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ऑस्ट्रेलिया के बाद ब्रिटेन से आई बहुत बड़ी खबर क्या भारत सरकार भी उठाएगी ऐसा कदम

लंदन/नई दिल्ली1जून 2026/बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर ब्रिटेन की सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और खुशहाली के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए पूर्ण प्रतिबंध ही सबसे उपयुक्त विकल्प है।
स्टार्मर ने बताया कि सरकार इस संबंध में आवश्यक कानून क्रिसमस से पहले पारित कराने का प्रयास करेगी और यह प्रतिबंध वर्ष 2027 की शुरुआत से लागू किया जाएगा। ब्रिटिश सरकार के अनुसार प्रतिबंध के दायरे में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल होंगे, जबकि व्हाट्सऐप और सिग्नल को इससे बाहर रखा जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष दिसंबर में Australia इस प्रकार का कानून लागू करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। अब ब्रिटेन के इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
भारत में भी उठ रही है चिंता
भारत में भी सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से जुड़े अनेक मामले सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र के बच्चे बिना पर्याप्त निगरानी के सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ठगी, फर्जी सूचनाओं, अश्लील सामग्री, गेमिंग की लत और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का शिकार हो सकते हैं। कई मामलों में सोशल मीडिया पर खतरनाक चुनौतियों (चैलेंज), आपत्तिजनक सामग्री और अनजान लोगों से संपर्क के कारण बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
क्या भारत भी करेगा ऐसा फैसला?
ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के कदम के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत सरकार भी बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया उपयोग की न्यूनतम आयु को लेकर सख्त नियम लागू करेगी। हालांकि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर पूर्ण प्रतिबंध जैसी कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन डिजिटल सुरक्षा, अभिभावकीय नियंत्रण और आयु सत्यापन संबंधी नियमों को लेकर चर्चा लगातार जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ती डिजिटल दुनिया में बच्चों को तकनीक से पूरी तरह दूर रखने के बजाय सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग की दिशा में मजबूत नीतियां, अभिभावकीय निगरानी और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम भी आवश्यक हैं। वहीं, ब्रिटेन के ताजा फैसले ने भारत सहित दुनिया के कई देशों के सामने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कितनी सख्ती जरूरी है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि क्या भारत भी ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया की राह पर चलते हुए बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर कोई बड़ा और सख्त कदम उठाता है।

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