भारतीय विदेश सेवा (आईएफ़एस) की अधिकारी निधि तिवारी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निजी सचिव (प्राइवेट सेक्रेटरी) नियुक्त किया गया है.
भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने 29 मार्च को इस संबंध में आदेश जारी किया और कहा कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने निधि की नियुक्ति की मंजूरी दे दी है. डीओपीटी ने यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होने की बात कही है.
निधि अभी तक प्रधानमंत्री कर्यालय में बतौर डिप्टी सेक्रेटरी अपनी सेवाएं दे रही थीं. उनकी नियुक्ति सह-अवधि (को-टर्मिनस) के आधार पर की गई है. सह-अवधि का मतलब ऐसे कार्यकाल से है जो प्रधानमंत्री का कार्यकाल समाप्त होने या अगले आदेश तक होता है.
इस पद रहते हुए निधि तिवारी अब पीएम मोदी के रोज़मर्रा के प्रशासनिक कामकाज जैसे- शेड्यूल मैनेज करना, पॉलिसी और एडमिनिस्ट्रेटिव कोऑर्डिनेशन और कम्युनिकेशन आदि को संभालेंगी.
कौन हैं निधि तिवारी?
2014 बैच की आईएफ़एस अधिकारी निधि तिवारी ने सिविल सेवा परीक्षा 2013 में 96वीं रैक हासिल की थी.
अपनी नई नियुक्ति से पहले निधि पिछले लगभग ढाई साल से प्रधानमंत्री कर्यालय में अपनी सेवाएं दे रही हैं.
निजी सचिव बनने से पहले पीएमो में उप सचिव के रूप में काम कर रही थीं. वह इस पद पर विदेश और सुरक्षा मामलों से संबंधित प्रमुख विभागों को संभाल रहीं थीं.
इससे पहले, निधि तिवारी नवंबर, 2022 में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में अंडर सेक्रेटरी (अवर सचिव) के रूप में शामिल हुई थीं.
2013 की सिविल सेवा परीक्षा पास करने से पहले उन्होंने वाराणसी में सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर) के रूप में भी काम किया था.
निधि तिवारी के पति सुशील जायसवाल पेशे से डॉक्टर हैं और वाराणसी में अपने हॉस्पिटल का संचालन करते हैं.
निधि के बारे में डॉ. सुशील जायसवाल ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहते हैं, “सर्विस में अलग-अलग ज़िम्मेदारियां मिलती रहती हैं, लेकिन यह एक बड़ी ज़िम्मेदारी है. निधि बहुत मेहनती हैं और नौकरी के प्रति उनकी रुचि भी है.”
पीएमओ में अपने कार्यकाल से पहले, निधि की तैनाती विदेश मंत्रालय में थी. यहां पर वह निरस्त्रीकरण (डिसआर्मामेंट) और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों की टीम का हिस्सा थीं.
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उनकी विशेषज्ञता पीएमओ में जाने के बाद अहम साबित हुई, जहां उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल के तहत ‘विदेश और सुरक्षा’ कार्यक्षेत्र में योगदान दिया
नौकरी से इस्तीफ़ा देकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी
लखनऊ से ताल्लुक रखने वालीं निधि तिवारी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई से लेकर ग्रेजुएशन तक की शिक्षा यहीं से पूरी की.
ग्रेजुएशन उन्होंने बीएससी (बायोलॉजी) विषय में किया और पोस्ट-ग्रेजुएशन के लिए बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) का रुख़ किया. साल 2006 में उन्होंने बीएचयू से बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई पूरी की और गोल्ड मेडल हासिल किया.
इसके बाद निधि का चयन भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में बतौर वैज्ञानिक हुआ. साल 2008 में उन्होंने यहां से इस्तीफ़ा दिया और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की.
डॉ. सुशील जायसवाल बताते हैं, “वैज्ञानिक की नौकरी से इस्तीफ़ा देने के बाद उनका दो बार चयन (2008 और 2009) में पीसीएस (यूपी की सिविल सेवा परीक्षा) में हुआ था. 2008 में बेसिक शिक्षा अधिकारी बनीं थीं और 2009 के पीसीएस में उनका चयन असिस्टेंट कमिश्नर (सेल टैक्स) के पद पर हुआ था.”
2013 की सिविल सेवा परीक्षा से पहले निधि तिवारी ने 2012 की भी सिविल सेवा परीक्षा पास की थी. लेकिन तब उनका नाम वेटिंग लिस्ट में था.
इस दौरान उन्होंने वाराणसी में असिस्टेंट कमिश्नर (सेल टैक्स) की नौकरी जारी रखी और फिर 2014 में उनका चयन 96 रैंक के साथ सिविल सेवा परीक्षा 2013 में हो गया.