प्रवीण दुबे
मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से निगम मंडल आयोग प्राधिकरण आदि में नियुक्तियों की राह देख रहे भाजपा नेताओं के असंतोष को दूर करने भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने अपना होमवर्क लगभग पूरा कर लिया है। सम्भावना है कि बहुत जल्दी इनमें नियुक्तियों का क्रम प्रारंभ हो जाएगा। पिछले तीन दिनों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कई बार दिल्ली जाना और उसके बाद रविवार को पार्टी अध्यक्ष प्रदेश संगठन मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री की लम्बी चली गुप्तवार्ता इसी बात का संकेत है कि पार्टी ने पूर्ण सहमति के साथ नियुक्तियों का कार्य लगभग पूरा कर लिया है अब केवल घोषणा होना शेष है। मीडिया में आ रही घबरों पर विश्वास किया जाए तो नाम तय करने को लेकर पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने सिंधिया समर्थित नेताओं का एकबार पुनः विशेष ध्यान रखा है। जिस प्रकार बीते एक पखवाड़े से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का लगातार दिल्ली आनाजाना हुआ है उसे देखकर ऐसा लगता है कि सिंधिया का भाजपा शीर्ष नेतृत्व द्वारा पूरा ख्याल रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के बार बार दिल्ली जाने से यह भी संकेत मिलता है कि श्री सिंधिया अपने मन की बात साझा करने के लिए प्रदेश नेतृत्व खासकर मुख्यमंत्री की जगह सीधे दिल्ली बैठे शीर्ष नेतृत्व पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। नियुक्तियों के मामले में भी ऐसा ही संकेत नजर आता है। दो दिन के भीतर शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इससे पहले एक महीने में वे तीन बार दिल्ली दौरे पर गए थे। इस दौरान केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात की थी। शुक्रवार और शनिवार को वह लगातार दो दिन दिल्ली दौरे पर गए और लौट आए। शुक्रवार को सीएम ने दिल्ली में तीन केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की थी। शाम को फिर भोपाल लौट आए थे। इसके बाद शनिवार को फिर दिल्ली गए और अमित शाह से मुलाकात की। दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें सीएम ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर भी किए थे। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री से किन मुद्दों पर बात हुई है, इसके बारे में जानकारी नहीं दी। पहले मंत्रियों से जब सीएम की मुलाकात होती थी तो मुद्दों के बारे में जानकारी दी जाती थी। इस मुलाकात को बीजेपी की तरफ से सामान्य बताने की कोशिश की जा रही है। मगर सियासी गलियारों में चर्चा है कि उनके पास बात करने की कई मुद्दे थे। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या सिंधिया द्वारा अपने चहेते नेताओं की नियुक्ति को लेकर शीर्ष नेतृत्व को कोई सूची सौंपी गई है ? इसी सूची में शामिल नामों को एडजस्ट करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज लगातार दिल्ली और भोपाल भागते रहे हैं। भाजपा जैसे राजनीतिक दल के लिए सत्ता से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर इस प्रकार दिल्ली की दौड़ लगाना आश्चर्यजनक लगता है। इसे व्यक्ति विशेष के लिए मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारों का हनन कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए। यह तो भाजपा जैसा अनुशाषित दल है मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन किसी राजनीतिज्ञ की ऐसी छीछालेदर किसी अन्य पार्टी में भी दिखाई नहीं देती। मंडल प्राधिकरण जैसी छोटे पदों पर नियुक्तियों में पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व का इस हद तक दखल देना न केवल आश्चर्यजनक है बल्कि पार्टी में हावी होती व्यक्तिनष्ठा की ओर इशारा भी करता है। यह भाजपा जैसे तत्वनिष्ठ राजनीतिक दल की सेहत की दृष्टि से भी ठीक नहीं कहा जा सकता । पार्टी में नियुक्तियों को लेकर शीर्ष नेतृत्व को जानकारी देने व अंतिम रजामंदी की परंपरा तो पुरानी रही है लेकिन इस कदर दखलंदाजी कभी नहीं देखी गई कि मुख्यमंत्री को लगातार कई कईबार दिल्ली के फेरे लगाने पड़े हों। नियुक्तियों का विशेषधिकार मुख्यमंत्री सहित प्रदेश संगठन नेतृत्व का ही होता है यहां तो प्रदेश की सत्ता और संगठन दोनों ही गौण नजर आ रहे हैं, समझ से परे है आखिर एक व्यक्ति की खातिर पूरा का पूरा नेतृत्व इस कदर पंगु हो चला है कि अपने मुख्यमंत्री तक को उपहास का प्रतीक बना डाला है।