प्रवीण दुबे
ग्वालियर 24 फरवरी 2026/26 फरवरी से शुरू होने वाले ‘वायुशक्ति-2026′ (Exercise Vayu Shakti 2026) युद्धाभ्यास को लेकर ग्वालियर के महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन और ग्वालियर के आकाश पर युद्धक विमानों की गड़गड़ाहट बढ़ गई है इसी के चलते आज सुबह से फाइटर जेट्स की बढ़ी हुई हलचल को महसूस किया गया इसको लेकर वायुसेना ने अधिकृत रूप से तो कोई बात नहीं कही है लेकिन जानकारों का कहना है कि ग्वालियर के आकाश में युद्धक विमानों की गड़गड़ाहट बढ़ने का मुख्य कारण आगामी ‘वायुशक्ति-2026′ (Exercise Vayu Shakti 2026) युद्धाभ्यास की तैयारी है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय वायुसेना का बड़ा युद्धाभ्यास ‘वायुशक्ति-26’ आगामी 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के पोखरण में आयोजित होने वाला है। ग्वालियर का एयरबेस मिराज-2000 (Mirage 2000) और सुखोई (Su-30 MKI) जैसे प्रमुख लड़ाकू विमानों का गढ़ है। इस मेगा शो से पहले विमानों की फुल-स्केल रिहर्सल और फॉर्मेशन प्रैक्टिस की जा रही है, जिसकी वजह से ग्वालियर के आसपास आसमान में गर्जना बढ़ गई है।
ग्वालियर बेस विशेष रूप से मिराज-2000 लड़ाकू विमानों का मुख्य केंद्र है। वायुशक्ति अभ्यास में इन विमानों की अहम भूमिका होती है (जैसे लेजर गाइडेड बमबारी का प्रदर्शन)। पायलट अपनी सटीकता और ‘टाइमिंग’ को परखने के लिए सुबह से ही ‘सॉर्टीज’ (Sorties) ले रहे हैं।
हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद वायुसेना अपनी परिचालन क्षमता (Operational Readiness) को लगातार उच्चतम स्तर पर रख रही है। नियमित ट्रेनिंग मिशन के तहत भी विमानों की उड़ानें बढ़ाई गई हैं ताकि किसी भी स्थिति के लिए तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
जानकारों के मुताबिक युद्धाभ्यास से पहले विमानों के इंजन और रडार सिस्टम की सघन जांच के लिए भी टेस्ट फ्लाइट्स की जाती हैं। फरवरी का साफ मौसम लंबी दूरी की उड़ानों और अभ्यास के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, इसलिए इस दौरान ट्रेनिंग सत्र बढ़ जाते हैं। जानकारों का कहना है कि
ग्वालियर वासियों को इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है; यह भारतीय वायुसेना की नियमित अभ्यास प्रक्रिया और 27 फरवरी को होने वाले शक्ति प्रदर्शन की तैयारी का हिस्सा है।