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ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर केंद्र ने राज्यों को जारी की चेतावनी

केंद्र सरकार ने कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट को देखते हुए राज्यों को चेतावनी जारी की है। केंद्र ने बताया है कि वेरिएंट स्वरूप डेल्टा की तुलना में तीन गुना अधिक संक्रामक है। ऐसे में इसे फैलने से रोकने के लिए राज्य वॉर रूम केंद्रों को सक्रिय करें। साथ ही जिला एवं स्थानीय स्तर पर सख्त एवं तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।

ओमिक्रॉन के 200 से ज्यादा केस

देश में ओमिक्रॉन के मामले तेजी से बढ़े है। केरल से जम्मू और कश्मीर तक अब तक 14 राज्यों में कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट ने दस्तक दे दी है। अब तक देश में 200 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। सबसे ज्यादा मामले मुंबई में सामने आए हैं। दिल्ली में ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या बढ़कर 54 हो गई। यानी देश में हर चौथा संक्रमित दिल्ली में है। इस बीच, केंद्र सरकार ने राज्यों को चेतावनी जारी कर वार रूम सक्रिय करने के लिए कहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि देश में 77 मरीज ओमिक्रॉन से उबर चुके हैं या देश से बाहर चले गए हैं। महाराष्ट्र में मंगलवार को ओमिक्रॉन के 11 केस सामने आए, जिसके चलते इस स्वरूप के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 65 हो गई। यह किसी राज्य के मुकाबले सर्वाधिक है। दिल्ली में मंगलवार को ओमिक्रॉन के 24 नए मामले मिले। कुल 54 मरीजों में से 34 एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती हुए थे। इनमें 17 ठीक हो चुके हैं।

एलएनजेपी से मंगलवार को पांच और ओमिक्रॉन संक्रमितों को घर भेज दिया गया। दिल्ली में मंगलवार शाम तक भर्ती ओमिक्रॉन के 31 संक्रमित मरीजों में अधिकतर को कोई लक्षण नहीं है। लोकनायक में भर्ती तीन मरीजों को गले में खराश जैसे बेहद हल्के लक्षण हैं। वहीं निजी अस्पतालों में भर्ती मरीज भी बिना लक्षण वाले हैं।

राज्यों को चिट्ठी लिख कही यह बात

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लिखे पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने परीक्षण और निगरानी बढ़ाने के अलावा रात में कर्फ्यू लगाने, बड़ी सभाओं का सख्त नियमन, शादियों और अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में लोगों की संख्या कम करने जैसे रणनीतिक निर्णय को लागू करने की सलाह दी। पत्र में उन उपायों पर प्रकाश डाला गया है, जिन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के शुरुआती संकेतों के साथ-साथ चिंता बढ़ाने वाले स्वरूप ओमिक्रॉन का पता लगाने के लिए उठाए जाने की आवश्यकता है।

इसमें कहा गया है कि जिला स्तर पर कोरोना से प्रभावित जनसंख्या, भौगोलिक प्रसार, अस्पताल के बुनियादी ढांचे और इसके उपयोग, श्रमशक्ति, कंटेन्मेंट जोन अधिसूचित करने, कंटेन्मेंट जोन की परिधि लागू करने आदि के संबंध में उभरते आंकड़ों की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। यह साक्ष्य जिला स्तर पर ही प्रभावी निर्णय लेने का आधार होना चाहिए। भूषण ने पत्र में कहा कि इस तरह की रणनीति यह सुनिश्चित करती है कि संक्रमण राज्य के अन्य हिस्सों में फैलने से पहले स्थानीय स्तर पर ही नियंत्रित हो जाए।

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