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	<title>विश्लेषण &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Fri, 09 Aug 2024 16:25:24 +0000</lastBuildDate>
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		<title>आखिर कौन हैं कांग्रेस के भीतर छुपे आस्तीन के सांप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Aug 2024 16:24:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[विश्लेषण]]></category>
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					<description><![CDATA[मध्यप्रदेश की सत्ता पर दस साल काबिज रहे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव आखिर अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच आस्तीन के सांपों से सावधान रहने की नसीहत क्यों दे रहे हैं ? सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर दिग्विजय सिंह की नजरों में पार्टी के वह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मध्यप्रदेश की सत्ता पर दस साल काबिज रहे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव आखिर अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच आस्तीन के सांपों से सावधान रहने की नसीहत क्यों दे रहे हैं ? सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर दिग्विजय सिंह की नजरों में पार्टी के वह कौन लोग हैं जिन्हें दिग्गी राजा आस्तीन के सांप के रूप में देखते हैं।</p>
<p>पहले आपको यह समझना होगा कि आस्तीन के सांप का जिक्र कब और कैसे आया दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचे। यहां उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आस्तीन के सांपों से सचेत रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा- आज आदिवासी दिवस और नागपंचमी है। नागपंचमी पर नाग की पूजा करें, लेकिन आस्तीन के सांपों से सचेत रहें।</p>
<p>दिग्विजय सिंह के अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच आस्तीन के सांपों से सावधान रहने की नसीहत के बाद पार्टी के भीतर चर्चाओं का बाजार सरगर्म है दिग्गी राजा के इस बयान के तमाम निहितार्थ लगाए जा रहे हैं बहुत सारे नेताओं कार्यकर्ताओं का मानना है कि दिग्विजय सिंह का सीधा निशाना ऐसे नेताओं पर है जो जुड़े तो कांग्रेस से हैं लेकिन कहीं न कहीं भाजपा के संपर्क में रहे हैं । ऐसे तमाम नेताओं ने हाल ही में  चुनाव के समय कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।</p>
<p>उधर बहुत सारे लोग दिग्विजय सिंह के आज के बयान को सीधे सीधे कमलनाथ पर निशाना मानकर चल रहे हैं ऐसा इसलिए क्यों कि चुनाव के पहले कमलनाथ के भाजपा में जाने की पूरी तैयारी हो चुकी थी लेकिन ऐन समय पर सिक्ख दंगों में उनकी लिप्तता के कारण मामला पलट गया।</p>
<p>उधर दिग्विजय सिंह के आज के बयान के बाद यह बात एकबार फिर खुलकर सामने आ गई है कि चुनाव में मिली करारी हार के बावजूद कांग्रेस के भीतर घात प्रतिघात का खेल समाप्त नहीं हुआ है और अंतर्कलह चरम पर है।</p>
<p>गौरतलब है कि ग्वालियर आए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को शुक्रवार को उनको भिंड के लहार में पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की कोठी को तोड़ने के विरोध में किए जा रहे धरना-प्रदर्शन में शामिल होना था। पहले वे भोपाल से ग्वालियर आए, यहां उन्होंने लहार रवाना होने से पूर्व सिटी सेंटर होटल सेंट्रल पार्क में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। राज्य सभा सदस्य दिग्विजय सिंह के बयान पर जब पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव यादव से बात की तो उन्होंने भी बयान का समर्थन किया है। अरुण यादव ने कहा है जो राजा साहब ने बात कही है, वो सच है। हमें ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। हालांकि अपने सार्वजनिक बयान पर दिग्विजय सिंह बिना कुछ बोले चल दिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उधर भिंड के लहार में मध्य प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि कोई भी भाजपा का कार्यकर्ता सामने निकलकर आए कि मेरे ऊपर अत्याचार किया हो तो मैं माफी मांगूंगा। लहार में आज कांग्रेस की विशाल जंगी सभा में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंच से कहा कि मैं किसी के ऊपर कभी अत्याचार नहीं किया। अगर कोई है तो सामने लाओ मैं माफी मांगने के लिए तैयार हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि मैं सचेत करना चाहता हूं, जिसको भी शासन के खजाने से पैसा जाता है और वह संविधान के अनुसार नियम का पालन नहीं करता। प्रशासन का कोई भी व्यक्ति हो मैं उसके खिलाफ नीचे से लेकर ऊपर तक की लड़ाई लडूंगा और यह लड़ाई आज भिंड से शुरू होती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>क्या आज अंग्रजों से पिछले टी 20 सेमीफाइनल में मिली हार का बदला ले पाएंगे टीम इंडिया के धुरंधर ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Jun 2024 03:46:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेल]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[विश्लेषण]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे सेमीफ़ाइनल के पहले मुक़ाबले में दक्षिण अफ़्रीका ने अफगानिस्तान को हराकर  फाइनल में जगह बना ली लेकिन अब करोड़ों भारत वासियों की धड़कने आज शाम 8 बजे गुयाना वेस्टइंडीज  के प्रोविडेंस स्टेडियम में होने वाले दूसरे सेमीफाइनल को लेकर बढ़ी हुई हैं । दूसरे सेमीफाइनल में पिछली t 20 कप विजेता इंग्लैंड से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</p>
<p>सेमीफ़ाइनल के पहले मुक़ाबले में दक्षिण अफ़्रीका ने अफगानिस्तान को हराकर  फाइनल में जगह बना ली लेकिन अब करोड़ों भारत वासियों की धड़कने आज शाम 8 बजे गुयाना वेस्टइंडीज  के प्रोविडेंस स्टेडियम में होने वाले दूसरे सेमीफाइनल को लेकर बढ़ी हुई हैं । दूसरे सेमीफाइनल में पिछली t 20 कप विजेता इंग्लैंड से भारत भिड़ने वाला है। इंग्लैंड अबतक दो बार इस टी 20 विश्व कप को जीत चुका है और भारत ने अबतक 2007 में इस विश्व कप को जीता था। पिछले टी-20 विश्व कप में  इंग्लैंड की टीम ने ही भारतीय टीम को सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में 10 विकटों की करारी हार दी थी.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p style="text-align: center;"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-47570" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/8df472c0-33cb-11ef-90be-b75b34b0bbb2.jpg.webp" alt="" width="800" height="527" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/8df472c0-33cb-11ef-90be-b75b34b0bbb2.jpg.webp 800w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/8df472c0-33cb-11ef-90be-b75b34b0bbb2.jpg-300x198.webp 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/8df472c0-33cb-11ef-90be-b75b34b0bbb2.jpg-768x506.webp 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/8df472c0-33cb-11ef-90be-b75b34b0bbb2.jpg-638x420.webp 638w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/8df472c0-33cb-11ef-90be-b75b34b0bbb2.jpg-696x458.webp 696w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">मौजूदा टूर्नामेंट की बात करें तो अभी तक भारतीय टीम ख़िताब की प्रबल दावेदार नज़र आ रही है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">इस टूर्नामेंट में भारत अभी तक अजेय रहा है. ग्रुप टीम में केवल पाकिस्तान ही एक ऐसी टीम थी, जिसे भारत के ख़िलाफ़ एक मज़बूत दावेदार माना जा रहा था.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">हालांकि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत पहले बैटिंग करते हुए भले ही लड़खड़ाया हो लेकिन शानदार बॉलिंग की बदौलत टीम जीतने में कमयाब रही.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">वहीं सुपर-8 मुक़ाबले में भी भारत के सामने ऑस्ट्रेलिया के तौर पर एक ख़तरनाक टीम थी.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">यह वही ऑस्ट्रेलियाई टीम है, जिसने 19 नवंबर 2023 को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में लगभग 1.5 लाख दर्शकों को ख़ामोश कराते हुए भारत को हराकर 50 ओवरों के विश्व कप ख़िताब पर कब्ज़ा जमाया था.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">लेकिन भारत ने टी-20 विश्व कप में कप्तान रोहित शर्मा की शानदार बैटिंग के दम पर नवंबर की मिली हार का ग़म ज़रूर एक हद तक कम किया. भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफ़ाइनल में अपनी जगह पक्की की थी।</p>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">भले ही इस 50 ओवरों वाले विश्व कप की तरह ही इस टी-20 विश्व कप में भारतीय टीम का अजेय अभियान जारी है. पर अब भी कुछ ऐसी कमज़ोरियां हैं, जो सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में टीम इंडिया के लिए बड़ी मुश्किल साबित हो सकती हैं.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">इस विश्व कप में ओपनिंग भारतीय टीम के लिए अभी तक सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हुई है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">ओपनर के तौर पर टीम के दो सबसे अनुभवी खिलाड़ी और बल्लेबाज़ विराट कोहली और रोहित शर्मा अपने कद के हिसाब से ख़ास छाप नहीं छोड़ पाए हैं.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">इस पूरे टूर्नामेंट में रोहित शर्मा के बल्ले से केवल दो अर्धशतक ही निकले हैं. रोहित ने आयरलैंड के ख़िलाफ़ भारतीय टीम के पहले मैच में 52 रनों की पारी खेली थी.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">हालांकि रोहित ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 92 रनों की ताबड़तोड़ पारी से एक हद तक दर्शकों को ख़ुश होने का मौक़ा भले दे दिया है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">लेकिन सबसे बड़ी चुनौती विराट कोहली के मोर्चे पर देखने को मिल रही है. विराट अभी तक इस टूर्नामेंट में लय में नहीं आ पाए हैं.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">यहां तक कि उन्होंने केवल बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में 30 रनों का आंकड़ा पार किया था. इसके अलावा कोहली इस टूर्नामेंट में दो बार ज़ीरो पर आउट हो चुके हैं.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">इन टीमों की लिस्ट देखें तो केवल पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और अभी की स्थिति के लिहाज़ से अफ़ग़ानिस्तान ही ऐसी टीमें हैं, जिनको मज़बूत टीमें कहा जा सकता है. लेकिन स्कोरबोर्ड से साफ़ है कि आयरलैंड, अमेरिका और बांग्लादेश जैसी टीमों के ख़िलाफ़ भी कोहली का बल्ला ख़ामोश ही रहा.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">कोहली और रोहित के बीच इस पूरे टूर्नामेंट में अभी तक कोई ढंग की साझेदारी भी नहीं हो पाई है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">भारत की बैटिंग में मसला केवल ओपनिंग का ही नहीं है, बल्कि मध्य क्रम पर भी भारत को ध्यान देने की ज़रूरत है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">हालांकि एक विडंबना यह है कि ऋषभ पंत, हार्दिक पांड्या और सूर्यकुमार यादव की एक दो पारियों की वजह से इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">लेकिन इस टूर्नामेंट में भारतीय मध्य क्रम को क़रीब से देखें तो ऋषभ पंत ही एक अकेले ऐसे बल्लेबाज़ रहे हैं, जिन्होंने लगभग सभी मैचों में ठीक-ठाक या पारी को गति देने वाली बल्लेबाज़ी की है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">वहीं सूर्यकुमार यादव के बल्ले से दो और हार्दिक पांड्या के बल्ले से अभी तक एक अर्धशतक आया है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">मध्य क्रम में शिवम दुबे, अक्षर पटेल और रविंद्र जडेजा मैच को संभालने वाली पारी खेलने में काफ़ी हद तक नाक़ाम रहे हैं. शिवम दुबे केवल दो ही मैचों में 30 के पार का स्कोर बना पाए हैं.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">भले ही जडेजा की छवि एक बॉलर के तौर पर हो, पर टीम में उनकी भूमिका ऑलराउंडर की मानी जाती है. ऐसे में जडेजा से टीम को हमेशा ही ऐसी उम्मीदें रहतीं है कि वे बॉलिंग या फिर बैटिंग किसी भी एक तरीके से मैच में अपना योगदान देंगे.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">हालांकि जडेजा अभी तक बॉलिंग और बैटिंग दोनों से ही प्रभाव दिखा पाने में नक़ाम रहे हैं. ठीक जडेजा की तरह ही अक्षर पटेल और शिवम दुबे को भी उनकी ऑलराउंड क्षमता के चलते टीम में जगह दी गई है. लेकिन अभी तक इन दोनों खिलाड़ियों फैंस की उम्मीदों के हिसाब से प्रदर्शन नहीं किया है.</p>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">इंग्लैंड और इंडिया के बीच मैच 27 जून को गुयाना के प्रोविडेंस स्टेडियम में खेला जाना है. वर्ल्ड वेदर ऑनलाइन वेबसाइट पर जानकारी के मुताबिक इस दिन हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">टीम कॉम्बिनेशन और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के अलावा बारिश भी एक कारक हो सकता है. ऐसा कई मैचों में देखा गया है कि बारिश के चलते मैच में आई रुकावट के बाद भारतीय टीम का प्रदर्शन अचानक से ख़राब हो जाता है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">इसकी सबसे बड़ी मिसाल 2019 के विश्व कप सेमीफ़ाइनल मैच में देखने को मिली थी. सेमीफ़ाइनल में भारत का मुक़ाबला न्यूजीलैंड के साथ था.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">एक वक्त भारतीय टीम मैच पर अपनी मज़बूत पकड़ भी बना चुकी थी. पहली पारी में भारतीय गेंजबाज़ों ने न्यूजीलैंड की टीम को 239 रनों पर ही समेट दिया था. लेकिन बारिश के चलते खेल को रिज़र्व डे तक बढ़ाना पड़ा.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">रिज़र्व डे में भारतीय टीम बैटिंग की बैटिंग कीवी बॉलरों के आगे ताश के पत्तों की तरह ढहती चली गई. उस मैच में पूरी भारतीय टीम 221 रनों पर ही सिमट गई और भारत का विश्व कप जीतने का सपना अधूरा ही रह गया.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">भारत के नज़रिये से यह विश्व कप कई मायनों में अहम भी है. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह विराट कोहली और रोहित शर्मा का आख़िरी आईसीसी टूर्नामेंट साबित हो सकता है.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">ऐसे में इस सेमीफ़ाइनल मैच से पहले भारतीय टीम को अपनी इन कमज़ोरियों से निपटना बेहद ज़रूरी है. इससे ठीक पिछले टी-20 विश्व कप में भी इंग्लैंड की टीम ने ही भारतीय टीम को सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में 10 विकटों की करारी हार दी थी.</p>
</div>
<div class="bbc-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="bbc-kl1u1v e17g058b0" dir="ltr">ऐसे में कहीं ऐसा ना हो कि आईसीसी ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमाने का ख़्वाब कुछ और साल आगे खिसक जाए.</p>
</div>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>संघ पर बक बक करने वालों की इस नासमझी को आप क्या कहेंगे ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Jun 2024 08:51:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[विश्लेषण]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ मोहन भागवत और संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश जी के हाल ही में आए दो बयानों के बाद यह कहा जा रहा है कि संघ और भाजपा के बीच तनाव बढ़ गया है। देश का मेन स्ट्रीम मीडिया और उससे जुड़े [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>प्रवीण दुबे</strong></p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ मोहन भागवत और संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश जी के हाल ही में आए दो बयानों के बाद यह कहा जा रहा है कि संघ और भाजपा के बीच तनाव बढ़ गया है। देश का मेन स्ट्रीम मीडिया और उससे जुड़े तमाम बड़े पत्रकार तथा राजनीतिक विश्लेषक इस प्रसंग को लेकर तरह तरह की बातें करते दिखाई दे रहे हैं।<br />
विडंबना इस बात की है कि जिन्होंने संघ को कभी नजदीक से नहीं देखा और उसकी तमाम रीतियों नीतियों का भी उन्हें भान नहीं है ऐसे लोग संघ के क्रिया कलापों पर चर्चा करते दिखाई दे रहे हैं उन्हें यह भी ठीक से नहीं मालूम की संघ कैसे काम करता है और समाज में काम करने के पीछे उसका उद्देश्य हमेशा गैर राजनीतिक ही रहा है।<br />
संघ की स्थापना से लेकर वर्तमान तक संघ के बारे में जो कुछ कहा जाता रहा है या उसको लेकर जो कुछ प्रचारित होता रहा उसमें कितनी सच्चाई और कितना झूठ होता। है यह अनेक बार समाज के सामने आ चुका है।</p>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-47347" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/27_10_2022-rashtriya_swayamsevak_sangh_news_23166336_m-1.webp" alt="" width="700" height="394" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/27_10_2022-rashtriya_swayamsevak_sangh_news_23166336_m-1.webp 700w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/27_10_2022-rashtriya_swayamsevak_sangh_news_23166336_m-1-300x169.webp 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/27_10_2022-rashtriya_swayamsevak_sangh_news_23166336_m-1-696x392.webp 696w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /> <img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-47348" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/3984fe40-2a42-11ef-9749-cd6cde939cc7.jpg.webp" alt="" width="800" height="450" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/3984fe40-2a42-11ef-9749-cd6cde939cc7.jpg.webp 800w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/3984fe40-2a42-11ef-9749-cd6cde939cc7.jpg-300x169.webp 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/3984fe40-2a42-11ef-9749-cd6cde939cc7.jpg-768x432.webp 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/3984fe40-2a42-11ef-9749-cd6cde939cc7.jpg-747x420.webp 747w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2024/06/3984fe40-2a42-11ef-9749-cd6cde939cc7.jpg-696x392.webp 696w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></p>
<p>इससे जुड़े कुछ प्रसंग ऐसे हैं जिनका जिक्र इस समय करना बेहद सामयिक लगता है। 1934 में महात्मा गांधी<br />
संघ के वर्धा शिविर में गए थे.महात्मा गांधी संघ के भोज में सभी वर्ग के लोगों के एक साथ भोजन करने के कार्यक्रम से बेहद प्रभावित हुए थे बाद में गांधी ने कहा मैं वर्धा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक शिविर में गया था. उस समय इसके संस्थापक श्री हेडगेवार जीवित थे. स्व. श्री जमनालाल बजाज मुझे शिविर में ले गये थे और वहां मैं उन लोगों का कड़ा अनुशासन, सादगी और छुआछूत की पूर्ण समाप्ति देखकर अत्यन्त प्रभावित हुआ था.संघ एक सुसंगठित, अनुशासित संस्था है.&#8221; वहां के समरसता और परस्पर परिवार भाव ने मुझे बहुत प्रभावित किया।<br />
साफ है संघ को लेकर जो कुछ प्रचारित किया गया था गांधी जी का वह मिथक उस समय ही टूटा जब उन्होंने संघ को उसके निकट जाकर देखा और समझा ,महात्मा गांधी के अलावा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन, जयप्रकाश नारायण और सेना के पूर्व जनरल करियप्पा पूर्व राष्ट्रपति प्रो अब्दुल कलाम प्रणव मुखर्जी भी संघ में गए और बेहद प्रभावित भी हुए।<br />
इन प्रसंगों का उल्लेख करने के पीछे यही अभिप्राय है कि वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर सर संघचालक मोहन भागवत और वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के बयान का विश्लेषण तभी संभव है जब संघ को निकट से समझा जाए यह सच है कि अपनी विराटता और अदभुत कार्यशैली के कारण आज संघ मीडिया की चर्चा के केन्द्र में रहता है लेकिन यह समझना बेहद आवश्यक है कि संघ परिवार के अन्य घटकों के प्रति संघ का भाव पिता के समान ही रहा है। जिस प्रकार घर का मुखिया समय समय पर कुटुंब प्रबोधन करता है उसी तर्ज पर संघ के बयान को देखे जाने की जरूरत है। वहां टकराव या झगड़े को कोई स्थान नहीं है और जो लोग ऐसा प्रचारित करते दिख रहे हैं वह उनकी नासमझी है। जहां तक संघ के दो महानुभावों के बयानों को लेकर हो हल्ला मचाया जा रहा है वह बयान बिना किसी लाग लपेट द्वेष को लेकर दिए गए हैं जो राजनीति की वर्तमान देश काल परिस्थिति के अनुसार पूर्णतः सही है मीडिया या राजनीतिक विश्लेषक इन बयानों को लेकर भले ही कुछ भी अर्थ निकालें लेकिन उन बयानों में छुपी सीख और प्रेरक भाव को समझने की आवश्यकता है। सरसंघचालक डॉ भागवत ने इसमें किसी को भी टारगेट न करते हुए संघ के समग्रता पूर्ण भाव को महत्वत्ता दी है साफ है उन्होंने हाल में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों, राजनीति और राजनीतिक दलों के रवैये पर अपनी राय रखी थी.<br />
बाद में संघ भी साफ कर दिया कि संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान सरकार पर टिप्पणी नहीं थी. इसका अलग मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए. इसमें साफ तौर पर स्पष्ट कर दिया गया कि सरसंघचालक ने</p>
<p>नागपुर में संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा चुनावों, सेवाभाव, मानवता और अन्य मुद्दों पर अपनी राय रखी थी. RSS की ओर से कहा गया कि संघ प्रमुख के भाषण का 3 मिनट का एडिटेड हिस्सा चलाया गया. जिसमें ये कहा गया कि जो सेवक होते हैं, उनमें अहंकार नहीं होना चाहिए. अहंकार बात को ही सरकार से जोड़ दिया गया.संघ ने इसी बयान को गलत बताया संघ ने साफ किया कि मोहन भागवत की टिप्पणी किसी व्यक्ति विशेष या सरकार पर नहीं थी. उधर इंद्रेश जी का बयान भी भगवान राम द्वारा सभी को एक भाव से देखने की ओर इंगित करता है । इन बयानों पर हो हल्ला मचाने वालों को पहले संघ और उसके दृष्टिकोण को समझने की आवश्यकता है जहां केवल राष्ट्रहित को ही सर्वोपरि मानकर कार्य किया जाता है वहां व्यक्तिनिष्ठा को कोई स्थान नहीं है । जो बयान सामने आए हैं वह सभी के लिए प्रेरक कहे जा सकते हैं</p>
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			</item>
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		<title>बढ़े हुए मतदान प्रतिशत को लेकर चौंकाने वाले हैं यह आंकड़े ,जीत के दावे पर फिर सकता है पानी</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Nov 2023 08:54:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[विश्लेषण]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में हुई रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग के पीछे आखिर क्या संदेश छुपा है ? क्या यह बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत  18 वर्षों से सत्ता पर काबिज भाजपा के खिलाफ असंतोष का पर्याय है ? अथवा यह बढ़ी हुई वोटिंग उन महिलाओं की है जो शिवराज सरकार द्वारा उनके लिए लागू लाड़ली [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</p>
<p>मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में हुई रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग के पीछे आखिर क्या संदेश छुपा है ? क्या यह बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत  18 वर्षों से सत्ता पर काबिज भाजपा के खिलाफ असंतोष का पर्याय है ?</p>
<p>अथवा यह बढ़ी हुई वोटिंग उन महिलाओं की है जो शिवराज सरकार द्वारा उनके लिए लागू लाड़ली बहना योजना से प्रभावित हैं।</p>
<p>कांग्रेस और भाजपा दोनों इसे अपने अपने ढंग से परिभाषित करके अपनी अपनी जीत का दावा कर रही हैं। इन दावों में कितनी सच्चाई है यह तो 3 दिसंबर को ही पता चलेगा जब ईवीएम में बंद नतीजे सामने आएंगे।</p>
<p>हालांकि पिछले रिकॉर्ड को देखें तो पिछले चार दशक से मध्यप्रदेश का वोटिंग का प्रतिशत लगातार बढ़ता रहा है और वोटिंग का बढ़ा हुआ प्रतिशत अलग कहानी बयां कर रहा है।</p>
<p>आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि मध्यप्रदेश में कई बार बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत सत्ता पर काबिज दल की पुनः जीत का कारण बना ।</p>
<p>1998 के विधानसभा चुनाव में 60.21 फीसदी वोटिंग हुई। यह पिछले चुनाव के मुकाबले  अधिक थी पिछले 1993 में मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में 60.17 फीसदी वोटिंग हुई थी बावजूद इसके सत्ताधारी दल कांग्रेस पुनः जीतकर आई थी।</p>
<p>2008 के विधानसभा चुनाव में 69.78 फीसदी मतदान हुआ। यह पिछले चुनाव के मुकाबले 2.53 फीसदी अधिक था। यहां भी सत्ता पर पहले से काबिज  बीजेपी एक बार फिर सत्ता में आई। चुनाव में बीजेपी को 143 और कांग्रेस को 71 सीटें मिली।</p>
<p>इसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में 70 फीसदी से भी अधिक वोटिंग हुई। 2013 में कुल 72.13 फीसदी मतदान हुआ। सता की बागडोर पहले से जिस  बीजेपी के हाथ थी उसने  एक बार फिर बड़ी जीत हासिल की। चुनाव में बीजेपी को 165 और कांग्रेस को 58 सीटें मिलीं।</p>
<p>यह आंकड़े इस बात की गवाही देते दिख रहे हैं कि बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत हमेशा सत्ता पर काबिज दल के खिलाफ आक्रोश का संकेत नहीं होता है। चूंकि मध्यप्रदेश में शुरुआत से ही लगातार मतदान प्रतिशत बढ़ते रहने का इतिहास रहा है अतः इसबार भी प्रदेशवासियों ने उस जागरूकता को ही प्रदर्शित किया है। इसको यह कहना ठीक नहीं है कि परिवर्तन अथवा सत्ताधारी दल से नाराजगी के कारण यह मतदान प्रतिशत बढ़ा है।</p>
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		<title>लाड़ली बहना और मोदी का चेहरा भाजपा ने क्या मतदान से पहले मध्यप्रदेश में कर दिया खेला .?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Nov 2023 07:44:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[विश्लेषण]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे मोदी फैक्टर और लाड़ली बहना के सामने बौने पड़े सारे मुद्दे मतदान से पहले बढ़ा भाजपा का ग्राफ क्या मध्यप्रदेश में मतदान से पहले भाजपा का मोदी फैक्टर और लाड़ली  बहना योजना का चुनावी खेला कामयाब हो गया है ? क्या मोदी की तमाम रीतियों नीतियों के दीवाने लेकिन शिवराज को लेकर असमंजस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">
<p style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</p>
<p>मोदी फैक्टर और लाड़ली बहना के सामने बौने पड़े सारे मुद्दे मतदान से पहले बढ़ा भाजपा का ग्राफ</p>
<p>क्या मध्यप्रदेश में मतदान से पहले भाजपा का मोदी फैक्टर और लाड़ली  बहना योजना का चुनावी खेला कामयाब हो गया है ? क्या मोदी की तमाम रीतियों नीतियों के दीवाने लेकिन शिवराज को लेकर असमंजस वाले 34 प्रतिशत वोटर एकबार फिर मोदी की गारंटी पर असमंजस से बाहर आकर कमल का बटन दबाने का मन बना चुके हैं  ? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो चुनाव प्रचार के अंतिम चरण तक पहुंचते पहुंचते देश के तमाम राजनीतिक विश्लेषकों के मन मस्तिष्क में कौंध रहे हैं।</p>
<p>देश का ह्रदय के जाने वाले मध्यप्रदेश  में सरकार चुनने का समय आ गया है अब से लगभग 18 घंटे बाद मध्यप्रदेश की 5.39 करोड़ जनता अपने मताधिकार का उपयोग करने घरों से निकलना शुरू करेगी और शाम 5 बजे तक ईवीएम मशीनों में उनका फैसला जमा हो जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश की जनता एकबार फिर भाजपा सरकार को चुनेंगे अथवा परिवर्तन के पक्ष में अपना वोट डालेंगे ? इस प्रश्न का जवाब खोजने के लिए कई समाचार एजेंसियों और मीडिया हाउस द्वारा जनमत सर्वेक्षण कराए गए और उनमें जो बात निकलकर आई उसमें मध्यप्रदेश के चुनावी रण में भाजपा और कांग्रेस के बीच नजदीकी लड़ाई अर्थात कांटे के मुकाबले की बात कही जा रही है।</p>
<p>यह सच है कि मध्यप्रदेश में मुकाबला कांटे का है बावजूद इसके कुछ फैक्टर ऐसे हैं जिसके कारण प्रदेश की जनता का मूड एकबार पुनः भाजपा के पक्ष में बनता दिखाई दे रहा है।</p>
<p>सीएसडीएस सर्वेक्षण के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान सरकार के साथ जनता का satisfaction level 61 प्रतिशत बेहतर है, 27 प्रतिशत लोग पूरी तरह से संतुष्ट हैं और 34 प्रतिशत कुछ हद तक संतुष्ट हैं. कुछ हद तक संतुष्ट मतदाता किसी भी दिशा में जा सकते हैं और परिणाम को बदल सकते हैं.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>जो 34 प्रतिशत मतदाता कुछ हद तक संतुष्ट हैं या फिर जो मतदाता भाजपा के राष्ट्रवादी कार्यों,विकास की मोदी अवधारणा, उत्कृष्ठ विदेश नीति, सनातन के प्रति सम्मान जैसे तमाम विषयों से तो जबरदस्त समर्थन रखते हैं लेकिन मध्यप्रदेश में शिवराज के चेहरे अथवा कार्यों से उनकी असहमति है।</p>
<p>निसंदेह कुछ हद तक संतुष्ट अथवा असमंजस वाले मतदाताओं को लेकर भाजपा ने जो चुनावी रणनीति अपनाई  उसने बेहद चमत्कारिक ढंग से न केवल ऐसे मतदाताओं के असमंजस को दूर कर अपनी तरफ मोड़ दिया है। इसमें सबसे बड़ा काम मोदी फैक्टर ने किया है।</p>
<p>भाजपा ने शिवराज को पीछे और मोदी के चेहरे को आगे करके असमंजस वाले वोटरों को बड़ा संदेश दिया । मोदी का चेहरा जहां  ऐसे वोटरों के लिए विकास,राष्ट्रवाद सहित उन सभी कार्यों की गारंटी बन गया जिसके कि वे फेन थे साथ इस बात का संदेश भी चला गया कि अब शिवराज मुख्यमंत्री नहीं होंगे। इस बड़े फैक्टर और मोदी की ताबड़तोड़ चुनावी सभाओं रैलियों ,रोड शो आदि ने अंतिम चरण के चुनाव प्रचार आते आते जैसे चमत्कार कर दिया है। तमाम राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब असमंजस वाले 34 प्रतिशत वोटर मोदी के चेहरे और गारंटी पर भाजपा को ही वोट देने का मन बना चुके हैं। अर्थात भाजपा इन वोटरों के सहारे आसानी से मध्यप्रदेश की सत्ता का सिंहासन प्राप्त कर सकने की स्थिति में नजर आ रही है।</p>
<p>भाजपा के लिए जहां मोदी फैक्टर ने अमृत का काम किया है वहीं शिवराज सिंह की लाड़ली बहना योजना भी उसके लिए गेम चेंजर बनती दिखाई दे रही है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा खासकर शिवराज के प्रति महिलाओं की जो सकारात्मकता और प्रसन्नता दिखाई दी है उससे बहुत बड़ा संदेश दे दिया है।</p>
<p>राजनीति के जानकारों की मानें तो मध्य प्रदेश में इस बार राजनीतिक दलों के निशाने पर दो प्रमुख वोटर समूह हैं- महिलाएं और आदिवासी. इन दोनों वोटर समूह का साथ जिस भी दल को मिल गया उसके लिए सत्ता की चाबी ज्यादा दूर नहीं होगी. ऐसे में सूबे के दोनों प्रमुख दल कांग्रेस और बीजेपी इन वोटर समूहों को अपनी ओर खींचने की कोशिश में लगे हुए हैं. कांग्रेस ने सस्ते सिलेंडर समेत महिला केंद्रित कई ऐलान किए और नारी सम्मान योजना का कार्ड इस वोटर समूह को लुभाने के इरादे से चला तो बीजेपी ने इसके जवाब में लाड़ली बहना योजना शुरू कर दी. इस योजना के तहत महिलाओं को 1250 रुपए महीने मिल रहे हैं.</p>
<p style="text-align: center;">
<p>&nbsp;</p>
<p>माना जा रहा है कि ये राशि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित हो रही है, ऐसे में इसका चुनावी लाभ मिलना भी मुमकिन माना जा रहा है. अब राज्य की जो महिलाएं इस योजना से नहीं जुड़ पाई हैं, उनको भी इससे जोड़ने का वादा शिवराज सिंह चौहान का एक और ट्रंप कार्ड  है. उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में महिला वोटरों की संख्या 48 प्रतिशत है ।मालूम हो कि मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है. चुनावों के नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में भगवा ब्रिगेड के सामने कांग्रेस बैकफुट पर,ताबड़तोड़ रैलियों सभाओं ने बदला माहौल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Nov 2023 10:14:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[विश्लेषण]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे शोरगुल वाला चुनाव प्रचार आज  शाम 5 बजे थम जाएगा। इससे पूर्व  पिछले एक पखवाड़े से जारी चुनाव प्रचार की समीक्षा की जाए तो भाजपा शीर्ष नेतृत्व खासकर प्रधानमंत्री मोदी,गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्रियो राजनाथ सिंह,नितिन गडकरी सहित मध्यप्रदेश से जुड़े पार्टी नेताओं जिसमें खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto" style="text-align: center;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-42487" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2023/11/Screenshot_20231115-152032_Gmail-286x300.jpg" alt="" width="286" height="300" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2023/11/Screenshot_20231115-152032_Gmail-286x300.jpg 286w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2023/11/Screenshot_20231115-152032_Gmail-400x420.jpg 400w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2023/11/Screenshot_20231115-152032_Gmail.jpg 692w" sizes="auto, (max-width: 286px) 100vw, 286px" /></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto" style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">शोरगुल वाला चुनाव प्रचार आज  शाम 5 बजे थम जाएगा। इससे पूर्व  पिछले एक पखवाड़े से जारी चुनाव प्रचार की समीक्षा की जाए तो भाजपा शीर्ष नेतृत्व खासकर प्रधानमंत्री मोदी,गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्रियो राजनाथ सिंह,नितिन गडकरी सहित मध्यप्रदेश से जुड़े पार्टी नेताओं जिसमें खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ,केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर आदि ने जबरदस्त ढंग से प्रचार करके कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">जिस समय चुनाव तारीखों का एलान हुआ था। भाजपा एंटी इंकम्बेंसी के खतरे से बुरी तरह से जूझती दिखाई दे रही थी। लेकिन आज चुनाव प्रचार समाप्त होते तक स्थिति ठीक उलट नजर आ रही है। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की पूरी टीम ने जिस प्रकार सुनियोजित ढंग से कांग्रेस की तमाम कमजोरियों खासकर 18 महीने की कमलनाथ सरकार द्वारा की गई वादाखिलाफी को अपने भाषणों के माध्यम से हमला बोला और मध्यप्रदेश की जनता को सबकुछ बताने में कामयाब रहे उसने मध्यप्रदेश के सारे चुनावी गणित को उलटकर रख दिया है।</div>
<div dir="auto">आज की बात करें तो भाजपा के खिलाफ न तो एंटी इंकम्बेंसी दिखाई दे रही है और न नाराजी लड़ाई में कमलदल हाथ के पंजे की तुलना में अधिकांश हिस्सों में बीस ही नजर आ रहा है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">एक तरफ प्रदेश के 48 प्रतिशत मतों का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला वोटरों के बीच  भैय्या शिवराज के प्रति जबरदस्त सकारात्मकता देखने को मिल रही है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी धुरंधर टीम राज्य और प्रदेश की तमाम जन कल्याणकारी योजनाओं को जनता के दिमाग में उतारने में कामयाब रहे हैं।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">इन सबके अलावा राममंदिर निर्माण,धारा 370 की समाप्ति,तथा पूरी दुनिया में भारत के बढ़ते दबदबे किसानों  मजदूरों गरीबों के लिए जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मध्यप्रदेश चुनावों में  भाजपा को इस कारण मिल रहा है क्योंकि पार्टी ने बड़ी चतुराई से प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा आगे करके चुनाव लडा है।</div>
<div dir="auto">मोदी की गारंटी को मध्यप्रदेश वासी तमाम कल्याणकारी कार्यों के वादों पर पक्का हॉलमार्क मानकर चल रहे हैं जो भाजपा के लिए बहुत कारगर साबित हुआ है।</div>
<div dir="auto">दूसरी ओर कांग्रेस की बात की जाए तो चुनाव के शुरुआती दौर में बहुत सारी चीजें उसके पक्ष में होने के बावजूद अंतिम चरण आते आते तक उस माहौल को वह यथावत नहीं रख सकी यही वजह है कि आज अनेक विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस पीछे नजर आ रही है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">इसका मूल कारण कांग्रेस के पास मोदी बिग्रेड की तुलना में लोकप्रिय नेताओं की बहुत कमी है। जिन नेताओं ने मध्यप्रदेश में पार्टी प्रचार की कमान सम्हाले हुई है उन्हे भाजपा नेताओं की तुलना में अपनी बात रखने में न तो महारत हासिल है और न ही उनके चेहरे उतने लोकप्रिय हैं।</div>
<div dir="auto">उनके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कमलनाथ से लेकर केंद्रीय नेतृत्व राहुल प्रियंका गांधी मल्लिकार्जुन खड़गे तक भाजपा की तमाम कमियों को प्रभावी ढंग से रखने नाकामयाब ही नजर आए।</div>
<div dir="auto"> यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी नासमझी को कई बार अपने भाषणों में उजागर किया बल्कि राहुल गांधी को यहां तक कह दिया कि मूर्खों के सरदार किस दुनिया में रहते हो। उधर चुनाव आयोग तक ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ झूठे और अप्रत्याशित आरोप लगाने को लेकर नोटिस जारी कर दिया। इससे कांग्रेस की भारी किरकिरी तो हुई ही साथ ही भाजपा नेताओं द्वारा कांग्रेस पर झूठे और मनगडंत आरोप लगाने की बात सिद्ध हो गई। अब जबकि आज चंद घंटे बाद शोरगुल वाला चुनाव प्रचार थम जाएगा और मतदान में डेढ़ दिन का समय ही शेष बचेगा यह कहा जा सकता है कि भाजपा नेताओं की जबरदस्त मेहनत और निर्धारित रणनीति ने मध्यप्रदेश के चुनावी माहौल को भगवामय कर दिया है।</div>
<div dir="auto">यह कहना तो फिलहाल कठिन होगा कि  17 तारीख को मतदाता क्या निर्णय लेगा लेकिन इतना जरूर। कहा जा सकता है कि जो माहौल दिख रहा है वह चुनाव प्रचार के शुरुआती माहौल जैसा कतई नहीं है ,भाजपा ने इसे संतुलित करने में पूरी तरह से कामयाब रही है।</div>
<div dir="auto"></div>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दक्षिण व पूर्व विधानसभा : भाजपा को देख लगता ही नहीं चुनाव नजदीक हैं,जनता के बीच गजब की सक्रीयता दिखाती कांग्रेस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Jun 2023 06:33:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[विश्लेषण]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे ग्वालियर/एक तरफ मध्यप्रदेश में सत्ताधारी  दल भाजपा ग्वालियर पूर्व और ग्वालियर दक्षिण विधानसभा में चुनाव लड़ने के इच्छुक पार्टी नेताओं की लंबी होती सूची के कारण टेंशन में है तो दूसरी और उसके प्रतिद्वंदी दल कांग्रेस ने इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में अपने तत्कालीन विधायकों को पूरी तरह से चुनाव के लिए एक्टिव [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</p>
<p>ग्वालियर/एक तरफ मध्यप्रदेश में सत्ताधारी  दल भाजपा ग्वालियर पूर्व और ग्वालियर दक्षिण विधानसभा में चुनाव लड़ने के इच्छुक पार्टी नेताओं की लंबी होती सूची के कारण टेंशन में है तो दूसरी और उसके प्रतिद्वंदी दल कांग्रेस ने इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में अपने तत्कालीन विधायकों को पूरी तरह से चुनाव के लिए एक्टिव कर दिया है। उल्लेखनीय है कि इन दोनो विधानसभा क्षेत्रों से पिछली बार हुए चुनावों में कांग्रेस के सतीश सिकरवार और प्रवीण पाठक ने जीत हासिल की थी। ग्वालियर पूर्व से सतीश सिकरवार ने मुन्नालाल गोयल को और  ग्वालियर  दक्षिण से प्रवीण पाठक ने भाजपा के नारायण सिंह को हराया था।</p>
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<div dir="auto">पूर्व विधानसभा से विधायक सतीश सिंह सिकरवार का चुनाव लड़ना पूरी तरह से पक्का होने के कारण वह दमखम के साथ जनता के बीच उतर गए हैं। उनके द्वारा विधानसभा में हाथ से हाथ जोड़ों’ पद यात्राः के द्वारा लोगों से मिलने ,उनकी समस्या सुनने,मौके से ही सम्स्याओं के समाधान का सिलसिला जोर शोर से चालू है इसे मिल रहे व्यापक जनसमर्थन ने भाजपा के समर्थकों को खासा परेशानी में डाल रखा है,इतना ही नहीं उनकी महापौर पत्नी भी लगातार जनता से संपर्क बनाए हुए हैं।</div>
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<div dir="auto">भाजपा की बात की जाए तो इस विधानसभा में अभी उसका प्रत्याशी तय नहीं है।जिस प्रकार की बयानबाजी चल  रही है उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि कई दावेदार सामने होने से सिर फुट्टवल की स्थिति बनती दिख रही है।</div>
<div dir="auto">यहां जनता के बीच जनसंपर्क करने की कोई प्लानिंग नजर नहीं आती, समस्या सुनने और उनके समाधान का कोई ठोस कार्यक्रम नहीं है साथ ही कार्यकर्ता भी मुंह फुलाए होने से समस्या खड़ी हो गई है,कार्यकर्ता को मनाने समझाने वाले ही दिखाई नहीं दे रहे हैं।</div>
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<div dir="auto">दक्षिण विधानसभा में भी वर्तमान में कांग्रेस विधायक है इस वजह से यह माना जा रहा है कि इस बार भी पार्टी उनको ही अपना उम्मीदवार  बनाएगी तस्वीर साफ होने की वजह से उन्होंने भी जनता के बीच संपर्क शुरू कर दिया है हालांकि वर्तमान विधायक प्रवीण पाठक के अतिरिक्त यहां से कांग्रेस के समीकरण कुछ बदल भी सकते हैं ऐसा इसलिए कि प्रवीण पाठक कांग्रेस के जिस सुरेश पचौरी गुड से आते हैं उनका वजन इस बार बेहद कमजोर माना जा रहा है ऐसी स्थिति में चेहरा बदल भी सकता है लेकिन इसकी संभावना कम है ।</div>
<div dir="auto">फिलहाल तो वर्तमान विधायक की स्वच्छ छवि लोगों के सुख-दुख में लगातार खड़े रहने का इतिहास और मिलनसार व्यक्तित्व का लाभ तो कांग्रेस को मिल ही रहा है जोकि आगामी चुनाव में उसके लिए रास्ता आसान कर  सकता है।</div>
<div dir="auto">भाजपा की बात करें तो दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से सर्वाधिक उम्मीदवार दावेदारी करते दिखाई दे रहे हैं कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा ने साफ तौर पर यह कह दिया है कि वह  तो दक्षिण से ही चुनाव लड़ेंगे पार्टी टिकट दे या ना दे।</div>
<div dir="auto">उधर दूसरी ओर नारायण सिंह कुशवाह पिछले चुनाव में बहुत कम अंतर से हारे थे और इस बार भी दावेदारी करते दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा पिछले चुनाव में बागी होकर मैदान में उतरी पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता भी चुनाव की दौड़ में शामिल हैं इनके अलावा लगभग आधा दर्जन नाम ऐसे हैं जो इस विधानसभा से चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं।</div>
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<p>ऐसी स्थिति में पार्टी के लिए बड़ी विषम परिस्थितियां निर्मित हो गई है यहां भी पूर्व की ही तरह जनता की समस्याएं सुनने उनका निवारण करने तथा तमाम सरकारी कल्याणकारी योजनाओं  के प्रचार और जनता के बीच बताने का काम लगभग ठप्प पड़ा है ।</p>
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<div dir="auto">जहां तक इन विधानसभा क्षेत्रों की भोगोलिक स्थिति का सवाल है तो ग्वालियर पूर्व विधानसभा का संपूर्ण भाग ग्वालियर के भीड़ भरे शहरी इलाकों का प्रतिनिधित्व करता है कमोबेश यही स्थिति ग्वालियर दक्षिण की भी कही जा सकती है। यह दोनों विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां से ग्वालियर की सभी सातों सीटों पर हवा बनती है।</div>
<div dir="auto">फिलहाल प्रचार,संपर्क,समस्या समाधान तथा सक्रियता के मामले में यहां कांग्रेस सत्ताधारी दल से आगे निकलती दिख रही है  ।भाजपा के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी का लाभ भी कांग्रेस को मिल रहा है। हालांकि चुनाव अभी दूर है और ऊंट किस करवट बैठेगा इसका अंदाजा अभी लगाना थोड़ी जल्दबाजी होगी लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि पूर्व और दक्षिण विधानसभा क्षेत्रों में अगर भाजपा ने  अपनी अंदरूनी कलह समाप्त करके सक्रियता नहीं दिखाई तो उसे आगामी चुनाव भारी पड़ सकता है।</div>
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