प्रवीण दुबे
यह यात्रा यदि आगाज की तरह अंजाम तक इसी अंदाज में पहुंचाने में शिवराज सिंह कामयाब रहते हैं तो विधानसभा चुनाव से पूर्व जीत की ओर बढ़ने वाला यह उनका सबसे मजबूत कदम हो सकता है। लेकिन थोड़ी सी चूक या यूं कहें कि यात्रा की थोड़ी सी असफलता शिवराज के लिए बड़ा कांटा भी बन सकती है।

जो लोग मध्यप्रदेश में शिवराज की लोकप्रियता पर अंगुली उठा रहे हैं या फिर इस बात का कयास लगा रहे हैं कि इस बार मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन की लहर है, ऐसे लोगों के लिए कम से कम शनिवार का दिन निराशा भरा कहा जा सकता है। जिस प्रकार के उत्साह और जोशपूर्ण माहौल में शिवराज ने अपनी जन आशीर्वाद यात्रा का आगाज किया और उसके बाद महाकाल की नगरी उज्जैन तथा मालवा के जिन स्थानों से शिवराज का जनआशीर्वाद रथ गुजरा वहां जिस प्रकार की भीड़ देखी गई वह निसन्देह इस बात को गलत साबित करती है कि शिवराज की लोकप्रियता में कोई कमी आई है।
जय महाकाल जय शिवराज , अबकी बार दो सौ के पार जैसे गगनभेदी नारों के बीच कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बनता था। इसकी कल्पना तो शायद शिवराज ने भी नहीं की होगी कि उज्जैन की सड़कों पर ऐसे माहौल में जब विपक्ष ही नहीं उनकी अपनी पार्टी के भीतर से भी यह आवाज आ रही है कि चेहरा बदलो तब उनका चेहरा इतनी भीड़ और इतना जबरदस्त उत्साह पैदा कर सकता है।
लेकिन यह हम सबने शनिवार को देखा , यहां मेरा यह सिध्द करने का कतई इरादा नहीं कि शिवराज के बारे में जो कुछ कहा या लिखा जा रहा है वह गलत है। उसमें कितनी सच्चाई या झूठ है यह विश्लेषण और जांच का विषय हो सकता है। लेकिन मेरा यह आलेख सिर्फ और सिर्फ जन आशीर्वाद यात्रा के आगाज पर आधारित है। मेरे अनुसार इस शुरुआत को सौ में से 99 नम्बर दिए जाएं तोर अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए
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यह सच है कि अभी तो जनआशीर्वाद यात्रा की शुरूआत हुई है अभी शिवराज को लंबा सफर तय करना है। यात्रा का जो कार्यक्रम सामने आया है उसके मुताबिक विधानसभा के सभी स्थानों से होकर यह यात्रा गुजरने वाली है। ऐसे में शिवराज का चेहरा उज्जैन वाले जादू को कायम रख पायेगा इस बारे में ज्यादा कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है यात्रा की सफल शुरुआत ने भाजपा के नीतिनिर्धारकों खासकर अमितशाह को सुकून पहुंचाया है ।
यहां अमितशाह का विशेष उल्लेख इस कारण किया गया है क्योंकि वे ही ऐसे शख्स थे जिन्होंने चुनाव से पूर्व शिवराज के नेतृत्व में किसी भी तरह के बदलाव को नकार दिया था ।
यात्रा के सफल आगाज के बाद अब शिवराज की सबसे बड़ी चिंता यह होगी कि इस यात्रा को सफल अंजाम तक पहुंचाया जाए ।
यह यात्रा यदि आगाज की तरह अंजाम तक इसी अंदाज में पहुंचाने में शिवराज सिंह कामयाब रहते हैं तो विधानसभा चुनाव से पूर्व जीत की ओर बढ़ने वाला यह उनका सबसे मजबूत कदम हो सकता है। लेकिन थोड़ी सी चूक या यूं कहें कि यात्रा की थोड़ी सी असफलता शिवराज के लिए बड़ा कांटा भी बन सकती है।
ऐसे हालात में यह जरूरी है कि पार्टी नेतृत्व उन बातों के लिए शिवराज को आगाह करे जो उनकी कमजोरियां रही हैं।
स्वयं शिवराज को भी यह भली प्रकार ध्यान रखना होगा कि यह चुनावी मौसम है यहां छोटी सी चूक भी जनता,कार्यकर्ता या किसी एक वर्ग विशेष का गुस्सा भड़का सकती है और इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
शिवराज सिंह को सबसे ज्यादा ध्यान इस बात का रखना होगा कि वे अपने भाषणों के दौरान स्वयं पर नियंत्रण रखें , सर्वविदित है कि उनके द्वारा दिया गया आरक्षण सम्बन्धी एक सार्वजनिक बयान आज तक उनके गले की हड्डी बना हुआ है।
ऐसे ज्वलंत विषयों से उन्हें बचना होगा। अपने गुस्से पर काबू रखना होगा ध्यान रहे की कुछ महीने पूर्व ही गुस्से में आकर शिवराज ने अपने ही एक सुरक्षा कर्मी को चांटे मारकर अपनी जग हंसाई कराई थी। उन्हें हंसमुख रहना होगा, कार्यकर्ताओं को पुचकारना होगा तथा जनता की मीठी कड़वी बांतों को मुस्कराते हुए पचाना होगा तभी यह यात्रा अपने उद्देश्य को पूरा कर पाएगी।