– डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भारत आज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां नवाचार और उद्यमिता राष्ट्र निर्माण की धुरी बन चुकी हैं। देश में स्टार्टअप्स की तेजी से बढ़ती संख्या, उनके द्वारा सृजित रोजगार और वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान इस बात का प्रमाण है कि भारत एक नए ‘आर्थिक युग’ में प्रवेश कर चुका है।
इस संदर्भ में कहना होगा कि 16 जनवरी 2016 को शुरू की गई “स्टार्टअप इंडिया” पहल ने इस परिवर्तन को दिशा और गति प्रदान की है। इस पहल का उद्देश्य एक ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना था, जहां नए विचारों को पंख मिलें, निवेश को प्रोत्साहन मिले और उद्यमियों को हर स्तर पर सहयोग प्राप्त हो सके। केंद्र की मोदी सरकार ने समय को पहचानते हुए नीतियों को सरल बनाया, वित्तीय सहायता, कर में छूट और बाजार तक पहुंच जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया और एक नया क्षितिज अपने देश के युवाओं के लिए खोल दिया, जिनके लिए नवाचार से उद्यमिता में सफलता जैसे कोई स्वप्न था!
वस्तुत: आज इस यात्रा का परिणाम हमारे सामने मौजूद है। वित्त वर्ष 2025-26 में 55,200 से अधिक “स्टार्टअप्स” को राज्यवार मान्यता मिल गई है। कह सकते हैं कि वर्ष 2026 से शुरू हुई “स्टार्टअप्स” की यात्रा में यह किसी एक वर्ष में अब तक की सर्वाधिक संख्या है। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 36,400+ स्टार्टअप्स की तुलना में 51.6 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है। यह आंकड़ा निश्चित ही उस विश्वास और ऊर्जा का प्रतीक है, जोकि वर्तमान भारत के युवाओं में दिखाई दे रही है।
यही कारण है, रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी स्टार्टअप्स ने उल्लेखनीय योगदान दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 4,99,400 प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित हुईं हैं, आंकड़ा कहता है कि यह पिछले वर्ष की तुलना में 36.1 प्रतिशत अधिक हैं। 31 मार्च 2026 तक कुल 2.23 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स ने 23.36 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं।
देश के विभिन्न राज्यों में स्टार्टअप्स का विस्तार भारत के संतुलित विकास की कहानी कहता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरे हैं। इन राज्यों में हजारों स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से सिर्फ लाखों भारतीयों को ही नहीं, कई विदेशियों को भी रोजगार मिल रहा है। इसमें अच्छी बात यह भी है कि अब छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों से भी स्टार्टअप्स उभर रहे हैं, जोकि भारत के आर्थिक विकास को व्यापक और समावेशी बना रहे हैं।
सरकार की विभिन्न योजनाएं इस विकास को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (एफएफएस) के तहत 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1,420 से अधिक स्टार्टअप्स में 26,900 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश संभव हुआ है। इस सफलता को देखते हुए 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ एफएफएस 2.0 की शुरुआत की गई है, जो भविष्य में और अधिक स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान करेगा। क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (सीजीएसएस) का विस्तार भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गारंटी कवर को 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाना आसान हो गया है। 2025-26 तक 1,250 करोड़ रुपये से अधिक के ऋणों की गारंटी दी जा चुकी है, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (एसआईएसएफएस) के तहत 219 इनक्यूबेटरों के माध्यम से 3,400 से अधिक स्टार्टअप्स को 605 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है। कहना होगा कि यह योजना उन स्टार्टअप्स के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो शुरुआती चरण में होते हैं और जिन्हें वित्तीय सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। वहीं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी यह क्रांति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। 1.07 लाख से अधिक स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार है, जिसे आंकड़ों के हिसाब से हम कुल स्टार्टअप्स का लगभग 48 प्रतिशत मान सकते हैं। यह संख्या बता रही है कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी अब नेतृत्व की भूमिका में है। यह परिवर्तन सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है।
यही कारण भी है जो नवाचार के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप्स द्वारा दायर पेटेंट आवेदनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि इसका साक्षात प्रमाण है। वित्त वर्ष 2024-25 में जहां 2,850+ पेटेंट आवेदन दायर किए गए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 4,480+ हो गई है। कुल मिलाकर 19,400 से अधिक पेटेंट आवेदन दाखिल किए जा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि भारत अब नवाचार के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने भी स्टार्टअप्स को नई संभावनाएं प्रदान की हैं। 38,600 से अधिक स्टार्टअप्स इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं, जिससे उन्हें सरकारी खरीद में भाग लेने का अवसर मिला है। 2025-26 में 1,40,260 से अधिक ऑर्डर दिए गए, जिनका कुल मूल्य 19,190 करोड़ रुपये से अधिक रहा। यह सरकारी समर्थन का एक सशक्त उदाहरण है, जिसने स्टार्टअप्स को बाजार तक पहुंचने में मदद की है।
अब यदि इस पूरे परिदृश्य को व्यापक दृष्टि से देखें, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत ने अपनी विशाल जनसंख्या को एक उत्पादक शक्ति में बदलने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। युवाओं की ऊर्जा, सरकार की नीतियां और तकनीकी प्रगति, वस्तुत: इन तीनों के समन्वय ने भारत को आज वैश्विक स्तर पर इस दिशा में एक नई पहचान दिलाई है। आज भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल होकर वैश्विक नवाचार के मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम और अधिक सशक्त होगा, जोकि देश को आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। एक तरह से देखें तो वर्तमान भारत में “स्टार्टअप क्रांति” न सिर्फ आर्थिक विकास की कहानी है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत और निर्णायक कदम है; कहना होगा कि एक ऐसा कदम, जोकि आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहा है और भारत दिनो-दिन सशक्त हो रहा है, अर्थ के साथ वैश्विक प्रभाव में भी।