ओमप्रकाश जाजौरिया
भारतीय जनता पार्टी के पितृ पुरुष दो बार के विधायक और ग्वालियर के लोकप्रिय महापौर स्वर्गीय रघुनाथ शंकर भाऊ साहब पोतनीस जिन्हें सभी भाऊ साहब के नाम से संबोधित करते थे 11 नवंबर 2025 को उनकी 24वीं पुण्यतिथि है ऐसी महान प्रतिभा जो वर्षों वर्ष में एक बार जन्म लेती हैं ऐसी अद्भुत प्रतिभाशाली कर्तव्य निष्ठ व्यक्तित्व के धनी थे भाऊ साहब। बे संगठन में अनेकों पदों पर रहे और छोटे से छोटे और बड़े से बड़े कार्यकर्ता से लगातार संपर्क और उसकी चिंता उनकी दिनचर्या थी ।कार्यकर्ता के ऊपर आये किसी भी संकट के निवारण के लिए वे हनुमान थे जब वे जिला अध्यक्ष थे तो नित्य भारतीय जनता पार्टी कार्यालय मुखर्जी भवन में 4 घंटे बैठते थे। 1987 में जब पार्टी ने उन्हें स्व गंगाराम बादिलं जी के असमय निधन के बाद उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया उस समय प्रतिद्वंद्वी दल कांग्रेस पार्टी यह मानकर बैठी थी यह वैश्य बहुल क्षेत्र है और यहां से वैश्य समाज का व्यक्ति ही चुनाव जीत सकता है इसलिए उन्होंने हरिश्चंद्र गोयल जो उस समय पार्षद भी थे अपना प्रत्याशी घोषित किया परंतु भाऊ साहब की ईमानदार और स्वच्छ छवि ऐसी थी कि उस समय कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री अपने प्रत्याशी श्री हरिश्चंद्र गोयल के समर्थन में प्रचार करने महाराज बाडा जीवाजी चौक आम सभा को संबोधित कर रहे थे तो उन्हें भी अपने भाषण में यह कहना पड़ा था कि भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी ईमानदार है स्वच्छ छवि वाला है परंतु आपसे निवेदन है वोट कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को ही दें। मोतीलाल बोरा भी गली मोहल्ले में हर तरह के हथकंडे अपनाते हुए मिले। फिर भी कांग्रेस पार्टी का प्रत्याशी पराजित हो गया।
1989 में भाऊ साहब विधानसभा चुनाव लड़े और भारी बहुमत से विजय बने उसे समय उन पर जिला अध्यक्ष की भी जिम्मेवारी थी और चुनाव वाले दिन मैंने उनके साथ था m80 दो पहिया वाहन पर वह चलते थे मैंने देखा उसे समय लश्कर पश्चिम विधानसभा हुआ करती थी जिस पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री शीतल सहाय जी चुनाव लड़ रहे थे और भाऊ साहब पूर्व विधानसभा क्षेत्र से लड़ रहे थे जब मैंने उनसे कहा भाऊ साहब आप अपने क्षेत्र में चलें बोले शीतल सहाय जी का जीतना भी मुझसे ज्यादा जरूरी है मैं जिला अध्यक्ष हूं इसलिए ग्वालियर में जिले की संपूर्ण विधानसभा में चुनाव जिताना मेरी जिम्मेदारी है जब भाऊ साहब महापौर थे तो ग्वालियर जिले का विकास कैसे हो इसके लिए दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दलों से उनके दफ्तर में जाकर ग्वालियर के विकास के लिए उन्होंने कार्य योजना बनाई चंबल का पानी ग्वालियर में आये इसके लिए उन्होंने जमीनी आंदोलन किये। । भाऊ साहब भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के महामंत्री संगठन भी रहे और कुशाभाऊ ठाकरे जी के मार्गदर्शन में उन्होंने मध्य प्रदेश के संगठन को ऊंचाइयों पर पहुंचया।। संगठन में सही आदमी का चयन करने की और उसे मजबूती से बेचारिक रूप से पार्टी से जोड़ने की उनकी दूरदर्शिता के सभी कायल थे।
एक बार की घटना मुझे याद आती है जब सुंदर लाल जी पटवा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और विक्रम वर्मा शिक्षा मंत्री एक कार्यकर्त्ता जो शिक्षक था मेरे पास आए और बोले आप भाऊ साहब से बोल मेरा ट्रांसफर ग्वालियर करा दे। मैं रोजाना गोहद से ग्वालियर अप डाउन करता हूं पारिवारिक स्थिति भी ठीक नहीं थी इसलिए मैं उन्हें भाऊ साहब के पास ले गया भाऊ साहब ने भी तुरंत बोला आप भोपाल आ जाना हम वापस लौटे तो मास्टर साहब बोले आप साथ में चले मैंने उनसे कहा मैं नहीं जा रहा मैं भोपाल देखा भी नहीं है परंतु बे बड़ी भी वेबस होकर जिद्द करने लगे रात में जीटी एक्सप्रेस से जनरल कोच में मैं और मास्टर साहब जमीन पर बैठकर ट्रेन की यात्रा की उस समय ₹50 ट्रेन में किराया था हम वहां पहुंचे विधायक विश्राम ग्रह भाऊ साहब ने विक्रम वर्मा जी से बोलकर मास्टर साहब का तबादला आदेश करवा दिया जब हम वापस लौट रहे थे रात्रि में तो मुझसे पूछा ओमप्रकाश तुम्हारा टिकट किसने लिया था मैं भी सहज भाव में जो सच्चाई थी बता दी पैसे मास्टर साहब ने दिए थे बोले नहीं गलत बात हम राजनीति सेवा के लिए करते हैं इस पैसे से भोपाल आना जाना ठीक नहीं जब लौट कर जाओ तो पैसे मुझे ले जाओ और दोनों टिकट तुम लेना मैंने कहा भाऊ मेरे पास पैसे हैं। और मैंने दोनों टिकट जब ग्वालियर वापसी वाले लिए तो मास्टर साहब यह दोनों आंखों में पानी था इस प्रकार से कार्यकर्ता को नैतिक से मजबूत आत्म बल वाला बनाते थे भाऊ साहब।जो जीवन में किसी भी प्रकार से नैतिक पतन से बचाए रखता था। उनकी 24 वीं पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि और सादर नमन।