प्रवीण दुबे
दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क में शामिल भारतीय रेल में प्रतिदिन लाखों यात्री सफर करते हैं जरा सोचिये यदि अपनी सुरक्षित यात्रा के प्रति इनके मन में भय व्याप्त हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन है। आज देश के सबसे व्यस्ततम रेलवे ट्रेक दिल्ली मुम्बई के ग्वालियर रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूर बिडलानागर पर विशिष्ट रेलों में शुमार ए पी एक्सप्रेस के दो डिब्बे जिस प्रकार धू धू कर जल उठे तथा लगभग 10 घण्टे का समय गुजरने के बाद भी रेलवे यह नहीं बता पा रहा कि आखिर इस आग का कारण क्या था तो इसे आप क्या कहेंगे, निःसन्देह इस दुर्घटना ने और जिस प्रकार बर्निंग ट्रेन की भयावह तस्वीरें सामने आई हैं उसने देशवासियों के मन में अपने रेल सफर को लेकर एक अजीब सा डर पैदा कर दिया है।
भगवान का शुक्र है कि इस दुर्घटना में सभी रेल यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए लेकिन यदि सफर कर रहे यात्रियों, दमकल कर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने समझदारी न दिखाई होती तो कई यात्रियों को अपनी जान के लाले पड़ गए होते।
इसे रेलवे की बेशर्मी न कहा जाए तो और क्या कहें कि इतनी भयावह रेल दुर्घटना के घण्टों बाद जहां रेलवे यह बताने की स्थिति में नहीं हैं की आग लगने का कारण क्या था तो दूसरी ओर मीडिया के सवालों के जवाब में पी आर ओ वेदप्रकाश आग पर काबू पाने के लिए रेलवे की पीठ थपथपाते दिखाई दिए।रेलवे सुबह से शाम तक दुर्घटना के अलग अलग कारण गिनाते दिखाई दिया पहले कहा गया कि हाइटेंशन तार गिरने से आग लगी फिर कहा गया हो सकता है पेंट्री कार जो कि दुर्घटना वाले डिब्बों से जुड़ी थी के कारण आग लगी यह भी कहा गया कि रेल में लगे ऐसी भी आग का कारण हो सकते हैं अंततः यह सफाई दी गयी कि आग के कारणों की जांच की जा रही है।
दुर्घटना इस नजरिए से भी सन्देहास्पद हो जाती है कि जिस ट्रेन में आग लगी उसमें 37 से अधिक आईएएस भी सवार थे जो ट्रेंनिग पूरी करके लौट रहे थे कहीं इन अधिकारियों को निशाना बनाने किसी सुनियोजित षडयंत्र के तहत तो यह आग नहीं लगाई गई हालांकि अभी इस दृष्टि से किसी प्रकार का कोई सुबूत सामने नहीं आया है और पक्के तौर पर ऐसा नहीं कहा जा सकता बावजूद इसके जबतक दुर्घटना का मूल कारण सामने नहीं आता इस एंगिल को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यूँ हुई दुर्घटना
दिल्ली से चलकर विशाखापट्टनम की ओर जाने वाली आंध्रा एक्सप्रेस गाड़ी प्रातः 8.30 बजे दिल्ली से निकली थी गाड़ी ने दोपहर 11.30 बजे के आसपास धौलपुर छोड़ा वह जैसे ही ग्वालियर से पहले बिडलानागर पहुंची अचानक गाड़ी के B 6 कोच में धुआं निकलता दिखाई दिया यात्री कुछ समझ पाते इससे पहले धुआं आग में तब्दील हो गया और आग ने चार डब्बे अपनी चपेट में ले लिए चूंकी गाड़ी को बिडलानागर में ही रोक दिया गया था अतः तुरंत स्थानीय लोगों के सहयोग से यात्रियों को बाहर निकाल लिया गया लगभग आधे घण्टे के इंतजार बाद वहां दमकल की गाड़ियां व रेलवे कर्मचारी पहुंचे जबतक गाड़ी के चार डब्बे धूं धूं कर जलने लगे थे बाद में आग पर काबू पाया गया। शाम तक दिल्ली मुम्बई ट्रेक पर यातायात बाधित रहा जिसे देर शाम तक सुचारू कर दिया गया इस वजह से कई गाड़ियां विलंब से छूटी उधर जो गाड़ी आग का शिकार बनी उसमें 37 डिप्टी कलेक्टर भी सवार थे जो अपनी ट्रेनिंग से वापस लौट रहे थे उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया।।

