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मध्यप्रदेश में नई परिवहन नीति के खिलाफ 2 मार्च से बस हड़ताल,थम जाएंगे 6 हजार यात्री बसों के पहिए

सरकार 7 प्राइवेट कंपनियों के माध्यम से पीपीपी मॉडल पर लागू करने जा रही है, जिसमें प्राइवेट बस ऑपरेटर से अनुबंध किया जा रहा है. चार या पांच रुपये किलोमीटर के अनुसार अनुबंध होगा. इसमें 18% अनुबंध करने वाली कंपनी लेगी 10% रेड बस वाले लेंगे. अभी यात्रियों के लिए प्रति 1 किलोमीटर 1.25 रुपये का किराया लगता है, लेकिन सरकार की नीति में यह किराया प्रति एक किलोमीटर 1.75 रुपये हो जाएगा. इससे आम जनता को भी नुकसान होगा

ग्वालियर 22 फरवरी 2026/मध्य प्रदेश सरकार की परिवहन नीति के खिलाफ मध्यप्रदेश रोडवेज यूनियन बस ऑपरेटर्स ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है, आज ग्वालियर में आयोजित पत्रकार वार्ता में बस ऑपरेटर यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष बलवीर तोमर महामंत्री पदम् गुप्ता प्रयाग नारायण भटेले, देवेंद्र सिंह तोमर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार की परिवहन नीति न तो जनता के हित में है और न ही बस ऑपरेटर के मध्यप्रदेश रोडवेज यूनियन बस ऑपरेटर्स की मांग है कि नई नीति के अंतर्गत प्रदेश सरकार यात्री बसों पर बढ़ाये गए टैक्स को वापस ले और साथ ही जो नई परिवहन नीति अप्रैल 2026 से लागू करने वाली है उसको भी निरस्त करें।

उन्होंने बताया कि इसके पहले अपनी दोनों प्रमुख मांगों को लेकर पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर सोमवार से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिए जा रहे हैं . सरकार को करीब एक सप्ताह का समय दिया जा रहा है कि वह उनकी मांगों को तुरंत माने प्रदेश सरकार यदि इसकी अनदेखी करती है तो ग्वालियर सहित मध्य प्रदेश के 55 जिलों में 2 मार्च से यात्री बस हड़ताल शुरू कर दी जाएगी इसके अंतर्गत सुबह 6:00 बजे से प्रदेश भर की 6000 यात्री बसों के पहिए अनिश्चितकाल के लिए ठहर जाएंगे. इससे लाखों यात्री प्रभावित होंगे.

उन्होंने कहा कि सरकार 20 साल बाद परिवहन सेवा दोबारा शुरू करने जा रही है,प्रदेश की जनता को सस्ते में बेहतर सफर के झूठे वादे किये जा रहे हैं परन्तु सच्चाई यह है कि  सरकार के पास अब कोई बस बची ही नहीं है. वह यह सेवा 7 प्राइवेट कंपनियों के माध्यम से पीपीपी मॉडल पर लागू करने जा रही है, जिसमें प्राइवेट बस ऑपरेटर से अनुबंध किया जा रहा है. चार या पांच रुपये किलोमीटर के अनुसार अनुबंध होगा. इसमें 18% अनुबंध करने वाली कंपनी लेगी 10% रेड बस वाले लेंगे. अभी यात्रियों के लिए प्रति 1 किलोमीटर 1.25 रुपये का किराया लगता है, लेकिन सरकार की नीति में यह किराया प्रति एक किलोमीटर 1.75 रुपये हो जाएगा. इससे आम जनता को भी नुकसान होगा. इससे सरकार का उद्देश्य बस मालिकों को किराएदार बनाकर उनका शोषण करना है.

ऐसे तो बेरोजगारी बढ़ेगी
बस ऑपरेटर ने कहा कि सरकार व्यावहारिक समस्याएं नहीं समझना चाह रही. मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री से मुलाकात के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है. जो कंपनियां अनुबंध कर रही हैं, वह केवल 6 महीने का है. ऐसे में वह धीरे-धीरे अपनी बस लगाएंगे और हम लोगों को अलग करते जाएंगे. इससे सैकड़ों लोग बे-रोजगार होंगे और हम लोगों का धंधा पानी बंद हो जाएगा. इसलिए अब एक हफ्ते का समय सरकार को दिया है, नहीं तो 2 तारीख से हड़ताल शुरू हो जाएगी.

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