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	<title>श्रद्धाजंलि &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>विनोद जी का जीवन क्षण-क्षण और कण-कण राष्ट्र को समर्पित था : दीपक विस्पुते</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2026 16:55:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[विनोदजी श्रद्धांजलि सभा]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; श्रद्धांजलि सभा में उनसे जुड़े वरिष्ठ जनों ने साझा किए संस्मरण। सादगी, संगठननिष्ठा और सामाजिक समरसता के प्रति समर्पण को किया स्मरण भोपाल 9 अक्टूबर 2026/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक  विनोद जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रकार्य, संगठननिष्ठा और समाज के प्रति संवेदनशीलता का अनुपम उदाहरण था। उनके जीवन का क्षण-क्षण और कण-कण राष्ट्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>श्रद्धांजलि सभा में उनसे जुड़े वरिष्ठ जनों ने साझा किए संस्मरण। सादगी, संगठननिष्ठा और सामाजिक समरसता के प्रति समर्पण को किया स्मरण</strong></p>
<p>भोपाल 9 अक्टूबर 2026/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक  विनोद जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रकार्य, संगठननिष्ठा और समाज के प्रति संवेदनशीलता का अनुपम उदाहरण था। उनके जीवन का क्षण-क्षण और कण-कण राष्ट्र को समर्पित था। उनका जीवन केवल संघ की कार्यपद्धति को समझने का माध्यम नहीं, बल्कि संघमय जीवन जीने की प्रेरणा भी है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौधिल प्रमुख दीपक विस्पुते ने  विनोद जी की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में व्यक्त किए। सभा में पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, अशोक जी पांडे, गोरेलाल जी तथा अन्य वरिष्ठजनों ने श्रद्धेय विनोद जी के साथ बिताए संस्मरण साझा करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>दीपक विस्पुते ने कहा कि विनोद जी उच्च शिक्षित थे और चाहते तो अपने लिए एक सफल व्यावसायिक जीवन चुन सकते थे, किंतु उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन संघकार्य के लिए समर्पित किया। लगभग 55 वर्षों के प्रचारक जीवन में उन्होंने प्रांत प्रचारक, क्षेत्र प्रचारक और केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। उनकी कार्यपद्धति में सूक्ष्मता, आग्रहपूर्वक कार्य करने की क्षमता, व्यक्ति की परख और कार्यकर्ताओं की चिंता जैसे गुण स्पष्ट दिखाई देते थे। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार जी को प्रत्यक्ष देखने का अवसर भले ही नहीं मिला, लेकिन विनोद जी जैसे व्यक्तित्वों को देखकर यह समझा जा सकता है कि संघमय जीवन कैसा होता है। संघ को केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि विनोद जी जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं के जीवन से समझा जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विनोद जी के विरोधी भी उनकी सादगी और जीवनमूल्यों के प्रशंसक थे। उनके जीवन में आकर्षण और आत्मप्रचार से दूरी का सहज आदर्श दिखाई देता था। दीपक जी ने अपने जीवन का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि जब वे स्वयं प्रचारक के दायित्व से मुक्त होकर घर जाने का विचार कर रहे थे, तब विनोद जी ने उनसे जो संवाद किया और मार्गदर्शन दिया, उसका प्रभाव ऐसा रहा कि उनके मन में दोबारा वह विचार नहीं आया। उन्होंने कहा कि विनोद जी के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके जीवन से प्रेरणा लेकर उसे अपने आचरण में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।</p>
<p><strong>*सामाजिक समरसता के कार्यों में विनोद जी का मार्गदर्शन था महत्वपूर्ण &#8211; शिवराज सिंह चौहान*</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रद्धेय विनोद जी के साथ निकटता से कार्य करने के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता से जुड़े अनेक वैचारिक निर्णयों और योजनाओं में विनोद जी की दृष्टि एवं मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहता था। संत रविदास महाकुंभ, टंट्या मामा भील और भीमा नायक से जुड़े कार्यों तथा योजनाओं में उनकी अंतर्दृष्टि का विशेष योगदान रहा। उन्होंने कहा कि विनोद जी सामाजिक समरसता के विषयों को गहराई से समझते थे और उनके मार्गदर्शन में समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने की दृष्टि मिलती थी।</p>
<p>श्री चौहान ने विनोद जी के व्यक्तित्व के एक विशेष पक्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि वे बाहर से अत्यंत कठोर दिखाई देते थे, लेकिन उनका हृदय बहुत कोमल था। उनके व्यवहार में अनुशासन और आत्मीयता का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने विनोद जी से जुड़े अन्य संस्मरण भी साझा किए और कहा कि यदि हम उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करें, तो निश्चित रूप से भारत माता को परम वैभव तक पहुंचाने के कार्य में अपना योगदान दे सकेंगे।</p>
<p><strong>*प्रचारक का जीवन अदृश्य होते हुए भी प्रत्येक हृदय में विराजता है &#8211; कप्तान सिंह सौलंकी*</strong></p>
<p>पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि श्रद्धांजलि सभा केवल श्रद्धासुमन अर्पित करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह विनोद जी के जीवन को जानने, समझने और उनसे प्रेरणा लेकर उनके आदर्शों के अनुरूप जीवन जीने का संकल्प लेने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि प्रचारक का जीवन भले ही बाहरी दृष्टि से अदृश्य रहता हो, लेकिन वह अपने कार्य, व्यवहार और आत्मीय संबंधों के माध्यम से असंख्य लोगों के हृदय में स्थायी स्थान बना लेता है।</p>
<p>श्री सोलंकी ने विनोद जी के साथ बिताए अनेक संस्मरण साझा किए। अंतिम दिनों की स्मृति बताते हुए वे भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले जब उन्होंने अस्पताल में विनोद जी से बात करने का प्रयास किया, तब उनकी स्थिति देखकर वे व्यथित हो गए थे। वे बोल नहीं पा रहे थे और उन्हें ऑक्सीजन पाइप लगी हुई थी। इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने विनोद जी के प्रति अपनी आत्मीयता और उनके जाने से उत्पन्न रिक्तता को व्यक्त किया।</p>
<p><strong>*प्रतिज्ञा को जीवन में उतारना विनोद जी से सीखना चाहिए &#8211; अशोक पांडे*</strong></p>
<p>अशोक जी पांडे ने श्रद्धेय विनोद जी को कार्यकर्ता की चिंता, समाज के प्रति संवेदना, जीवन की प्रमाणिकता और भविष्य को देखने वाली दूरदृष्टि का प्रतिरूप बताया। उन्होंने कहा कि विनोद जी का जीवन अनुकरणीय है। किसी विचार और प्रतिज्ञा को केवल शब्दों तक सीमित न रखकर उसे अपने जीवन में कैसे उतारा जाता है, यह विनोद जी के जीवन से सीखा जा सकता है। उनका प्रत्येक कार्य समाज और संगठन के प्रति समर्पण की भावना से प्रेरित था। श्री पांडे ने हृदय की संपूर्ण पवित्रता के साथ उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।</p>
<p><strong>*सात्विकता, सहजता और संगठनात्मक दृढ़ता का अनुपम समन्वय &#8211; गोरेलाल*</strong></p>
<p>क्षेत्र घुमंतू कार्य प्रमुख गोरेलाल जी ने अपने विस्तृत संस्मरणों में विनोद जी के सात्विक व्यक्तित्व, सहज व्यवहार, कार्यकर्ता-हित की चिंता और संगठनात्मक दृढ़ता का उल्लेख किया। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के सात्विक कर्ता के लक्षणों वाले श्लोक “मुक्तसंगोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः। सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते॥” का उल्लेख करते हुए कहा कि आसक्ति और अहंकार से मुक्त रहकर धैर्य, उत्साह तथा सफलता-असफलता में समान भाव बनाए रखने के ये गुण विनोद जी के जीवन में सहज रूप से दिखाई देते थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मूलतः उत्तर प्रदेश से आने वाले विनोद जी ने संघकार्य में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। दायित्वों से मुक्त होने के बाद उज्जैन में रहते हुए भी उनकी दिनचर्या और कार्यनिष्ठा में कोई शिथिलता नहीं आई। नियमित व्यायाम, स्नान-ध्यान, जप-तप, बाबा महाकाल के दर्शन और आरती में सहभागिता तथा समाज के विभिन्न वर्गों एवं कार्यकर्ताओं से सहज संवाद उनके जीवन का अभिन्न अंग बने रहे। बड़े दायित्वों से मुक्त होने के बाद भी उन्होंने अपने व्यवहार में न कोई बदलाव आने दिया और न ही मिलने वालों की संख्या में परिवर्तन को अपने मन पर प्रभावी होने दिया।</p>
<p>गोरेलाल जी ने बताया कि विनोद जी व्यक्तियों की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें समाज और संगठन के कार्यों से जोड़ने में विशेष दक्ष थे। घुमंतू समाज से जुड़े ऐसे व्यक्तियों को, जो आगे चलकर इंदौर में उद्योग स्थापित कर चुके थे, उन्होंने आत्मीयता से संघकार्य से जोड़ा। दीपावली मिलन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने उद्योग जगत के लोगों को एकत्र किया और धीरे-धीरे उन्हें संघ की विचारधारा से परिचित कराया। यह उनके संबंध निर्माण की सहज और प्रभावी कार्यपद्धति का उदाहरण था।</p>
<p>उन्होंने महाकौशल में प्रांत प्रचारक के रूप में विनोद जी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि वे कार्यकर्ताओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील थे। किसी वरिष्ठ कार्यकर्ता का दायित्व बदलते समय उसकी भावनाओं और सक्रियता का ध्यान रखते थे, वहीं संगठन विरोधी गतिविधियों के मामलों में आवश्यक कठोर निर्णय लेने से भी पीछे नहीं हटते थे। उनका हृदय मातृवत कोमल था, लेकिन संगठन के हित में निर्णय लेते समय वे दृढ़ और अनुशासित रहते थे।</p>
<p>प्रयागराज कुंभ के दौरान लगभग एक माह तक उनकी सक्रियता का उल्लेख करते हुए गोरेलाल जी ने बताया कि वे वहां आने वाले पुराने कार्यकर्ताओं, साधु-संतों और पूर्व प्रचारकों के आतिथ्य तथा उनकी सक्रियता बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत रहे। उनकी चिंता रहती थी कि कोई भी पुराना कार्यकर्ता स्वयं को उपेक्षित या निष्क्रिय अनुभव न करे, बल्कि समाजकार्य में अपनी भूमिका निभाता रहे।</p>
<p>गोरेलाल जी ने अपनी अंतिम भेंट का उल्लेख करते हुए बताया कि देहावसान से चार दिन पूर्व बड़ौदा-मेरठ प्रवास के दौरान उनकी विनोद जी से मुलाकात हुई थी। अस्वस्थता के बावजूद उनके भीतर संकल्प और कार्य के प्रति समर्पण का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था। उज्जैन पहुंचने के लगभग 12 घंटे के भीतर उन्होंने देह त्याग दी। उनकी शवयात्रा के समय एक पुराने कार्यकर्ता के भावुक शब्दों को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि विनोद जी अनेक लोगों के लिए ऐसे आत्मीय आश्रय थे, जिनके सामने वे अपने मन की बात रख सकते थे और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते थे।</p>
<p>गोरेलाल जी ने कहा कि विनोद जी के व्यक्तित्व में मातृ-हृदय की करुणा, पितृ-हृदय की चिंता और गुरु-हृदय का मार्गदर्शन एक साथ दिखाई देता था। उनका जीवन आज के सामाजिक कार्यकर्ताओं को यह सिखाता है कि कितना बोलना चाहिए, क्या बोलना चाहिए और कैसा आचरण करना चाहिए।</p>
<p>श्रद्धांजलि सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं संघ प्रेरित संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और विनोद जी से आत्मीय संबंध रखने वाले अनेक लोगों ने भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किए। सभा के उपरांत सभी उपस्थितजनों ने मौन रखकर श्रद्धेय विनोद जी को नमन किया और उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व ग्रामीण जिला अध्यक्ष जगदीश शर्मा का निधन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Oct 2026 13:28:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[भाजपा ग्रामीण जिला अध्यक्ष जगदीश शर्मा निधन]]></category>
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					<description><![CDATA[पूर्व ग्रामीण जिला अध्यक्ष एवं पूर्व GDA अध्यक्ष जगदीश शर्मा का निधन ग्वालियर, 2 अक्टूबर 2026/भारतीय जनता पार्टी ग्वालियर के वरिष्ठ नेता पूर्व ग्रामीण जिला अध्यक्ष एवं पूर्व GDA अध्यक्ष श्री जगदीश शर्मा का शुक्रवार, 2 अक्टूबर  को दुःखद निधन हो गया। वे कुछ समय से बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे,उनके निधन की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पूर्व ग्रामीण जिला अध्यक्ष एवं पूर्व GDA अध्यक्ष जगदीश शर्मा का निधन<br />
ग्वालियर, 2 अक्टूबर 2026/भारतीय जनता पार्टी ग्वालियर के वरिष्ठ नेता पूर्व ग्रामीण जिला अध्यक्ष एवं पूर्व GDA अध्यक्ष श्री जगदीश शर्मा का शुक्रवार, 2 अक्टूबर  को दुःखद निधन हो गया। वे कुछ समय से बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे,उनके निधन की सूचना से परिजनों, परिचितों एवं शुभचिंतकों में शोक की लहर है।<br />
प्राप्त शोक संदेश के अनुसार, उनकी अंतिम यात्रा शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे उनके निज निवास बसंत विहार कॉलोनी, D-58/A4, पुराना सहारा हॉस्पिटल के पास से लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के लिए प्रस्थान करेगी।<br />
परिजनों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सभी शुभचिंतकों से अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील की है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्वयंसेवकों ने किया वीरांगना को नमन कृष्णा रावत बोलीं स्त्री अबला नहीं, सबला है</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:37:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस ग्वालियर]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर18 जून 2026/वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। कई महिलाएं कुछ कार्यों को पुरुषों का क्षेत्र मानती हैं, जबकि झांसी की रानी हर महिला के लिए साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण हैं। लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर18 जून 2026/वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। कई महिलाएं कुछ कार्यों को पुरुषों का क्षेत्र मानती हैं, जबकि झांसी की रानी हर महिला के लिए साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण हैं। लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र को पीठ पर बांधकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।<br />
यह बात कथा वाचक कृष्णा रावत ने लक्ष्मीबाई समाधि के सामने गुरुवार को लक्ष्मीबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ता की आसंदी से कही।</p>
<p style="text-align: center;"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64599" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047.jpg 1600w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-300x200.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-1024x682.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-768x512.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-1536x1023.jpg 1536w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-630x420.jpg 630w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-696x464.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-1068x712.jpg 1068w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महानगर ग्वालियर के तत्वावधान में वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी मंचासीन रहे। इस अवसर पर संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ.मनमोहन वैद्य भी विशेषरूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर स्वयंसेवकों ने झांसी की रानी को प्रणाम किया। मुख्य वक्ता सुश्री रावत ने रानी लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्त्री अबला नहीं सबला है। लक्ष्मीबाई इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं। उन्होंने परिवार के साथ समाज और देशहित में काम किया। रानी लक्ष्मीबाई का जीवन जोश, जज्बा और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण था। वे बचपन से ही घुड़सवारी और तलवारबाजी में निपुण थीं। जब अंग्रेजों ने दामोदर राव को दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार करने से इंकार करते हुए झांसी को अंग्रेजी शासन में मिलाने की घोषणा की, तब उन्होंने दृढ़ता से कहा था, ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।’ इसके बाद उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया। कृष्णा रावत ने कहा कि लक्ष्मीबाई केवल पराक्रमी योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल संगठक और दयालु व्यक्तित्व की धनी भी थीं। उनका संपूर्ण जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा तथा आज भी सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। अबला नहीं, सबला है; लक्ष्मीबाई इसका सर्वोत्तम उदाहरण : कृष्णा रावत<br />
-स्वयंसेवकों ने किया वीरांगना को प्रणाम<br />
ग्वालियर। वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। कई महिलाएं कुछ कार्यों को पुरुषों का क्षेत्र मानती हैं, जबकि झांसी की रानी हर महिला के लिए साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण हैं। लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र को पीठ पर बांधकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।<br />
यह बात कथा वाचक कृष्णा रावत ने लक्ष्मीबाई समाधि के सामने गुरुवार को लक्ष्मीबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ता की आसंदी से कही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महानगर ग्वालियर के तत्वावधान में वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी मंचासीन रहे। इस अवसर पर संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ.मनमोहन वैद्य भी विशेषरूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर स्वयंसेवकों ने झांसी की रानी को प्रणाम किया। मुख्य वक्ता सुश्री रावत ने रानी लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्त्री अबला नहीं सबला है। लक्ष्मीबाई इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं। उन्होंने परिवार के साथ समाज और देशहित में काम किया। रानी लक्ष्मीबाई का जीवन जोश, जज्बा और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण था। वे बचपन से ही घुड़सवारी और तलवारबाजी में निपुण थीं। जब अंग्रेजों ने दामोदर राव को दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार करने से इंकार करते हुए झांसी को अंग्रेजी शासन में मिलाने की घोषणा की, तब उन्होंने दृढ़ता से कहा था, ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।’ इसके बाद उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया। कृष्णा रावत ने कहा कि लक्ष्मीबाई केवल पराक्रमी योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल संगठक और दयालु व्यक्तित्व की धनी भी थीं। उनका संपूर्ण जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा तथा आज भी सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।</p>
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		<title>युवा समाजसेवी मनोज जायसवाल का हृदयाघात से आकस्मिक निधन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:08:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[हृदयाघात निधन]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर 15 जून 2026/दौलतगंज के प्रतिष्ठित यंग्स हिंद क्लब के सक्रिय युवा समाजसेवी मनोज जायसवाल का आज दोपहर अचानक हुए हृदयाघात से दुखद निधन हो गया। 55 वर्षीय मनोज जायसवाल धर्म और संस्कृति को समर्पित दौलतगंज के यंग्स हिंद क्लब की सभी गतिविधियों में बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी निभाते थे, गणेशउत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto">ग्वालियर 15 जून 2026/दौलतगंज के प्रतिष्ठित यंग्स हिंद क्लब के सक्रिय युवा समाजसेवी मनोज जायसवाल का आज दोपहर अचानक हुए हृदयाघात से दुखद निधन हो गया।</div>
<div dir="auto">55 वर्षीय मनोज जायसवाल धर्म और संस्कृति को समर्पित दौलतगंज के यंग्स हिंद क्लब की सभी गतिविधियों में बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी निभाते थे, गणेशउत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजनों में उनकी विशिष्ट भूमिका रहती थी।</div>
<div dir="auto">वे दो दिनों से दांत के मामूली दर्द से परेशान थे, सुबह ग्यारह बजे तक रोजाना की तरह दौलतगंज अपने निवास पर सबसे हंस बोल रहे थे तभी अचानक उन्हें हृदयाघात हुआ और उनका दुखद निधन हो गया। मिलनसार और हंसमुख व्यक्तित्व वाले युवा मनोज जायसवाल के आकस्मिक निधन के समाचार से दौलतगंज में शोक की लहर दौड़ गई है यंग्स हिंद क्लब से जुड़े उनके निकट सहयोगियों ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है यंग्स हिंद क्लब के चित्रगुप्त अष्ठाना व अन्य समाजसेवियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि</div>
<div dir="auto">उनका मिलनसार स्वभाव, समाज सेवा और क्लब के प्रति समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। उनके निधन से दौलतगंज क्षेत्र ने एक कर्मठ और सबके सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले व्यक्तित्व को खो दिया है। जानकारी के अनुसार मनोज जायसवाल की अंतिम यात्रा उनके दौलतगंज स्थित निवास से मंगलवार को प्रातः रवाना होगी</div>
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		<title>स्व. गंगाराम बांदिल कि 39वी पुण्यतिथि पर कल 2 जून को होगी श्रद्धांजलि सभा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:25:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[स्व. गंगाराम बांदिल श्रद्धांजलि सभा]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर। 1 जून।भारतीय जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल, प्रख्यात समाजसेवी एवं पूर्व विधायक श्रद्धेय स्वर्गीय श्री गंगाराम बांदिल जी की 39वीं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 2 जून, मंगलवार को प्रातः 8 बजे मुखर्जी भवन, भाजपा कार्यालय, महाराज बाड़ा में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर। 1 जून।भारतीय जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल, प्रख्यात समाजसेवी एवं पूर्व विधायक श्रद्धेय स्वर्गीय श्री गंगाराम बांदिल जी की 39वीं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 2 जून, मंगलवार को प्रातः 8 बजे मुखर्जी भवन, भाजपा कार्यालय, महाराज बाड़ा में आयोजित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64000" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1.jpg" alt="" width="1066" height="1599" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1.jpg 1066w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-200x300.jpg 200w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-683x1024.jpg 683w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-768x1152.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-1024x1536.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-280x420.jpg 280w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-696x1044.jpg 696w" sizes="(max-width: 1066px) 100vw, 1066px" /></p>
<p>इस अवसर पर भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित होकर स्वर्गीय गंगाराम बांदिल जी को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे तथा उनके समाज और संगठन के प्रति योगदान को स्मरण करेंगे।<br />
जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजोरिया ने सभी कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों से श्रद्धांजलि सभा में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रद्धेय गंगाराम बांदिल जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को नमन करने का आग्रह किया है।<br />
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन गंगाराम बांदिल सेवा संस्थान एवं भाजपा महानगर संगठन के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आमजन की उपस्थिति रहेगी।</p>
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		<title>28 मई 1883 दिवस विशेष :स्वत्ववोध पुनर्जागरण के लिये समर्पित स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी का जन्म</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 May 2026 10:50:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी का जन्म]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8211;रमेश शर्मा स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी ऐसे ही महान विभूति थे जिनके जीवन का प्रतिक्षण राष्ट्र और स्वत्व बोध कराने के लिये समर्पित रहा। वे संसार के एक मात्र ऐसे कैदी थे जिन्हें एक ही जीवन में दो आजीवन कारावास का दंड मिला। यह उनके संघर्ष और अंग्रेज सरकार द्वारा दी गई यातनाओं का ही कारण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">&#8211;रमेश शर्मा</p>
<p>स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी ऐसे ही महान विभूति थे जिनके जीवन का प्रतिक्षण राष्ट्र और स्वत्व बोध कराने के लिये समर्पित रहा। वे संसार के एक मात्र ऐसे कैदी थे जिन्हें एक ही जीवन में दो आजीवन कारावास का दंड मिला। यह उनके संघर्ष और अंग्रेज सरकार द्वारा दी गई यातनाओं का ही कारण था कि उन्हें समाज ने &#8220;स्वातंत्र्यवीर&#8221; जैसे गौरवमयी उपाख्य से सम्मानित किया। लेकिन उनका संघर्ष स्वतंत्रता के बाद भी कम न हुआ। उन्हें गाँधीजी की हत्या के झूठे आरोप में बंदी बनाया गया। यद्यपि फरवरी 49 में अदालत ने उन्हें सम्मान दोषमुक्त कर दिया था लेकिन षड्यंत्र के अंतर्गत उन्हें पूरे जीवन प्रताड़ित किया गया।<br />
भारतीय स्वाभिमान और स्वातंत्र्य वोध जागरण केलिए यूँ तो करोड़ों महापुरुषों के जीवन का बलिदान हुआ है किन्तु उनमें कुछ ऐसे हैं जिनके जीवन की प्रत्येक श्वाँस राष्ट्र के लिये समर्पित रही। सावरकरजी पहले ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक व्यक्त क्यों करें? सावरकरजी पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ..! 7 अक्टूबर 1905 को पूना में सावरकर जी ने ही विदेशी वस्त्रों की पहली होली जलाई थी…! उनके द्वारा विदेशी वस्त्रों का दहन करने पर तिलक जी ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी सावरकरजी द्वारा आरंभ की गई विदेशी वस्त्र दहन के इसी मार्ग पर गाँधीजी भी चले और 11 जुलाई 1921 को मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया गया। उनके द्वारा आरंभ स्वत्व जागरण अभियान से क्रोधित होकर 1905 में उन्हें पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया था। इसके विरोध में हड़ताल हुई। इस घटना पर भी तिलकजी ने अपने समाचार पत्र ‘केसरी’ में सम्पादकीय लिखा था। स्वातंत्र्यवीर सावरकर पहले ऐसे विचारक थे जिन्होंने 1857 की क्राँति को पहला स्वातंत्र्य समर माना और एक ग्रंथ की रचना की। उनसे पहले सब इसे एक विद्रोह लिखा करते थे। यह पहला ऐसा ग्रंथ था जिसपर प्रकाशन से पहले प्रतिबंध लगा दिया गया था। स्वातंत्र्यवीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र में कूद पड़े थे। उन्होंने तैरकर इंग्लिश चैनल पार किया और फ्रांस पहुँच गए थे। वे पहले ऐसे राजनैतिक बंदी थे जिन्होंने अंडमान की काला पानी जेल में 10 साल से भी अधिक समय यातनाएँ सहीं। उन्हें कोल्हू में प्रतिदिन 30 पोंड तेल निकालना होता था। उन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकर कोयले से कवितायें लिखीं और 6000 पंक्तियाँ याद कीं। उनकी कोठरी 7 X 11 आकार की थी। मौसम गर्मी का हो या सर्दी का उन्हें जमीन पर ही सोना होता था । इसी कोठरी कोने में शौच और पेशाब करना होती । और इसी में भोजन करना होता था । हाथ में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियाँ लगी होती थीं। उसी स्थिति में जो और जैसा मिले, वही भोजन करना होता था । उन्हें प्रतिदिन बैल की भाँति कोल्हू में जोता जाता था। यदि तेल निकालने की मात्रा कम हो तो पिटाई होती थी। भोजन नहीं दिया जाता था। उसी जेल में उनके भाई भी थे पर दोनों भाई एक दूसरे से मिलना तो दूर देख भी नहीं सकते थे। पूरी जेल में सावरकर जी एकमात्र ऐसे कैदी थे, जिनके गले में अंग्रेजों ने एक पट्टी लटका रखी थी । इस पर &#8220;D&#8221; लिखा था । &#8220;D&#8221; अर्थात डेंजरस। यातनाएँ देने का यह चक्र चला लगभग ग्यारह वर्ष चला । इतनी यातनाएँ देने का कारण यह था कि पूना से लेकर लंदन तक उनके जीवन का कोई क्षण ऐसा नहीं बीता जब उन्होंने अंग्रेजों से भारत की मुक्ति का कोई उपक्रम न किया हो । स्वातंत्र्यवीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में आयोजित शोक सभा का विरोध किया था और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें? वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि दासता का उत्सव मत मनाओ..! उन्होंने 7 अक्टूबर 1905 को पूना में स्वदेशी अपनाओ आंदोलन छेड़ा और विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी । यह सावरकर जी द्वारा स्वाभिमान और स्वतव जागरण केलिए किये जाने वाले कार्यों का ही प्रभाव था कि तिलक जी ने अपने समाचार पत्र &#8220;केसरी&#8221; में सावरकर जी को छत्रपति शिवाजी महाराज के समान बताकर प्रशंसा की थी । सावरकर जी द्वारा विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के कारण उन्हे फर्म्युसन कॉलेज पुणे से निकाल दिया गया था । इसके विरोध में छात्रों ने हड़ताल की । इस समूची घटना पर तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर जी के पक्ष में सम्पादकीय लिखा । वे पहले ऐसे बैरिस्टर थे जिन्होंने ब्रिटेन में परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफ़ादार होने की शपथ लेने से इंकार कर दिया था । इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नहीं मिला । यह घटना 1909 की है । वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे जिनकी पुस्तक &#8220;1857 का स्वातंत्र्य समर’ पर प्रकाशन के पहले ही प्रतिबंध लगा । वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे । लेकिन तट पर बंदी बना लिये गये । सावरकर जी पहले ऐसे क्रान्तिकारी थे जिनका मुकद्दमा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला। वे भारत के पहले क्राँतिकारी थे जिन्हें अंग्रेजी काल में दो आजन्म कारावास की सजा सुनाई गई। दो जन्म कारावास की सजा सुनते ही हंसकर बोले, “चलो, ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया&#8221; ।<br />
वे अंग्रेजी सत्ता काल में लगभग 30 वर्षों तक विभिन्न जेलों में रहे और स्वतंत्रता के बाद भी 1948 में गाँधीजी की हत्या के आक्षेप में पुनः गिरफ्तार हुये और न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा हुये लेकिन 4 अप्रैल 1950 को पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री लियाक़त अली ख़ान के दिल्ली आगमन पर पुनः उन्हें बेलगाम जेल में रोका गया। मई 1952 में पुणे की एक विशाल सभा में उन्होंने अभिनव भारत संगठन को भंग किया गया। 10 नवम्बर 1957 को नई दिल्ली में आयोजित भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम समारोह में वे मुख्य वक्ता रहे। 8 अक्टूबर 1949 को उन्हें पुणे विश्वविद्यालय ने डी०लिट० की मानद उपाधि से अलंकृत किया। 8 नवम्बर 1963 को उनकी पत्नी यमुनाबाई का निधन हुआ। सितम्बर, 1965 से उन्हें तेज ज्वर ने आ घेरा, जिसके बाद इनका स्वास्थ्य गिरने लगा। एक फरवरी 1966 को उन्होंने मृत्युपर्यन्त उपवास करने का निर्णय लिया और 26 फरवरी 1966 को बम्बई में प्रातः 10 बजे पार्थिव शरीर त्यागकर परमधाम को प्रस्थान किया ।<br />
सावरकर जी ने भारत की आज की सभी राष्ट्रीय सुरक्षा सम्बन्धी समस्याओं को बहुत पहले ही भाँप लिया था। 1962 में चीन द्वारा आक्रमण करने के लगभग दस वर्ष पहले ही उन्होंने देश को सतर्क कर दिया था कि चीन भारत पर आक्रमण करने वाला है। भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद गोवा की मुक्ति की आवाज सबसे पहले सावरकर जी ने ही उठायी थी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पूर्व विधायक समाजसेवी स्व. गंगाराम बांदिल की 39वीं श्रद्धांजलि सभा 2 जून को</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 16:48:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[पूर्व विधायक श्रद्धेय स्व. श्री गंगाराम बांदिल 39वीं श्रद्धांजलि सभा]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर27 मई 2026/जनसंघ एवं भाजपा के संस्थापक सदस्य, समाजसेवी एवं पूर्व विधायक श्रद्धेय स्व. श्री गंगाराम बांदिल जी की 39वीं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 2 जून 2026, मंगलवार को प्रातः 8 बजे किया जाएगा। यह श्रद्धांजलि सभा मुखर्जी भवन, भाजपा कार्यालय, महाराज बाड़ा, ग्वालियर में आयोजित होगी। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, समाजसेवी एवं गणमान्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर27 मई 2026/जनसंघ एवं भाजपा के संस्थापक सदस्य, समाजसेवी एवं पूर्व विधायक श्रद्धेय स्व. श्री गंगाराम बांदिल जी की 39वीं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 2 जून 2026, मंगलवार को प्रातः 8 बजे किया जाएगा।<br />
यह श्रद्धांजलि सभा मुखर्जी भवन, भाजपा कार्यालय, महाराज बाड़ा, ग्वालियर में आयोजित होगी। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित होकर स्व. बांदिल जी को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।</p>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64000" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1.jpg" alt="" width="1066" height="1599" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1.jpg 1066w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-200x300.jpg 200w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-683x1024.jpg 683w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-768x1152.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-1024x1536.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-280x420.jpg 280w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-696x1044.jpg 696w" sizes="(max-width: 1066px) 100vw, 1066px" /></p>
<p>कार्यक्रम के संबंध में भाजपा ग्वालियर महानगर जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया एवं गंगाराम बांदिल सेवा संस्थान के सचिव अशोक बांदिल ने अधिक से अधिक लोगों से उपस्थित होने की अपील की है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग के पूर्व संघचालक राष्ट्रोत्थान न्यास तथा सेवाभारती के महानगर अध्यक्ष प्रसिद्ध समाजसेवी रेडियेंट स्कूल के संचालक विजय जी गुप्ता का दुखद निधन</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98-22/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 17:05:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[विजय गुप्ता निधन]]></category>
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					<description><![CDATA[अंतिम यात्रा निज निवास &#8211; नया बाजार से प्रातः 10:30 बजे लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के लिए प्रस्थान करेगी ग्वालियर 19 अप्रैल 2026/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग के पूर्व संघचालक राष्ट्रोत्थान न्यास के अध्यक्ष तथा सेवाभारती के महानगर अध्यक्ष प्रसिद्ध समाजसेवी रेडियेंट स्कूल के संचालक  विजय जी गुप्ता अब हमारे बीच नहीं रहे आज शाम ह्रदय गति [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto"><strong><span style="color: #000000;">अंतिम यात्रा निज निवास &#8211; नया बाजार से प्रातः 10:30 बजे लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के लिए प्रस्थान करेगी</span></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">ग्वालियर 19 अप्रैल 2026/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग के पूर्व संघचालक राष्ट्रोत्थान न्यास के अध्यक्ष तथा सेवाभारती के महानगर अध्यक्ष प्रसिद्ध समाजसेवी रेडियेंट स्कूल के संचालक  विजय जी गुप्ता अब हमारे बीच नहीं रहे आज शाम ह्रदय गति रुक जाने से उनका दुखद निधन हो गया। उनको उज्जैन से ग्वालियर लौटते समय अचानक हृदयाघात हुआ और ज्यादा तबियत बिगड़ने के बाद  उनका निधन हो गया।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">मृदभाषी तथा संगठननिष्ठ व्यक्तित्व के धनी 70 वर्षीय श्री विजयजी गुप्ता के आकस्मिक निधन का समाचार सुनकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित उनके तमाम शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">आपकी  अंतिम यात्रा निज निवास &#8211; नया बाजार से प्रातः 10:30 बजे लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के लिए प्रस्थान करेगी।शब्दशक्ति न्यूज़ परिवार विजयजी के आकस्मिक निधन पर गहन दुख व्यक्त करता है और उन्हें अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करता है ॐ शांति</div>
<div dir="auto"></div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुरु तेग बहादुर शहदी दिवस पर विशेष : शीश कटा दिया पर कबूल नहीं किया इस्लाम</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%97-%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%87/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Nov 2025 08:02:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
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		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु तेग बहादुर]]></category>
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					<description><![CDATA[मनीष उपाध्याय &#160; औरंगजेब ने बादशाह बनते ही 1661 में मंदिरों पर ताले लगा दिए और कहा यह इमारतें पुरानी हो गई है इस कारण इन मंदिरों को बंद किया जाता है । कई सालों तक ताले लगे रहने के बाद जब कोई नहीं बोला तब औरंगजेब ने 1674 में मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनवाने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59480" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009.jpg" alt="" width="739" height="1021" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009.jpg 739w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009-217x300.jpg 217w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009-304x420.jpg 304w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009-696x962.jpg 696w" sizes="auto, (max-width: 739px) 100vw, 739px" /></p>
<p style="text-align: center;">मनीष उपाध्याय</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>औरंगजेब ने बादशाह बनते ही 1661 में मंदिरों पर ताले लगा दिए और कहा यह इमारतें पुरानी हो गई है इस कारण इन मंदिरों को बंद किया जाता है । कई सालों तक ताले लगे रहने के बाद जब कोई नहीं बोला तब औरंगजेब ने 1674 में मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनवाने के आदेश दे दिए हिंदुओं को मुसलमान बनाने के लिए प्रलोभन के साथ-साथ अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया ।<br />
जो लोग हिंदू धर्म नहीं छोड़ते उनकी बहन बेटियों को उठाकर ले जाते और पुरुषों का बच्चों का बेरहमी से कत्ल करते थे । हिंदुओं के प्रमुख लोगों को मुसलमान बनाने के लिए औरंगजेब ने पूरी ताकत लगा दी उसने आदेश दिया कि उनके बड़े-बड़े मंदिरों को तीर्थ स्थलों को तोड़ा जाए और पहले ब्राह्मणों को मुसलमान बनाया जाए । औरंगजेब से काजियों ने कहा कि कश्मीरी पंडित हिन्दुओ में सबसे ज्यादा सम्मानित है और अगर इनको पहले मुसलमान बना दिया जाए तो हिंदुस्तान में सभी हिंदू मुस्लिम बन जाएंगे । काजी-मौलवी की यह सलाह के कारण कश्मीरी पंडितों पर बहुत ज्यादा शक्ति होने लगी । कश्मीरीयो के घर धन दौलत तथा उनकी महिलाओं को बलात कब्जा कर लिया गया उन पर भयावह अत्याचार होने लगे । तब कश्मीरी पंडितों ने सलाह करके कश्मीर के सूबेदार से कहा कि हमको सोचने समझने के लिए 6 महीने का समय दिया जाये । इसमें हम इस्लाम स्वीकार कर लेंगे या जो सजा मिलेगी उसे स्वीकार करेंगे । पंडितों की इस सलाह को सूबेदार ने मान लिया । कश्मीरी ब्राह्मण विचार करने लगे की इस संकट से कैसे बचा जाए तब एक पंडित कृपाराम ने सलाह दी इस समय किसी महापुरुष या संत की सहायता ली जाए तभी हम बच पाएंगे तब गुरु नानक देव की गद्दी का उन्हें ध्यान आया कि उन गुरुओं मैं ही जुल्म से टक्कर लेने की समर्थ है । उसे गद्दी पर अभी नवे गुरु तेज बहादुर जी विराजित है वही हमारी फरियाद सुनेंगे और अपनी शक्ति और भक्ति के साथ औरंगजेब के जुल्म को रोकेंगे ।<br />
इस तरह सभी कश्मीरी पंडित आनंदपुर साहिब गुरुजी के दरबार में पहुंच गए गुरु जी से विनती कर अपनी आपबीती सुनाई और जालिम औरंगजेब के जुल्म से रक्षा करने का अनुनय विनय किया । कश्मीरी पंडितों ने कहा कि हमको 6 माह में मुसलमान बनना पड़ेगा या हमें कत्ल कर दिया जाएगा ।<br />
कश्मीरी पंडितों की यह दुख भरी व्यथा सुनकर गुरु तेग बहादुर जी खामोश होकर कुछ सोचने लगे गुरुजी गहरी सोच में डुबे हुए थे कि उनके साहिबजादे गोविंद राय जी ने कहा पिताजी आप क्या सोच रहे हैं तब अपने बेटे को कश्मीरी पंडितों की पूरी घटना बताई और कहा कि उनकी रक्षा के लिए किसी महापुरुष को बलिदान देना पड़ेगा । पिताजी के मुख से यह बात सुनकर साहिबजादे ने कहा कि इस समय आपकी तुलना में और कौन महापुरुष है जो इनकी रक्षा कर सके आप ही किसी तरह इनकी रक्षा करें । अपने दिलेर पुत्र की बात सुनकर गुरुजी ने कश्मीरी पंडितों से कहा की जाकर औरंगज़ेब से कहो कि अगर अनंतपुर वासी हमारे गुरु तेग बहादुर जी को मुसलमान बना देगा तो हम सब मुस्लिम बन जाएंगे ।<br />
औरंगजेब ने जैसे ही यह सुना तो सोचा की एक व्यक्ति को मुसलमान बनने से अगर सभी हिंदू मुसलमान बन जाएंगे तो हमें और क्या चाहिए । इस कारण गुरु तेग बहादुर को हर हालत में इस्लाम में लाना जरूरी है । गुरुजी ने औरंगजेब के पास दिल्ली जाने की तैयारी कर ली और अपने साथ छः सिखों को ले लिया और गुरुगद्दी अपने पुत्र गोविंद राय को सौंप दी ।<br />
गुरु जी के दिल्ली जाने की तैयारी कि जानकारी जब लोगो को लगी तो बड़ी संख्या में सिख वहां पहुंच गए उन्होंने गुरुजी के साथ चलने की अनुमति मांगी तब गुरु जी ने धरती पर लकीर खींच दी और कहा कि कोई सिख इस लकीर के आगे नहीं आएगा और गुरु गोविंद राय का ख्याल सभी ने रखना है और उनकी आज्ञा का पालन करने को कहा ।<br />
विदाई के समय गुरु गोविंद राय को अपनी बाहों में कस लिया तब माता नानकी जी ने उदासी दिखाई तो गुरु तेग बहादुर जी ने संदेश दिया कि इस जगत में कोई भी सदा नहीं रहा है और ना ही रहेगा शरीरों का रिश्ता सदा कायम नहीं रहता प्रभु का सिमरन करें ।<br />
गुरुजी दिल्ली के लिए अपने साथ 6 सिख भाइयों को साथ लेकर निकले । जिसमें भाई दयाल जी भाई मतीदास जी भाई सतीश दास जी भाई गुरु दत्ता जी भाई जयेता जी भाई उदय चंद जी जो इतिहास में अमर हैं ।<br />
दिल्ली में क्रूर औरंगजेब ने गुरु जी के साथ भाई दयाल जी भाई मतीदास जी भाई सती दास जी को कैद कर लिया । दिल्ली जाते समय गुरु तेग बहादुर जी ने भाई गुरुदत्ता भाई उदय चंद जी को आगरे में ही रोक दिया था । जिससे सारी जानकारी वह अनंतपुर पहुंचते रहे । उसके बाद में यह दोनों भी दिल्ली पहुंचकर भाई जयता जी के पास ठहर गए ।<br />
गुरु जी के कैद होने पर औरंगजेब ने उनके पास लिखित हुकुम देकर भेजा ।काजी ने गुरुजी से कहा की आप सच्चे पीर हैं तो कोई करामात दिखाओ वर्ना मुसलमान बनो । अगर यह बात स्वीकार नहीं है तो फिर कत्ल होने को तैयार रहो । गुरु तेग बहादुर जी ने फरमाया<br />
* करामत नाम कहर का है जिसे करने में रब के वंदे को शर्म आती है ।<br />
* परमात्मा ने हमें जिस धर्म में पैदा किया है उसे छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाना बहुत बड़ा गुनाह है हम अपने धर्म में ही जीयेंगे अपने धर्म में ही मरेंगे ।<br />
* कत्ल हमें होना खुशी-खुशी स्वीकार है यह सारा जगत ही मुसाफिरखाना है यहां हमेशा किसी को भी नहीं रहना हमें मौत का क्या डर ।<br />
गुरु जी की यह बातें सुनकर उन्हें छोटी कोठरी में कैद किया गया भूखे प्यासे रखा गया । कई प्रकार की यातनाएं दी गई । उसके बाद उनके तीनों सिखों को उनके सामने ही भयानक यातनाएं देकर कत्ल किया गया ताकि उनकी दर्दनाक मौत देखकर गुरुजी धर्म परिवर्तन कर ले ।<br />
सन 1675 में भाई मती दास जी को लकड़ी के बड़े टुकड़ों में बांधकर आरे से दो फाड़ किया गया ।<br />
भाई दयाल जी को उबलते हुए पानी में बिठाकर बलिदान किया ।<br />
भाई सती दास को रुई में लपेटकर आज के हवाले कर दिया गया ।<br />
आखरी सांस तक यह तीनों भाई पाठ करते रहे और मुंह से आह भी नहीं ।<br />
इस प्रकार तीनों भाइयों के बलिदान के बाद क्रूर औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को कत्ल करने का हुक्म जारी किया । उसने पूरे शहर में मुनादी पिटवाया के हिंदुओं के पीर का बीच बाजार कत्ल किया जाएगा ।<br />
काजी ने फिर से गुरु जी को इस्लाम स्वीकार करने को कहा तब गुरु जी ने कठोर शब्दों में इस्लाम स्वीकार करने से मना कर दिया और कहा हम अपने धर्म में ही कत्ल होने को तैयार हैं ।<br />
अगले दिन 24 नवंबर 1675 को कोतवाली से बाहर गुरु जी की इच्छा अनुसार स्नान कराया उसके बाद गुरु जी ने पाठ का भोग करके प्रभु को नमस्कार किया । जल्लाद जलालुद्दीन ने उनके शीश को धड़ से अलग कर दिया । हजारों लोगों की भीड़ ने जब यह नजारा देखा तो चारों तरफ हाहाकार मच गया । हिंदुओं के मन में इन मुस्लिम आतताइयों ने इतनी दहशत भर दी कोई भी गुरु जी का शीश और धड़ उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता था । इसी समय भयानक तूफान आ गया चारों तरफ दिन में अंधेरा हो गया ।<br />
गुरुजी के तीनों खास सेवक भी इस भीड़ में थे वह गुरु जी के बलिदान को अपनी आंखों से देख रहे थे गुरु जी का शीश व धड़ जमीन पर पड़ा था । भाई जयेता जी ने तूफान आने पर अंधेरे को देखकर भाई उदय चंद को इशारा किया भाई उदय चंद चादर लेकर उसके पीछे हो लिया और शीश को चादर में लपेट लिया दोनों बचकर अनंतपुर साहब आ गए । इसी समय गुरुघर का सेवक लखीशाह बंजारा जो मुगल फौजी का ठेकेदार था । किले में सामान रखकर अपनी खाली बैलगाड़ी को लेकर घर जा रहा था उसने गुरु जी के धड़ को जमीन पर पड़ा देखा तो अपने पुत्र व भाई की सहायता से उसे धड़ को अपनी बैलगाड़ी पर रख लिया और घर जाकर घर को ही आग लगाकर गुरु जी का अंतिम संस्कार किया । जिससे मुगल फौज को शंका न हो सके । आज उसी स्थान पर गुरुद्वारा रकाबगंज बना है<br />
भाई जयेता जी ने गुरुजी के पावन शीश को अनंतपुर साहब पहुंच कर बेटे गोविंद राय जी की झोली में डाल दिया । वहां पर चंदन की लकड़ी से चिता तैयार कर बड़े संस्कार से गुरु तेग बहादुर जी के पवन शीश का संस्कार किया गया।<br />
जहां गुरु जी का शीश धड़ से अलग किया गया वहां दिल्ली के चांदनी चौक में गुरुद्वारा शीशगंज साहिब बना है ।<br />
वर्तमान परिस्थितियों में हमको गुरु जी के बलिदान को याद कर उनके बताए मार्ग पर चलते हुए धर्म की रक्षा करने का संकल्प ले यही गुरु को सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।</p>
<p><strong>     लेखक पूर्णकालिक सामाजिक कार्यकर्त्ता हैं           </strong></p>
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		<title>भाऊ साहब राजनीति में आदर्शवाद की जीवंत मूर्ति थे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 17:29:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[भाऊ साहब पोतनीस]]></category>
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					<description><![CDATA[भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व भाऊ साहब पोतनीस की पुण्यतिथि पर भाजपाजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की ग्वालियर 11 नवंबर202 /भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व महापौर, पूर्व विधायक एवं भाजपा के प्रदेश महामंत्री स्व. श्री रघुनाथ शंकर भाऊसाहब पोतनीस की 24वीं पुण्यतिथि पर भाजपा कार्यालय मुखर्जी भवन पर पुण्य स्मरण दिवस पर भाजपाजनों द्वारा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व भाऊ साहब पोतनीस की पुण्यतिथि पर भाजपाजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की</strong></p>
<p>ग्वालियर 11 नवंबर202 /भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व महापौर, पूर्व विधायक एवं भाजपा के प्रदेश महामंत्री स्व. श्री रघुनाथ शंकर भाऊसाहब पोतनीस की 24वीं पुण्यतिथि पर भाजपा कार्यालय मुखर्जी भवन पर पुण्य स्मरण दिवस पर भाजपाजनों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई है।<br />
पूर्व सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर भाऊसाहब पोतनीस का पुण्य संस्मरणों को सुनाते हुए कहा कि भाऊ साहब पोतनीस जी कार्यकर्ताओं से जीवांत संपर्क किया करते थे। वे कार्यकर्ताओं का हालचाल जानने अपने दोपहिया गाड़ी उनके घर सहज ही पहुंच जाया करते थे।</p>
<p style="text-align: center;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59189" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019.jpg" alt="" width="1280" height="650" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019.jpg 1280w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-300x152.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-1024x520.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-768x390.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-827x420.jpg 827w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-696x353.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-1068x542.jpg 1068w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /> <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59190" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1928" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-scaled.jpg 2560w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-300x226.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1024x771.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-768x578.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1536x1157.jpg 1536w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-2048x1542.jpg 2048w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-558x420.jpg 558w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-80x60.jpg 80w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-696x524.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1068x804.jpg 1068w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1920x1446.jpg 1920w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p>श्री शेजवलकर ने कहा कि भाऊसाहब को जब महापौर का चुनाव लड़ने की बात आयी तो तब वे चुनाव लड़ने को तैयार नहीं थे। वे निस्वार्थ रूप से राजनीति में पार्टी का कार्य किया करते थे। उन्होंने कहा कि मैं राजनीति में देरी से आया किंतु पार्टीजनों के कार्य में मदद किया करता था।<br />
उन्होंने कहा कि पोतनीस जी संगठन मंत्री की भूमिका में रहा करते थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि विपक्षी भी उनकी स्वच्छ और ईमानदार छवि पर प्रश्न नहीं उठा पाएं।<br />
श्री शेजवलकर ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि हम राजनीति में काम करना चाहते हैं तो भाऊसाहब पोतनीस की तरह काम करें।<br />
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्री वेदप्रकाश शर्मा ने कहा कि भाऊ साहब पार्टी के प्रति समर्पित थे, किन्तु वे कार्यकर्ताओं के प्रति भी समर्पित थे। भाऊ साहब राजनीति में आदर्शवाद की जीवंत मूर्ति थे। उन्होंने कहा कि भाउसाहब पोतनीस जब विधायक थे, उनसे कार्यकर्ता मिलने भोपाल जाया करते थे। उस दौरान पोतनीस जी मिलने आने कार्यकर्ताओं को बिस्तर पर और स्वयं धरती पर चटाई बिछाकर सो जाया करते थे। वहीं वे सुबह उठकर स्वयं कार्यकर्ताओं के लिए चाय बनाकर पिलाया करते थे।<br />
डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भवन ट्रस्ट के सचिव एवं भाऊसाहब के साथी वेद्य गजेन्द्र गडकर ने कहा कि भाउसाहब को 1986 में जब उन्हें महापौर बनाने की बात आई, तब वे बहुत रोए। उन्होंने कहा कि आपने मुझे कहां फंसा दिया।<br />
इस अवसर पर श्री विवेक जोशी, श्री अजित बरैया ने भी संस्मरण रखे।<br />
इस अवसर पर भाजपा प्रदेश सह मीडिया प्रभारी जवाहर प्रजापति, जिला महामंत्रीद्वय विनय जैन, राजू पलैया, भाजपा वरिष्ठ नेता निर्मल कोठारी, जीडीए के पूर्व अध्यक्ष रविन्द्रसिंह राजपूत, पूर्व सभापति राकेश माहौर, अशोक बांदिल,रमेश सेन, हासानंद आहूजा, ओमप्रकाश जाजौरिया, वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण दुबे, मंगेश पोतनीस, गोपाल गांगिल, राजेन्द्रसिंह कुशवाह, भारत शाक्य, हरीदास अग्रवाल,गौरव वाजपेयी, अमर कुटे, विनोद अष्टैया, डालचंद वर्मा, मनोज मुटाटकर, विवेक पोतनीस, संतोष गोडयाले, अशोक सहगल, किशोर जैन, ओमप्रकाश धनौल, अजय महेन्द्रू, सीताराम बघेल सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।</p>
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