कानपुर और ग्वालियर के बाद अब दिल्ली में 9 अक्टूबर को अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाने वाले भारत और बांग्लादेश के बीच दूसरे टी20 मैच पर भी विरोध का साया मंडरा रहा है। इस मैच को रद्द करने की मांग पहले से ही की जा चुकी है।
मैच को लेकर हरिद्वार का संत समाज बहुत पहले से विरोध में आया हुआ है। संतों की ओर से इसको लेकर एक सप्ताह पहले ही बीसीसीआई को चिट्ठी लिखी जा चुकी है।
जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी नरसिंहानंद ने मैच को रद्द करने की मांग की है। दिल्ली में होने वाले इंडिया बांग्लादेश क्रिकेट मैच का साधु संतों ने विरोध किया है। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी नरसिंहानंद पहले ही जूना अखाड़ा पहुंचकर साधु संतों के साथ नारेबाजी करते हुए मैच रद्द करने की मांग कर आक्रोश व्यक्त कर चुके हैं। संतों का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर भीषण अत्याचार हुआ। बावजूद इसके बांग्लादेश के साथ क्रिकेट मैच खेलना हिंदुओं के साथ अन्याय है।
यति नरसिंहानंद ने प्रदर्शन के दौरान कहा था कि मैच को रद्द करने के लिए बीसीसीआई को पत्र लिखा गया है। अगर मैच को रद्द नहीं किया गया, तो वे अग्नि समाधि लेने को मजबूर होंगे।
जूना अखाड़े के महामण्डलेश्वर यति नर्सिंहानन्द गिरी ने हरिद्वार की कुल देवी मानी जाने वाली माया देवी मंदिर में मैच के विरोध में सांकेतिक धरना देकर इसकी शुरुआत भी की। मंदिर परिसर से यति ने बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति को लेकर अपना रोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ वहाँ हिंदूओ को दुर्गा पूजा नही करने दी जा रही है और दूसरी तरफ हम लोग उसी देश के साथ मैच खेल रहे है।
उन्होंने कहा था कि इसके विरोध स्वरूप उन्होंने गृह मंत्री को पत्र लिखकर इसे रोकने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नही होता वे विरोध में हरिद्वार या डासना पीठ में अग्नि समाधि लेंगे। माया देवी मंदिर से महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि महाराज ने सभी संतों से आह्रवान किया कि संपूर्ण संत समाज को हिंदुओं के उत्पीड़कों के साथ हो रही इस क्रिकेट श्रृंखला का विरोध करना चाहिए।
नर्सिंहानंद गिरी के इस विरोध को हरिद्वार में भी समर्थन मिलना शुरू हो गया । परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष ने यति नर्सिंहानंद गिरी की इस मांग को जायज बताकर इसका समर्थन किया ।