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माधवराव सिंधिया और राजमाता के बीच विवाद का कारण बनी हिरण्यवन कोठी फिर चर्चा में

न्यायालय 14 मई से विवाद की नियमित सुनवाई करेगा     

इस मामले के साक्षी माधवराव सिंधिया, नरेंद्र सिंह, शरद शुक्ला के अलावा विजयाराजे सिंधिया, संभाजी राव आंग्रे, माधव शंकर इंदापुरकर, शीतला सहाय आदि अब इस दुनिया में नहीं हैं.

ग्वालियर के बहुचर्चित हिरण्य वन कोठी मामले में शुक्रवार को भी साक्षियों के नहीं आने से प्रतिवादी पक्ष के बयान दर्ज नहीं किए जा सके. न्यायालय ने अब 14 मई से 18 मई तक एक बार फिर नियमित सुनवाई तय की है. चित्रलेखा आंग्रे विरुद्ध माधवराव सिंधिया मामले में 35 साल पुराने केस में कोर्ट ने नियमित सुनवाई कर मामले के जल्द निपटारे के आदेश दिए थे लेकिन अधिकांश साक्षियों की इस दौरान मौत हो चुकी है.

यही हाल जिन पर वाद दायर किया गया है, उस प्रतिवादी पक्ष का भी है. इनमें प्रमुख रुप से माधवराव सिंधिया, नरेंद्र सिंह, शरद शुक्ला के अलावा विजयाराजे सिंधिया, संभाजी राव आंग्रे, पूर्व महापौर माधव शंकर इंदापुरकर, शीतला सहाय आदि अब इस दुनिया में नहीं हैं.

इस मामले में 37 साक्षियों में से कुछ अभी मौजूद हैं लेकिन वह न्यायालय में समन की तामील के बावजूद नहीं पहुंचे. इस मामले में शुक्रवार को पूर्व मंत्री केपी सिंह, कांग्रेस नेता अशोक शर्मा, उदयवीर भदोरिया, रवि भदोरिया, अरुण तोमर, अमर सिंह भोसले, रमेश शर्मा पेश हुए. लेकिन साक्षियों के नहीं आने से वे अपना बयान दर्ज नहीं करा सके.दोनों पक्षों में वाद हिरण्य वन कोठी के मालिकाना हक को लेकर है.

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