त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा से शुभ फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से दीर्घ आयु का वरदान प्राप्त होता है। जिनको क्रोध अधिक आता हो, तनाव में रहते हों, मानसिक रोग हो या फिर स्वास्थ्य से कमज़ोर हों उन्हें प्रदोष व्रत रख भगवान शिव और मां पार्वती की उपासना अवश्य करनी चाहिए।
इस व्रत में भगवान शिव और मां पार्वती की उपासना शुभ फलदायी है। विधि विधान से प्रदोष व्रत रखने वाले को किसी प्रकार का कोई भय नहीं रहता। इस तिथि पर भगवान शिव और मां पार्वती की उपासना करने से समस्त वास्तुदोष का शमन होता है। जीवन में सुख-शांति आती है। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल यानि संध्या के समय सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले आरंभ कर दी जाती है। इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करें। प्रदोष व्रत रखने से शरीर में चंद्र तत्व में सुधार होता है। मानसिक बैचेनी खत्म होती है। प्रदोष व्रत में व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। इस व्रत को समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना गया है।