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देश के शीर्षस्थ शास्त्रीय संगीतज्ञों सहित ब्राजील, अर्जेंटीना, फ्रांस, स्पेन, रसिया व इजराहल के कलाकार देंगे प्रस्तुतियां यहां जानिए कलाकारों के नाम

ग्वालियर / “तानसेन संगीत समारोह” की तैयारियाँ जारी हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित यह समारोह संगीत की नगरी ग्वालियर में 25 से 30 दिसम्बर तक आयोजित होगा। समारोह में देश एवं विदेश से आ रहे ब्रम्हनाद के शीर्षस्थ साधक गान मनीषी तानसेन को स्वरांजलि अर्पित करेंगे। इस साल के तानसेन समारोह में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों की सूची जारी कर दी गई है। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के लिये उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी व मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा तानसेन समारोह का आयोजन किया जाता है।
इस बार के समारोह में कुल 9 संगीत सभायें होंगी। पहली 7 संगीत सभायें सुर सम्राट तानसेन की समाधि एवं मोहम्मद गौस के मकबरा परिसर में भव्य एवं आकर्षक मंच पर सजेंगीं। समारोह की आठवीं एवं प्रात:कालीन सभा सुर सम्राट तानसेन की जन्मस्थली बेहट में झिलमिल नदी के किनारे सजेगी। किला परिसर स्थित गूजरी महल में समारोह की नौवीं एवं आखिरी संक्षिप्त संगीत सभा 30 दिसम्बर को सायंकाल आयोजित होगी। मालूम हो शास्त्रीय संगीत के महान पोषक राजा मानसिंह तोमर की प्रेयसी मृगनयनी गूजरी महल में ही सुर सम्राट तानसेन से संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त करती थीं। इसी बात को ध्यान में रखकर गूजरी महल परिसर में समारोह की अंतिम संगीत सभा आयोजित की जाती है। तानसेन समारोह की प्रात:कालीन संगीत सभाएं प्रात: 10 बजे और सायंकालीन सभाएं सायंकाल 6 बजे शुरू होंगीं।

गमक” में होगी सुविख्यात सूफियाना गायक पद्मश्री पूरनचंद बडाली और लखविंदर बडाली की प्रस्तुति

तानसेन संगीत समारोह की पूर्व संध्या यानि 25 दिसम्बर को सायंकाल 7 बजे हजीरा चौराहे के समीप स्थित इंटक मैदान में उप शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम पूर्वरंग “गमक” होगा। गमक में पंजाब के सुविख्यात सूफियाना गायक पद्मश्री उस्ताद पूरनचंद बडाली एवं उस्ताद लखविंदर बडाली का सूफियाना गायन होगा। बडाली बन्धु पंजाब के ऐसे सूफियाना गायक हैं, जिन्होंने गायकी में शास्त्रीयता पर आधारित एक बिल्कुल नई विधा पेश की है। ये दोनों उस्ताद भारतीय शास्त्रीय संगीत में पारंगत हैं और सूफियाना गायकी की दुनिया में अद्वितीय हैं।

इस बार भी विश्व संगीत की प्रस्तुतियाँ होंगी आकर्षण का केन्द्र

इस बार के संगीत समारोह में भी गत वर्ष की भाँति विश्व संगीत को भी शामिल किया गया है। समारोह में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विदेशी संगीत साधक प्रस्तुतियाँ देंगे। इनमें ब्राजील, अर्जेंटीना, फ्रांस, स्पेन, रसिया व इजराहल आदि देशों के स्थापित कलाकार शामिल हैं।

प्रथम सभा 26 दिसम्बर (सायंकाल) – तानसेन समाधि स्थल
तानसेन सम्मान से विभूषित कलाकार की प्रस्तुति होगी। इस सभा में कालिदास सम्मान से सम्मानित पं. विक्कू विनायकम चैन्नई का घटम वादन, उदय भवालकर पुणे का ध्रुपद गायन, कालिदास सम्मान से विभूषित पं. कार्तिक कुमार व नीलाद्रि कुमार मुम्बई का सितार वादन होगा। सभा का शुभारंभ शासकीय माधव संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा।

द्वितीय सभा (प्रात:काल) – 27 दिसम्बर

श्री तेजस विंचूरकर एवं सुश्री मिताली खरगोणकर विंचूरकर मुम्बई की बांसुरी-तबला जुगलबंदी, श्री मनोज सराफ इंदौर का ध्रुपद गायन, विश्व संगीत के तहत श्री पाब्लो जी ब्राजील की प्रस्तुति, श्री संजय गरूण पुणे का गायन एवं श्री भारत भूषण गोस्वामी दिल्ली का सारंगी वादन होगा। इस सभा का शुभारंभ राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा।

तृतीय सभा (सायंकाल) – 27 दिसम्बर

विश्व संगीत के तहत गान्जालो जेवियर मेरनेस अर्जेंटीना की प्रस्तुति, पं. अभय नारायण मलिक दिल्ली का ध्रुपद गायन, कालिदास सम्मान से विभूषित पं. भजन सोपोरी दिल्ली का संतूर वादन का श्री राहुल देशपाण्डे मुम्बई का गायन तथा पं. अनिन्दो चटर्जी एवं अनुवृत चटर्जी कोलकला की तबला जुगलबंदी एवं कालिदास सम्मान से सम्मानित सुश्री अश्विनी भिड़े देशपाण्डे का गायन होगा। इस सभा का आरंभ शंकर गांधर्व महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा।

चतुर्थ सभा (प्रात:काल) – 28 दिसम्बर

विश्व संगीत के तहत श्री मार्टिन डबास फ्रांस की प्रस्तुति, सुश्री तृप्ति कुलकर्णी इंदौर का गायन, सुश्री सुधा रघुरामन दिल्ली का कर्नाटक संगीत, श्री राहुल व श्री रोहित मिश्रा वाराणसी का युगल गायन और मैहर वाद्यवृंद का वृंद वादन होगा। इस सभा के आरंभ में भारतीय संगीत महाविद्यालय ग्वालियर की ध्रुपद प्रस्तुति होगी।

पाँचवी सभा (सायंकाल) – 28 दिसम्बर

कालिदास सम्मान से सम्मानित पं. सुरेश तलवलकर पुणे का तबला वादन, विश्व संगीत के तहत अल्मुडेना डियाज एवं ए-लानोस स्पेन की प्रस्तुति, सुश्री शाश्वती मण्डल दिल्ली का गायन, सुश्री देवोप्रिया एवं सुचिस्मिता मुम्बई का बांसुरी युगल वादन एवं श्री प्रसाद खापर्डे नासिक का गायन होगा। इस सभा की शुरूआत तानसेन संगीत महाविद्यालय के ध्रुपद गायन से होगी।

छठवीं संगीत सभा (प्रात:काल) – 29 दिसम्बर

विश्व संगीत के तहत एकातेरिना एरिस्टोवा-तात्याना शान्द्रकोवा रशिया की प्रस्तुति, श्री रमाकांत गायकवाड़ मुम्बई का गायन, श्री भरत नायक ग्वालियर का सितार वादन, श्री विनोद कुमार द्विवेदी एवं श्री आयुष द्विवेदी कानपुर का युगल ध्रुपद गायन, उस्ताद सिराज अली खां कोलकता का सरोद वादन एवं सुश्री सरिता पाठक यजुर्वेदी नईदिल्ली का गायन होगा। सभा की शुरूआत ध्रुपद केन्द्र ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगी।

सातवीं सभा (सायंकाल) – 29 दिसम्बर

विश्व संगीत के तहत श्री युसेफ रोहे अलौश इजराइल की प्रस्तुति, सुश्री मोनिका हितेन शाह अहमदाबाद का गायन, सुश्री तारा किनी बैंगलोर का ध्रुपद गायन, कालिदास सम्मान से विभूषित सुश्री अरूणा सांई राम दिल्ली का कर्नाटक संगीत एवं श्री सोनक अभिषेकी पुणे का गायन होगा। इस सभा का शुभारंभ साधना संगीत महाविद्यालय के ध्रुपद गायन से होगा।

आठवीं सभा (प्रात:काल) – 30 दिसम्बर – बेहट

श्री अभिषेक व्यास उज्जैन का गिटार वादन, श्री सुदीप भदौरिया ग्वालियर का ध्रुपद गायन एवं श्री संजय राठौर व साथियों का तबला वादन होगा। सभा के प्रारंभ में तानसेन कला केन्द्र बेहट का ध्रुपद गायन होगा।

नौवीं एवं अंतिम संगीत सभा (सायंकाल) – 30 दिसम्बर – गूजरी महल

सुश्री वैशाली बाकोरे इंदौर का गायन, सुश्री राधिका उमड़ेकर द्वारा विचित्र वीणा वादन एवं सुश्री सानिया पाटनकर पुणे का गायन होगा। सभा की शुरूआत शारदानाद मंदिर के ध्रुपद गायन से होगी।

हरिकथा व मीलाद गायन से होगा शुभारंभ

गान महर्षि तानसेन की स्मृति में आयोजित होने वाले “तानसेन समारोह” के अपने अलग ही रंग हैं । समारोह के शुभारंभ दिवस को प्रात: काल में तानसेन की समाधि पर सामाजिक समरसता के सजीव दर्शन होते हैं । इस बार 26 दिसम्बर को प्रात: काल पारंपरिक रूप से हरिकथा, मीलाद, शहनाई वादन व चादरपोशी के साथ “तानसेन समारोह” का पारंपरिक शुभारंभ होगा।

वादी-संवादी में होंगे व्याख्यान

तानसेन समारोह की संगीत सभाओं के साथ-साथ एक अन्य महत्वपूर्ण गतिविधि “वादी-संवादी” का भी आयोजन होगा। इस आयोजन में संगीत रसिकों के विचारों से संगीत प्रेमी रूबरू होते हैं। इस साल 28 व 29 दिसम्बर को राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में यह आयोजन होगा।

चित्रकला : रंग संभावना

रंग संभावना चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन पूर्व वर्षों की भाँति शासकीय ललितकला महाविद्यालय में “रंग संभावना” शीर्षक से प्रदर्शनी भी लगेगी। यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों को अपनी कला के साक्षात्कार करने का माध्यम बनेगी।

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