मुताबिक भारत और चीन के सैनिकों के बीच यह टकराव एक हफ्ते पहले अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में हुई थी। सूत्रों ने भारतीय मीडिया से कहा कि तवांग के पास दोनों ही देशों की पेट्रोलिंग पार्टी आमने-सामने आ गई थी। इस दौरान दोनों सेनाओं के बीच हल्ती तकरार हुई थी। जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान से एक प्रेस वार्ता में इस बारे में पूछा गया तब उन्होंने कहा कि ‘मुझे इसके बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।’
नई दिल्ली में ‘Hindustan Times’ से बातचीत में एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि यह टकराव लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पास नियंत्रण रेखा को समझने में आई परेशानी को लेकर हुई थी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एलएसी के पास भारत और चीन बॉर्डर पर सीमांकन नहीं है। भारत हमेशा से ही इस तरह के विवादों को मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल के माध्यम से हल करने पर जोर देता आया है।
चीन, अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों को तिब्बत का हिस्सा बताता है और इसे अपना मानता है। लेकिन भारत शुरू से ही इस बात पर अड़ा हुआ है कि जिस हिस्से को चीन अपना बताता है वो भारत के अरुणाचल प्रदेश में है। अरुणाचल प्रदेश के अलावा लद्दाख में भी सीमा के पास चीन अक्सर घुसपैठ की कोशिश करता है। लेकिन वहां भारतीय सेना की मुस्तैदी की वजह से चीन को मुंह की खानी पड़ती है।
लद्दाख में दोनों सेनाओं के बीच गतिरोध को हल करने के लिए कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य बातचीत भी हो चुकी है। 12 अक्टूबर को पीएलए के साथ अगले दौर की सैन्य वार्ता फिर होनी है। चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने हाल ही में चीन से पूर्वी लद्दाख में चल रहे सीमा तनाव को बड़े स्तर पर जारी सीमा विवाद से अलग रखने का आग्रह करते हुए कहा था कि प्राथमिक चिंता अब एलएसी पर शांति को बहाल करना है ना कि दशकों से चले आ रहे सीमा विवाद को हल करना है।