ग्वालियर, 28 जून 2026/ मानसून के आगमन में देरी या सामान्य से कम वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखकर ग्वालियर जिले के किसानों के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग द्वारा वैज्ञानिक सलाह जारी की गई है। कृषकगणों से अपील की गई है कि वे मानसून देरी से आने पर चिंता न करें, कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए उपाय अपनाकर खेती करें, जिससे कम वर्षा की स्थिति में भी फसल उत्पादन को सुरक्षित रखा जा सके।
कृषि विभाग ने सलाह दी है कि किसान 50 से 75 मिलीमीटर प्रभावी वर्षा होने के बाद ही बुवाई प्रारंभ करें। खेत में नमी संरक्षण के लिए मेड़बंदी, मल्चिंग तथा जल संरक्षण के उपाय अपनाएँ और कम अवधि वाली एवं ऐसी किस्मों का चयन करें जो कम वर्षा को सहन कर सकें।
मानसून 15 से 30 दिन विलंब से आने पर फसलवार सलाह
कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि यदि मानसून 15 से 30 दिन की देरी से आता है तो किसान ज्वार की 80 से 100 दिन में पकने वाली किस्में, बाजरा की शीघ्र पकने वाली किस्में तथा तिल, मूंग और उड़द जैसी कम अवधि एवं कम वर्षा में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों की बुवाई करें। सोयाबीन की बुवाई जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक पूर्ण कर लें। इसके बाद तिल, मूंग अथवा उड़द जैसी वैकल्पिक फसलों को प्राथमिकता दें। अरहर की शीघ्र पकने वाली किस्में केवल हल्की भूमि में जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक बोने की सलाह दी गई है।
कम वर्षा की स्थिति में अपनाएँ ये उपाय
कृषि विभाग ने खेतों में मेड़बंदी, कंटूर बंडिंग, मल्चिंग तथा वर्षा जल संरक्षण पर विशेष जोर दिया है। समय पर खरपतवार नियंत्रण करें तथा उपलब्ध पानी से आवश्यकता पड़ने पर जीवन रक्षक सिंचाई दें। यूरिया की पूरी मात्रा एक साथ न देकर दो से तीन किस्तों में दें। फसल पर आवश्यकता अनुसार 2 प्रतिशत यूरिया अथवा 1 प्रतिशत पोटाश का पर्णीय छिड़काव करें तथा कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी रखें।
भूमि एवं उर्वरक प्रबंधन पर दें विशेष ध्यान
विभाग ने किसानों को गहरी जुताई, खेत समतलीकरण, मजबूत मेड़बंदी तथा वर्षा जल को खेत में ही रोकने की सलाह दी है। फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग नमी संरक्षण के लिए करें। फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय दें तथा नाइट्रोजन (यूरिया) का उपयोग विभाजित मात्रा में करें। जैव उर्वरकों एवं जैविक खाद के प्रयोग को बढ़ावा दें।
ग्वालियर जिले के किसानों के लिए विशेष सलाह
कम वर्षा की संभावना को देखते हुए बाजरा, ज्वार, तिल, मूंग एवं उड़द जैसी अपेक्षाकृत सूखा सहनशील फसलों को प्राथमिकता दें। सिंचित क्षेत्रों में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों का उपयोग करें तथा प्रतिदिन मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य करें।
कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वर्षा में देरी होने पर किसी प्रकार की चिंता न करें। पहली प्रभावी वर्षा के बाद ही बुवाई करें, कम अवधि एवं सूखा सहनशील किस्मों का चयन करें तथा कृषि विभाग एवं कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार कृषि कार्य करें।
अधिक जानकारी के लिए जिले के कृषकगण उप संचालक किसान कल्याण व कृषि विकास विभाग के कार्यालय अथवा कृषि विज्ञान केंद्र, ग्वालियर से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही विकासखंड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के कार्यालय में भी संपर्क किया जा सकता है।