प्रवीण दुबे
बड़ा अजीब है ये पत्रकारिता का क्षेत्र यहां कोई बाहर का नहीं अपितु अपने ही सर्वाधिक निंदा करते अथवा एक दूसरे को हतोत्साहित और निम्नतर निरूपित करते दिखाई देते हैं। आप सोच रहे होंगें आखिर यह प्रसंग क्यों छेड़ा गया ? तो हम आपको स्पष्ट किए देते हैं इस पर इस कारण कलम चलाने को मजबूर हुआ क्योंकि घटनाक्रम अभी सजीव है और ताजे घटनाक्रम पर लिखने से मन नहीं माना खैर …
बीते रोज ग्वालियर से ताल्लुकात रखने वाले देश के प्रतिष्ठित एनजीओ उदभव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान ने प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान की घोषणा की।
इस वर्ष यह सम्मान भारतीय पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक लेखक व इंडिया टुडे ग्रुप में डिप्टी एडिटर रह चुके , भारत सरकार के सूचना आयुक्त उदय माहुरकर को प्रदान किया जाएगा इसके अलावा विविध श्रेणियों में लगभग एक दर्जन पत्रकारों को भी सम्मानित करने की घोषणा की गई। यहां बताना उपयुक्त होगा कि इन पत्रकार सम्मानों की घोषणा करने वाले एनजीओ उदभव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष शहर के वरिष्ठ पत्रकार डॉ केशव पांडेय और संरक्षक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। डॉ पांडेय लम्बे समय से सिंधिया से जुड़े हैं और उनकी मीडिया सम्बन्धी कार्यों को देखते हैं।
अब मीडिया से सम्बंध रखने वाले कुछ लोग जो पत्रकार कम राजनीतिक ज्यादा कहे जा सकते हैं उन्होंने बड़ी चतुराई से पत्रकार सम्मान की घोषणा को राजनीतिक रंग देकर टांग खिंचाई का काम प्रारंभ कर दिया।
उनके पेट में मरोड़ इस कारण से उठी क्यों कि यह आयोजन वरिष्ठ पत्रकार डॉ पांडेय के एनजीओ द्वारा आयोजित किया जा रहा है। वे इस कारण भी परेशान हैं कि इससे ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम जुड़ा है,और उन्हें सबसे ज्यादा किसी बात से पीढा पहुंच रही है तो वह यह है कि यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व स्वातन्त्र्य वीर सावरकर पर चर्चित पुस्तकें लिख़ने वाले एक राष्ट्रवादी लेखक चिंतक उदय माहुरकर को कैसे दिया जा रहा है।
उनके परेशान होने के पीछे एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह भी है कि खुद को पत्रकारिता का स्वंभू समझने वाले कुछ कथित राजनीतिक भोंपुओं को इसमें तवज्जो क्यों नहीं मिली,उन्हें सम्मान देकर महिमामंडन क्यों नहीं किया जा रहा ?
निःसन्देह स्वस्थ पत्रकारिता के लिए इस तरह की मानसिकता रखने वाले गिरोह एक बड़ी चुनौती है और हर विषय में राजनीति करने वाले ऐसे कथित पत्रकार लेखकों से कैसे निपटा जाए यह बेहद चिंता का विषय है। राष्ट्रीय स्तर पर भी इस तरह के कथित पत्रकारों ने ही पत्रकारिता के माहौल को न केवल प्रदूषित कर रखा है बल्कि लांछित भी किया है।
किसी भी विषय पर लिखना अथवा विश्लेषण करना पत्रकार का धर्म है लेकिन इस लेखन और विश्लेषण में जब व्यक्तिगत राजनीतिक विचारों की सड़ांध आने लगे तो इसे कतई सही नहीं कहा जा सकता। बड़े दुख का विषय है कि कुछ चंद गिने चुने कथित पत्रकार राजनीतिक चेहरों की इस मानसिकता ने देश की पत्रकारिता को बांटने का काम किया है यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण कहा जा सकता है। इससे पत्रकार व पत्रिकारिता दोनों का स्तर गिरा है और समाज का विश्वास मीडिया से घट रहा है।
किसी भी पत्रकार के अपने विचार व अपनी सोच हो सकती है क्यों कि वह भी इस समाज व देश का अंग है लेकिन इस विचार व सोच का राजनीतिक कठपुतली बनकर प्रगटीकरण किए जाने को कतई स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए ।
जिस पत्रकार सम्मान समारोह को लेकर अंगुली उठाई जा रही है वह भी इसी प्रकार की पीत पत्रिकारिता का परिणाम है। जिन पत्रकारों का सम्मान हो रहा है वह लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
उद्भव राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान समारोह मंें ’’राज्य स्तरीय सम्मान’’ प्रिन्ट मीडिया केटेगरी में ग्वालियर के श्री धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया तथा इलेक्ट्रोनिक केटेगरी में भोपाल के श्री शरद द्विवेदी को प्रदान किया जायेगा । साथ ही दि प्रेसिडेंस मैगजीन के सौजन्य से यंग ऐचीवर अवार्ड भी प्रदान किया जायेगा ।
ग्वालियर के देव श्रीमाली, भोपाल के प्रमोद भारद्वाज एवं इन्दौर के उज्जवल शुक्ला को उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिये विशेष पुरस्कारों से सम्मानित किया जायेगा । एजेन्सी श्रेणी में आई.ए.एन.एस. भोपाल के श्री संदीप पॉराणिक तथा पी.आर.ओ. श्रेणी में ग्वालियर के मधु सोलापुरकर को सम्मानित किया जायेगा । इसके अतिरिक्त उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिये ग्वालियर के स्टार रिपोर्टस सम्मान मनीष शर्मा ( दैनिक भास्कर) एंव महेश गुप्ता ( पत्रिका) को प्रदान किया जायेगा।
यंग एचीवरस् अवार्ड वरुण शर्मा ( नई दुनिया) को एंव फोटो जर्नलिस्ट अवार्ड से राजेश जायसवाल ( स्वदेश)को भी उद्भव पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया जायेगा । सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनका चयन यूं ही घर बैठकर नहीं किया गया इसके लिए बाकायदा एक जूरी गठित की गई । पुरस्कार चयन समिति में श्री अभिलाष खाण्डेकर (नई दिल्ली), आर.एम.पी. सिंह (भोपाल) एवं पुष्पेन्द्र पाल सिंह भोपाल शामिल हैं। इसमें महिला पत्रकार व छायाकार का चयन बेहद प्रशंसनीय है। सबसे बड़ी बात की मुख्य सम्मान के लिए उदय माहुरकर जैसे पत्रकार लेखक ,विश्लेषक का चयन करके निर्णायक मंडल ने स्वागतयोग्य कार्य किया है। जो लोग श्री माहुरकर के चयन को राजनीतिक चश्में से देख रहे हैं उन्हें पहले उनके बारे में सम्पूर्ण पढ़ने की जरूरत है। यह सावरकरजी पर उन कांग्रेस नेताओं की निंदा के समान है जिन्हें यही नहीं मालूम कि नेहरू इंदिराजी जैसे नेताओं ने सावरकर की प्रशंसा की यहां तक कि डाक टिकट जारी करवाया था। वरिष्ठ पत्रकार श्री माहुरकर ने सावरकरजी पर लिखी अपनी पुस्तक द मैन हू प्रिवेंटेड पार्टिशन (2021)
ग्वालियर के देव श्रीमाली, भोपाल के प्रमोद भारद्वाज एवं इन्दौर के उज्जवल शुक्ला को उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिये विशेष पुरस्कारों से सम्मानित किया जायेगा । एजेन्सी श्रेणी में आई.ए.एन.एस. भोपाल के श्री संदीप पॉराणिक तथा पी.आर.ओ. श्रेणी में ग्वालियर के मधु सोलापुरकर को सम्मानित किया जायेगा । इसके अतिरिक्त उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिये ग्वालियर के स्टार रिपोर्टस सम्मान मनीष शर्मा ( दैनिक भास्कर) एंव महेश गुप्ता ( पत्रिका) को प्रदान किया जायेगा।
यंग एचीवरस् अवार्ड वरुण शर्मा ( नई दुनिया) को एंव फोटो जर्नलिस्ट अवार्ड से राजेश जायसवाल ( स्वदेश)को भी उद्भव पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया जायेगा । सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनका चयन यूं ही घर बैठकर नहीं किया गया इसके लिए बाकायदा एक जूरी गठित की गई । पुरस्कार चयन समिति में श्री अभिलाष खाण्डेकर (नई दिल्ली), आर.एम.पी. सिंह (भोपाल) एवं पुष्पेन्द्र पाल सिंह भोपाल शामिल हैं। इसमें महिला पत्रकार व छायाकार का चयन बेहद प्रशंसनीय है। सबसे बड़ी बात की मुख्य सम्मान के लिए उदय माहुरकर जैसे पत्रकार लेखक ,विश्लेषक का चयन करके निर्णायक मंडल ने स्वागतयोग्य कार्य किया है। जो लोग श्री माहुरकर के चयन को राजनीतिक चश्में से देख रहे हैं उन्हें पहले उनके बारे में सम्पूर्ण पढ़ने की जरूरत है। यह सावरकरजी पर उन कांग्रेस नेताओं की निंदा के समान है जिन्हें यही नहीं मालूम कि नेहरू इंदिराजी जैसे नेताओं ने सावरकर की प्रशंसा की यहां तक कि डाक टिकट जारी करवाया था। वरिष्ठ पत्रकार श्री माहुरकर ने सावरकरजी पर लिखी अपनी पुस्तक द मैन हू प्रिवेंटेड पार्टिशन (2021)
में तर्कसंगत ढंग से उनके व्यक्तित्व कृतित्व पर लिखा है और कई महत्त्वपूर्ण जानकारियों का खुलासा किया है। जहां तक प्रधानमंत्री मोदी पर उनके लेखन की बात है तो केवल माहुरकर ही नहीं दुनियाभर के तमाम विद्वानों ने मोदी पर लिखा है। बावजूद इसके माहुरकरजी द्वारा मोदी पर लिखी पुस्तक को एकतरफा कतई नहीं कहा जा सकता उन्होंने अपनी पुस्तक में मोदी सरकार की कई कमियों पर भी कलम चलाई है जो उनके श्रेष्ठ पत्रकार होने का प्रमाण है वे दो दशक तक देश की जानीमानी मैग्जीन इंडिया टुडे के उपसम्पादक भी रहे जो यह सिद्ध करता है कि वे यह सम्मान पाने के योग्य हैं अतः इसपर चिल्लपों बंद होना चाहिए और ग्वालियर में होने जा रहे इस गरिमापूर्ण आयोजन का समर्थन करना चाहिए।