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अल फलाह यूनिवर्सिटी के पास अंडरग्राउंड मदरसा, 5-5 फीट मोटी दीवारें

अल  फलाह यूनिवर्सिटी के पास अंडरकंस्ट्रक्शन एक मदरसे के असामान्य ढांचे ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच चिंता बढ़ा दी है. शनिवार को पुलिस टीम ने मदरसे वाले स्थान का दौरा किया और इमारत की बनावट को देखते हुए इसे संदेहास्पद मानकर जांच शुरू कर दी. सूत्रों के अनुसार यह मदरसा करीब 200 गज के प्लॉट पर बनाया जा रहा है, लेकिन इसकी संरचना सामान्य इमारतों से बिल्कुल अलग है. इमारत का अधिकांश हिस्सा जमीन के नीचे बना है और सिर्फ तीन फीट का हिस्सा ही ऊपर दिखाई देता है. सबसे हैरान करने वाली बात इसकी 4-5 फीट मोटी दीवारें हैं, जबकि आवासीय या शैक्षणिक इमारतों में दीवारों की सामान्य मोटाई मात्र नौ इंच होती है.

जांच अधिकारियों का कहना है कि इतनी भारी संरचना किसी सामान्य मदरसे या शिक्षण संस्थान के लिए असामान्य है, इसलिए इसकी गहन जांच जरूरी है. पुलिस सूत्रों ने पुष्टि की है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के करीब इस मदरसे के निर्माण को लेकर धन मुहैया कराने वाला शख्स मुज़म्मिल गनई बताया जा रहा है. वही मुज़म्मिल जिसे हाल ही में उजागर हुए ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ मामले में गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद उसकी लोकेशन, संपर्क सूत्र और वित्तीय लिंक की जांच की जा रही है.
पुलिस ने क्या कहा?
फरीदाबाद पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक यह बिल्कुल जांच में नहीं आया है कि ये जो निर्माणधीन स्ट्रक्चर है उसकी फंडिग आतंकियों ने की है. बिल्डिंग के मालिक को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है. अभी उस जमीन के कागजात वेरीफाई हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस मदरसे की फंडिंग आतंकियों की तरफ से हुई है, ऐसी कोई जानकारी नहीं है.
मौलवी इश्ताक के नाम पर मदरसा
इमारत का रजिस्ट्रेशन मौलवी इश्ताक के नाम पर है. इश्ताक ने ही मुज़म्मिल गनई को किराए पर कमरा दिया था. मुज़म्मिल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इश्ताक से भी पूछताछ की थी. अब निर्माणाधीन मदरसा पुलिस के रडार पर आ गया है. पुलिस टीम ने स्थल का निरीक्षण कर कई तकनीकी विवरण दर्ज किए हैं. प्राथमिक अनुमान यह जताता है कि इमारत की संरचना किसी विशेष उद्देश्य के लिए की गई हो सकती है.
अंडरग्राउंड मदरसे का मकसद जानने में जुटी पुलिस
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी मोटी दीवारें और अंडरग्राउंड ढांचा क्यों बनाया जा रहा था. फिलहाल, पुलिस ने निर्माण कार्य को रोकते हुए भवन की कानूनी और तकनीकी जांच तेज कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस इमारत के पीछे असल मकसद क्या था
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