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मौन तपस्वी बन समाज से धीमे जहर को मिटाने कार्य कर रहे इन समाजसेवियों का करें समर्थन

प्रवीण दुबे

आज के चकाचौंध भरे इस संसार के बीच कई बार ऐसी कई जन हितैषी खबरें कहीं खो जाती हैं या दूसरे शब्दों में कहें तो टी आर पी के खेल में हमारा मेनस्ट्रीम मीडिया उन्हें तवज्जो नहीं देता जितनी की देना चाहिए थी। मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक ग्वालियर शहर में आजकल कुछ लोग बिगड़ते पर्यावरण को ठीक करने के लिए  आगे आए हैं ,उन्होंने प्रथम चरण में इसके लिए सर्वप्रथम पॉलीथिन के दुष्परिणामों  के प्रति शहरवासियों को जागरूक करने उन्हें सचेत करने का काम शुरू किया है। बिना किसी ताम झाम, प्रचार प्रसार के कुछ थोड़े से समाज सेवियों द्वारा प्रारम्भ किया यह अभियान थोड़े से ही समय में शहर के सभी वर्गों के बीच पहुंचकर उन्हें पॉलीथिन के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करने में सफलता प्राप्त करता दिखाई दे रहा है। निःसन्देह वर्तमान समय में पर्यावरण को विविध प्रकार के प्रदूषण से बचाना पूरी मानवजाति के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। पूरी दुनिया के पर्यावरण विद व तमाम वैज्ञानिक इसको लेकर चिंतित हैं। ऐसे समय में जब इस विकट समस्या के समाधान हेतु स्व प्रेरणा से समाजसेवियों का कोई समूह आगे आकर समय निकालकर जनता के बीच जन जागरूकता अभियान का संचालन करे तो इसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। हमारे समाचार जगत को भी मौन रहकर कार्य करने वाले ऐसे समाजसेवियों की जानकारियां प्राथमिकता से प्रकाशित करने में रुचि दिखाना चाहिए ताकि पूरा समाज न केवल इससे प्रेरणा ले सके बल्कि अपनी तरफ से इसमें सहभागी बनने के लिए आगे आ सके। हम समाजसेवियों के जिस समूह की बात कर रहे हैं उसमें विविध संगठनों के लोगों ने आगे आकर ग्वालियर को पॉलीथिन मुक्त कराने के लिए कुछ समय पूर्व एक स्थान पर अनोपचारिक रूप से बैठक की और जमीनी स्तर पर जनता को पॉलीथिन जैसे घातक जहर के प्रति जागरूक करने इसको उपयोग न करने के प्रति संकल्पबद्ध करने का निर्णय लिया, महत्वपूर्ण बात यह है कि इन समाजसेवियों की टोली ने जो कुछ तय किया अगले दिन से ही कृतिरुप में धरातल पर काम प्रारंभ कर दिया। सबसे पहले पॉलीथिन के दुष्प्रभाव, उसके विकल्प आदि के प्रति जनचेतना की आवश्यकता पर बल देते हुए समाज विशेषकर युवा वर्ग को पॉलीथिन रूपी इस स्लो पॉइज़न अर्थात धीमे जहर के प्रति स्वयं को संकल्पबद्ध करने का अभियान प्रारंभ किया गया,इसके साथ ही पॉलीथिन के विकल्प और इसको विनिष्ट करने के पूर्व ईको ब्रिक्स की अभिनव तकनीक के प्रचार का अभियान हाथ में लिया गया। मुझे लिखने में खुशी हो रही है कि समाज के इस छोटे से वर्ग ने केवल बैठक भाषण ,फोटो प्रचार से अलग हटकर अपने संकल्प को यतार्थ में बदलने के लिए काम प्रारंभ किया,अब तक शहर के विश्वविद्यालयों सहित तमाम कॉलेजों,स्कूलों में पॉलीथिन उपयोग न करने  की सामूहिक प्रतिज्ञा दिलवाई गई है साथ ही पीपीटी के द्वारा पॉलीथिन के दुष्परिणामों पर आधारित लघु फ़िल्म का प्रदर्शन करके जनमानस को जागरूक करने का काम सतत रूप से चल रहा है। इन समाजसेवियों की लगन ,कार्य के प्रति संकल्पबद्धता, व मेहनत को देखकर अब तमाम सामाजिक धार्मिक संगठनों ने इनकी और सहयोग का हाथ बढ़ाया है इतना ही नहीं ग्वालियर जिला प्रशासन को भी इन समाजसेवियों के अभियान ने प्रभावित किया है और अपनी तरफ से सहयोग व समर्थन व्यक्त करने की बात कही है। इस अभियान के संयोजक व प्रसिद्ध समाजसेवी दीपक सचेती व गिर्राज दानी ने हमसे बात करते हुए कहा कि समाज में व्याप्त किसी भी बुराई को केवल डंडे के सहारे बलपूर्वक समाप्त नहीं किया जा सकता, इससे तभी छुटकारा मिल सकता है जब समाज इसके प्रति जागरूक होकर बुराई को समाप्त करने संकल्पबद्ध हो ,यही कारण है कि पर्यावरण से लेकर जन ,जानवर व जमीन को ख़तरनाक ढंग से नुकसान पहुंचा रही पॉलीथिन के दुष्प्रभावों के प्रति समाज को जन जागरूक करने उसके विकल्पों का इस्तेमाल करने आदि के प्रति हमने समाज को सचेत व जागरूक करने  का अभियान चलाया है। सचेतीजी , दानी जी सहित उन समस्त समाजसेवियों को शब्दशक्तिन्यूस सलाम करता है जो पॉलीथीन रूपी जहर को समाज से हटाने के लिए अपना अभियान चला रहे हैं साथ ही मेनस्ट्रीम मीडिया, सोशल मीडिया सहित समाज के समस्त जागरूक नागरिकों से भी यह अपील करता है कि निःस्वार्थ भाव से इस जनजागरण अभियान में जुटे समाजसेवियों के इस समूह के कार्य को न केवल सहयोग प्रदान करें बल्कि इसको इतना प्रचारित भी करें की इनके इस कार्य की चर्चा चौतरफा प्रारंभ हो और स्वप्रेरणा से सम्पूर्ण समाज पॉलिथीन रूपी जहर को समाप्त करने इनके साथ उठ खड़ा हो,शब्दशक्तिन्यूस भी इस पुनीत कार्य में इनके साथ है।

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