैं की उन्होंने कभी भी कार्य में व्यवधान पैदा करने वालों के प्रति भी शिष्ट व्यवहार की मर्यादा नहीं लांघी वास्तव में आज की राजनीति में उनके जैसा नेता मिलना मुश्किल है।
Shabd shakti news.in की ओर से सांसद विवेक शेजवलकर को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं साथ ही उनके स्वस्थ व लम्बे जीवन के लिए ईश्वर से प्रार्थना।

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