Homeधर्म कर्मरामनवमी पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता का एक बार फिर हिंदू विरोधी...

रामनवमी पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता का एक बार फिर हिंदू विरोधी मुगलिया फरमान

आखिर देश की राजनीति में तुष्टीकरण का शिकार हिंदुत्व ही क्यों होता है? कभी हिन्दुओं के धार्मिक पर्व-त्यौहार तुष्टीकरण की राजनीति के शिकार होते हैं तो कभी धार्मिक यात्रायें. आजादी के समय से ही देश की राजनीति का चलन ही ऐसा बन गया है कि हिंदुत्व के दमन का कोई न कोई रास्ता खोज लिया जाता है. एक विशेष सम्प्रदाय को खुश करने के लिए हिन्दुओं के खिलाफ, हिन्दू धर्म की परम्पराओं के खिलाफ राजनीति शुरू कर दी जाती है.

देश की राजनीति में इस समय हिन्दू का एक पर्याय बन चुकी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर तुष्टीकरण की राजनीति के तहत एक मुगलिया फरमान जारी किया है. ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि श्रीरामनवमी पर हिन्दुओं की शोभायात्रा में शस्त्र प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जायेगी. बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के डीजीपी सुरजीत कार पुरकायस्थ को इस संबंध में खास निर्देश दिए. ममता बनर्जी ने कहा है कि 25 मार्च को श्रीरामनवमी पर किसी भी रैली या यात्रा में शस्त्र नहीं लाने दिए जाएँ ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाये.

जो ममता बनर्जी श्रीरामनवमी में हथियारों के प्रदर्शन पर रोक लगा रही हैं वह कभी मोहर्रम पर रोक नहीं लगा सकी. जब मुहर्रम का जुलूस निकलता है तो उसमें न सिर्फ हथियार लहराए जाते हैं बल्कि खून खराबा भी किया जाता है लेकिन ममता बनर्जी उसके खिलाफ कोई कार्यवाही करना तो दूर उसका समर्थन करती है लेकिन ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति में इतनी अंधी हो चुकी हैं कि हिदुओं की आस्थाओं के दमन का कोई मौक़ा नहीं छोडती हैं. इससे पहले भी वह कई बार हिन्दुओं के पर्वों धार्मिक यात्राओं के खिलाफ इसी तरह की कार्यवाही कर चुकी हैं.

हालाँकि ममता बनर्जी के इस फैसले के खिलाफ विहिप, बजरंग दल तथा भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है तथा कहा है कि वो लोग श्रीरामनवमी यात्रा में तलवार, गदा तथा धनुष-बाण लेकर के आयेंगे. प. बंगाल भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने कहा है कि शायद ममता जी को याद नहीं कि, हमारी माता के हाथ मे तलवार, त्रिशूल,खड्ग, हनुमान जी के हाथ में गदा और श्रीराम के हाथ में धनुष है। हिन्दू संस्कृति मे शास्त्र व शस्त्र दोनों का महत्व है ममता जी हमारे लिए शास्त्र-शस्त्र दोनों पूजनीय हैं. हम यात्रा में शस्त्र लेकर आयेंगे जरूर आयेंगे, हमें हमारे पर्व त्यौहारों को मनाने से कोई नहीं रोक सकता है, ये हमारा संवैधानिक अधिकार है.

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments