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	<title>श्रद्धाजंलि &#8211; Shabd Shakti News</title>
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		<title>गुरु तेग बहादुर शहदी दिवस पर विशेष : शीश कटा दिया पर कबूल नहीं किया इस्लाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Nov 2025 08:02:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
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		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु तेग बहादुर]]></category>
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					<description><![CDATA[मनीष उपाध्याय &#160; औरंगजेब ने बादशाह बनते ही 1661 में मंदिरों पर ताले लगा दिए और कहा यह इमारतें पुरानी हो गई है इस कारण इन मंदिरों को बंद किया जाता है । कई सालों तक ताले लगे रहने के बाद जब कोई नहीं बोला तब औरंगजेब ने 1674 में मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनवाने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59480" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009.jpg" alt="" width="739" height="1021" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009.jpg 739w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009-217x300.jpg 217w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009-304x420.jpg 304w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009-696x962.jpg 696w" sizes="(max-width: 739px) 100vw, 739px" /></p>
<p style="text-align: center;">मनीष उपाध्याय</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>औरंगजेब ने बादशाह बनते ही 1661 में मंदिरों पर ताले लगा दिए और कहा यह इमारतें पुरानी हो गई है इस कारण इन मंदिरों को बंद किया जाता है । कई सालों तक ताले लगे रहने के बाद जब कोई नहीं बोला तब औरंगजेब ने 1674 में मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनवाने के आदेश दे दिए हिंदुओं को मुसलमान बनाने के लिए प्रलोभन के साथ-साथ अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया ।<br />
जो लोग हिंदू धर्म नहीं छोड़ते उनकी बहन बेटियों को उठाकर ले जाते और पुरुषों का बच्चों का बेरहमी से कत्ल करते थे । हिंदुओं के प्रमुख लोगों को मुसलमान बनाने के लिए औरंगजेब ने पूरी ताकत लगा दी उसने आदेश दिया कि उनके बड़े-बड़े मंदिरों को तीर्थ स्थलों को तोड़ा जाए और पहले ब्राह्मणों को मुसलमान बनाया जाए । औरंगजेब से काजियों ने कहा कि कश्मीरी पंडित हिन्दुओ में सबसे ज्यादा सम्मानित है और अगर इनको पहले मुसलमान बना दिया जाए तो हिंदुस्तान में सभी हिंदू मुस्लिम बन जाएंगे । काजी-मौलवी की यह सलाह के कारण कश्मीरी पंडितों पर बहुत ज्यादा शक्ति होने लगी । कश्मीरीयो के घर धन दौलत तथा उनकी महिलाओं को बलात कब्जा कर लिया गया उन पर भयावह अत्याचार होने लगे । तब कश्मीरी पंडितों ने सलाह करके कश्मीर के सूबेदार से कहा कि हमको सोचने समझने के लिए 6 महीने का समय दिया जाये । इसमें हम इस्लाम स्वीकार कर लेंगे या जो सजा मिलेगी उसे स्वीकार करेंगे । पंडितों की इस सलाह को सूबेदार ने मान लिया । कश्मीरी ब्राह्मण विचार करने लगे की इस संकट से कैसे बचा जाए तब एक पंडित कृपाराम ने सलाह दी इस समय किसी महापुरुष या संत की सहायता ली जाए तभी हम बच पाएंगे तब गुरु नानक देव की गद्दी का उन्हें ध्यान आया कि उन गुरुओं मैं ही जुल्म से टक्कर लेने की समर्थ है । उसे गद्दी पर अभी नवे गुरु तेज बहादुर जी विराजित है वही हमारी फरियाद सुनेंगे और अपनी शक्ति और भक्ति के साथ औरंगजेब के जुल्म को रोकेंगे ।<br />
इस तरह सभी कश्मीरी पंडित आनंदपुर साहिब गुरुजी के दरबार में पहुंच गए गुरु जी से विनती कर अपनी आपबीती सुनाई और जालिम औरंगजेब के जुल्म से रक्षा करने का अनुनय विनय किया । कश्मीरी पंडितों ने कहा कि हमको 6 माह में मुसलमान बनना पड़ेगा या हमें कत्ल कर दिया जाएगा ।<br />
कश्मीरी पंडितों की यह दुख भरी व्यथा सुनकर गुरु तेग बहादुर जी खामोश होकर कुछ सोचने लगे गुरुजी गहरी सोच में डुबे हुए थे कि उनके साहिबजादे गोविंद राय जी ने कहा पिताजी आप क्या सोच रहे हैं तब अपने बेटे को कश्मीरी पंडितों की पूरी घटना बताई और कहा कि उनकी रक्षा के लिए किसी महापुरुष को बलिदान देना पड़ेगा । पिताजी के मुख से यह बात सुनकर साहिबजादे ने कहा कि इस समय आपकी तुलना में और कौन महापुरुष है जो इनकी रक्षा कर सके आप ही किसी तरह इनकी रक्षा करें । अपने दिलेर पुत्र की बात सुनकर गुरुजी ने कश्मीरी पंडितों से कहा की जाकर औरंगज़ेब से कहो कि अगर अनंतपुर वासी हमारे गुरु तेग बहादुर जी को मुसलमान बना देगा तो हम सब मुस्लिम बन जाएंगे ।<br />
औरंगजेब ने जैसे ही यह सुना तो सोचा की एक व्यक्ति को मुसलमान बनने से अगर सभी हिंदू मुसलमान बन जाएंगे तो हमें और क्या चाहिए । इस कारण गुरु तेग बहादुर को हर हालत में इस्लाम में लाना जरूरी है । गुरुजी ने औरंगजेब के पास दिल्ली जाने की तैयारी कर ली और अपने साथ छः सिखों को ले लिया और गुरुगद्दी अपने पुत्र गोविंद राय को सौंप दी ।<br />
गुरु जी के दिल्ली जाने की तैयारी कि जानकारी जब लोगो को लगी तो बड़ी संख्या में सिख वहां पहुंच गए उन्होंने गुरुजी के साथ चलने की अनुमति मांगी तब गुरु जी ने धरती पर लकीर खींच दी और कहा कि कोई सिख इस लकीर के आगे नहीं आएगा और गुरु गोविंद राय का ख्याल सभी ने रखना है और उनकी आज्ञा का पालन करने को कहा ।<br />
विदाई के समय गुरु गोविंद राय को अपनी बाहों में कस लिया तब माता नानकी जी ने उदासी दिखाई तो गुरु तेग बहादुर जी ने संदेश दिया कि इस जगत में कोई भी सदा नहीं रहा है और ना ही रहेगा शरीरों का रिश्ता सदा कायम नहीं रहता प्रभु का सिमरन करें ।<br />
गुरुजी दिल्ली के लिए अपने साथ 6 सिख भाइयों को साथ लेकर निकले । जिसमें भाई दयाल जी भाई मतीदास जी भाई सतीश दास जी भाई गुरु दत्ता जी भाई जयेता जी भाई उदय चंद जी जो इतिहास में अमर हैं ।<br />
दिल्ली में क्रूर औरंगजेब ने गुरु जी के साथ भाई दयाल जी भाई मतीदास जी भाई सती दास जी को कैद कर लिया । दिल्ली जाते समय गुरु तेग बहादुर जी ने भाई गुरुदत्ता भाई उदय चंद जी को आगरे में ही रोक दिया था । जिससे सारी जानकारी वह अनंतपुर पहुंचते रहे । उसके बाद में यह दोनों भी दिल्ली पहुंचकर भाई जयता जी के पास ठहर गए ।<br />
गुरु जी के कैद होने पर औरंगजेब ने उनके पास लिखित हुकुम देकर भेजा ।काजी ने गुरुजी से कहा की आप सच्चे पीर हैं तो कोई करामात दिखाओ वर्ना मुसलमान बनो । अगर यह बात स्वीकार नहीं है तो फिर कत्ल होने को तैयार रहो । गुरु तेग बहादुर जी ने फरमाया<br />
* करामत नाम कहर का है जिसे करने में रब के वंदे को शर्म आती है ।<br />
* परमात्मा ने हमें जिस धर्म में पैदा किया है उसे छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाना बहुत बड़ा गुनाह है हम अपने धर्म में ही जीयेंगे अपने धर्म में ही मरेंगे ।<br />
* कत्ल हमें होना खुशी-खुशी स्वीकार है यह सारा जगत ही मुसाफिरखाना है यहां हमेशा किसी को भी नहीं रहना हमें मौत का क्या डर ।<br />
गुरु जी की यह बातें सुनकर उन्हें छोटी कोठरी में कैद किया गया भूखे प्यासे रखा गया । कई प्रकार की यातनाएं दी गई । उसके बाद उनके तीनों सिखों को उनके सामने ही भयानक यातनाएं देकर कत्ल किया गया ताकि उनकी दर्दनाक मौत देखकर गुरुजी धर्म परिवर्तन कर ले ।<br />
सन 1675 में भाई मती दास जी को लकड़ी के बड़े टुकड़ों में बांधकर आरे से दो फाड़ किया गया ।<br />
भाई दयाल जी को उबलते हुए पानी में बिठाकर बलिदान किया ।<br />
भाई सती दास को रुई में लपेटकर आज के हवाले कर दिया गया ।<br />
आखरी सांस तक यह तीनों भाई पाठ करते रहे और मुंह से आह भी नहीं ।<br />
इस प्रकार तीनों भाइयों के बलिदान के बाद क्रूर औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को कत्ल करने का हुक्म जारी किया । उसने पूरे शहर में मुनादी पिटवाया के हिंदुओं के पीर का बीच बाजार कत्ल किया जाएगा ।<br />
काजी ने फिर से गुरु जी को इस्लाम स्वीकार करने को कहा तब गुरु जी ने कठोर शब्दों में इस्लाम स्वीकार करने से मना कर दिया और कहा हम अपने धर्म में ही कत्ल होने को तैयार हैं ।<br />
अगले दिन 24 नवंबर 1675 को कोतवाली से बाहर गुरु जी की इच्छा अनुसार स्नान कराया उसके बाद गुरु जी ने पाठ का भोग करके प्रभु को नमस्कार किया । जल्लाद जलालुद्दीन ने उनके शीश को धड़ से अलग कर दिया । हजारों लोगों की भीड़ ने जब यह नजारा देखा तो चारों तरफ हाहाकार मच गया । हिंदुओं के मन में इन मुस्लिम आतताइयों ने इतनी दहशत भर दी कोई भी गुरु जी का शीश और धड़ उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता था । इसी समय भयानक तूफान आ गया चारों तरफ दिन में अंधेरा हो गया ।<br />
गुरुजी के तीनों खास सेवक भी इस भीड़ में थे वह गुरु जी के बलिदान को अपनी आंखों से देख रहे थे गुरु जी का शीश व धड़ जमीन पर पड़ा था । भाई जयेता जी ने तूफान आने पर अंधेरे को देखकर भाई उदय चंद को इशारा किया भाई उदय चंद चादर लेकर उसके पीछे हो लिया और शीश को चादर में लपेट लिया दोनों बचकर अनंतपुर साहब आ गए । इसी समय गुरुघर का सेवक लखीशाह बंजारा जो मुगल फौजी का ठेकेदार था । किले में सामान रखकर अपनी खाली बैलगाड़ी को लेकर घर जा रहा था उसने गुरु जी के धड़ को जमीन पर पड़ा देखा तो अपने पुत्र व भाई की सहायता से उसे धड़ को अपनी बैलगाड़ी पर रख लिया और घर जाकर घर को ही आग लगाकर गुरु जी का अंतिम संस्कार किया । जिससे मुगल फौज को शंका न हो सके । आज उसी स्थान पर गुरुद्वारा रकाबगंज बना है<br />
भाई जयेता जी ने गुरुजी के पावन शीश को अनंतपुर साहब पहुंच कर बेटे गोविंद राय जी की झोली में डाल दिया । वहां पर चंदन की लकड़ी से चिता तैयार कर बड़े संस्कार से गुरु तेग बहादुर जी के पवन शीश का संस्कार किया गया।<br />
जहां गुरु जी का शीश धड़ से अलग किया गया वहां दिल्ली के चांदनी चौक में गुरुद्वारा शीशगंज साहिब बना है ।<br />
वर्तमान परिस्थितियों में हमको गुरु जी के बलिदान को याद कर उनके बताए मार्ग पर चलते हुए धर्म की रक्षा करने का संकल्प ले यही गुरु को सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।</p>
<p><strong>     लेखक पूर्णकालिक सामाजिक कार्यकर्त्ता हैं           </strong></p>
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		<title>भाऊ साहब राजनीति में आदर्शवाद की जीवंत मूर्ति थे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 17:29:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[भाऊ साहब पोतनीस]]></category>
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					<description><![CDATA[भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व भाऊ साहब पोतनीस की पुण्यतिथि पर भाजपाजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की ग्वालियर 11 नवंबर202 /भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व महापौर, पूर्व विधायक एवं भाजपा के प्रदेश महामंत्री स्व. श्री रघुनाथ शंकर भाऊसाहब पोतनीस की 24वीं पुण्यतिथि पर भाजपा कार्यालय मुखर्जी भवन पर पुण्य स्मरण दिवस पर भाजपाजनों द्वारा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व भाऊ साहब पोतनीस की पुण्यतिथि पर भाजपाजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की</strong></p>
<p>ग्वालियर 11 नवंबर202 /भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व महापौर, पूर्व विधायक एवं भाजपा के प्रदेश महामंत्री स्व. श्री रघुनाथ शंकर भाऊसाहब पोतनीस की 24वीं पुण्यतिथि पर भाजपा कार्यालय मुखर्जी भवन पर पुण्य स्मरण दिवस पर भाजपाजनों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई है।<br />
पूर्व सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर भाऊसाहब पोतनीस का पुण्य संस्मरणों को सुनाते हुए कहा कि भाऊ साहब पोतनीस जी कार्यकर्ताओं से जीवांत संपर्क किया करते थे। वे कार्यकर्ताओं का हालचाल जानने अपने दोपहिया गाड़ी उनके घर सहज ही पहुंच जाया करते थे।</p>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59189" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019.jpg" alt="" width="1280" height="650" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019.jpg 1280w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-300x152.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-1024x520.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-768x390.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-827x420.jpg 827w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-696x353.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-1068x542.jpg 1068w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /> <img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59190" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1928" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-scaled.jpg 2560w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-300x226.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1024x771.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-768x578.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1536x1157.jpg 1536w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-2048x1542.jpg 2048w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-558x420.jpg 558w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-80x60.jpg 80w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-696x524.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1068x804.jpg 1068w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1920x1446.jpg 1920w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p>श्री शेजवलकर ने कहा कि भाऊसाहब को जब महापौर का चुनाव लड़ने की बात आयी तो तब वे चुनाव लड़ने को तैयार नहीं थे। वे निस्वार्थ रूप से राजनीति में पार्टी का कार्य किया करते थे। उन्होंने कहा कि मैं राजनीति में देरी से आया किंतु पार्टीजनों के कार्य में मदद किया करता था।<br />
उन्होंने कहा कि पोतनीस जी संगठन मंत्री की भूमिका में रहा करते थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि विपक्षी भी उनकी स्वच्छ और ईमानदार छवि पर प्रश्न नहीं उठा पाएं।<br />
श्री शेजवलकर ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि हम राजनीति में काम करना चाहते हैं तो भाऊसाहब पोतनीस की तरह काम करें।<br />
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्री वेदप्रकाश शर्मा ने कहा कि भाऊ साहब पार्टी के प्रति समर्पित थे, किन्तु वे कार्यकर्ताओं के प्रति भी समर्पित थे। भाऊ साहब राजनीति में आदर्शवाद की जीवंत मूर्ति थे। उन्होंने कहा कि भाउसाहब पोतनीस जब विधायक थे, उनसे कार्यकर्ता मिलने भोपाल जाया करते थे। उस दौरान पोतनीस जी मिलने आने कार्यकर्ताओं को बिस्तर पर और स्वयं धरती पर चटाई बिछाकर सो जाया करते थे। वहीं वे सुबह उठकर स्वयं कार्यकर्ताओं के लिए चाय बनाकर पिलाया करते थे।<br />
डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भवन ट्रस्ट के सचिव एवं भाऊसाहब के साथी वेद्य गजेन्द्र गडकर ने कहा कि भाउसाहब को 1986 में जब उन्हें महापौर बनाने की बात आई, तब वे बहुत रोए। उन्होंने कहा कि आपने मुझे कहां फंसा दिया।<br />
इस अवसर पर श्री विवेक जोशी, श्री अजित बरैया ने भी संस्मरण रखे।<br />
इस अवसर पर भाजपा प्रदेश सह मीडिया प्रभारी जवाहर प्रजापति, जिला महामंत्रीद्वय विनय जैन, राजू पलैया, भाजपा वरिष्ठ नेता निर्मल कोठारी, जीडीए के पूर्व अध्यक्ष रविन्द्रसिंह राजपूत, पूर्व सभापति राकेश माहौर, अशोक बांदिल,रमेश सेन, हासानंद आहूजा, ओमप्रकाश जाजौरिया, वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण दुबे, मंगेश पोतनीस, गोपाल गांगिल, राजेन्द्रसिंह कुशवाह, भारत शाक्य, हरीदास अग्रवाल,गौरव वाजपेयी, अमर कुटे, विनोद अष्टैया, डालचंद वर्मा, मनोज मुटाटकर, विवेक पोतनीस, संतोष गोडयाले, अशोक सहगल, किशोर जैन, ओमप्रकाश धनौल, अजय महेन्द्रू, सीताराम बघेल सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>11 नवम्बर पुण्यतिथि विशेष : जब भाऊ साहब ने कहा था हम राजनीति सेवा के लिए करते हैं इनके पैसे से भोपाल आना जाना ठीक नहीं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 13:03:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[भाऊ साहब पोतनीस]]></category>
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					<description><![CDATA[ओमप्रकाश जाजौरिया &#160; भारतीय जनता पार्टी के पितृ पुरुष दो बार के विधायक और ग्वालियर के लोकप्रिय महापौर स्वर्गीय रघुनाथ शंकर भाऊ साहब पोतनीस जिन्हें सभी भाऊ साहब के नाम से संबोधित करते थे 11 नवंबर 2025 को उनकी 24वीं पुण्यतिथि है ऐसी महान प्रतिभा जो  वर्षों वर्ष में एक बार जन्म लेती हैं ऐसी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>ओमप्रकाश जाजौरिया</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी के पितृ पुरुष दो बार के विधायक और ग्वालियर के लोकप्रिय महापौर स्वर्गीय रघुनाथ शंकर भाऊ साहब पोतनीस जिन्हें सभी भाऊ साहब के नाम से संबोधित करते थे 11 नवंबर 2025 को उनकी 24वीं पुण्यतिथि है ऐसी महान प्रतिभा जो  वर्षों वर्ष में एक बार जन्म लेती हैं ऐसी अद्भुत प्रतिभाशाली कर्तव्य निष्ठ व्यक्तित्व के धनी थे भाऊ साहब। बे संगठन में अनेकों पदों पर रहे और छोटे से छोटे और बड़े से बड़े कार्यकर्ता से  लगातार संपर्क और उसकी चिंता उनकी दिनचर्या थी ।कार्यकर्ता के ऊपर आये किसी भी संकट के निवारण के लिए वे हनुमान थे जब वे जिला अध्यक्ष थे तो नित्य भारतीय जनता पार्टी कार्यालय मुखर्जी भवन में 4 घंटे बैठते थे। 1987 में जब पार्टी ने उन्हें स्व गंगाराम बादिलं जी के असमय निधन के बाद उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया उस समय प्रतिद्वंद्वी दल कांग्रेस पार्टी यह मानकर बैठी थी यह वैश्य बहुल क्षेत्र है और यहां से वैश्य समाज का व्यक्ति ही चुनाव जीत सकता है इसलिए उन्होंने हरिश्चंद्र गोयल जो उस समय पार्षद भी थे अपना प्रत्याशी घोषित किया परंतु भाऊ साहब की ईमानदार और स्वच्छ छवि ऐसी थी कि उस समय कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री अपने प्रत्याशी श्री हरिश्चंद्र गोयल के समर्थन में प्रचार करने महाराज बाडा जीवाजी चौक आम सभा को संबोधित कर रहे थे तो उन्हें भी अपने भाषण में यह कहना पड़ा था कि भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी ईमानदार है स्वच्छ छवि वाला है परंतु आपसे निवेदन है वोट कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को ही दें। मोतीलाल बोरा भी गली मोहल्ले में हर तरह के हथकंडे अपनाते हुए मिले। फिर भी कांग्रेस पार्टी का प्रत्याशी पराजित हो गया।</p>
<p>1989 में भाऊ साहब विधानसभा चुनाव लड़े और भारी बहुमत से विजय बने उसे समय उन पर जिला अध्यक्ष की भी जिम्मेवारी थी और चुनाव वाले दिन मैंने उनके साथ था m80 दो पहिया वाहन पर वह चलते थे मैंने देखा उसे समय लश्कर पश्चिम विधानसभा हुआ करती थी जिस पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री शीतल सहाय जी चुनाव लड़ रहे थे और भाऊ साहब पूर्व विधानसभा क्षेत्र से लड़ रहे थे जब मैंने उनसे कहा भाऊ साहब आप अपने क्षेत्र में चलें बोले शीतल सहाय जी का जीतना भी मुझसे ज्यादा जरूरी है मैं जिला अध्यक्ष हूं इसलिए ग्वालियर में जिले की संपूर्ण विधानसभा में चुनाव जिताना मेरी जिम्मेदारी है जब भाऊ साहब महापौर थे तो ग्वालियर जिले का विकास कैसे हो इसके लिए दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दलों से उनके दफ्तर में जाकर ग्वालियर के विकास के लिए उन्होंने कार्य योजना बनाई चंबल का पानी ग्वालियर में आये इसके लिए उन्होंने जमीनी आंदोलन किये। । भाऊ साहब भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के महामंत्री संगठन भी रहे और कुशाभाऊ ठाकरे जी के मार्गदर्शन में उन्होंने मध्य प्रदेश के संगठन को ऊंचाइयों पर पहुंचया।। संगठन में सही आदमी का चयन करने की और उसे मजबूती से बेचारिक रूप से पार्टी से जोड़ने की उनकी दूरदर्शिता के सभी कायल थे।</p>
<p>एक बार की घटना मुझे याद आती है जब सुंदर लाल जी पटवा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और विक्रम वर्मा शिक्षा मंत्री एक कार्यकर्त्ता जो शिक्षक था मेरे पास आए और बोले आप भाऊ साहब से बोल मेरा ट्रांसफर ग्वालियर करा दे। मैं रोजाना गोहद से ग्वालियर अप डाउन करता हूं पारिवारिक स्थिति भी ठीक नहीं थी इसलिए मैं उन्हें भाऊ साहब के पास ले गया भाऊ साहब ने भी तुरंत बोला आप भोपाल आ जाना हम वापस लौटे तो मास्टर साहब बोले आप साथ में चले मैंने उनसे कहा मैं नहीं जा रहा मैं भोपाल देखा भी नहीं है परंतु बे बड़ी भी वेबस होकर जिद्द करने लगे रात में जीटी एक्सप्रेस से जनरल कोच में मैं और मास्टर साहब जमीन पर बैठकर ट्रेन की यात्रा की उस समय ₹50 ट्रेन में किराया था हम वहां पहुंचे विधायक विश्राम ग्रह भाऊ साहब ने विक्रम वर्मा जी से बोलकर मास्टर साहब का तबादला आदेश करवा दिया जब हम वापस लौट रहे थे रात्रि में तो मुझसे पूछा ओमप्रकाश तुम्हारा टिकट किसने लिया था मैं भी सहज भाव में जो सच्चाई थी बता दी पैसे मास्टर साहब ने दिए थे बोले नहीं गलत बात हम राजनीति सेवा के लिए करते हैं इस पैसे से भोपाल आना जाना ठीक नहीं जब लौट कर जाओ तो पैसे मुझे ले जाओ और दोनों टिकट तुम लेना मैंने कहा भाऊ मेरे पास पैसे हैं। और मैंने दोनों टिकट जब ग्वालियर वापसी वाले लिए तो मास्टर साहब यह दोनों आंखों में पानी था इस प्रकार से कार्यकर्ता को नैतिक से मजबूत आत्म बल वाला बनाते थे भाऊ साहब।जो जीवन में किसी भी प्रकार से नैतिक पतन से बचाए रखता था। उनकी 24 वीं पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि और सादर नमन।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>जनहित पार्टी के महामंत्री मनीष काले को मातृ शोक,मृत्यु पूर्व किया था देहदान</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Oct 2025 15:37:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
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					<description><![CDATA[इंदौर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक और जनहित पार्टी के महामंत्री  मनीष  काले की माताजी श्रीमती लीला काले जी का आज दोपहर उनके निवास वासुदेव नगर, इन्दौर में निधन हो गया हो गया। वे 92 वर्ष की थीं। उन्होंने देहदान का संकल्प किया था, वह कल 18 अक्टूबर की सुबह पूरा होगा। जानकारी के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इंदौर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक और जनहित पार्टी के महामंत्री  मनीष  काले की माताजी श्रीमती लीला काले जी का आज दोपहर उनके निवास वासुदेव नगर, इन्दौर में निधन हो गया हो गया।</p>
<p>वे 92 वर्ष की थीं। उन्होंने देहदान का संकल्प किया था, वह कल 18 अक्टूबर की सुबह पूरा होगा। जानकारी के अनुसार आज चोइथराम अस्पताल से एक टीम आई थी त्वचा लेने के लिए और एक टीम एमजीएम मेडिकल कॉलेज से आई थी नेत्र लेने के लिए, दोनों ही काम हो चुके हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें ॐ शांति शांति शांति</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>संघ के प्रांत व्यवस्था प्रमुख कमल जैन को मातृ शोक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 14:13:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत के व्यवस्था प्रमुख एवं पीजीवी महाविद्यालय में सह प्राध्यापक डॉ.कमल कुमार जैन की माताजी एवं स्व.डॉ.रतन चन्द्र जैन की पत्नी श्रीमती शांति देवी जैन का शुक्रवार को निधन हो गया। हरिशंकरपुरम निवासी 85वर्षीय स्व.श्रीमती जैन कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। शुक्रवार को एक निजी अस्पताल में उपचार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत के व्यवस्था प्रमुख एवं पीजीवी महाविद्यालय में सह प्राध्यापक डॉ.कमल कुमार जैन की माताजी एवं स्व.डॉ.रतन चन्द्र जैन की पत्नी श्रीमती शांति देवी जैन का शुक्रवार को निधन हो गया।<br />
हरिशंकरपुरम निवासी 85वर्षीय स्व.श्रीमती जैन कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। शुक्रवार को एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने सुबह 6 बजे अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार उनके गृह नगर गोरमी में किया गया। स्व.शांति देवी जैन दो पुत्र प्रो.कमल कुमार जैन, डॉ.अक्षय कुमार जैन सहित भरापूरा परिवार छोड़ गई हैं। श्रद्धांजलि सभा शनिवार 4 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे आरके गार्डन, थाने के पास गोरमी, भिंड में होगी। उनके निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यक्षेत्र के कार्यकारिणी सदस्य यशवंंत इंदापुरकर, मध्यभारत प्रांत सह कार्यवाह विजय दीक्षित, ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी, स्वदेश के प्रबंध संचालक यशवर्धन जैन, पीजीवी महाविद्यालय ग्वालियर के प्राचार्य प्रो.सुनील पाठक ने गोरमी पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>नहीं रहे मशहूर शास्त्रीय गायक पद्मविभूषण छन्नूलाल मिश्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 05:31:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
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					<description><![CDATA[मशहूर शास्त्रीय गायक पद्मविभूषण छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार को निधन हो गया. वे 89 वर्ष के थे. उनकी बेटी नर्मदा मिश्र ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि गुरुवार सुबह करीब 4 बजे मिर्ज़ापुर स्थित घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली. परिवार के अनुसार, पंडित मिश्र का अंतिम संस्कार वाराणसी में शाम 5 बजे किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="css-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-1ajuixv e17g058b0" dir="ltr">मशहूर शास्त्रीय गायक <a class="focusIndicatorReducedWidth css-n8oauk e1p3sufg0" href="https://www.mha.gov.in/sites/default/files/2023-01/2020AwardeesList_25012020.pdf" target="_blank" rel="noopener">पद्मविभूषण</a> छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार को निधन हो गया. वे 89 वर्ष के थे.</p>
</div>
<div class="css-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-1ajuixv e17g058b0" dir="ltr">उनकी बेटी नर्मदा मिश्र ने समाचार एजेंसी <a class="focusIndicatorReducedWidth css-n8oauk e1p3sufg0" href="https://www.ptinews.com/story/national/classical-vocalist-channulal-mishra-dies-at-89/2968990" target="_blank" rel="noopener">पीटीआई</a> को बताया कि गुरुवार सुबह करीब 4 बजे मिर्ज़ापुर स्थित घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली.</p>
</div>
<div class="css-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-1ajuixv e17g058b0" dir="ltr">परिवार के अनुसार, पंडित मिश्र का अंतिम संस्कार वाराणसी में शाम 5 बजे किया जाएगा.</p>
</div>
<div class="css-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-1ajuixv e17g058b0" dir="ltr">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि देते हुए <a class="focusIndicatorReducedWidth css-n8oauk e1p3sufg0" href="https://x.com/narendramodi/status/1973575304552595958" target="_blank">एक्स</a> पर लिखा है, &#8220;सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-1ajuixv e17g058b0" dir="ltr">&#8220;उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया. यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-19j92fr ebmt73l0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-1ajuixv e17g058b0" dir="ltr">उन्होंने यह भी लिखा, &#8220;साल 2014 में वे वाराणसी सीट से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे. शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं. ओम शांति!&#8221;</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आरएसएस के मध्य क्षेत्र सेवा प्रमुख ओमप्रकाश  सिसोदिया को पितृ शोक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 09:45:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक मध्यक्षेत्र सेवा प्रमुख श्री ओमप्रकाश सिसोदिया के पिताजी श्रीजनक सिंह सिसोदिया उपाख्य जगन्नाथदास जी का आज दोपहर 12.15 बजे उनके पैतृक गांव में दुखद निधन हो गया, वे दिव्य धाम की यात्रा पर निकल गये हैं। आपका अंतिम संस्कार उत्तरप्रदेश के आगरा जिले की तहसील किरावली के अंतर्गत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto">ग्वालियर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक मध्यक्षेत्र सेवा प्रमुख श्री ओमप्रकाश सिसोदिया के पिताजी श्रीजनक सिंह सिसोदिया उपाख्य जगन्नाथदास जी का आज दोपहर 12.15 बजे उनके पैतृक गांव में दुखद निधन हो गया, वे दिव्य धाम की यात्रा पर निकल गये हैं।</div>
<div dir="auto"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-57690" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/FB_IMG_1757584339381.jpg" alt="" width="1137" height="1600" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/FB_IMG_1757584339381.jpg 1137w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/FB_IMG_1757584339381-213x300.jpg 213w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/FB_IMG_1757584339381-728x1024.jpg 728w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/FB_IMG_1757584339381-768x1081.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/FB_IMG_1757584339381-1092x1536.jpg 1092w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/FB_IMG_1757584339381-298x420.jpg 298w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/FB_IMG_1757584339381-696x979.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/09/FB_IMG_1757584339381-1068x1503.jpg 1068w" sizes="auto, (max-width: 1137px) 100vw, 1137px" /></div>
<div dir="auto">आपका अंतिम संस्कार उत्तरप्रदेश के आगरा जिले की तहसील किरावली के अंतर्गत पैतृक गांव बाकन्दा में</div>
<div dir="auto"> मे कल 12 सितंबर सुबह 8.00 बजे किया जाएगा । वे पिछले कुछ माह से अस्वस्थ थे ग्वालियर आरोग्यधाम चिकित्सालय में स्वास्थ्य चिकित्सा हो रही थी।</div>
<div dir="auto">90 वर्षीय श्री जनक सिंह जी तीन पुत्र अनार सिंह, प्रहलाद सिंह, ओमप्रकाश सिसोदिया सहित भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। उल्लेखनीय है कि 1 जनवरी 1935 को जन्मे जनक सिंह जी ने 1978 में श्री हरदेव मंदिर वृंदावन के महंत त्रिदंडी स्वामी देवनारायणाचार्य महाराज जी से दीक्षा ली थी। दीक्षा के बाद उनका नाम जगन्नाथ दास जी रखा गया। संन्यास के बाद उन्होंने देशभर में भ्रमण किया।</div>
<div dir="auto"></div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्मृतिशेष: लोकतंत्र सेनानी मीसाबंदी सुभाष आहूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Aug 2025 07:53:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
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					<description><![CDATA[डॉ. प्रवीण दाताराम गुगनानी पूर्व सांसद, लोकतंत्र सेनानी (मीसाबंदी) सुभाषचंद्र जी आहूजा नहीं रहे! कल उनका दुखद निधन हुआ। उनके प्रति ये आदरांजलि उनका भांजा, उनका परिजन होने के नाते और एक स्वयंसेवक दोनों के नाते व्यक्त कर रहा हूँ। वो आपातकाल के दिन हुआ करते थे। हमारा परिवार आमला में संघ, जनसंघ के आने-जाने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">डॉ. प्रवीण दाताराम गुगनानी</p>
<p>पूर्व सांसद, लोकतंत्र सेनानी (मीसाबंदी) सुभाषचंद्र जी आहूजा नहीं रहे! कल उनका दुखद निधन हुआ।<br />
उनके प्रति ये आदरांजलि उनका भांजा, उनका परिजन होने के नाते और एक स्वयंसेवक दोनों के नाते व्यक्त कर रहा हूँ।<br />
वो आपातकाल के दिन हुआ करते थे। हमारा परिवार आमला में संघ, जनसंघ के आने-जाने वाले प्रचारकों व पदाधिकारियों का एक सुनिश्चित भोजन, मिलन, बैठक का स्थान हुआ करता था। आपातकाल में कांग्रेस और शासनतंत्र में हमारें परिवार को इन पंक्तियों के साथ ही चिह्नित किया जाता था कि, इनका घर तो आमला में संघियों का अड्डा है। आपातकाल में मामाजी, अर्थात् सुभाष भैया को जेल में बंद किया जाना हमारे परिवार पर और अधिक भारी पड़ा। संघ प्रचारकों के आने जाने के ठप्पे के बाद मामाजी के मीसाबंदी होने से हमारा परिवार कांग्रेस और कांग्रेस रिमोटेड जिला प्रशासन के सीधे रडार पर आ गया! इसके बड़े दुष्परिणाम मेरे पिताजी को और समूचे परिवार को झेलने पड़े थे। हमारे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर छापे पड़े! केस दर्ज हुए, अनावश्यक धाराएँ लादी गई!! आर्थिक हानियाँ पहुंचाई गई!!! सामाजिक स्तर पर हमारे परिवार में हमारे बुजुर्गों को परिहास, व्यंग्य ही नहीं अपितु घोर उपेक्षा का शिकार भी होना पड़ता था।<br />
मेरी स्मृतियों में है मेरा वह बाल्यकाल जब हम मामाजी से मिलने और कभी कभार भोजन देने हेतु या कभी वार-त्यौहार पर भेंट करने हेतु बैतूल स्थित जेल में जाया करते थे। मुझे आज भी भली-भाँति याद है उनका चेहरा! कभी किसी प्रकार का तनाव, क्लांति, दुख उनके चेहरे पर तब भी नहीं हुआ करता था!! जिंदादिल थे वे!!! और सम्पूर्ण जीवन उन्होंने जिंदादिली से ही जिया!!!!<br />
क्षमा माँगकर, संघ परिवार छोड़ने की घोषणा करके, जेल से छूट जाने के प्रस्ताव दसियों बार दिए गए थे उन्हें; किंतु, उन्होंने कभी ऐसा करना स्वीकार नहीं किया। वे अपनी विचारधारा से किसी भी मूल्य पर समझौता करना नहीं चाहते थे, किया भी नहीं! आपातकाल की समाप्ति तक वे जेल में ही रहे। आपातकाल की समाप्ति तक ही; उन पर, उनके परिजनों यानि हम पर तमाम प्रकार के अत्याचार, उपेक्षा, आर्थिक हानि, प्रशसनिक छापे आदि का क्रम चलता रहा किंतु उन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया।<br />
सुभाष मामाजी, भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। सबसे कम आयु के सांसद होने का कीर्तिमान दीर्घसमय तक उनके नाम पर रहा। सबसे कम आयु का सांसद होने के कारण वे आदरणीय अटल जी के प्रियतम सांसद रहे।<br />
सांसद रहते हुए उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। सांसद रहते हुए तब उनका परिवार आर्थिक रूप से दुर्बल जैसा ही था। बहुत बड़ी आर्थिक स्थिति नहीं थी उनकी, किंतु बैतूल जिले में उनकी आर्थिक शुचिता के किस्से बहुधा ही सुनने में आते रहते थे। अपने सिद्धांतों के लिए परिवार की आर्थिक स्थिति को कमजोर होने देना तो पसंद किया उन्होंने किंतु कभी आर्थिक अनियमितता न होने दी। स्वाभिमानी इतने कि किसी से मदद भी नहीं लेते थे, रिश्वत तो बड़ी दूर की बात थी उनके लिए।<br />
समूचा बैतूल उन्हें सुभाष भैया, नेताजी के नाम से पुकारता था। वे सचमुच नेता थे। जितना सरल, विशाल व सहज उनका हृदय था ठीक वैसा ही उनका आचरण था। सभी से बड़े ही उदारहृदय मिलते थे वे। राजनीति में थे किंतु अजातशत्रु थे!<br />
आज जब वे हमारे मध्य नहीं हैं तब आभास होता है कि हमने एक बड़े राजनैतिक सूर्य को खो दिया है…</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>एक संघ स्वयंसेवक के सर्वस्व समर्पण का प्रतीक बना बिरलानगर संघ कार्यालय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Apr 2025 15:59:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे रामनवमी 6 अप्रैल को होगा बिरलानगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय का औपचारिक उद्घाटन ग्वालियर/ शरद स्मृति सेवा न्यास द्वारा बिरलानगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय का उद्घाटन रामनवमी 6 अप्रैल को शाम 4 बजे किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि नवनिर्मित यह संघ कार्यालय एक समर्पित स्वयंसेवक के संघ के प्रति त्याग, समर्पण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3 style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</h3>
<h3><strong style="color: var(--td_text_color, #111111);">रामनवमी 6 अप्रैल को होगा बिरलानगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय का औपचारिक उद्घाटन</strong></h3>
<p>ग्वालियर/ शरद स्मृति सेवा न्यास द्वारा बिरलानगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय का उद्घाटन रामनवमी 6 अप्रैल को शाम 4 बजे किया जाएगा।<br />
उल्लेखनीय है कि नवनिर्मित यह संघ कार्यालय एक समर्पित स्वयंसेवक</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-54797" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471.jpg 1600w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471-300x225.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471-1024x768.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471-768x576.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471-1536x1152.jpg 1536w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471-560x420.jpg 560w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471-80x60.jpg 80w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471-696x522.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471-1068x801.jpg 1068w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA02471-265x198.jpg 265w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p style="text-align: center;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-54798" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA0110.jpg" alt="" width="1000" height="1600" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA0110.jpg 1000w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA0110-188x300.jpg 188w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA0110-640x1024.jpg 640w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA0110-768x1229.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA0110-960x1536.jpg 960w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA0110-263x420.jpg 263w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250402-WA0110-696x1114.jpg 696w" sizes="auto, (max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></p>
<p>के संघ के प्रति त्याग, समर्पण का प्रतीक है। जेसी मिल में साधारण सी नौकरी करने वाले वरिष्ठ स्वयंसेवक बाबा केसरी ने बिरला नगर स्थित अपना मकान संघ कार्य के लिए समर्पित कर दिया था। बाद में संघ के तपोनिष्ठ प्रचारक रहे स्व. शरद जी मेहरोत्रा की स्मृति में गठित न्यास के अंतर्गत यहां संघ गतिविधियों का संचालन तीन दशक से अधिक समय से किया जा रहा है। बाबा केसरी ने अपना घर संघ को समर्पित करने के बाद खुद अपना जीवन पूर्ण कालिक रूप से संघ को समर्पित कर दिया था। वे लंबे समय तक नई सडक़ स्थित संघ कार्यालय में कार्यालय प्रमुख के रूप में संघ कार्य करते रहे।<br />
वर्तमान में संघ के स्वयंसेवकों ने समाज के सहयोग से बिरला नगर स्थित संघ कार्यालय भवन को संघ गतिविधियों के सुविधापूर्ण संचालन हेतु तैयार कराया और यह मकान एक निष्ठावान स्वयंसेवक के तन, मन, धन सहित सर्वस्व समर्पण का बड़ा प्रमाण बन गया है।</p>
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		<title>मध्य भारतीय हिंदी साहित्य सभा के मंत्री उपेंद्र कस्तूरे को  भ्रातुः शोक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 08:36:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
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					<description><![CDATA[मध्य भारतीय हिंदी साहित्य सभा के मंत्री उपेंद्र कस्तूरे  के बड़े भ्राता  श्री गोविंद कस्तूरे  का आज  सुबह निधन  हो गया वे कुछ समय से बीमार थे और इलाज हेतु बिड़ला हॉस्पिटल में भर्ती थे। आज प्रातः उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने अंतिम सांस ली 62 वर्षीय श्री गोविंद कस्तूरे दूरसंचार विभाग से सेवानिवृत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मध्य भारतीय हिंदी साहित्य सभा के मंत्री उपेंद्र कस्तूरे  के बड़े भ्राता  श्री गोविंद कस्तूरे  का आज  सुबह निधन  हो गया</p>
<div dir="auto">
<div dir="auto">वे कुछ समय से बीमार थे और इलाज हेतु बिड़ला हॉस्पिटल में भर्ती थे। आज प्रातः उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने अंतिम सांस ली</div>
<div dir="auto">62 वर्षीय श्री गोविंद कस्तूरे दूरसंचार विभाग से सेवानिवृत थे आपकी अंतिम यात्रा दोपहर   कदम साहब के बाड़े से <i>लक्ष्मी</i> गंज   मुक्ति  धाम  को रवाना हुई उनके अनेक शुभचिंतकों ने शोक व्यक्त करते हुए अंतिम विदाई दी।</div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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