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दतिया उपचुनाव: क्या नरोत्तम मिश्रा की राह आसान? दामोदर यादव फैक्टर और ‘हारे हुए प्रत्याशी’ की नीति बढ़ा सकती है टेंशन

प्रवीण दुबे

भोपाल/दतिया 3 जुलाई 2026/दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल उम्मीदवार चयन का है। राजनीतिक गलियारों में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे चल रहा है, लेकिन इस बार उनकी राह उतनी आसान नहीं मानी जा रही जितनी दिखाई दे रही है।
भाजपा यदि दतिया में अपनी सबसे मजबूत राजनीतिक पहचान पर दांव लगाती है तो नरोत्तम मिश्रा स्वाभाविक दावेदार हैं। वर्षों तक दतिया की राजनीति का केंद्र रहे मिश्रा के पास संगठन, कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेटवर्क का मजबूत आधार है।

2023 की हार के बाद भी उन्होंने क्षेत्र में लगातार सक्रियता बनाए रखी है और इसे अपनी राजनीतिक वापसी का सबसे बड़ा अवसर माना जा रहा है।
हालांकि, पार्टी के भीतर दो ऐसे समीकरण हैं जो टिकट के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
पहला है दामोदर यादव फैक्टर दतिया और आसपास के क्षेत्र में यादव समाज का प्रभाव लगातार बढ़ा है। भाजपा के कुछ स्थानीय नेता यह तर्क दे रहे हैं कि यदि पार्टी सामाजिक समीकरणों को भी  दृष्टिगत रखते हुए निर्णय ले,हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण पहलू भाजपा की वह रणनीति है, जिसमें कई राज्यों के हालिया चुनावों में पार्टी ने विधानसभा चुनाव हार चुके प्रत्याशियों को तुरंत उपचुनाव में दोबारा टिकट देने से परहेज किया है।

वीडियो राजधानी समाचार भोपाल से साभार लिया गया है 

यदि यही सोच दतिया में भी लागू होती है, तो नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी पर सवाल खड़े हो सकते हैं। दूसरी ओर, पार्टी यह भी मान सकती है कि दतिया जैसी प्रतिष्ठा वाली सीट पर सबसे अनुभवी और पहचान वाले चेहरे को ही मैदान में उतारा जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के सामने यह केवल एक सीट जीतने का सवाल नहीं है, बल्कि यह संदेश देने का भी अवसर है कि पार्टी अनुभव, संगठन और जीत की संभावना—तीनों में किसे प्राथमिकता देती है।
उधर कांग्रेस भी इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न मान रही है और पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। ऐसे में दतिया का उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाला मुकाबला बन सकता है।
फिलहाल भाजपा ने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। नरोत्तम मिश्रा सबसे चर्चित और मजबूत दावेदारों में जरूर हैं, लेकिन दामोदर यादव फैक्टर, स्थानीय सामाजिक समीकरण और हारे हुए प्रत्याशी को दोबारा टिकट देने को लेकर पार्टी की रणनीति अंतिम फैसले को दिलचस्प बना सकती है।
उल्लेखनीय है कि भारत निर्वाचन आयोग ने विगत दिवस दतिया विधानसभा क्रमांक 22 के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही पूरे जिले में तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई।

उपचुनाव की घोषणा के बाद जिले का सियासी पारा चढ़ गया है। सभी दलों के संभावित उम्मीदवारों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

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