Homeधर्म कर्मयदि बुझ जाए माता रानी की अखंड ज्योति तोअपशकुन की आशंका से...

यदि बुझ जाए माता रानी की अखंड ज्योति तोअपशकुन की आशंका से घबरायें नहीं जानिए क्या करें

चैत्र नवरात्रि में घर में अखंड ज्योति जलाना मां दुर्गा की कृपा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। यह ज्योति नौ दिनों तक लगातार जलनी चाहिए। लेकिन कई बार हवा, घी की कमी, बाती का जलना या अन्य कारणों से ज्योति बुझ जाती है। ऐसे में मन में डर और अपराधबोध बैठ जाता है कि कहीं माता नाराज तो नहीं हो गईं? ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, अखंड ज्योति का बुझना कोई बड़ा अपशकुन नहीं है। यह केवल भौतिक घटना हो सकती है। महत्वपूर्ण है आपकी श्रद्धा और भाव। आइए जानते हैं कि ज्योति बुझ जाए तो क्या करें और क्या ना करें।

अखंड ज्योति का महत्व

अखंड ज्योति मां दुर्गा की शक्ति और अखंड भक्ति का प्रतीक है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुरक्षा और मंगल का संचार करती है। दुर्गा सप्तशती और मार्कण्डेय पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि पूजा में कर्मकांड से ज्यादा महत्वपूर्ण है भक्त का भाव और श्रद्धा। यदि नीयत साफ है और पूजा सच्चे मन से की गई है, तो छोटी-मोटी तकनीकी चूक (जैसे ज्योति का बुझना) साधना को भंग नहीं करती है। माता रानी अपराध क्षमापन स्तोत्र में स्वयं कहती हैं कि भक्त की भूलें क्षमा करने योग्य हैं। इसलिए घबराएं नहीं, बस सच्चे दिल से माफी मांगें।

ज्योति बुझने पर तुरंत क्या करें?

ज्योति बुझते ही सबसे पहले शांत होकर मां दुर्गा का ध्यान करें।

  1. तुरंत एक साक्षी दीपक (छोटा दीपक) जलाएं और उसे माता के सामने रखें।
  2. अखंड ज्योति के पात्र को साफ करें, जली हुई बाती (गुल) निकालें।
  3. नई, लंबी और अच्छी बाती लगाएं तथा घी डालें।
  4. साक्षी दीपक की लौ से ही अखंड ज्योति को दोबारा प्रज्वलित करें।
  5. हाथ जोड़कर मां से अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा मांगें।
  6. ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ या ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें।

इन उपायों से ज्योति फिर से जलने लगेगी और आपकी साधना अखंड बनी रहेगी।

ज्योति बुझने पर क्या ना करें – गलत धारणाएं

कई लोग ज्योति बुझने को बड़ा अपशकुन मानकर पूजा छोड़ देते हैं या नई ज्योति जलाने से डरते हैं। ऐसा बिल्कुल ना करें। ज्योति बुझना कोई अभिशाप या माता की नाराजगी नहीं है। इसे अपनी भक्ति की कमी ना समझें। शास्त्रों में लिखा है कि पूजा में अनजाने में हुई गलतियां क्षमा योग्य हैं। घबराहट में ज्योति को बार-बार बदलना या पूजा स्थल बदलना भी गलत है। बस शांत मन से उपाय करें और विश्वास रखें कि मां सब देख रही हैं और आपकी श्रद्धा से प्रसन्न हैं।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments