रजनीश कुमार
क्रिकेट के जुनून को ज़ाहिर करने के लिए अक्सर भारतीय उपमहाद्वीप में कहा जाता है कि क्रिकेट धर्म है. लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच मैच होता है तो यह धर्म कई बार अफ़ीम की तरह आता है.
پاکستان انڈیا میچ ٹکرا:
پاکستانی کرکٹ ٹیم اور عوام کو مبارکباد پیش کرتا ہوں.https://t.co/Tc0IG0n2DJ@GovtofPakistan @ImranKhanPTI #PakvsIndia pic.twitter.com/e9RkffrK2O— Sheikh Rashid Ahmed (@ShkhRasheed) October 24, 2021
पाकिस्तान के मंत्री शेख़ रशीद के अलावा असद उमर का बयान और भारत में मोहम्मद शमी के ख़िलाफ़ ऑनलाइन टिप्पणियों से यही ज़ाहिर होता है.
पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख़ रशीद ने टी-20 वर्ल्ड में भारत के ख़िलाफ़ जीत को इस्लाम की जीत कहा था. रशीद ने रविवार को जीत के ठीक बाद ट्विटर पर एक वीडियो संदेश पोस्ट किया था और इसी में ये बात कही थी.
रशीद ने यहाँ तक कह दिया था, ”दुनिया के मुसलमान समेत हिन्दुस्तान के मुसलमानों के जज़्बात पाकिस्तान के साथ हैं. इस्लाम को फ़तह मुबारक हो. पाकिस्तान ज़िंदाबाद.”
पाकिस्तान एक इस्लामिक देश है, लेकिन वहाँ के गृह मंत्री पाकिस्तान की भारत से जीत के बाद अपने मुल्क को दुनिया भर के मुसलमानों के प्रतिनिधि के तौर पर पेश कर रहे हैं.
भारत संवैधानिक रूप से एक सेक्युलर देश है और यहाँ दुनिया भर में पाकिस्तान के बाद सबसे ज़्यादा मुसलमान हैं. शेख़ रशीद ने वीडियो संदेश में ऐसे बात की है, मानो उन्होंने ख़ुद को भारतीय मुसलमानों का प्रवक्ता घोषित कर लिया है.
क्रिकेट और मज़हब
Allah us sar ko kisi aur k aagay jhuknay nahi deta jo us k saamnay jhukta hai.
Subhan Allah. pic.twitter.com/pmeE9FwYQG— Shoaib Akhtar (@shoaib100mph) October 24, 2021
हालांकि पाकिस्तान की ओर से इस तरह का बयान कोई पहली बार नहीं आया है. 2007 के टी-20 विश्व कप फ़ाइनल में भारत से हारने के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन कप्तान शोएब मलिक ने मुस्लिम दुनिया से माफ़ी मांगी थी. तब शोएब मलिक की भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा से शादी नहीं हुई थी. दोनों की शादी 2010 में हुई थी.
2007 के टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फ़ाइनल मैच में पाकिस्तान की हार हुई थी. तब पाकिस्तानी टीम की कप्तानी शोएब मलिक के पास थी. शोएब मलिक इस वर्ल्ड कप में भी पाकिस्तानी टीम का हिस्सा हैं, लेकिन कप्तान नहीं हैं.
भारत से हार के बाद शोएब मलिक ने कहा था, ”मैं अपने मुल्क पाकिस्तान और दुनिया भर के मुसलमानों को समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूँ. बहुत शुक्रिया और मैं वर्ल्ड कप नहीं जीत पाने के लिए माफ़ी मांगता हूँ. हालाँकि हमने खेल में अपना 100 फ़ीसदी दिया था.”

शोएब मलिक तब ये भी भूल गए थे कि उस मैच में भारत के इरफ़ान पठान मैन ऑफ़ द मैच बने थे. शोएब मलिक को आउट इरफ़ान पठान ने ही किया था. तब शोएब मलिक के बयान की भारत के मुस्लिम नेताओं और खिलाड़ियों ने भी कड़ी निंदा की थी.
दिल्ली में अल्पसंख्यक आयोग के तत्कालीन प्रमुख कमाल फ़ारूक़ी ने कहा था, ”इस तरह से उनकी बोलने की हिम्मत कैसे हुई? क्या पाकिस्तान के भीतर कोई ग़ैर-मुस्लिम समर्थक नहीं है? उनका बयान पाकिस्तान के हिन्दुओं और ईसाइयों का अपमान है.”
तब भारतीय हॉकी के स्टार असलम शेर ख़ान ने कहा था, ”बेचारा भावना में बह गया. अंग्रेज़ी भी उसे बहुत अच्छी नहीं आती है और उसमें भी हार के बाद बोल रहा था.”
कहा जाता है कि पाकिस्तानी क्रिकेटरों की ड्रेसिंग रूम की संस्कृति और वहाँ की राजनीतिक संस्कृति का असर उनके ऊपर ख़ूब रहता है. 2006 में डॉक्टर नसीम अशरफ़ को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था. उन्होंने तब अपने खिलाड़ियों से कहा था कि वे अपनी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी गतिविधियों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित ना करें. हालांकि डॉक्टर नसीम के बयान का असर पाकिस्तान के खिलाड़ियों पर नहीं हुआ.
इस बार तो भारत के साथ मैच में ड्रिंक के दौरान ही मोहम्मद रिज़वान नमाज़ अदा करते दिखे. रिज़वान के नमाज़ पढ़ने का वीडियो क्लिप शोएब अख़्तर ने ट्वीट करते हुए लिखा था, ”अल्लाह उस सिर को किसी के आगे झुकने नहीं देता जो उसके सामने झुकता है. सुभानअल्लाह.”
डॉक्टर नसीम अशरफ़ ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा था, ”इसमें कोई शक़ नहीं है कि खिलाड़ियों की धार्मिक आस्था उन्हें प्रेरित करती है. यह एकजुट रखती है. लेकिन क्रिकेट और मज़हब के बीच संतुलन होना चाहिए.”
”मैंने इसे लेकर टीम के कप्तान इंज़माम-उल हक़ (तब कप्तान) से बात की है. हमें निजी आस्था को लेकर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इंज़माम से कहा है कि इस्लाम दूसरों पर अपना विचार थोपने की इजाज़त नहीं देता है.”
कमाल फ़ारूक़ी ने 2007 में शोएब मलिक के बयान के बाद कहा था कि पाकिस्तान के खिलाड़ी इस तरह के बयान देते रहते हैं. फ़ारूक़ी ने वसीम अकरम के एक बयान को याद करते हुए कहा था, ”मुझे याद है कि बांग्लादेश से हारने के बाद वसीम अकरम ने कहा था कि ‘ब्रदर नेशन’ से हार हुई है. ऐसी टिप्पणियां खेल भावना के ख़िलाफ़ हैं.”
पाकिस्तान के ख़िलाफ़ विश्व कप मैच में भारत को तीन जीत मोहम्मद अज़हरूद्दीन की कप्तानी में मिली है. अज़हरुद्दीन ने क्रिकेट और मज़हब को कभी मिक्स नहीं किया. पाकिस्तान के खिलाड़ियों और नेताओं के इस तरह के बयान को उनके ऊपर भारत के ख़िलाफ़ जीत के दबाव के रूप में भी देखा जाता है.
खेल की प्रतिद्वंद्विता धार्मिक नहीं
भारत के पूर्व क्रिकेटर सबा करीम ने बीबीसी हिन्दी से कहा कि पाकिस्तान की तरफ़ से इस तरह का बयान बहुत ही फालतू है. वे कहते हैं, ”भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट में प्रतिद्वंद्विता खेल के स्तर पर है न कि धार्मिक स्तर पर. इस तरह के बयान से उनके पागलन का ही पता चलता है. भारत के मुसलमानों के वे प्रवक्ता ना बनें. भारत के मुसलमान टीम इंडिया का अहम हिस्सा रहे हैं और उनकी ख़ुशी और नाराज़गी अपनी टीम की जीत हार से ही तय होती है.”
सबा कहते हैं, ”पाकिस्तान से ऐसी बातें आती हैं तो भारत के अतिवादियों को भी ऊर्जा मिलती है और उसकी प्रतिक्रिया में यहाँ वैसी चीज़ें होती हैं. मोहम्मद शमी के मामले में हम देख सकते हैं.” हालांकि सबा करीम मैदान में नमाज़ अदा करने के ख़िलाफ़ नहीं हैं. उनका कहना है कि धार्मिक प्रैक्टिस से किसी को नुक़सान नहीं है.
शेख़ रशीद के अलावा पाकिस्तान के एक और मंत्री असद उमर ने भी भारत की हार के बाद आपत्तिजनक ट्वीट किया था. असद उमर ने अपने ट्वीट में लिखा था, ”पहले हम उनको हराते हैं और जब ज़मीन पर गिर जाते हैं तो चाय देते हैं.” असद उमर ने भारत के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को लेकर तंज़ कसते हुए यह टिप्पणी की है.
शेख़ रशीद और असद उमर के इन बयानों की पाकिस्तान में भी निंदा हो रही है.
पाकिस्तानी पत्रकार शिराज़ हसन ने शेख़ रशीद के वीडियो क्लिप को ट्वीट करते हुए लिखा है, ”शेख़ रशीद का जीत के बाद दुनिया के सभी मुसलमानों को बधाई देना बहुत ही बकवास बयान है. क्रिकेट से राजनीति और धर्म को प्लीज़ दूर रखें.”इंज़माम उल पाकिस्तान के लीगल मामलों की जानकार रीमा उमर ने शेख़ रशीद का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, ”गृह मंत्री का यह बयान ख़तरनाक और बाँटने वाला है. जब भारतीय टीम में एक मुस्लिम खिलाड़ी पर उसके मज़हब के कारण वफ़ादारी पर सवाल उठ रहा है तब कुछ मंत्री जीत के बाद की गरिमा और मर्यादा को ताक पर रख दे रहे हैं.”रीमा उमर ने पाकिस्तान की जीत के बाद विराट कोहली की मोहम्मद रिज़वान और बाबर आज़म को गले लगाने वाली तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा है, ”शुक्र है कि खिलाड़ियों ने खेल भावना और गरिमा को कायम रखा.”पाकिस्तानी टीम का हिस्सा रहे हिन्दू खिलाड़ी दानिश कनेरिया धार्मिक भेदभाव के आरोप कई बार लगा चुके हैं. कम से कम भारतीय क्रिकेट के इतिहास में इस तरह के आरोप देखने को नहीं मिले हैं. 2005 में जाने-माने पाकिस्तानी क्रिकेटर यूसुफ़ योहाना ईसाई से मुसलमान बन गए थे.
साभार बीबीसी