प्रवीण दुबे
कभी भीड़ भाड़ भरे चौराहे तो कभी ऐतिहासिक इमारतों के बाहर बट शट में खड़े एक्शन पोज में हाथों से इशारा करते फोटो फोटोशूट कराते हमारे साहब लोग और पांच दिन में छह मर्डर करके मूछों पर ताव देकर फरार होते खूनी दरिंदे, क्या ऐसे स्मार्ट बनेगा हमारा शहर ?
ऐसी स्मार्टनेस पर लानत है शहरवासी न घर के बाहर सुरक्षित हैं न घर के भीतर और जिनके जिम्मे शहर की कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी है वे सरकारी सुविधाओं के बंगले गाड़ियों का आनंद ले रहे हैं। ऐसा लगता है कि उनका काम सिर्फ वीआईपी डयूटी देना और गाड़ियों के पीछे आगे भागना ही रह गया है।
गुंडे बदमाश किस तरह हैवानियत की हदें पार कर रहे हैं कि अभी दो दिन पहले ही अपने घर के बाहर मॉर्निंग वॉक करने वाले को बीच सड़क पर एक दो नहीं पांच गोलियां मारकर मौत के घाट उतार जाता है।
सनसनी अभी खत्म नहीं हुई की आज सुबह होने से पहले ही एक युवक के घर में बेख़ौफ़ बदमाश घुस जाते हैं भाई चिल्लाता रहता है दर्जनों चाकुओं से शरीर गोदकर युवक को मौत की नींद सुलाने के बाद बदमाश रफूचक्कर हो जाते हैं।
एक अन्य मामले में ग्वालियर में एक अधेड़ की हत्या सिर पर पत्थर पटककर सिर्फ इसलिए उसके पड़ोसी दोस्त ने कर दी कि दोनों के बीच चबूतरे पर सोने को लेकर विवाद हो गया था।
बीते चार दिन में जिले में पांच हत्या की घटनाएं घटी हैं और पुलिस सिर्फ एक मामले में आरोपी को पकड़ पाई है, जबकि अन्य मामलों में पुलिस के हाथ खाली हैं।
इससे पहले बदमाशों ने मुरार में इलेक्ट्रीशियन की चाकू से गोदकर हत्या की थी, इस मामले में संदेही अभी भी पुलिस के हाथ नहीं लगा है, ना ही बहोड़ापुर के आनंद नगर में हुई प्रॉपर्टी डीलर की गोली मारकर हत्या करने वाले बदमाशों का सुराग पुलिस को लगा सकी है। न ही मकान के लिए भाई की हत्या करने चरने वाले को पुलिस पकड़ सकी है। भितरवार के करियावटी गांव में बदमाश राकू कुशवाह व डबरा में किसान रामहेत की हत्या में भी आरोपी नहीं पकड़े गए हैं।
इन ताबड़तोड़ हत्याओं ने शहर को हिलाकर रख दिया है लोग सकते में हैं न जाने कब कोई सिरफिरा खूनी दरिंदा हाथों में बंदूक या चाकू लहराता घर में जा घुसे और खून की होली खेलकर फरार हो जाए।
आश्चर्य की बात है कि जिस जिले से खुद प्रदेश के गृहमंत्री आते हैं, जिस जिले में देश के सत्ता में काबिज राजनीतिक दल के दो दमदार केंद्रीयमंत्री निवास करते हैं ।
राज्य सरकार में भी जिस जिले का खासा दबदबा है उस शहर की कानून व्यवस्था को लेकर वहां की नोकरशाही इतनी सुस्त और नाकारा कैसे हो चली है ? आखिर गुंडे बदमाशों के बीच हमारी पुलिस का भय भी नहीं रह कि वे घर के भीतर घुसकर मर्डर कर रहे हैं।
, जो हत्याऐं पिछले 5 दिनों में हुई हैं उन्हें देखकर साफतौर पर यह कहा जा सकता है कि यह सुनियोजित थीं। आखिर कहां है पुलिस का खुफिया तंत्र ?
अफसोस का विषय है कि सम्पूर्ण आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होने के बावजूद हमारा पुलिस महकमा गुंडे बदमाशों पर लगाम कसने या फिर उनमे भय पैदा करने में नाकाम है।
इसके पीछे एक बड़ा कारण जमीनी रूप से उसका सक्रीय न रहना व सूचना जुटाने के पुराने परम्परागत तरीकों का इस्तेमाल न करना है।
यही वजह है ऊंची दुकान फीके पकवान जैसे हमारे थाने बन गए हैं न जमीनी गस्त नजर आती है न गली मोहल्लों का मुखबिरतंत्र है परिणाम सामने हैं गुंडे बदमाशों में कोई भय नहीं वे सुनियोजित ढंग से मर्डर कर रहे हैं और मूछों पर ताव देकर घूम रहे हैं।