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“मैं ही मैं हूं मैं ही मैं हूं दूसरा कोई नहीं”

 

प्रवीण दुबे

कभी पांव पांव वाले भैया के नाम से मशहूर अब मध्यप्रदेश की बहनों के लाड़ले भैया और बेटे बेटियों के मामा शिवराज सिंह चौहान को लेकर एक प्रसिद्ध गाने की पक्तियां रह रहकर याद आ रहीं हैं गाने के बोल हैं”मैं ही मैं हूं मैं ही मैं हूं दूसरा कोई नहीं” उनके आभा मंडल पर यह पक्तियाँ बिल्कुल सटीक बैठती हैं और इसमें कोई अतिश्योक्ति नजर नहीं आती। भोपाल दौरे पर आए भाजपा के चाणक्य अमितशाह ने शिवराज को जैसे वरदहस्त प्रदान करके विरोधियों की बोलती बंद कर दी है। अब लगभग यह तय हो गया है कि मध्यप्रदेश की चुनावी फील्ड में मामा शिवराज के चेहरे पर ही पूरी भाजपा बल्लेबाजी करती नजर आएगी। फिलहाल न कोई डिप्टी सीएम और न कोई बदलाव सिर्फ और सिर्फ शिवराज ।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मामा शिवराज में ऐसा क्या है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व को मध्यप्रदेश में उनका कोई विकल्प नजर नहीं आता। पिछले 20 वर्षों की लंबी मैराथन पारी खेलने के बावजूद शिवराज अभी तक नॉट आउट जमें हुए हैं , पार्टी के अंदर उनका विकल्प बनने की कोशिश में लगे प्रतिद्वंदियों की चेहरा बदलने की मुहिम जैसे टांय टांय फुस्स हो चली है।

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा शिवराज को बनाए रखने का निर्णय बेहद सोच समझकर उठाया गया कदम कहा जा सकता है।
शिवराज में एक नहीं ऐसी अनेक खूबियां हैं जो मध्यप्रदेश में वर्तमान के राजनीतिक परिदृश्य में सक्रिय किसी अन्य नेता में नजर नहीं आती दूसरा महत्वपूर्ण कारण यह है की भाजपा का आलाकमान शिवराज को हटाकर मुख्यमंत्री की लाइन में शामिल दूसरे नेताओं में किसी को ताज पहना कर नई राजनीतिक मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता

यहां बताना उपयुक्त होगा की मुख्यमंत्री पद की दौड़ में जिन वजनदार नेताओं के नाम लिए जा सकते है उनमें नरेंद्र सिंह तोमर , ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल एवं नरोत्तम मिश्रा सहित कई अन्य नेता शामिल हैं।

इनमें से किसी के भी मुख्यमंत्री का ताज पहनने पर मध्य प्रदेश में भाजपा का राजनीतिक समीकरण बिगड़ सकता है ।
चूंकि भाजपा के इन छत्रपों का राजनीति में अलग अलग प्रभाव है इस वजह से जो सामंजस्य शिवराज के रहते बना हुआ है उसमे उफान आ सकता है ।
चुनाव से ठीक पहले इस डैमेज को कंट्रोल करना भाजपा नेतृत्व के लिए टेढ़ी खीर होगा जिसे पार्टी शीर्ष नेतृत्व कतई स्वीकारने को तैयार नहीं होगा ।

लिखने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए कि शिवराज ने बड़ी चतुराई और राजनीतिक सूझ बूझ से जातिगत समीकरणों से लेकर प्रदेश के हर वर्ग को प्रभावित करने की योग्यता दिखाई है जिस वजह से वे लंबे अंतराल तक मुख्यमंत्री बने रहने के बावजूद अपनी छवि को जनता के बीच एक हितैषी के रूप में स्थापित करने में सफल रहे हैं ।

शिवराज सिंह ने प्रदेश के हर वर्ग के बीच अपनी जबरदस्त पैठ बनाई है इसके लिए उन्होंने अपने बीस वर्ष के कार्यकाल में ऐसी तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं जनता को दीं जिसके चलते प्रदेश वासियों को विश्वास हो चला की शिवराज केवल कहते ही नहीं करते भी हैं ।

एक ओर शिवराज ने बीमारू प्रदेश के रूप में चर्चित मध्य प्रदेश को विकास की सरपट दौड़ में आगे लाकर खड़ा कर दिया वहीं दूसरी ओर खेती को लाभ का धंधा बना बनाने की अपनी घोषणा को अमली जामा पहनाने में भी कामयाबी हासिल की । किसानों के लिए प्राकृतिक आपदा के समय उन्हें बीमा क्षतिपूर्ति का लाभ दिलाने में शिवराज ने अदभुत कार्य किया और किसानों। के बीच उनकी छवि भगवान जैसी बन गई।
बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के अभियान को अपने कुशल नेतृत्व के सहारे इस प्रकार संचालित किया की मध्य प्रदेश की बेटियों ने अनेक क्षेत्रों सफलता के झंडे गाड़ दिए ।
महिला पुरुष लिंग अनुपात में शर्मनाक प्रदर्शन करने वाले मध्य प्रदेश को भ्रूण हत्या के पाप से शिवराज ने न केवल बाहर निकाला बल्कि महिला पुरुष लिंगानुपात में सुधार कर के दिखाया
गरीब बेटियों की कन्या दान योजना भावुक कर देने वाली साबित हुई और हाथ पीले होते देख मायूस बेटियों के चेहरे खिलखिला उठे ।
मेधावी छात्र छात्राओं को आगे पढ़ाई का खर्चा, लैपटॉप, ,स्कूटी, साइकिल ,मोबाइल ,ड्रेस एवं किताबें प्रदान करने की योजनाएं शिवराज ने ही लागू की ।

हाल ही में मध्य प्रदेश की महिलाओं को सशक्त करने के लिए लाड़ली बहना योजना ने तो सफलता के ऐसे आयाम रचे हैं कि शिवराज सिंह महिलाओं के बीच सगे भाई से भी ज्यादा चहेते बन गए है ।
बेटे बेटियों को मामा का संबोधन हो अथवा महिलाओं को लाडली बहना का संबोधन हो सभी को शिवराज परिवार के सदस्य जैसे नजर आ रहें हैं।
बुजुर्गों को हवाई जहाज से तीर्थ दर्शन कराने के दृश्य पूरे देश को भावुक कर देने वाले रहे हैं । इतनी सारी उपलब्धियां ही शिवराज को अपने प्रतिद्वंदियों से अलग दिखाती हैं ।
ऐसा नहीं की शिवराज में सब अच्छा ही अच्छा हुआ यदि कुछ गलती हुई भी तो मामा शिवराज ने अपनी राजनीतिक चतुर्ता से उसे सुधारने में जरा भी देरी नहीं की फिर से चाहे वे अपने ही लोग क्यों न हों जिसने भी गलती की उसे सजा भुगतनी पड़ी एक सबसे बड़ी बात शिवराज के व्यक्तित्व की यह भी रही की राजनीति की रपटीली राहों में लगातार चलने के बावजूद वे अभी तक बेदाग हैं न कोई भ्रष्टाचार का दाग न कोई चरित्र पर लांछन ।    “ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर”,।

 

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