प्रवीण दुबे
दतिया उपचुनाव की करारी हार के बाद भाजपा में बढ़ा अंतर्द्वंद्व, मुख्यमंत्री आवास पर मंथन, जांच समिति के गठन पर भी उठे सवाल
भोपाल/दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर अंतर्द्वंद्व खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है।
भीतरघात के आरोपों और कथित सबूतों को लेकर पार्टी के अंदर हलचल तेज है। हालात अधिक न बिगड़ें, इसके मद्देनजर प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है।
वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को अपने आवास पर समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें दतिया उपचुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी प्रमुख नेताओं को तलब किया गया।
सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान भीतरघात से जुड़े कई कथित सबूत प्रस्तुत किए गए। बैठक में कुछ पार्षदों, जिलाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
सूत्रों का यहां तक दावा है कि चुनावी हार के लिए पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भी सीधे तौर पर निशाने पर रखा गया। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बैठक समाप्त होने के बाद बाहर निकले नेताओं ने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। दतिया उपचुनाव से जुड़े अधिकांश नेता बिना कोई प्रतिक्रिया दिए चुपचाप वहां से रवाना हो गए, जिससे राजनीतिक चर्चाओं का दौर और तेज हो गया।
वहीं, नाम न छापने की शर्त पर कुछ भाजपा नेताओं ने दावा किया कि पार्टी की हार और भीतरघात से जुड़े पर्याप्त तथ्य एवं प्रमाण सामने आने के बावजूद संगठन कार्रवाई को टालने का प्रयास कर रहा है।
उनका आरोप है कि इसी उद्देश्य से मामले को फिलहाल जांच समिति के हवाले कर दिया गया है।
दूसरी ओर, भाजपा की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने भी हार के बाद आत्ममंथन की आवश्यकता पर जोर दिया है।
राजनीतिक जानकार उनके इस बयान को दतिया उपचुनाव के दौरान पार्टी लाइन से इतर हुई गतिविधियों की ओर संकेत के रूप में देख रहे हैं।
उधर प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी हार पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हार तो हार है और इस हार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” उनके इस बयान को भी पार्टी के भीतर गंभीर समीक्षा की आवश्यकता से जोड़कर देखा जा रहा है।
दतिया उपचुनाव के परिणाम आए 24 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन भाजपा नेतृत्व की ओर से अब तक कोई बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सामने नहीं आई है। पार्टी से जुड़े कई कार्यकर्ता और नेता इसे प्रदेश नेतृत्व की कमजोरी के रूप में देख रहे हैं।
उनका कहना है कि जिस तरह कांग्रेस ने कथित भीतरघात के मामले में राजेंद्र भारती के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की, उसी प्रकार भाजपा भी प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माने जा रहे नेताओं को कम से कम कारण बताओ नोटिस जारी कर सकती थी।
फिलहाल सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट और उसके बाद संगठन द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस हार से क्या सबक लेती है और भीतरघात के आरोपों पर क्या ठोस निर्णय करती है।