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सम्राट मिहिरभोज से संबंधित रैली, धरना, प्रदर्शन व सभाओं इत्यादि पर पूर्णत: प्रतिबंध

जिला दण्डाधिकारी द्वारा धारा-144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी

ग्वालियर / माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर में मिहिर भोज प्रतिमा से संबंधित प्रकरण के अंतिम निराकरण होने तक जिले की सीमा में सम्राट मिहिर भोज से संबंधित किसी भी प्रकार के आयोजन मसलन जुलूस, मौन जुलूस, सभा, आम सभा, रैली, धरना, प्रदर्शन व भोज इत्यादि पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-144 के तहत इस आशय का प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।
जिला दण्डाधिकारी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार के कटआउट, बैनर, पोस्टर, फ्लैक्स, होर्डिंग व झण्डे आदि पर किसी भी धर्म, व्यक्ति, संप्रदाय, जाति या समुदाय के खिलाफ नारे या भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया हो, उनका प्रकाशन एवं निजी व सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन भी पूर्णत: प्रतिबंधित किया गया है। किसी भी सार्वजनिक या निजी भवन या सम्पत्ति पर आपत्तिजनक भाषा अथवा भड़काऊ नारे लिखे जाना इस आदेश के तहत पूर्णत: प्रतिबंधित रहेंगे। किसी भी व्यक्ति, किसी भी वर्ग, धर्म एवं संप्रदाय विशेष संबंधी भड़काऊ पोस्ट सोशल मीडिया मसलन फेसबुक, वॉट्सएप व ट्विटर इत्यादि पर अपलोड करना, फारवर्ड या शेयर किया जाना भी प्रतिबंधित रहेगा।
फेसबुक एवं सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के संज्ञान में यह बात आई थी कि सर्व क्षत्रिय समाज, ब्राम्हण समाज द्वारा 30 अगस्त को “इतिहास बचाओ एवं स्वाभिमान यात्रा” तथा गुर्जर सेना मध्यप्रदेश द्वारा भी 30 अगस्त को ही “मिहिरोत्सव” पर जन सभा एवं रैली का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों से जातिगत सदभाव बिगड़ सकता है और कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होने की संभावना है।
ज्ञात हो दो समुदायों के मध्य सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण के दौरान लगाई गई पट्टिका में सम्राट मिहिरभोज के नाम को लेकर पूर्व में भी टकराव एवं विवाद की स्थिति बन चुकी है, जिससे कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति बन गई थी। सम्राट मिहिर भोज के नाम एवं पट्टिका को लेकर प्रकरण अभी माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इस दौरान किसी भी सामाजिक संगठन द्वारा सम्राट मिहिर भोज के संबंध में रैली, जुलूस एवं सभा इत्यादि आयोजन किए जाने से सामाजिक मतभेद उत्पन्न होने और आपसी सदभाव बिगड़ने की प्रबल संभावना है। इसलिए समाज में शांति एवं सदभाव बनाए रखने के लिये ऐसे किसी भी आयोजन पर रोक लगाया जाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

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