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	<title>त्वरित टिप्पणी &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Sun, 29 Mar 2026 12:51:14 +0000</lastBuildDate>
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		<title>जिस सोन चिरैया के नाम पर घाटीगांव से करेरा तक फूंक डाले लाखों गुजरात में उसे बचाकर कर दिया कमाल  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 12:42:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कार्टून]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[त्वरित टिप्पणी]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे जिस ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी सोन चिरैया  &#8216;घोड़ाड पक्षी&#8217; को अस्सी नब्बे के दशक में ग्वालियर के करेरा से घाटीगांव तक बनाए गए अभ्यारण में लाखो करोड़ों फूकने के बाद भी मध्यप्रदेश की नौकरशाही  बचा नहीं सकी उसे बचाने के लिए एक विशेष योजना के साथ गुजरात सरकार ने सफलता प्राप्त की है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="px-1 storyContent flex flex-col svelte-1ael1cx">
<p style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</p>
<p>जिस ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी सोन चिरैया  &#8216;घोड़ाड पक्षी&#8217; को अस्सी नब्बे के दशक में ग्वालियर के करेरा से घाटीगांव तक बनाए गए अभ्यारण में लाखो करोड़ों फूकने के बाद भी मध्यप्रदेश की नौकरशाही  बचा नहीं सकी उसे बचाने के लिए एक विशेष योजना के साथ गुजरात सरकार ने सफलता प्राप्त की है। यहां कच्छ के अब्दासा में 10 साल बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी सोन चिरैया  &#8216;घोड़ाड पक्षी&#8217; का चूजा पैदा हुआ है। यह वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ा गर्व का पल है। क्योंकि कच्छ में घोड़ाड पक्षियों की आबादी में नर पक्षियों की कमी थी, दरअसल मादा पक्षी जो अंडे दे रही थीं, वे निषेचित (Fertilized) नहीं हो पा रहे थे। इस चुनौती से निपटने के लिए, एक खास संरक्षण प्लान बनाया गया और तब जाकर अंडे को बचाया जा सका, संरक्षण के दौरान स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बन गई थी। आखिरकार 19 घंटे सड़क यात्रा करने के बाद अंडे को कच्छ पहुंचाया गया, जिसके बाद स्वस्थ चूजा पैदा हुआ। ये पूरा प्रोसेस बहुत उत्साहित कर देने वाला था।</p>
</div>
<div class="px-1 storyContent flex flex-col svelte-1ael1cx">
<p>वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि गुजरात और राजस्थान के वन विभाग, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के मिले-जुले प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई। मंत्री ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में वन विभाग की तारीफ की। उन्होंने सभी अधिकारियों और टीम के सदस्यों को बधाई दी।</p>
<div class="px-1 storyContent flex flex-col svelte-1ael1cx">
<h2>अंडे को बचाने के लिए अपनाई &#8216;जंपस्टार्ट अप्रोच&#8217;, ऐसे हुआ चमत्कार</h2>
</div>
<div class="px-1 storyContent flex flex-col svelte-1ael1cx">
<p>मंत्री ने बताया कि यह सफलता ‘जंपस्टार्ट अप्रोच’ नाम की आधुनिक संरक्षण मेथड (Modern Conservation Methods) से संभव हुई। कच्छ में घोड़ाड पक्षियों की आबादी में नरों की कमी थी, इसलिए मादाएं जो अंडे दे रही थीं वे निषेचित (Fertilized) नहीं हो पा रहे थे। इस समस्या को हल करने के लिए राजस्थान के प्रजनन केंद्र से एक निषेचित अंडा लाया गया। इसके बाद 22 मार्च को पोर्टेबल इनक्यूबेटर में 19 घंटे की सड़क यात्रा के बाद यह दूसरा अंडा कच्छ पहुंचाया गया। फिर मां मादा घोड़ाड के घोंसले में अनिषेचित अंडे को हटाकर निषेचित अंडा रख दिया गया। मादा ने खुद इसे सेता और 26 मार्च को एक स्वस्थ चूजा पैदा हुआ।</p>
</div>
<div class="px-1 storyContent flex flex-col svelte-1ael1cx">
<p>यह वाकई में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता है। इस प्रक्रिया को &#8216;क्रॉस-फॉस्टरिंग&#8217; (Cross-fostering) कहा जाता है, जहां वैज्ञानिक रूप से तैयार किए गए निषेचित अंडे (Fertilized egg) को जंगली पक्षी के घोंसले में रखा जाता है।</p>
<div class="px-1 storyContent flex flex-col svelte-1ael1cx">
<h2>जंपस्टार्ट अप्रोच&#8217; मेथड भी समझे..</h2>
</div>
<div class="px-1 storyContent flex flex-col svelte-1ael1cx">
<p>&#8216;जंपस्टार्ट अप्रोच&#8217;  एक तात्पर्य प्रक्रिया या योजना को तेजी से शुरू करने, उसमें तत्काल सुधार या परिणाम प्राप्त करने की एक रणनीतिक विधि है। वन्यजीव संरक्षण (जैसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) में, यह एक प्रजाति को बचाने के लिए कृत्रिम प्रजनन या अंडों के स्थानांतरण जैसी त्वरित और आधुनिक तकनीकों का उपयोग है। इस मेथड से लुप्त होती प्रजाति को बचाने की कोशिश की जा सकती है।</p>
<div class="px-1 storyContent flex flex-col svelte-1ael1cx">
<h2>प्रोजेक्ट GIB की सफल यात्रा</h2>
</div>
<div class="px-1 storyContent flex flex-col svelte-1ael1cx">
<p>2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत 2016 में ‘प्रोजेक्ट GIB’ शुरू किया गया था। राजस्थान के सैम और रामदेवरा में बने प्रजनन केंद्रों में अब घोड़ाड पक्षियों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी एक्स पर इस खबर को शेयर करते हुए अपनी खुशी जताई। उन्होंने गुजरात, राजस्थान और WII के संयुक्त प्रयासों की सराहना की। फिलहाल फील्ड मॉनिटरिंग टीम मादा घोड़ाड और उसके चूजे पर लगातार नजर रख रही है। अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि यह चूजा सुरक्षित रहेगा और भविष्य में कच्छ की घोड़ाड आबादी बढ़ाने में मदद करेगा। यह उपलब्धि न सिर्फ वैज्ञानिकों और वनकर्मियों के लिए गर्व की बात है, बल्कि भारत की वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी बचाने की मजबूत ताकत को भी दिखाती है।</p>
</div>
<div dir="auto"><strong>इस सुंदर चिड़िया ने  90 के पूर्व घाटीगांव करेरा आदि के पथरीले जंगलों को अपना घर बना रखा </strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">उल्लेखनीय है कि सोन चिरैया  अर्थात ग्रेट इंडियन बस्टर्ड  एक बहुत सुंदर चिड़िया है और इस सुंदर चिड़िया ने  90 के पूर्व घाटीगांव करेरा आदि के पथरीले जंगलों को अपना घर बना रखा था चूंकि यह लुप्तप्राय दुर्लभ पक्षी की श्रेणी में आता है अतः इसके संरक्षण हेतु मध्यप्रदेश के इस इलाके में 1981 में“सौन चिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)  अभयारण्य की स्थापना की गई थी जब यहाँ सौन चिरैया देखी जा रही थी।</div>
<div dir="auto">अभयारण्य के बनते ही यहां तैनात सरकारी अमले की बल्ले बल्ले हो गई सौन चिरैया के नाम पर लाखों के काजू किशमिश उड़ाये जाने लगे सौन चिरैया के संरक्षण पर किसी ने ध्यान नहीं दिया परिणाम यह हुआ अधिकारियों,भू माफियाओ,खदान माफियाओं की आवाजाही के कारण सौन चिरैया  यहां से पलायन कर गई बाद में इस सौन चिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)  अभयारण्य को समाप्त घोषित कर दिया गया। हालांकि कई पक्षी विशेषज्ञ इसके यहां होने का दावा करते रहे हैं।</div>
</div>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवामय हुआ बिहार, बांटने वालों के गाल पर सनातन विजय का करारा तमाचा है यह जीत</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%86-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Nov 2025 07:19:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[त्वरित टिप्पणी]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[त्वरित टिप्पणी:प्रवीण दुबे &#160; बिहार के चुनाव परिणाम उन भारत विरोधी शक्तियों के मुंह पर करारा तमाचा कहा जा सकता है जो भारत में हिन्दू वोटों को बांटकर सत्ता हथियाने के षड्यंत्र में लगे हैं,बिहार के चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि हिन्दू वोट जाति,भाषा, वर्ग के आधार पर बटने वाला नहीं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">त्वरित टिप्पणी:प्रवीण दुबे</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बिहार के चुनाव परिणाम उन भारत विरोधी शक्तियों के मुंह पर करारा तमाचा कहा जा सकता है जो भारत में हिन्दू वोटों को बांटकर सत्ता हथियाने के षड्यंत्र में लगे हैं,बिहार के चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि हिन्दू वोट जाति,भाषा, वर्ग के आधार पर बटने वाला नहीं है और और पूरा देश अब इस बात को अच्छी तरह समझ चुका है कि सनातन धर्म में सभी को समान अधिकार हैं केवल देश को तोड़ने और बाँटने वाली शक्तियां ऊंच नीच अगड़ा पिछड़ा जाति वर्ग आरक्षण आदि के नाम पर देश को तोड़कर उसका राजनितिक लाभ उठाना चाहती हैं। इन चुनाव परिणामों से बिहार की जनता ने अपने पडोसी राज्य के भगवाधारी मुख्यमंत्री के &#8220;बंटोगे तो कटोगे&#8221; के आव्हान पर जैसे पूरी तरह से अमल करके बहुत बड़ा संदेश दिया है। लिखने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए कि देश के दो प्रमुख और सबसे बड़े राज्यों उत्तरप्रदेश और बिहार से चली सनातन एकता की यह लहर आगे जाकर पूरे देश में बहुत भीषण आंधी के रूप में तब्दील होती दिखाई दे रही है। एक ऐसे राज्य के चुनावों में जहां कई दलों के बीच जबरदस्त वैचारिक मतभिन्नता के बीच कई कोणीय मुकाबला था वोटर ने बिना बंटे NDA को स्पष्ट ही नहीं प्रचंड बहुमत देकर बहुत सारे संदेश दिए हैं। सबसे बड़ा संदेश तो इस बात का है कि बिहार के लोग अब बाहरी ताकतों को सहन करने वाले नहीं हैं वोटर लिस्ट से बांग्लादेशी घुसपैठियों सहित फर्जी वोटरों के शुद्धिकरण अभियान को उसने अपना पूर्ण समर्थन दिया, चुनाव परिणामों ने बिहार की जनता की विकास पसंद सोच को भी व्यक्त किया है उसने लालटेन युग की समाप्ति करके बता दिया कि बिहार अब विकास के रास्ते पर बहुत ऊँची छलांग लगाने को तैयार है।बिहार चुनाव में अब तक सभी 243 सीटों पर रुझान सामने आए हैं. 11.30 बजे तक के अपडेट्स के अनुसार, महागठबंधन 50 सीटों पर सिमटता दिख रहा है, जो पिछले चुनाव के मुकाबले 64 कम है. जबकि एनडीए को 188 सीटों पर बढ़त के साथ सुनामी की ओर बढ़ रही है. सीटों के हिसाब से बीजेपी 84 सीटों और जदयू 73 सीटों पर आगे है. ऐसे में बीजेपी और जदयू में ही सबसे बड़ी पार्टी बनने की रेस चल रही है. पिछले चुनाव में बीजेपी और राजद के बीच सबसे बड़ी पार्टी बनने की रेस थी. राजद 74 सीटों के साथ सिर्फ एक सीट के अंतर से सबसे बड़ा दल बनी थी. बीजेपी दूसरे नंबर पर रही थी. राजद इस बार सिर्फ 36 सीटों पर आगे है.<br />
विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के तहत भाजपा और जदयू ने 101-101 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा।वहीं, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) ने 6-6 सीटों पर अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे थे।बिहार विधानसभा परिणाम की कुछ ऐसी बातें भी हैं जिनने बहुतों को आश्चर्यचकित भी किया है सबसे बड़ी बात तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ होना है चुनाव से पहले बड़बोली बातें कर रहे राहुल गांधी को बिहारियों ने जैसे पिक्चर से ही गायब कर दिया है,वामपंथी दलों का भी सूपड़ा साफ हो गया है कई बाहुबली और नामचीन चेहरे जमीदोज हो गए इन सबके बीच चिराग पासवान की पार्टी की बम्पर सफलता के चलते वे बड़े नेता के रूप में उभरे हैं चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि उनका पिछले चुनावों में स्ट्राइक रेट सौ फीसदी रहा है और वे इसे सच करते दिख रहे हैं खैर इन सबके बीच दिल्ली भाजपा मुख्यालय से ढोल नगाड़ों के साथ रसगुल्ले और लड्डू की महक आना शुरू हो गई है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नई भाजपा में कार्यकारिणी की घोषणा एक साहसपूर्ण काम</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a3%e0%a5%80/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Oct 2025 14:05:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[त्वरित टिप्पणी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[भाजपा त्वरित टिप्पणी]]></category>
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					<description><![CDATA[त्वरित टिप्पणी :प्रवीण दुबे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अंततः अपनी नई टीम का ऐलान कर ही दिया, नई भाजपा के समय में रिकॉर्ड समय में नई कार्यकारिणी घोषित करना बेहद चुनौतीपूर्ण और साहस भरा कार्य कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए ऐसा इसलिए क्यों कि नई भाजपा अब न [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">त्वरित टिप्पणी :प्रवीण दुबे</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अंततः अपनी नई टीम का ऐलान कर ही दिया, नई भाजपा के समय में रिकॉर्ड समय में नई कार्यकारिणी घोषित करना बेहद चुनौतीपूर्ण और साहस भरा कार्य कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए ऐसा इसलिए क्यों कि नई भाजपा अब न तो कुशाभाऊ ठाकरे वाली है और न प्यारेलाल खंडेलवाल या सुन्दरलाल पटवा अथवा कैलाश जोशी वाली मध्यप्रदेश भाजपा में अब एक दो नहीं कई ऐसे क्षत्रपों का बोलबाला है जिनके अपने अपने पट्ठों की फौज है और उन्हें प्रदेश स्तर पर सेट कराने के लिए ये किसी भी स्तर तक जाने को तैयार रहते हैं।<br />
ऐसे हालातों में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पदभार संभालने के मात्र 3 माह 21 दिन में कार्यकारिणी का गठन किया है। यह निश्चित ही काबिलेतारीफ है।<br />
यहां बताना उपयुक्त होगा कि इससे पहले विष्णुदत्त शर्मा को कार्यकारिणी बनाने में 10 माह 28 दिन, स्वर्गीय नंदकुमार सिंह चौहान को 7 माह 5 दिन, और स्वर्गीय प्रभात झा को 4 माह 6 दिन का समय लगा था। वहीं राकेश सिंह ने पूर्व कार्यकारिणी के साथ ही काम किया था।</p>
<p>हेमंत खंडेलवाल ने अपनी नई कार्यकारिणी में बड़ी चतुराई से आगे होने वाले किसी भी संभावित विद्रोह बगावत अथवा नाराजगी को टालने के लिए भी व्यवस्था की है।<br />
प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने उपाध्यक्ष और मंत्री के कुछ पद खाली रखे हैं, ताकि भविष्य में संगठनात्मक जरूरत और संतुलन के अनुसार नए चेहरों को अवसर दिया जा सके।</p>
<p>एमपी बीजेपी की पिछली कार्यकारिणी में 14 उपाध्यक्ष, 14 मंत्री और 5 महामंत्री थे</p>
<p style="text-align: center;"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-58686" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222263086.jpg" alt="" width="1079" height="1396" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222263086.jpg 1079w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222263086-232x300.jpg 232w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222263086-791x1024.jpg 791w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222263086-768x994.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222263086-325x420.jpg 325w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222263086-696x900.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222263086-1068x1382.jpg 1068w" sizes="(max-width: 1079px) 100vw, 1079px" /></p>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-58687" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222268636.jpg" alt="" width="1080" height="1401" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222268636.jpg 1080w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222268636-231x300.jpg 231w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222268636-789x1024.jpg 789w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222268636-768x996.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222268636-324x420.jpg 324w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222268636-696x903.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/FB_IMG_1761222268636-1068x1385.jpg 1068w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></p>
<p style="text-align: left;">नई कार्यकारिणी में 13 पदाधिकारी पिछली टीम से दोबारा शामिल किए गए हैं। 16 नए कार्यकर्ताओं को स्थान मिला है। नई टीम में 7 महिलाओं को भी कार्यकारिणी में प्रतिनिधित्व दिया गया है।</p>
<p>पिछली कार्यकारिणी में प्रदेश महामंत्री के तौर पर काम कर चुके पूर्व विधायक रणबीर सिंह रावत अब उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। मनीषा सिंह का प्रमोशन हुआ है बीजेपी की प्रदेश मंत्री और विधायक मनीषा सिंह अब प्रदेश उपाध्यक्ष बनाई गई हैं।</p>
<p>पहले संभागीय संगठन मंत्री रहे शैलेंद्र बरुआ बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष बने हैं। सीएम के करीबी प्रभुलाल जाटव और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए हैं।</p>
<p>कांत देव सिंह एक बार फिर से प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। मध्य प्रदेश युवा कल्याण आयोग के पूर्व अध्यक्ष निशांत खरे भी उपाध्यक्ष बने हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ग्वालियर की सड़कों के लिए  बजट की मांग को लेकर  मुख्यमंत्री से मिले सांसद भारत सिंह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 14:11:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[त्वरित टिप्पणी]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[सांसद कुशवाह ने मुख्यमंत्री का ध्यान ग्वालियर में कई जर्जर सड़कों की ओर आकृष्ट किया और आग्रह किया कि जल्द से जल्द सड़क मरम्मत और नई सड़कों के निर्माण हेतु आवश्यक बजट और दिशा-निर्देश जारी किए जाएं स्वास्थ मंत्री एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री से भी मिले सांसद कुशवाह ग्वालियर/भोपाल/ सांसद भारत सिंह कुशवाह ने भोपाल मंत्रालय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4><strong>सांसद कुशवाह ने मुख्यमंत्री का ध्यान ग्वालियर में कई जर्जर सड़कों की ओर आकृष्ट किया और आग्रह किया कि जल्द से जल्द सड़क मरम्मत और नई सड़कों के निर्माण हेतु आवश्यक बजट और दिशा-निर्देश जारी किए जाएं</strong></h4>
<h4><strong>स्वास्थ मंत्री एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री से भी मिले सांसद कुशवाह</strong></h4>
<h4>ग्वालियर/भोपाल/ सांसद भारत सिंह कुशवाह ने भोपाल मंत्रालय में जाकर सीएम डॉ मोहन यादव से मुलाकात कर ग्वालियर संसदीय क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति एवं प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने ग्वालियर की सड़कों, अधोसंरचना, उद्योग, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, एवं महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर विचार-विमर्श किया। कुशवाह ने मुख्यमंत्री का ध्यान ग्वालियर में कई जर्जर सड़कों की ओर आकृष्ट किया और आग्रह किया कि जल्द से जल्द सड़क मरम्मत और नई सड़कों के निर्माण हेतु आवश्यक बजट और दिशा-निर्देश जारी किए जाएं</h4>
<h4>। सांसद कुशवाह ने ग्वालियर में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए एम्स ग्वालियर में एम्स खोलने और अन्य सुविधाओं को लेकर भी विस्तार से चर्चा की। इसके साथ स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और नगरीय विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशवाह को आश्वस्त किया कि ग्वालियर क्षेत्र के विकास में राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और संबंधित विभागों को निर्देशित किया जाएगा कि प्राथमिकता के आधार पर इन प्रस्तावों पर कार्यवाही करें। स्वास्थ्य मंत्री से मेडीकल कॉलेज के विस्तार की मांग इस दौरान उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से भेंंट के दौरान सांसद कुशवाह ने ग्वालियर के गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबंद्ध जयारोग्य चिकित्सालय समूह के भवनों के पुनर्निर्माण एवं विस्तार कार्य को जल्द स्वीकृति करने का अनुरोध पत्र सौंपा। साथ ही सिविल अस्पताल डबरा के उन्नयन और भवन निर्माण कार्य को जल्द पूर्ण करने को लेकर भी विस्तार से चर्चा की।<br />
<strong>पीडब्ल्यूडी मंत्री से भी की मुलाकात</strong></h4>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-58412" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0016.jpg" alt="" width="1036" height="1280" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0016.jpg 1036w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0016-243x300.jpg 243w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0016-829x1024.jpg 829w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0016-768x949.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0016-340x420.jpg 340w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0016-324x400.jpg 324w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251014-WA0016-696x860.jpg 696w" sizes="(max-width: 1036px) 100vw, 1036px" /></p>
<h4>सांसद भारत सिंह कुशवाह ने लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह से आज उनके भोपाल स्थित निवास कार्यालय पर आत्मीय भेंट कर ग्वालियर संसदीय क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों को लेकर लंबी एवं चर्चा की, जिसके परिणाम जल्द ही ग्वालियर के लोगों को मिलेंगे। भोपाल स्थित मंत्रालय में प्रदेश नके उपमुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री से सौजन्य भेंट कर प्तग्वालियर_संसदीय_क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर चर्चा की।</h4>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>त्वरित टिप्पणी  :  आज की समीक्षा बैठक का सार फिलहाल नरक ही रहेगा ग्वालियर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 10:37:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[त्वरित टिप्पणी]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि आज जिसे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सर्वदलीय बैठक की संज्ञा दी उसी बैठक में ग्वालियर के भाजपा सांसद भारत सिंह कुशवाह नजर नहीं आए ग्वालियर में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक लेते केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि भाजपा के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</p>
<p>इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि आज जिसे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सर्वदलीय बैठक की संज्ञा दी उसी बैठक में ग्वालियर के भाजपा सांसद भारत सिंह कुशवाह नजर नहीं आए</p>
<div dir="auto" style="text-align: center;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-57759" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250915-140153_Facebook.jpg" alt="" width="718" height="706" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250915-140153_Facebook.jpg 718w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250915-140153_Facebook-300x295.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250915-140153_Facebook-427x420.jpg 427w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/Screenshot_20250915-140153_Facebook-696x684.jpg 696w" sizes="auto, (max-width: 718px) 100vw, 718px" /></div>
<div dir="auto"><strong>ग्वालियर में विकास कार्यों की समीक्षा <span style="text-align: center;">बैठक लेते केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया</span></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि भाजपा के भीतर  चल रहे मनमुटाव का प्रमाण सार्वजनिक रूप से दिखाई दिया है।</div>
<div dir="auto">
<div dir="auto"> कभी ये तो कभी वो इसी तरह से अनुशासन की धज्जियां उड़ाते नजर आए हैं,</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">खैर छोड़िये आज हम पार्टी में तार तार होते अनुशासन की चर्चा नहीं कर रहे हमारा फोकस तो केवल उस बैठक पर केंद्रित है जो बीते 48 घंटों से हर उस ग्वालियर वासी की जुबान पर थी जो नरक होते जा रहे ग्वालियर की अव्यस्थाओं से परेशान है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">उसकी आशा उस वक़्त से और बढ़ गई थी जब आज की  बैठक से चंद घंटे पहले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सार्वजनिक रूप से यह कहा था सड़कों की हालत तो वास्तव में बहुत खराब है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">इसके बाद हर ग्वालियर वासी के मन  में उम्मीद जगी थी कि अब आज ही युद्धस्तर पर काम के निर्देश जारी होंगे और धरातल पर आज से ही उसका असर देखने को मिलेगा</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">लेकिन अफ़सोस &#8220;दिल के अरमा आसुओं में बह गए&#8221; बैठक के बाद जो जानकारी दी गई उसके मुताबिक अभी तो मामला हरा पीला लाल पर ही अटका हुआ है,जनता नरक की दुर्दशा से बेहाल है और साहब लोगों को अब तक यह नहीं मालूम की कौन सी सड़क को दुर्दशा के किस स्तर पर रखना है, और जब इस पर कोई अखबार नवीस सड़कों पर पानी भरा होने की तरफ ध्यानाकर्षित करता है तो जवाब मिलता है मुझे मालुम है आप मसाला ढूंढ रहे हो आज में आपको मसाला नहीं दूंगा।</div>
<div dir="auto">बड़ा सवाल तो यह है कि मसाला तो सबसे पहले आप ही के मंत्री,प्रभारी मंत्री ने मुख्यमंत्री के सामने ही दे दिया था</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">आपने खुद ही बीते रोज सड़कों की दुर्दशा की सच्चाई को स्वीकार किया था। बड़ा सवाल कि क्या आज की बैठक में मौजूद नौकरशाही से नहीं पूछा जाना चाहिए था कि प्रदेश सरकार के केबिनेट मंत्री की पीढ़ा में सच्चाई है या फिर वे मुख्यमंत्री के सामने झूठ बोल रहे थे ?</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">क्या यह नहीं पूछा जाना चाहिए था कि सारी सुख सुविधाओं का उपभोग करने वाली नौकरशाही लम्बे समय से दुर्दशा झेल रही जनता की मुश्किलों के आधार पर अब तक प्राथमिकताओं का हरा पीला चार्ट क्यों तैयार नहीं कर पाई ?</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">अगर यह आज तैयार होता तो मुद्दा अगली बैठक तक नहीं टालना पड़ता और तुरंत ही सड़कों के नरक को सुधारने का काम शुरु हो जाता दुर्भाग्य नौकरशाही मस्त है, जनता त्रस्त है और आप मसाला देना नहीं चाहते।</div>
<div dir="auto">उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों  प्रद्युमन सिंह तोमर और तुलसी सिलावट की शिकायत के बाद अब आज केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया विकास कार्यों की समीक्षा बैठक ले रहे थे बैठक में</div>
<div dir="auto">ग्वालियर जिले में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा प्रस्तावित थी समीक्षा बैठक में केन्द्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया</div>
<div dir="auto">
<div dir="auto">
<div dir="auto">
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<div dir="auto">
<div dir="auto">  मंत्रीगण, प्रभारी मंत्री महापौर सांसद, विधायकगण, सभापति सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">पिछले दिनों  कैबिनेट की भोपाल में आयोजित बैठक के बाद मुख्यमंत्री के सामने ग्वालियर की दुर्दशा पर शिकायत कर चुके  मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर और इसपर सहमति जता चुके प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट  बाद आज की बैठक पर सबकी निगाह थी।</div>
</div>
</div>
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<div></div>
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<div dir="auto">
<p>&nbsp;</p>
</div>
</div>
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<div dir="auto"></div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>त्वरित टिप्पणी  :  “क्रिकेट का बहिष्कार  खेल से परे राष्ट्रहित का प्रश्न”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Sep 2025 07:40:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[खेल]]></category>
		<category><![CDATA[त्वरित टिप्पणी]]></category>
		<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[मयंक चतुर्वेदी एशिया कप 2025 के छठे मुकाबले में भारत और पाकिस्तान के बीच आज यानी 14 सितंबर (रविवार) को महामुकाबला होने वाला है। इस मैच की शुरुआत आज रात 8 बजे से होगी, जो दुबई के दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। किंतु भारत में अधिकांश जन भावनाएं इस मैच के विरोध में हैं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">मयंक चतुर्वेदी</p>
<p>एशिया कप 2025 के छठे मुकाबले में भारत और पाकिस्तान के बीच आज यानी 14 सितंबर (रविवार) को महामुकाबला होने वाला है। इस मैच की शुरुआत आज रात 8 बजे से होगी, जो दुबई के दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। किंतु भारत में अधिकांश जन भावनाएं इस मैच के विरोध में हैं । क्‍योंकि भारत में क्रिकेट केवल खेल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और सामूहिक चेतना का प्रतीक है।</p>
<p>यही कारण है कि जब किसी विवादित परिस्थिति में भारत-पाकिस्तान मैच आयोजित किया जाता है, तो यह महज़ मनोरंजन का आयोजन नहीं रह जाता, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और नैतिक प्रश्नों का केंद्र बन जाता है। इसीलिए ही आज देश के अधिकांश नगरों में इस मैच को लेकर विरोध हो रहा है, आम जनमानस बीसीसीआई को कोस रहा है और यह मांग कर रहा है कि भारतीय क्रिकेट टीम बहिष्कार कर जनता के साथ खड़ी हो। इस परिस्थिति को गहराई से समझने के लिए हमें सामाजिक, ऐतिहासिक और वर्तमान संदर्भों को जोड़कर देखना होगा।</p>
<p>क्रिकेट भारतीय जनमानस में भावनाओं का प्रतीक है। समाजशास्त्री पियरे बोरड्यू के अनुसार, खेल &#8220;सामाजिक पूंजी&#8221; का निर्माण करते हैं, अर्थात वे सामूहिक मूल्यों और पहचान को गढ़ते हैं। यही कारण है कि भारत-पाक मैच अक्सर महज़ खेल न रहकर राजनीतिक संबंधों और राष्ट्रीय भावनाओं का आईना बन जाता है। जनता जब किसी मैच का विरोध करती है, तो यह संकेत है कि यह आयोजन उन्हें उनके राष्ट्रीय स्वाभिमान के विपरीत प्रतीत हो रहा है।</p>
<p>बीसीसीआई की भूमिका यहाँ सबसे अधिक आलोचना के घेरे में है। Journal of Sport &amp; Social Issues (2018) में यह कहा गया है कि &#8220;खेल संस्थाएँ तभी वैधता बनाए रख पाती हैं, जब वे जनभावनाओं और राष्ट्रीय परिस्थितियों से सामंजस्य स्थापित करती हैं।&#8221; केवल आर्थिक हित और प्रसारण अधिकारों पर आधारित निर्णय लेना, और जनता की असहमति की अनदेखी करना, बीसीसीआई की सामाजिक वैधता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।</p>
<p>हाल की घटनाएँ इस आलोचना को और सशक्त बनाती हैं। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए, जिनमें उत्तर प्रदेश के शभम द्विवेदी भी शामिल थे। उनकी पत्नी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि भारत-पाकिस्तान मैच खेलना उन बलिदानों का अपमान है। इसी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ चलाकर सैन्य कार्रवाई की, किंतु इसके बावजूद पाकिस्तान से क्रिकेट खेलना आम जनता को असंवेदनशील निर्णय लगता है। महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) ने ‘सिंदूर रक्षा आंदोलन’ की घोषणा की, जिसमें महिलाओं से कहा गया कि वे प्रधानमंत्री को सिंदूर भेजें, ताकि उन्हें याद दिलाया जा सके कि पहलगाम हमले में कितनी महिलाओं का सिंदूर मिट गया।</p>
<p>दिल्ली में आप ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि क्लबों, बार और रेस्तरांओं में इस मैच का प्रसारण रोका जाएगा। यहां तक कि आईपीएल टीम पंजाब किंग्स ने भी सोशल मीडिया पर पाकिस्तान का नाम लिए बिना ही पोस्ट किया, जो सांकेतिक विरोध का उदाहरण है।</p>
<p>एतिहासिक नजरिए से भी देखें तो खेलों का बहिष्कार राष्ट्रीय संदेश देने का प्रभावी माध्यम रहा है। 1964 टोक्यो ओलंपिक में दक्षिण अफ्रीका को रंगभेद की नीति के कारण निष्कासित किया गया। 1980 मॉस्को ओलंपिक में अमेरिका और सहयोगी देशों ने सोवियत संघ के अफगानिस्तान आक्रमण का विरोध करते हुए भाग नहीं लिया। 1996 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने श्रीलंका में आतंकी घटनाओं के चलते अपने मैच खेलने से इनकार किया। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि खेल कभी भी शून्य-राजनीतिक नहीं होते, बल्कि अक्सर नैतिक-राजनीतिक हस्तक्षेप के मंच बनते हैं।</p>
<p>आज की स्थिति में बहिष्कार के संभावित परिणामों को भी ध्यान में रखना होगा। आर्थिक दृष्टि से बीसीसीआई और प्रसारकों को हानि होगी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है, और कूटनीतिक तनाव भी बढ़ सकता है। परंतु दूसरी ओर, जनता की भावनाओं के साथ खड़ा होना खिलाड़ियों की नैतिक प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान को और ऊँचाई देता, जो उन्‍होंने अवसर रहने और समय होने के बाद भी नहीं किया । महात्मा गांधी के &#8220;असहयोग&#8221; सिद्धांत के अनुरूप, जब व्यवस्था अन्यायपूर्ण या असंवेदनशील प्रतीत हो, तो असहयोग स्वयं में एक नैतिक संघर्ष का रूप ले लेता है।</p>
<p>वास्‍तव में यह बहस केवल एक मैच तक सीमित नहीं है। विचार करें, राजनीतिक स्‍थ‍ितियों में ये मैच यदि कांग्रेस के शासन के दौरान होता, तब क्‍या भाजपा जो सत्‍ता में है, उसकी यही प्रतिक्रिया होती जो अभी है? या उसकी राजनीतिक इच्‍छा शक्‍ति कुछ ओर कहती ?</p>
<p>यहां प्रश्न इस बात का भी है कि क्या भारत में खेल संस्थाएँ और खिलाड़ी जनता की भावनाओं तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हैं, या आर्थिक व राजनीतिक दबावों को। जब देशभर में विरोध की आवाज़ें गूंज रही हों, पीड़ित परिवार अपनी पीड़ा को सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर रहे हों, और राजनीतिक दल सड़कों पर आंदोलन कर रहे हों, तब तो कम से कम बीसीसीआई को समझना चाहिए, सिर्फ उसे ही क्‍यों प्रत्‍येक भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्‍य को यह बात समझनी चाहिए थी कि बहिष्कार केवल खेल का त्याग नहीं, राष्ट्र के जनमानस के साथ खड़े होने की यह हमारी निर्णायक भूमिका है ।</p>
<p>वस्‍तुत: यह कदम न केवल भारत के खेल इतिहास में एक नया अध्याय लिखता, बल्कि यह संदेश भी देता कि जब खेल और राष्ट्रहित आमने-सामने हों, तो राष्ट्रहित ही सर्वोच्च होता है और यही आगे भी होना चाहिए! किंतु दुख वह अवसर हमने खो दिया !!!</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ग्वालियर प्रेस क्लब की अनुकरणीय पहल: पत्रकार स्व.रामकिशन कटारे के परिजनों को 50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Feb 2025 12:51:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[त्वरित टिप्पणी]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर/ यूं तो प्रदेश में कई प्रेस क्लब और पत्रकार संगठन है लेकिन ग्वालियर प्रेस क्लब की अलग ही पहचान है ग्वालियर प्रेस क्लब हमेशा पत्रकारों के हितों में कार्य करते हुए पत्रकार साथियों के सुख दुख में शामिल रहता है। अभी हाल ही में ही ग्वालियर के दो पत्रकारों के आकस्मिक निधन पर ग्वालियर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर/ यूं तो प्रदेश में कई प्रेस क्लब और पत्रकार संगठन है लेकिन ग्वालियर प्रेस क्लब की अलग ही पहचान है ग्वालियर प्रेस क्लब हमेशा पत्रकारों के हितों में कार्य करते हुए पत्रकार साथियों के सुख दुख में शामिल रहता है। अभी हाल ही में ही ग्वालियर के दो पत्रकारों के आकस्मिक निधन पर ग्वालियर प्रेस क्लब ने शोक सभा आयोजित कर दिग्वंत पत्रकारों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये पत्रकार स्व. रामकिशन कटारे के निधन पर उनके परिजनों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान किये जाने की घोषणा की। साथ ही शासन से आर्थिक मदद किये जाने की मांग की। बीते सोमवार को ग्वालियर प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेश शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पत्रकार स्व. रामकिशन कटारे एवं वेंकटेश भार्गव के आकस्मिक निधन पर जनसंपर्क द्वारा मिलने वाली आर्थिक सहायता का प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री से मिलने का निर्णय लिया गया। साथ ही पत्रकार द्वय के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए परम्परागत हर वर्ष मनाये जाने वाले होली मिलन समारोह को इस वर्ष नहीं मनाये जाने का निर्णय लिया गया। आज बुधवार को पत्रकार स्व. रामकिशन कटारे के निवास पर पहुंचकर ग्वालियर प्रेस क्बल के अध्यक्ष राजेश शर्मा के नेतृत्व में स्व. कटारे की पुत्री दीपिका कटारे को 50 हजार रुपये का चेक भेंट कर आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इस मौके पर ग्वालियर प्रेस क्लब सचिव सुरेश शर्मा, मध्य प्रदेश पत्रकार संघ के संभागीय अध्यक्ष बृजमोहन शर्मा, सोशल मीडिया प्रकोष्ट के अध्यक्ष प्रवीण दुबे,वरिष्ठ पत्रकार सुरेश दंडोतिया ,राजीव अग्रवाल, हरीश चन्द्रा, दिनेश राव, जयेश कुमार,यादवेन्द्र कटारे,अभिषेक शर्मा, फोटो जर्नलिस्ट अध्यक्ष राजेश जयसवाल, रवि उपाध्याय , मुकेश बाथम, सहित अन्य पत्रकार उपस्थित थे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>देश की राजधानी में भगवा बहार, धड़ाम हुए केजरीवाल</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%b9/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Feb 2025 08:01:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[त्वरित टिप्पणी]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
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					<description><![CDATA[                                     प्रवीण दुबे     देश की राजधानी दिल्ली में सत्ता परिवर्तन ने एकबार पुनः साबित कर दिया है कि देशभर की जनता पर प्रधानमंत्री मोदी का जादू सर चढ़कर बोल रहा है हाल ही में महाराष्ट्र हरियाणा उत्तरप्रदेश [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>                                     प्रवीण दुबे </strong></p>
<p><strong>   </strong>देश की राजधानी दिल्ली में सत्ता परिवर्तन ने एकबार पुनः साबित कर दिया है कि देशभर की जनता पर प्रधानमंत्री मोदी का जादू सर चढ़कर बोल रहा है हाल ही में महाराष्ट्र हरियाणा उत्तरप्रदेश और अब दिल्ली के चुनावों में मिली जीत ने इस बात कों पूरी तरह प्रमाणित कर दिया है। दिल्ली चुनाव परिणामों को लेकर खबर लिखे जाने तक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली की लगभग 10 से अधिक मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर भी भगवा मैजिक ने अपना प्रभाव दिखाया है इसमें मुस्तफा बाद, बाबरपुर जैसी सीटें भी शामिल हैं। साफ है सबका साथ सबका विकास की बात पर मुस्लिमों का विश्वास बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस जीत का यह भी निहितार्थ है कि पूरी दिल्ली की जनता केजरीवाल के दस वर्षों से लगातार जारी भ्रष्टाचार, झूठ और निम्न स्तरीय आचरण से बुरी तरह से परेशान हो चुकी थी और उसने केजरिवावाल द्वारा एक और मोहलत दिए जाने की बात कों पूरी तरह से ठुकरा दिया है। व्यवस्था परिवर्तन का यह ज़नादेश इशारा करता है कि केजरीवाल का दस वर्षीय शासनकाल या फिर उससे पूर्व के 15 वर्षों के कांग्रेसी शासन में दिल्ली की मूलभूत परेशानिया जस की तस बनी रही कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए कि देश के अन्य शहर स्मार्ट बनते चले गए जबकि देश की राजधानी की समस्यायें कम होने के बजाए विकराल होती गईं प्रदूषण, यमुना सफाई, पेयजल, यातायात, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सुरक्षा,बांग्लादेशी घुसपैठ, ड्रग्स, नशाखोरी ऐसे तमाम मुद्दे हैं जिसमें आप सरकार फिसड्डी साबित हुई है। ऐसा नहीं कि केजरीवाल को अपनी हार का अंदेशा नहीं था उन्हें अपनी संभावित हार आसन्न नजर आ गईं थी यही वजह थी उन्होंने दिल्ली की जनता से गिड़गिड़ाते हुए अपनी गलतियां सुधारने के लिए पांच वर्ष का समय मांगा था लेकिन जनता को मोदी की गारंटी पर विश्वास नजर आया और और उसने भाजपा के लिए 27 वर्षों का सूखा समाप्त कर देश की राजधानी पर भगवा परचम पर विश्वास व्यक्त किया</p>
<p>अरविंद केजरीवाल अपने विरोधियों पर कुछ भी आरोप लगाते रहे हैं. कई बार इसके चलते ही उन्हें माफी भी मांगनी पड़ी है. उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनती चली गई जिसकी बात पर कोई भरोसा नहीं होता. हद तो तब हो गई जब उन्होंने हरियाणा सरकार पर जानबूझकर जहरीला पानी भेजने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार दिल्ली में नरसंहार करना चाहती है. जिससे दिल्ली में अफरातफरी मच जाए. उन्होंने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड के इंजीनियरों ने हरियाणा का पानी बॉर्डर पर ही रोक लिया इसके कारण हजारों की जान बच गई. दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के हार्डकोर समर्थकों को भी उनका ये बयान पसंद नहीं आया. उस पर हरियाणा सीएम नायब सैनी ने दिल्ली बॉर्डर पर जाकर यमुना का पानी पीकर केजरीवाल के नरेटिव को झूठा करार दे दिया.<br />
अरविंद केजरीवाल राजनीति में आने से पहले कहा था कि वो वीवीआईपी कल्चर को खत्म करेंगे. गाड़ी, बंगला और सुरक्षा लेने की बात से भी उन्होंने इनकार किया था.पर सत्ता मिलने के बाद उन्होंने न केवल लग्जरी गाड़ियां लीं बल्कि केंद्र से जेड प्लस सुरक्षा मिलने के बावजूद पंजाब सरकार की टॉप सिक्युरिटी भी उन्होंने ली. पर मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने जो अपने लिए उन्होंने जो एक्स्ट्रा लग्जुरियस आवास बनावाया उससे उनकी छवि काफी डेंट हुई. मीडिया ने उनके आवास को शीशमहल का नाम दिया.अब आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया की शर्मनाक हार दिल्ली में सफाए से इस पार्टी के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है बीते एक दशक में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के साथ पंजाब में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के साथ राष्ट्रीय पार्टी बनने की यात्रा पूरी की थी जो अब दिल्ली की हार के बाद उसकी समाप्ति की ओर अग्रसर हो गई है।</p>
<p>समाचार लिखे जाने तक दिल्ली की 70 सीटों में भाजपा कों 47 और आप को 23 सीटें मिलने की संभावना</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>नए कमिश्नर साहब की आमद और वही रटे रटाये जुमले</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%a8%e0%a4%8f-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jan 2025 16:56:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[त्वरित टिप्पणी]]></category>
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					<description><![CDATA[त्वरित टिप्पणी :प्रवीण दुबे एक और नए कमिश्नर साहब की आमद और स्वच्छता, सीवेज सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट आदि आदि को लेकर वही रटे रटाये जुमले, शहरवासियों का दुर्भाग्य कि उनकी परेशानियां कभी खत्म नहीं हुईं, हालात कितने बदतर कि ग्वालियर की स्वच्छता और सुंदरता पर इतना सम्मोहित हुए मप्र सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">त्वरित टिप्पणी :प्रवीण दुबे</p>
<p>एक और नए कमिश्नर साहब की आमद और स्वच्छता, सीवेज सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट आदि आदि को लेकर वही रटे रटाये जुमले, शहरवासियों का दुर्भाग्य कि उनकी परेशानियां कभी खत्म नहीं हुईं, हालात कितने बदतर कि ग्वालियर की स्वच्छता और सुंदरता पर इतना सम्मोहित हुए मप्र सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को बीते दिनों तत्कालीन कमिश्नर साहब वैष्णव को कहना पड़ा था कि गांव है या ग्वालियर….क्या हाल बना रखा है शहर का….</p>
<p><iframe loading="lazy" title="नए कमिश्नर बोले ग्वालियर को स्वच्छता रेटिंग में टाप फाइव में लाएंगे" width="696" height="392" src="https://www.youtube.com/embed/irBDd5Z8gmc?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p>शहर के हालात तो फिर भी नहीं सुधरे वैष्णव साहब जरूर चलता कर दिए गए अब इसे पनिशमेंट कहा जाए या सामान्य प्रशासनिक सर्जरी थोड़ा कठिन है,</p>
<p>लेकिन वैष्णव साहब की खाली कुर्सी को नए कमिश्नर साहब संघ प्रिय ने आज विधिवत ग्रहण कर लिया</p>
<p>जैसा की हमेशा होता है अखबार नवीसों को परिचय आत्मक बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया और हमने जिसका पहले ही जिक्र किया वही बातें और दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की औपचारिकता के साथ संघ प्रिय ने काम शुरू कर दिया।</p>
<p>यहां लिखने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए की ग्वालियर के पास सबकुछ है यदि कुछ नहीं है तो वह है ईमानदारी से ग्वालियर को सुव्यवस्थित करने की लगन और जज्बे की कमी<br />
निश्चित ही यह अफ़सोसजनक है कि पिछली बार ग्वालियर देशभर में स्वच्छता सर्वेक्षण में 16वें स्थान पर आया आखिर क्यों ?</p>
<p>ग्वालियर में चोड़ी सड़कें हैं लगभग हर प्रमुख सड़क के साथ सपोर्टिंग रोड भी है परन्तु न यातायात व्यस्थित है न सड़कें घेरने वाले ठेलों और आवारा घूमते जानवरों पर कोई कार्यवाही है<br />
परिणाम वही जो मंत्री जी ने कहा यह सुंदर शहर कसबों की तरह ठेला सिटी का स्वरुप धारण कर चुका है</p>
<p>जब तक ठेले, आवारा जानवर नहीं हटाए जाएंगे न तो शहर में स्वच्छता आएगी, न ठीक प्रकार से सड़कें क्लीन व धूल रहित होंगी और बीच सड़कों पर खड़े ठेलों के कारण ही यातायात बाधित रहेगा।</p>
<p>दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्य सड़कों से लगी सपोर्टिंग रोड को अतिक्रमण मुक्त करके मुख्य सड़कों के यातायात दबाव को कम करने में इनका ठीक प्रकार इस्तेमाल किया जाए जिससे शहर मछली बाजार की जगह सुंदर स्वरुप धारण करेगा यह तभी संभव है जब सरकारी मशीनरी पूरे मन और लगन से इस काम को अंजाम दे।</p>
<p>अच्छी बात है कि ग्वालियर के नवागत नगर निगम आयुक्त संघप्रिय ने पत्रकारों के समक्ष अपनी प्राथमिकतायें गिनाकर स्पष्ट कहा कि ग्वालियर को स्वच्छता रेटिंग में टाप फाइव में लाने का उनका प्रयास रहेगा। वहीं वाटर प्लस में जो रैंकिंग पिछले वर्ष निगम को मिली थी उसको बरकरार रखने का प्रयास करेंगे।इसके साथ ही सड़कों की बेहतरी, स्ट्रीट लाइट, सीवेज व्यवस्था सुधारने के लिये उनका प्रयास रहेगा। वहीं वह नगर निगम की संपत्तिकर व अन्य करों की वसूली का जो 242 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है, उसे भी प्राप्त करने के लिये हरसंभव प्रयास करेंगे। लेकिन पत्रकारों के सामने कह देने भर से काम नहीं चलने वाला नहीं भूलना चाहिए कि ग्वालियर उसी मध्यप्रदेश का हिस्सा है जहां के दो शहर इन सभी मामलों में पूरे देश में पहले दूसरे स्थान पर हैं फिर ग्वालियर क्यों पिछड़ा है जबकि ग्वालियर का इतिहास इस बात का प्रमाण रहा है कि हम कभी पूरे देश के सबसे स्वच्छ और सुंदर शहरों में शुमार थे लेकिन आज हम बीमार हैं और इस बीमारी का ठीक उपचार आपके पास है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>जियो साइंस म्यूजियम में ग्वालियर के महान भूगर्भ  वैज्ञानिक डॉ विद्या सागर दुबे की अनदेखी, आज उपराष्ट्रपति करेंगे उदघाटन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Dec 2024 04:50:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[त्वरित टिप्पणी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=52204</guid>

					<description><![CDATA[*ग्वालियर की ऐसी प्रतिभा जिसने रेडियो एक्टिविटी से खोजी  चट्टानों की आयु* *लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी. में लहराया था  अपनी प्रतिभा का परचम * आज उप राष्ट्रपति आ रहे हैं ग्वालियर जियो साइंस म्यूजियम का उदघाटन करने  बड़ा सवाल महान भूगर्भ वैज्ञानिक डॉ विद्या सागर दुबे के नाम पर क्यों नहीं  शहर के नवनिर्मित जियो [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto">
<h3 dir="auto"><strong>*ग्वालियर की ऐसी प्रतिभा जिसने रेडियो एक्टिविटी से खोजी  चट्टानों की आयु*</strong></h3>
<h3 dir="auto"><strong style="color: var(--td_text_color, #111111);">*लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी. में लहराया था  अपनी प्रतिभा का परचम</strong></h3>
<h3><strong>* आज उप राष्ट्रपति आ रहे हैं ग्वालियर जियो साइंस म्यूजियम का उदघाटन करने </strong></h3>
</div>
<div dir="auto"></div>
<h3 dir="auto"><strong>बड़ा सवाल महान भूगर्भ वैज्ञानिक डॉ विद्या सागर दुबे के नाम पर क्यों नहीं  शहर के नवनिर्मित जियो साइंस म्यूजियम का नामकरण*</strong></h3>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto" style="text-align: center;"><strong>त्वरित टिप्पणी :रवि उपाध्याय </strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<h4 dir="auto"><strong>ग्वालियर। ग्वालियर चंबल के नाम सुनते ही सामन्यतः जहन में खनन व रेत माफियाओं का नाम आता है जबकि कोई नहीं जानता कि ग्वालियर के ही एक लाड़ले सपूत  डॉ विद्या सागर दुबे ने भूविज्ञान के क्षेत्र में ऐतिहासिक इबारत लिखी एवं जो तत्कालीन ग्वालियर राज्य के डिपार्टमेंट ऑफ जियोलॉजी एवं माइनिंग विभाग के डाइरेक्टर आज से 97 साल पहले रहे।   यही नहीं लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से  पीएचडी करने वाले  गुमनामी के अंधेरे में रहे ग्वालियर के  डॉ दुबे ने न सिर्फ   रेडियो एक्टिविटी तत्वों से   चट्टानों की आयु की खोज की बल्कि वो</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>देश के पहले प्लानिंग कमीशन के सदस्य भी थे।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>     अब चूँकि  यह बेहद खुशी की बात है कि</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>ग्वालियर के ऐतिहासिक महाराज   बाड़े की विक्टोरिया मार्केट में बने देशके पहले जियो साइंस म्युजियम का  उद्धघाटन उपराष्ट्रपति जगदीश धनगढ़ के कर कमलों द्वारा होने जा रहा है। लेकिन उतनी ही विचारणीय बात यह भी है की जिस स्थान पर यह संग्रहालय स्थापित किया गया है वहां से चंद कदमों की दूरी पर भारत के महानतम भूगर्भ वैज्ञानिक डॉक्टर विद्यासागर दुबे की कर्म स्थली है और उस म्यूजियम की स्थापना मैं इस महान वैज्ञानिक की स्मृति को जीवंतता प्रदान करने का कोई कदम  नहीं उठाया गया है।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>उल्लेखनीय है कि डॉक्टर विद्यासागर दुबे देश के महानतम भूगर्भ वैज्ञानिकों में से एक है देश में स्वतंत्रता के बाद खनन क्षेत्र सहित भूगर्भ सर्वेक्षण मैं जो विकास किया उसका बड़ा श्रेय डॉक्टर विद्यासागर दुबे को जाता है। यह अफसोस जनक है कि स्वतंत्रता के बाद अधिकांश समय देश की सत्ता पर काबिज रही कांग्रेस ने  उन तमाम वैज्ञानिकों की अनदेखी की जो कांग्रेस सरकार के चारण भाट नहीं रहे और सरकार की अनदेखी का शिकार हुए उनकी प्रतिभा और शोध कार्यों को जन सामान्य तक पहुंचाने का कार्य तत्कालीन सरकार द्वारा नहीं किया गया। जहां तक डॉक्टर विद्यासागर दुबे की बात है वो भारतीय भूगर्भ विज्ञान के क्षेत्र में वह चमकता हुआ सितारा थे जिसकी चमक से पूरा भारतीय विज्ञान जगमगा उठा था। इसे विडंबना ही कहा जाएगा की इतने महान वैज्ञानिक की स्मृति को जीवंतता प्रदान करने के लिए  हमारे देश प्रदेश की सरकारों ने कोई कदम नहीं उठाया यहां  तक की उनके जयंती और पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धा के दो फूल चढ़ाने की याद भी हमारी सरकारों को नहीं आई। इस महान वैज्ञानिक ने 7 जनवरी 1979 को हैदराबाद में  देश की सर्वोच्च वैज्ञानिक कॉन्फ्रेंस भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लेते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे । इससे 1 दिन पूर्व देश के प्रधानमंत्री मोरारजी भाई देसाई ने डॉक्टर विद्यासागर दुबे को देश के लिए उनके विशिष्ट योगदान को दृष्टिगत रखते हुए सर्वोच्च वैज्ञानिक सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया था।</strong></h4>
<h4 dir="auto"></h4>
<h4 dir="auto"><strong>कला संगीत राजनीति आदि के क्षेत्र में ग्वालियर की धरा ने तमाम ऐसे व्यक्तियों को जन्म दिया जिन्होंने पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया । इसके साथ ही विज्ञान के क्षेत्र में भी ग्वालियर से जुड़ा एक ऐसा नाम भी है जिसे देश की वैज्ञानिक बिरादरी में चमकते हुए ध्रुव तारे की संज्ञा दी जाती है यह नाम है महान भूगर्भवेत्ता व देश के सुविख्यात वैज्ञानिक डॉ विद्यासागर दुबे का । आज खनिज, भूसम्पदा व भूगर्भविज्ञान के क्षेत्र में भारत को जो उच्च स्थान प्राप्त है उसमें डॉ विद्यासागर दुबे का बहुत बड़ा योगदान रहा।</strong></h4>
<h4 dir="auto"></h4>
<h4 dir="auto"><strong>यूं तो इस महान वैज्ञानिक का जन्म उत्तरप्रदेश के ग्राम इकनोर में हुआ था लेकिन अपनी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर जीवन पर्यंत उनकी कर्मभूमि ग्वालियर रही  उन्होंने विज्ञान जगत में ग्वालियर का नाम  पूरी दुनिया में रोशन किया।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>लिखने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए की डॉ विद्यासागर दुबे का जन्म विज्ञान के लिए ही हुआ था और यह महान वैज्ञानिक जीवन पर्यन्त देश की वैज्ञानिक उन्नति के लिए कार्य करते हुए उसी भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अधिवेशन में शरीर त्याग कर विलीन हो गया जिसके लिए उन्होंने जन्म लिया था। प्रतिवर्ष जब जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में देश के  शीर्ष वैज्ञानिकों की यह संस्था अपना वार्षिक अधिवेशन आयोजित करती है तब तब डॉ विद्यासागर दुबे का व्यक्तित्व जीवंत हो उठता है।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>1979 को भारतीय विज्ञान कांग्रेस के हैदराबाद में आयोजित 66 वे अधिवेशन में तत्कालीन प्रधानमंत्री मुरारजी देसाई ने उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों व देश को दिए उनके वैज्ञानिक योगदान के लिए सम्मानित किया था उसके कुछ घण्टों के बाद ही अधिवेशन के विज्ञानमय वातावरण के बीच ही डॉ विद्यासागर दुबे ने अंतिम सांस ली ।</strong></h4>
<h4 dir="auto"></h4>
<h4 dir="auto"><strong>डॉ विद्यासागर दुबे का जीवन कई दृष्टि से हमारे लिए प्रेरणादाई कहा जा सकता है। उन्होंने इकनोर  जैसे धुर ग्रामीण क्षेत्र में जन्म लिया घनघोर यमुना के बीहड़ों से घिरे इस गांव में शिक्षा की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण वे ग्वालियर में कस्टम एक्साइज में डिप्टी कमिश्नर अपने चाचा शम्भूदयाल दुबे के यहां पढ़ने आ गए। धीरे धीरे वर्ष बीतते गए और हर कक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण करते हुए उन्होंने सन 1921 में बीएससी परीक्षा विक्टोरिया कॉलेज जो अब MLB कॉलेज कहलाता है में उच्च अंकों के साथ उत्तीर्ण की।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong> अब विद्यार्थियों अध्यापकों एवं विद्यालय में विद्यासागर का नाम एक प्रतिभाशाली छात्र का पर्याय बनकर बहुश्रुत हो गया था । उनकी मेधाविता और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए न केवल महाविद्यालय बल्कि ग्वालियर स्टेट ने उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान करने की घोषणा की।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>इसके उपरांत उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रवेश प्राप्त किया और प्रोफेसर के के माथुर के निर्देशन में सन1924 में एमएससी भूगर्भ शास्त्र की उपाधि उच्च अंकों से प्राप्त की । इसी विश्विद्यालय में उन्होंने  दो वर्ष में शोध कार्य पूर्ण कर इतिहास रच दिया उन्होंने प्रोफेसर के के माथुर के सहकार्य में काठियावाड़ गुजरात में गिरनार पर्वत विषय पर उनका प्रथम महत्वपूर्ण शोधपत्र प्रकाशित हुआ।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong> तदंतर उन्होंने काठियावाड़ और कूच की अग्निमय चट्टानों का अध्ययन प्रारम्भ किया। सन 1926 में उन्होंने इम्पीरियल कॉलेज लंदन में प्रवेश लिया उन्होंने 1927 में पश्चिमी भारत में अग्निमय क्रियाओं के संदर्भ में पावागढ़ पर्वत का विस्तृत अध्ययन विषय पर शोधप्रबंध प्रस्तुत किया जिसपर लंदन के ऑक्सफ़ोर्ड विश्विद्यालय ने आपको डॉक्टरेट की उपाधि से विभूषित किया। देश विदेश के समाचार पत्रों में यह समाचार आश्चर्य और हर्ष के साथ पढ़ा गया की भारत के एक साधारण गांव इकनोर का एक साधारण बालक अपनी मेधाविता व मौलिक शोध प्रतिभा के बल पर डॉ विद्यासागर बन गया है।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>पीएचडी की प्राप्त करने पश्चात डॉ दुबे प्रोफेसर माचे के निर्देशन में शिलाओं की रेडियो धर्मिता पर कार्य करने के लिए वियाना गए यहां से वे प्रोफेसर पानेथ के निर्देशन में कार्य करने बर्लिन गए जो तबकुछ उल्काखण्डों के हीलियम विषयक सार निर्धारण में व्यस्त थे। डॉ दुबे के मन मे विचार आया की चट्टानों के रेडियो धर्मी तथा हीलियम विषयक निर्धारित चट्टानों के पुरातत्व या निर्माण काल को इंगित कर सकता है इस प्रकार शिलाखण्डों के काल निर्धारण अर्थात आयु ज्ञात करने की एक नवीन पद्धति प्राप्त हुई। यह विधि डॉ दुबे ने प्रोफेसर होम्स की सहकार्यता से विकसित की जो समस्त सुंदर दानेदार या रवादार अग्निशिलाओं पर प्रयुक्त हुई और  न्यूनतम काल या उनकी आयु बता सकी। इस शोध की महत्वत्ता के कारण इसे सम्पूर्ण पाठय पुस्तकों में स्थान प्राप्त हुआ।तदन्तर उन्होंने इसपर यू एस ए में भी कार्य किया ।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>लंदन वियाना बर्लिन यू एस ए आदि देशों में कार्य करने के पश्चात डॉ दुबे सन 1930 में भारत वापस आ गए । ग्वालियर राज्य ने उनके समस्त अध्ययन हेतु उन्हें उदारतापूर्वक छात्रवृतियां प्रदान कीं। यहां आनेपर उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों के मद्देनजर उन्हें ग्वालियर राज्य का खनिज भूगर्भ निर्देशक नियुक्त किया गया। बाद में वे बनारस विश्यविद्यालय चले गए और यहां ग्लास टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट स्थापित करने में महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई। 1939 मैं देश में बने प्रथम प्लानिंग कमीशन का उन्हें सदस्य बनाया गया था। अपने हिंदुत्व वादी विचारों के चलते लिखे एक लेख पर उठे विवाद के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में देश में तमाम ख्यातिपूर्ण वैज्ञानिकों की  तरह वे भी कांग्रेस  की उपेक्षा पूर्ण नीति का शिकार बने।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>वे विज्ञानमय थे और उनका जीवन विज्ञान साधना के लिए ही समर्पित था वे कभी न थकने वाले व्यक्ति थे। 78 वर्ष की अवस्था में भी विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षण और अनुसंधान करने और देश विदेश पर आयोजित संगोष्ठियों सभाओ तथा विज्ञान कांग्रेस अधिवेशन में भाग लेने के लिए उत्साहपूर्वक जाते रहे।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>लश्कर दौलतगंज में अपने घर पर तो वे बहुत कम ही रह पाते थे। वे चाहे जहां हों और स्वस्थ अस्वस्थ चाहे जैसी अवस्था में क्यों न हों विज्ञान कांग्रेस अधिवेशन में सम्मिलित होने से नहीं चूकते थे । उनके आदर्श विचारों को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें रोक गया पर वे न माने और हैदराबाद में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 66 वे अधिवेशन में शामिल होने के लिए 31 दिसंबर 1978 को ग्वालियर छोड़कर चले गए  वे कहा करते थे की में सबकुछ छोड़ सकता पर विज्ञान कांग्रेस को नहीं छोड़ सकता चाहे प्राण क्यों न चले जाएं। इसबार उन्होंने ग्वालियर छोड़ा तो वह हमेशा के लिए ही छूट गया कौन जानता था की विज्ञान के लिए यह उनके जीवन की अंतिम यात्रा होगी,  7 जनवरी 1979 तक देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में विज्ञान कांग्रेस में भाग लिया। इस दौरान देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री मुरारजी देसाई  की ओर से उन्हें  देश को उनके वैज्ञानिक योगदान के लिए सम्मानित भी किया। अचानक 8 जनवरी को अचानक ह्रदय गति रुक जाने के कारण वे स्वर्ग सिधार गए पार्थिव शरीर विज्ञान कांग्रेस में ही पड़ा रहा गया। भारत भूमि के गर्भ से  अन्वेषित अनेक खाने भूगर्भ पदार्थ खनिज तथा उनके द्वारा लिखी तमाम पुस्तकें  व शोध पत्र  देश विदेश में उनके अनुसन्धान इस महान वैज्ञानिक के स्मृति चिन्ह हैं।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>डॉ विद्यासागर के स्मरण आते ही एक महान प्रतिभाशाली वैज्ञानिक और प्रेरक व्यक्तित्व नजरों के सामने उतर आता है और इस प्रतिभाशाली व्यक्तित्व सम्पन दिव्य पुरूष की तस्वीर को देखकर मेरे हाथ इनके चरणों की ओर अनायास बढ़ जाते हैं माथा अपने आप श्रध्दा सहित झुक जाता है।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong> आजादी के बाद देश में कुछ खास वर्ग से जुड़े वैज्ञानिकों को ही सम्मान व पुरूस्कारों से महिमा मंडित किया गया और डॉ विद्यासागर दुबे जैसे तमाम प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों की अनदेखी होती रही। आज देश का माहौल बदला है विविध क्षेत्रों की ऐसी तमाम प्रतिभाशाली गुमनाम हस्तियों को  जिन्होंने इस देश की उन्नति के लिए बड़ा योगदान दिया खोजकर उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। आशा है ऐसे समय वैज्ञानिक क्षेत्र के महान व्यक्तित्व की स्मृति को संजोए रखने की ओर भी हमारी सरकारों का ध्यान अवश्य जाएगा जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी प्रेरणा ले सकेगी।</strong></h4>
<h4 dir="auto"><strong>डॉ विद्यासागर दुबे को सादर नमन।</strong></h4>
]]></content:encoded>
					
		
		
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