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मध्यप्रदेश भाजपा के लिए सरदर्द बनता कार्यकर्ताओं का सार्वजनिक गुस्सा, खोजना होगा इसका समाधान

विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन की तैयारियों की समीक्षा करने मुरैना आए प्रदेश संगठन के नेताओं के सामने भाजपा पदाधिकारियों व प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों ने  जिस प्रकार आक्रोश व्यक्त किया वह आने वाले चुनाव के मद्देनजर सत्ताधारी दल के लिए चिंता का विषय कहा जा सकता है। आखिर पार्टी के नीतिनिर्धारक इससे कैसे निपटेंगे यह सबसे बड़ा सवाल है। मुख्य बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में कार्यकर्ताओं के इस सार्वजनिक गुस्से के प्रगटीकरण की घटनाएं पार्टी में बढ़ गई हैं जो पार्टी हाईकमान के लिए परेशानी का सबब कहा जा सकता है।

मुरैना मैं बैठक के दौरान जो  गुबार फूटा उसमें कार्यकर्ताओं ने कहा कि पार्टी की जो विभागीय समितियां बनाई जा रही हैं, उनमें पार्टी में शामिल हुए कांग्रेसी पृष्ठभूमि वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं को रखा गया है। पार्टी के जो निष्ठावान व पुराने कार्यकर्ता थे, उन्हें दरकिनार किया गया है। ऐसे कार्यकर्ताओं की न तो संगठन में सुनवाई हो रही है और न ही सरकार में। ऐसे पुराने कार्यकर्ता क्या करें। पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने नेताओं के सामने जमकर अपना गुबार निकाला। अगर यह बात सच है तो पार्टी संगठन को इसका रास्ता खोजना होगा वह भी जल्द से जल्द।

उल्लेखनीय है कि रविवार को भाजपा के राज्य सभा सांसद विक्रम वर्मा, सांसद प्रहलाद पटेल जिले के पार्टी पदाधिकारियों व मोर्चा व प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा करने के लिए आए थे, लेकिन समीक्षा के दौरान नेताओं के सामने कार्यकर्ताओं का आक्रोश फूट पड़ा। हालांकि दोनों नेताओं ने काफी समझाने का प्रयास किया। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह, सांसद अनूप मिश्रा, मेयर अशोक अर्गल, विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार, सूबेदार सिंह रजौधा, जिलाध्यक्ष अनूप सिंह भदौरिया, वेदप्रकाश शर्मा आदि शामिल रहे।

नेताओं का भाषण खत्म होते ही हुआ हंगामा

जैसे ही नेताओं का उद्बोधन खत्म हुआ और कार्यकर्ताओं से उनकी बात कहने की बात की गई तो हंगामा हो गया। सभी कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा की बात नेताओं के सामने सुनाने लगे। बड़ी मुश्किल से मौजूद नेताओं को स्थिति को संभाला।

मंत्री व मेयर की कार्यशैली पर खड़े किए सवाल

बैठक में कार्यकर्ताओं से दोनों नेताओं से कहा कि शहर में स्थानीय मंत्री व मेयर की कार्यशैली ऐसी है कि आमजन तो दूर कार्यकर्ता तक खुश नहीं हैं। आगामी चुनाव में दोनों नेताओं की कार्यशैली का असर चुनाव पर पड़ सकता है। क्योंकि दोनों ही नेता कार्यकर्ताओं से बात नहीं करते हैं। बात भी करते हैं तो वे कार्यकर्ताओं की समस्या दूर नहीं होती।

संगठन में नेता नहीं सुनते, अफसर भी नहीं देते भाव

बैठक में कार्यकर्ताओं ने कहा कि संगठन तो उनकी उपेक्षा करता ही है। उनकी कोई नहीं सुनता। इसी तरह जब काम या समस्या के लिए अफसरों के पास कार्यकर्ता जाते हैं वहां भी उनकी कोई नहीं सुनता। ऐसे में वे आम लोगों को अपने साथ कैसे ला पाएंगे और संगठन को कैसे मजबूत बनाएंगे।

एसडीएम का भी ट्रांसफर नहीं करा पाए

कार्यकर्ताओं ने नेताओं को बताया कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की हद तो तब हुई जब भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नागेन्द्र तिवारी से एसडीएम ने अभद्रता कर दी। उसका ट्रांसफर भी संगठन नहीं करा पाया। ऐसे में जनता के बीच क्या संदेश जाता है, इस बात को आसानी से समझा जा सकता है।

मीडिया के सामने सवालों से बचने का प्रयास किया नेताओं ने

प्रेसवार्ता में जब जब विक्रम वर्मा से पूछा गया कि कार्यकर्ता संगठन से असंतुष्ट हैं तो उनकी नाराजगी को कैसे दूर करेंगे। श्री वर्मा ने कहा कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करेंगे। बैठक में कई चीजे सामने आई हैं। श्री वर्मा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अभी तो भाजपा में कई कांग्रेसी आएंगे। ऐसे में किसी न किसी समिति में एक दो कार्यकर्ता ऐसे शामिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कांगे्रस जिन कामों को संगठनात्मक स्तर पर अब कर रही है, वह काम हम बहुत पहले कर चुके हैं। साथ ही आगामी दिनों में मुख्यमंत्री जनआशीर्वाद यात्रा भी निकालेंगे और लोगों से रूबरू बात करेंगे।

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