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मोहर्रम की हिंसक घटनाएँ अराजकता और अशांति फैलाकर भारत की प्रगति अवरुद्ध करने का षड्यंत्र तो नहीं ?

 रमेश शर्मा 

मोहर्रम के दिन देश के विभिन्न भागों में अराजकता, अशांति और हिंसक घटनाओं का आश्चर्यजनक दृश्य सामने आया । इसे सामान्य नहीं माना जा सकता । कहीं यह भारत के सामाजिक जीवन में तनाव फैलाकर प्रगति अवरुद्ध करने के षड्यंत्र तो नहीं ?

इस्लाम की मान्यता में मुहर्रम महीने का विशिष्ट स्थान है । इस महीने का 10 वाँ तिथि हजरत इमाम हुसैन की शहादत का दिन है। मुस्लिम समाज द्वारा इसदिन जुलूस निकालकर उनके प्रति अपने शोकमय जज्बात व्यक्त किये जाते हैं । भारत में अन्य पंथों और धर्म के लोग भी मोहर्रम में शामिल होते रहे हैं । लेकिन इस साल मोहर्रम का माहौल बहुत अलग था । देश के सौ से अधिक स्थानों में मोहर्म के जुलूस में तनाव से भरे प्रदर्शन हुये या नारे लगे । कुछ स्थानों पर तो स्थानीय वरिष्ठजनों और पुलिस प्रशासन की समझाइश से मामला शांत हो गया । लेकिन पचास से अधिक स्थानों पर समझाइश से कोई बात नहीं बनीं। खुलकर हिंसा हुईं । कहीं हथियार चले तो कहीं फिलीस्तीन के झंडे लहराये गये, पथराव हुआ, आपत्तिनजक नारे भी लगे । कुछ स्थानों पर तो “नारा-ए-तकबीर” और “हिन्दुस्तान में रहना होगा, अल्लाहो अकबर कहना होगा” नारा भी लगा । सबसे अधिक घटनाएँ उत्तर प्रदेश और बिहार में घटीं। इनके अतिरिक्त दिल्ली, झारखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल आदि प्रांतों से भी मोहर्रम जुलूस के माध्यम से तनाव फैलाने के समाचार आये ।
आक्रामक भीड़ ने सड़कों को ईंट पत्थरों से पाट दिया। पथराव में कितनी गाड़ियाँ टूटी कितने लोगो घायल हुये इसका पूरा विवरण किसी के पास नहीं। पुलिस के पास केवल वे ही आकड़े हैं जिन लोगों ने पुलिस से सहायता ली । अन्यथा भीड़ से पिटकर लोग डरकर अपने अपने घरों को भाग गये । पथराव में पुलिस और पुलिस की गाड़ियाँ भी निशाना बनीं। मुजफ्फरपुर में भीड़ इतनी आक्रामक थी कि पुलिस को भागना पड़ा । बाद मेंजब अतिरिक्तबल आया तब स्थिति नियंत्रण में आ सकी । दिल्ली के नांगलोई में भीड़ सूरजमल स्टेडियम के भीतर जबरन घुसकर ताजिया दफनाने का प्रयास करने लगी । पुलिस ने रोका दिया तो आपत्तिजनक नारे लगे और पुलिस पर पथराव हुआ । भीड़ ने गाड़ियों और बसों पर पथराव किया और बसों में बैठे लोगों लाठी डंडों से हमला किया।
श्रीनगर में फिलस्तीन के झंडे लहराए गए। आपत्तिजनक नारे भी लगे । पहले पुलिस समझा बुझाकर चली गई। जब फोटो और वीडियो वायरल हुये तब पुलिस ने कार्रवाई की और गिरफ्तारियाँ हुईं । झारखंड दुमका के दुधानी में में भी फिलिस्तीन का झंडा लहराये गये। मोहर्रम जुलूस के बाद ये लोगों एक बस पर चढ़ गये । बस पर चढ़कर फिलीस्तीन का झंडा लहराया, नारे लगाये और इसका वीडियो बनाकर डाला ।
राजस्थान के भीलवाड़ा के कोटड़ी कस्बे में मुहर्रम जुलूस के लोगों को रास्ते में भगवा झंडा लगा दिखा तो उसे हटाया और पैरों से रौंदा । इसके विरोध में हिन्दू संगठनों ने अगले दिन बाजार बंद रखे । वाराणसी के जैतपुरा थाना अंतर्गत आपत्तिनजक नारेबाजी हुई । पथराव हुआ। दर्जनों गाड़ियां चकनाचूर हो गईं। पत्थरबाजी में पचास से अधिक लोग घायल हुए । प्रयागराज के लालापुर क्षेत्र के अमिलिया गाँव में मोहर्रम के जुलूस में शामिल लोग अधिवक्ता अवधेश कुमार के घर की दीवाल पर चढ़ गए। जब मना किया गया तो भीड़ ने अवधेश कुमार, उनके बेटे और बेटी पर तलवार और कट्टों से हमला बोल दिया । मोहल्ले घरों पर भी पथराव किया और सड़क चलते लोगों पर हमला बोला । बहराइच में पयागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत भीड़ द्वारा किये गये हमले में छह लोग घायल हुए । चार की हालत गंभीर है । नानपारा कोतवाली क्षेत्र में भी बवाल हुआ । जमकर ईंट-पत्थर चले । क्षेत्र में तनाव है । पुलिस तैनात है । जालौन में भी खूनी संघर्ष हुआ ।लाठी डंडे चले । तीन की हालत गंभीर है । बरेली के अलीगंज इलाके में डीजे बजाने को लेकर तनाव हुआ । पहले मुहर्रम जुलूस के आयोजकों और प्रशासन के बीच डीजे न बजाने पर सहमति बन गई थी । लेकिन जुलूस डीजे के साथ आरंभ हुआ और तेज बजाया। जब आपत्ति हुई तो जुलूस में शामिल लोगों ने पथराव शुरु कर दिया । पथराव में पुलिस पर भी हुआ और पुलिस का वाहन भी क्षतिग्रस्त हुआ ।
बिहार की राजधानी पटना में भी मुहर्रम के दिन भारी हिंसा हुई । जुलूस में शामिल भीड़ ने दुकानों में लूटपाट और राहगीरों से मारपीट की । लोगों ने यहाँ वहाँ भागकर अपनी जान बचाई । अनेक लोग घायल हुये । मोतिहारी में लाठी डंडे और ईंट पत्थरों के साथ हथियार भी चले और गोलीबारी भी हुई । छह से ज्यादा लोग घायल हुये । चंपारण जिले के सुगौली थाना क्षेत्र के नकरदेई गांव में भी तनाव हुआ । बिहार के कैमूर में भी भारी हिंसा हुई । पहले नारेबाजी और उसके बाद लाठी, डंडों, ईंट पत्थर से हमले शुरु हो गए। उपद्रवियों ने मंदिरों को भी निशाना बनाया, पत्थर फेके। पुलिस ने लाठी चार्ज करके स्थिति नियंत्रित की। अमिलिया तरहार गांव में एक भाजपा नेता घर पर पथराव किया, मारपीट और लूटपाट हुई । महाराष्ट्र के विशालगढ़ में अफजल खाँ के मजार के आसपास अतिक्रमण बढ़ाने का प्रयास हुआ । यह वही अफजल खाँ था जिसने शिवाजी महाराज को धोखे से मारने का प्रयास किया था । उसकी मजार का विस्तार और उसे धार्मिक स्वरूप देने का प्रयास क्यों है ? मध्यप्रदेश के धार, उज्जैन, रायसेन आदि स्थानों पर भी घटनाएँ घटीं।
केवल एक दिन में देश के विभिन्न स्थानों पर हुई घटनाएँ सामान्य नहीं माना जा सकता । इसकी तैयारी पहले से की गई लगती है। नारों, पथराव और उपद्रव की शैली लगभग एक सी थी । मानों सबके मन मानस में कोई एकसा भाव था । यह भाव किसने बनाया । किसने साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने, सामाजिक तनाव फैलाने केलिये मोहर्रम का दिन चुना और लोगों के मन में तनाव उत्पन्न किया ताकि वे हिंसा पर उतर आयें। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि मोहर्रम के फैलाया गया यह तनाव किसी बड़े षड्यंत्र का अंग है । इनकी आहट पिछले कुछ दिनों से लगातार मिल रही थी। यह आहट दोनों प्रकार की थी । देश के आंतरिक वातावरण में कुछ लोगों के उत्तेजक ब्यान आ रहे थे और दूसरे सीमा पार से आतंकी घटनाओं में अकस्मात वृद्धि हुई । कश्मीर, त्रिपुरा, मणिपुर और असम में आतंकी हमले हुये । उनको भी अनदेखा नहीं किया जा सकता । यदि इन सबको मिलाकर देखें तो तस्वीर स्पष्ट होती है कि कोई है जो भारत की प्रगति और अंतरराष्ट्रीय जगत में बढ़ती प्रतिष्ठा अवरुद्ध करना चाहता है । यदि सामाजिक तनाव होगा, अराजकता फैलेगी तो प्रगति रुकेगी । यह षड्यंत्र पड़ौसी देश भी कर रहे हैं और कुछ अंतर्राष्ट्रीय शक्तियाँ भी । इसलिये सभी को मिलकर विचार करना होगा कि क्या इन सब घटनाओं का कोई अदृश्य सूत्रधार है ? यदि कोई है तो इसकी पड़ताल गंभीरता होना चाहिए। इसमें सभी को सहयोग देना चाहिए। राष्ट्र, समाज और मानवीय सद्भाव राजनीति से ऊपर होना चाहिए। पंथ की सीमा से ऊपर होना चाहिए। धर्म भी मानवता का माध्यम होते हैं। इसलिए आवश्यक है कि राष्ट्र और मानवता को सर्वोपरि मानकर विचार हो । चूँकि तनाव मोहर्रम और मोहर्रम के जूलूस में शामिल कुछ लोगों द्वारा फैलाया गया इसलिए यह दायित्व मुस्लिम समाज का अधिक है कि वह आगे आकर उन तत्वों को बेनकाब करे जिन्होंने अशांति फैलाकर वातावरण बिगाड़ने का प्रयास किया ।

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