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	<title>श्रद्धाजंलि &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>स्वयंसेवकों ने किया वीरांगना को नमन कृष्णा रावत बोलीं स्त्री अबला नहीं, सबला है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:37:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस ग्वालियर]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर18 जून 2026/वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। कई महिलाएं कुछ कार्यों को पुरुषों का क्षेत्र मानती हैं, जबकि झांसी की रानी हर महिला के लिए साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण हैं। लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर18 जून 2026/वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। कई महिलाएं कुछ कार्यों को पुरुषों का क्षेत्र मानती हैं, जबकि झांसी की रानी हर महिला के लिए साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण हैं। लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र को पीठ पर बांधकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।<br />
यह बात कथा वाचक कृष्णा रावत ने लक्ष्मीबाई समाधि के सामने गुरुवार को लक्ष्मीबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ता की आसंदी से कही।</p>
<p style="text-align: center;"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64599" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047.jpg 1600w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-300x200.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-1024x682.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-768x512.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-1536x1023.jpg 1536w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-630x420.jpg 630w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-696x464.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-1068x712.jpg 1068w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महानगर ग्वालियर के तत्वावधान में वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी मंचासीन रहे। इस अवसर पर संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ.मनमोहन वैद्य भी विशेषरूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर स्वयंसेवकों ने झांसी की रानी को प्रणाम किया। मुख्य वक्ता सुश्री रावत ने रानी लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्त्री अबला नहीं सबला है। लक्ष्मीबाई इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं। उन्होंने परिवार के साथ समाज और देशहित में काम किया। रानी लक्ष्मीबाई का जीवन जोश, जज्बा और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण था। वे बचपन से ही घुड़सवारी और तलवारबाजी में निपुण थीं। जब अंग्रेजों ने दामोदर राव को दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार करने से इंकार करते हुए झांसी को अंग्रेजी शासन में मिलाने की घोषणा की, तब उन्होंने दृढ़ता से कहा था, ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।’ इसके बाद उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया। कृष्णा रावत ने कहा कि लक्ष्मीबाई केवल पराक्रमी योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल संगठक और दयालु व्यक्तित्व की धनी भी थीं। उनका संपूर्ण जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा तथा आज भी सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। अबला नहीं, सबला है; लक्ष्मीबाई इसका सर्वोत्तम उदाहरण : कृष्णा रावत<br />
-स्वयंसेवकों ने किया वीरांगना को प्रणाम<br />
ग्वालियर। वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। कई महिलाएं कुछ कार्यों को पुरुषों का क्षेत्र मानती हैं, जबकि झांसी की रानी हर महिला के लिए साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण हैं। लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र को पीठ पर बांधकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।<br />
यह बात कथा वाचक कृष्णा रावत ने लक्ष्मीबाई समाधि के सामने गुरुवार को लक्ष्मीबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ता की आसंदी से कही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महानगर ग्वालियर के तत्वावधान में वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी मंचासीन रहे। इस अवसर पर संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ.मनमोहन वैद्य भी विशेषरूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर स्वयंसेवकों ने झांसी की रानी को प्रणाम किया। मुख्य वक्ता सुश्री रावत ने रानी लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्त्री अबला नहीं सबला है। लक्ष्मीबाई इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं। उन्होंने परिवार के साथ समाज और देशहित में काम किया। रानी लक्ष्मीबाई का जीवन जोश, जज्बा और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण था। वे बचपन से ही घुड़सवारी और तलवारबाजी में निपुण थीं। जब अंग्रेजों ने दामोदर राव को दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार करने से इंकार करते हुए झांसी को अंग्रेजी शासन में मिलाने की घोषणा की, तब उन्होंने दृढ़ता से कहा था, ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।’ इसके बाद उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया। कृष्णा रावत ने कहा कि लक्ष्मीबाई केवल पराक्रमी योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल संगठक और दयालु व्यक्तित्व की धनी भी थीं। उनका संपूर्ण जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा तथा आज भी सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।</p>
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		<title>युवा समाजसेवी मनोज जायसवाल का हृदयाघात से आकस्मिक निधन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:08:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[हृदयाघात निधन]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर 15 जून 2026/दौलतगंज के प्रतिष्ठित यंग्स हिंद क्लब के सक्रिय युवा समाजसेवी मनोज जायसवाल का आज दोपहर अचानक हुए हृदयाघात से दुखद निधन हो गया। 55 वर्षीय मनोज जायसवाल धर्म और संस्कृति को समर्पित दौलतगंज के यंग्स हिंद क्लब की सभी गतिविधियों में बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी निभाते थे, गणेशउत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto">ग्वालियर 15 जून 2026/दौलतगंज के प्रतिष्ठित यंग्स हिंद क्लब के सक्रिय युवा समाजसेवी मनोज जायसवाल का आज दोपहर अचानक हुए हृदयाघात से दुखद निधन हो गया।</div>
<div dir="auto">55 वर्षीय मनोज जायसवाल धर्म और संस्कृति को समर्पित दौलतगंज के यंग्स हिंद क्लब की सभी गतिविधियों में बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी निभाते थे, गणेशउत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजनों में उनकी विशिष्ट भूमिका रहती थी।</div>
<div dir="auto">वे दो दिनों से दांत के मामूली दर्द से परेशान थे, सुबह ग्यारह बजे तक रोजाना की तरह दौलतगंज अपने निवास पर सबसे हंस बोल रहे थे तभी अचानक उन्हें हृदयाघात हुआ और उनका दुखद निधन हो गया। मिलनसार और हंसमुख व्यक्तित्व वाले युवा मनोज जायसवाल के आकस्मिक निधन के समाचार से दौलतगंज में शोक की लहर दौड़ गई है यंग्स हिंद क्लब से जुड़े उनके निकट सहयोगियों ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है यंग्स हिंद क्लब के चित्रगुप्त अष्ठाना व अन्य समाजसेवियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि</div>
<div dir="auto">उनका मिलनसार स्वभाव, समाज सेवा और क्लब के प्रति समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। उनके निधन से दौलतगंज क्षेत्र ने एक कर्मठ और सबके सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले व्यक्तित्व को खो दिया है। जानकारी के अनुसार मनोज जायसवाल की अंतिम यात्रा उनके दौलतगंज स्थित निवास से मंगलवार को प्रातः रवाना होगी</div>
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		<title>स्व. गंगाराम बांदिल कि 39वी पुण्यतिथि पर कल 2 जून को होगी श्रद्धांजलि सभा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:25:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[स्व. गंगाराम बांदिल श्रद्धांजलि सभा]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर। 1 जून।भारतीय जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल, प्रख्यात समाजसेवी एवं पूर्व विधायक श्रद्धेय स्वर्गीय श्री गंगाराम बांदिल जी की 39वीं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 2 जून, मंगलवार को प्रातः 8 बजे मुखर्जी भवन, भाजपा कार्यालय, महाराज बाड़ा में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर। 1 जून।भारतीय जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल, प्रख्यात समाजसेवी एवं पूर्व विधायक श्रद्धेय स्वर्गीय श्री गंगाराम बांदिल जी की 39वीं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 2 जून, मंगलवार को प्रातः 8 बजे मुखर्जी भवन, भाजपा कार्यालय, महाराज बाड़ा में आयोजित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64000" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1.jpg" alt="" width="1066" height="1599" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1.jpg 1066w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-200x300.jpg 200w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-683x1024.jpg 683w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-768x1152.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-1024x1536.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-280x420.jpg 280w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-696x1044.jpg 696w" sizes="(max-width: 1066px) 100vw, 1066px" /></p>
<p>इस अवसर पर भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित होकर स्वर्गीय गंगाराम बांदिल जी को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे तथा उनके समाज और संगठन के प्रति योगदान को स्मरण करेंगे।<br />
जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजोरिया ने सभी कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों से श्रद्धांजलि सभा में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रद्धेय गंगाराम बांदिल जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को नमन करने का आग्रह किया है।<br />
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन गंगाराम बांदिल सेवा संस्थान एवं भाजपा महानगर संगठन के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आमजन की उपस्थिति रहेगी।</p>
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		<item>
		<title>28 मई 1883 दिवस विशेष :स्वत्ववोध पुनर्जागरण के लिये समर्पित स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी का जन्म</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 May 2026 10:50:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी का जन्म]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8211;रमेश शर्मा स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी ऐसे ही महान विभूति थे जिनके जीवन का प्रतिक्षण राष्ट्र और स्वत्व बोध कराने के लिये समर्पित रहा। वे संसार के एक मात्र ऐसे कैदी थे जिन्हें एक ही जीवन में दो आजीवन कारावास का दंड मिला। यह उनके संघर्ष और अंग्रेज सरकार द्वारा दी गई यातनाओं का ही कारण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">&#8211;रमेश शर्मा</p>
<p>स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी ऐसे ही महान विभूति थे जिनके जीवन का प्रतिक्षण राष्ट्र और स्वत्व बोध कराने के लिये समर्पित रहा। वे संसार के एक मात्र ऐसे कैदी थे जिन्हें एक ही जीवन में दो आजीवन कारावास का दंड मिला। यह उनके संघर्ष और अंग्रेज सरकार द्वारा दी गई यातनाओं का ही कारण था कि उन्हें समाज ने &#8220;स्वातंत्र्यवीर&#8221; जैसे गौरवमयी उपाख्य से सम्मानित किया। लेकिन उनका संघर्ष स्वतंत्रता के बाद भी कम न हुआ। उन्हें गाँधीजी की हत्या के झूठे आरोप में बंदी बनाया गया। यद्यपि फरवरी 49 में अदालत ने उन्हें सम्मान दोषमुक्त कर दिया था लेकिन षड्यंत्र के अंतर्गत उन्हें पूरे जीवन प्रताड़ित किया गया।<br />
भारतीय स्वाभिमान और स्वातंत्र्य वोध जागरण केलिए यूँ तो करोड़ों महापुरुषों के जीवन का बलिदान हुआ है किन्तु उनमें कुछ ऐसे हैं जिनके जीवन की प्रत्येक श्वाँस राष्ट्र के लिये समर्पित रही। सावरकरजी पहले ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक व्यक्त क्यों करें? सावरकरजी पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ..! 7 अक्टूबर 1905 को पूना में सावरकर जी ने ही विदेशी वस्त्रों की पहली होली जलाई थी…! उनके द्वारा विदेशी वस्त्रों का दहन करने पर तिलक जी ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी सावरकरजी द्वारा आरंभ की गई विदेशी वस्त्र दहन के इसी मार्ग पर गाँधीजी भी चले और 11 जुलाई 1921 को मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया गया। उनके द्वारा आरंभ स्वत्व जागरण अभियान से क्रोधित होकर 1905 में उन्हें पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया था। इसके विरोध में हड़ताल हुई। इस घटना पर भी तिलकजी ने अपने समाचार पत्र ‘केसरी’ में सम्पादकीय लिखा था। स्वातंत्र्यवीर सावरकर पहले ऐसे विचारक थे जिन्होंने 1857 की क्राँति को पहला स्वातंत्र्य समर माना और एक ग्रंथ की रचना की। उनसे पहले सब इसे एक विद्रोह लिखा करते थे। यह पहला ऐसा ग्रंथ था जिसपर प्रकाशन से पहले प्रतिबंध लगा दिया गया था। स्वातंत्र्यवीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र में कूद पड़े थे। उन्होंने तैरकर इंग्लिश चैनल पार किया और फ्रांस पहुँच गए थे। वे पहले ऐसे राजनैतिक बंदी थे जिन्होंने अंडमान की काला पानी जेल में 10 साल से भी अधिक समय यातनाएँ सहीं। उन्हें कोल्हू में प्रतिदिन 30 पोंड तेल निकालना होता था। उन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकर कोयले से कवितायें लिखीं और 6000 पंक्तियाँ याद कीं। उनकी कोठरी 7 X 11 आकार की थी। मौसम गर्मी का हो या सर्दी का उन्हें जमीन पर ही सोना होता था । इसी कोठरी कोने में शौच और पेशाब करना होती । और इसी में भोजन करना होता था । हाथ में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियाँ लगी होती थीं। उसी स्थिति में जो और जैसा मिले, वही भोजन करना होता था । उन्हें प्रतिदिन बैल की भाँति कोल्हू में जोता जाता था। यदि तेल निकालने की मात्रा कम हो तो पिटाई होती थी। भोजन नहीं दिया जाता था। उसी जेल में उनके भाई भी थे पर दोनों भाई एक दूसरे से मिलना तो दूर देख भी नहीं सकते थे। पूरी जेल में सावरकर जी एकमात्र ऐसे कैदी थे, जिनके गले में अंग्रेजों ने एक पट्टी लटका रखी थी । इस पर &#8220;D&#8221; लिखा था । &#8220;D&#8221; अर्थात डेंजरस। यातनाएँ देने का यह चक्र चला लगभग ग्यारह वर्ष चला । इतनी यातनाएँ देने का कारण यह था कि पूना से लेकर लंदन तक उनके जीवन का कोई क्षण ऐसा नहीं बीता जब उन्होंने अंग्रेजों से भारत की मुक्ति का कोई उपक्रम न किया हो । स्वातंत्र्यवीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में आयोजित शोक सभा का विरोध किया था और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें? वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि दासता का उत्सव मत मनाओ..! उन्होंने 7 अक्टूबर 1905 को पूना में स्वदेशी अपनाओ आंदोलन छेड़ा और विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी । यह सावरकर जी द्वारा स्वाभिमान और स्वतव जागरण केलिए किये जाने वाले कार्यों का ही प्रभाव था कि तिलक जी ने अपने समाचार पत्र &#8220;केसरी&#8221; में सावरकर जी को छत्रपति शिवाजी महाराज के समान बताकर प्रशंसा की थी । सावरकर जी द्वारा विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के कारण उन्हे फर्म्युसन कॉलेज पुणे से निकाल दिया गया था । इसके विरोध में छात्रों ने हड़ताल की । इस समूची घटना पर तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर जी के पक्ष में सम्पादकीय लिखा । वे पहले ऐसे बैरिस्टर थे जिन्होंने ब्रिटेन में परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफ़ादार होने की शपथ लेने से इंकार कर दिया था । इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नहीं मिला । यह घटना 1909 की है । वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे जिनकी पुस्तक &#8220;1857 का स्वातंत्र्य समर’ पर प्रकाशन के पहले ही प्रतिबंध लगा । वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे । लेकिन तट पर बंदी बना लिये गये । सावरकर जी पहले ऐसे क्रान्तिकारी थे जिनका मुकद्दमा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला। वे भारत के पहले क्राँतिकारी थे जिन्हें अंग्रेजी काल में दो आजन्म कारावास की सजा सुनाई गई। दो जन्म कारावास की सजा सुनते ही हंसकर बोले, “चलो, ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया&#8221; ।<br />
वे अंग्रेजी सत्ता काल में लगभग 30 वर्षों तक विभिन्न जेलों में रहे और स्वतंत्रता के बाद भी 1948 में गाँधीजी की हत्या के आक्षेप में पुनः गिरफ्तार हुये और न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा हुये लेकिन 4 अप्रैल 1950 को पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री लियाक़त अली ख़ान के दिल्ली आगमन पर पुनः उन्हें बेलगाम जेल में रोका गया। मई 1952 में पुणे की एक विशाल सभा में उन्होंने अभिनव भारत संगठन को भंग किया गया। 10 नवम्बर 1957 को नई दिल्ली में आयोजित भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम समारोह में वे मुख्य वक्ता रहे। 8 अक्टूबर 1949 को उन्हें पुणे विश्वविद्यालय ने डी०लिट० की मानद उपाधि से अलंकृत किया। 8 नवम्बर 1963 को उनकी पत्नी यमुनाबाई का निधन हुआ। सितम्बर, 1965 से उन्हें तेज ज्वर ने आ घेरा, जिसके बाद इनका स्वास्थ्य गिरने लगा। एक फरवरी 1966 को उन्होंने मृत्युपर्यन्त उपवास करने का निर्णय लिया और 26 फरवरी 1966 को बम्बई में प्रातः 10 बजे पार्थिव शरीर त्यागकर परमधाम को प्रस्थान किया ।<br />
सावरकर जी ने भारत की आज की सभी राष्ट्रीय सुरक्षा सम्बन्धी समस्याओं को बहुत पहले ही भाँप लिया था। 1962 में चीन द्वारा आक्रमण करने के लगभग दस वर्ष पहले ही उन्होंने देश को सतर्क कर दिया था कि चीन भारत पर आक्रमण करने वाला है। भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद गोवा की मुक्ति की आवाज सबसे पहले सावरकर जी ने ही उठायी थी।</p>
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		<title>पूर्व विधायक समाजसेवी स्व. गंगाराम बांदिल की 39वीं श्रद्धांजलि सभा 2 जून को</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 16:48:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[पूर्व विधायक श्रद्धेय स्व. श्री गंगाराम बांदिल 39वीं श्रद्धांजलि सभा]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर27 मई 2026/जनसंघ एवं भाजपा के संस्थापक सदस्य, समाजसेवी एवं पूर्व विधायक श्रद्धेय स्व. श्री गंगाराम बांदिल जी की 39वीं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 2 जून 2026, मंगलवार को प्रातः 8 बजे किया जाएगा। यह श्रद्धांजलि सभा मुखर्जी भवन, भाजपा कार्यालय, महाराज बाड़ा, ग्वालियर में आयोजित होगी। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, समाजसेवी एवं गणमान्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर27 मई 2026/जनसंघ एवं भाजपा के संस्थापक सदस्य, समाजसेवी एवं पूर्व विधायक श्रद्धेय स्व. श्री गंगाराम बांदिल जी की 39वीं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 2 जून 2026, मंगलवार को प्रातः 8 बजे किया जाएगा।<br />
यह श्रद्धांजलि सभा मुखर्जी भवन, भाजपा कार्यालय, महाराज बाड़ा, ग्वालियर में आयोजित होगी। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित होकर स्व. बांदिल जी को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।</p>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64000" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1.jpg" alt="" width="1066" height="1599" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1.jpg 1066w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-200x300.jpg 200w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-683x1024.jpg 683w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-768x1152.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-1024x1536.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-280x420.jpg 280w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260527-WA0015-1-696x1044.jpg 696w" sizes="(max-width: 1066px) 100vw, 1066px" /></p>
<p>कार्यक्रम के संबंध में भाजपा ग्वालियर महानगर जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया एवं गंगाराम बांदिल सेवा संस्थान के सचिव अशोक बांदिल ने अधिक से अधिक लोगों से उपस्थित होने की अपील की है।</p>
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		<item>
		<title>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग के पूर्व संघचालक राष्ट्रोत्थान न्यास तथा सेवाभारती के महानगर अध्यक्ष प्रसिद्ध समाजसेवी रेडियेंट स्कूल के संचालक विजय जी गुप्ता का दुखद निधन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 17:05:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[विजय गुप्ता निधन]]></category>
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					<description><![CDATA[अंतिम यात्रा निज निवास &#8211; नया बाजार से प्रातः 10:30 बजे लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के लिए प्रस्थान करेगी ग्वालियर 19 अप्रैल 2026/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग के पूर्व संघचालक राष्ट्रोत्थान न्यास के अध्यक्ष तथा सेवाभारती के महानगर अध्यक्ष प्रसिद्ध समाजसेवी रेडियेंट स्कूल के संचालक  विजय जी गुप्ता अब हमारे बीच नहीं रहे आज शाम ह्रदय गति [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto"><strong><span style="color: #000000;">अंतिम यात्रा निज निवास &#8211; नया बाजार से प्रातः 10:30 बजे लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के लिए प्रस्थान करेगी</span></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">ग्वालियर 19 अप्रैल 2026/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग के पूर्व संघचालक राष्ट्रोत्थान न्यास के अध्यक्ष तथा सेवाभारती के महानगर अध्यक्ष प्रसिद्ध समाजसेवी रेडियेंट स्कूल के संचालक  विजय जी गुप्ता अब हमारे बीच नहीं रहे आज शाम ह्रदय गति रुक जाने से उनका दुखद निधन हो गया। उनको उज्जैन से ग्वालियर लौटते समय अचानक हृदयाघात हुआ और ज्यादा तबियत बिगड़ने के बाद  उनका निधन हो गया।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">मृदभाषी तथा संगठननिष्ठ व्यक्तित्व के धनी 70 वर्षीय श्री विजयजी गुप्ता के आकस्मिक निधन का समाचार सुनकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित उनके तमाम शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">आपकी  अंतिम यात्रा निज निवास &#8211; नया बाजार से प्रातः 10:30 बजे लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के लिए प्रस्थान करेगी।शब्दशक्ति न्यूज़ परिवार विजयजी के आकस्मिक निधन पर गहन दुख व्यक्त करता है और उन्हें अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करता है ॐ शांति</div>
<div dir="auto"></div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुरु तेग बहादुर शहदी दिवस पर विशेष : शीश कटा दिया पर कबूल नहीं किया इस्लाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Nov 2025 08:02:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु तेग बहादुर]]></category>
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					<description><![CDATA[मनीष उपाध्याय &#160; औरंगजेब ने बादशाह बनते ही 1661 में मंदिरों पर ताले लगा दिए और कहा यह इमारतें पुरानी हो गई है इस कारण इन मंदिरों को बंद किया जाता है । कई सालों तक ताले लगे रहने के बाद जब कोई नहीं बोला तब औरंगजेब ने 1674 में मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनवाने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59480" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009.jpg" alt="" width="739" height="1021" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009.jpg 739w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009-217x300.jpg 217w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009-304x420.jpg 304w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251124-WA0009-696x962.jpg 696w" sizes="auto, (max-width: 739px) 100vw, 739px" /></p>
<p style="text-align: center;">मनीष उपाध्याय</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>औरंगजेब ने बादशाह बनते ही 1661 में मंदिरों पर ताले लगा दिए और कहा यह इमारतें पुरानी हो गई है इस कारण इन मंदिरों को बंद किया जाता है । कई सालों तक ताले लगे रहने के बाद जब कोई नहीं बोला तब औरंगजेब ने 1674 में मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनवाने के आदेश दे दिए हिंदुओं को मुसलमान बनाने के लिए प्रलोभन के साथ-साथ अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया ।<br />
जो लोग हिंदू धर्म नहीं छोड़ते उनकी बहन बेटियों को उठाकर ले जाते और पुरुषों का बच्चों का बेरहमी से कत्ल करते थे । हिंदुओं के प्रमुख लोगों को मुसलमान बनाने के लिए औरंगजेब ने पूरी ताकत लगा दी उसने आदेश दिया कि उनके बड़े-बड़े मंदिरों को तीर्थ स्थलों को तोड़ा जाए और पहले ब्राह्मणों को मुसलमान बनाया जाए । औरंगजेब से काजियों ने कहा कि कश्मीरी पंडित हिन्दुओ में सबसे ज्यादा सम्मानित है और अगर इनको पहले मुसलमान बना दिया जाए तो हिंदुस्तान में सभी हिंदू मुस्लिम बन जाएंगे । काजी-मौलवी की यह सलाह के कारण कश्मीरी पंडितों पर बहुत ज्यादा शक्ति होने लगी । कश्मीरीयो के घर धन दौलत तथा उनकी महिलाओं को बलात कब्जा कर लिया गया उन पर भयावह अत्याचार होने लगे । तब कश्मीरी पंडितों ने सलाह करके कश्मीर के सूबेदार से कहा कि हमको सोचने समझने के लिए 6 महीने का समय दिया जाये । इसमें हम इस्लाम स्वीकार कर लेंगे या जो सजा मिलेगी उसे स्वीकार करेंगे । पंडितों की इस सलाह को सूबेदार ने मान लिया । कश्मीरी ब्राह्मण विचार करने लगे की इस संकट से कैसे बचा जाए तब एक पंडित कृपाराम ने सलाह दी इस समय किसी महापुरुष या संत की सहायता ली जाए तभी हम बच पाएंगे तब गुरु नानक देव की गद्दी का उन्हें ध्यान आया कि उन गुरुओं मैं ही जुल्म से टक्कर लेने की समर्थ है । उसे गद्दी पर अभी नवे गुरु तेज बहादुर जी विराजित है वही हमारी फरियाद सुनेंगे और अपनी शक्ति और भक्ति के साथ औरंगजेब के जुल्म को रोकेंगे ।<br />
इस तरह सभी कश्मीरी पंडित आनंदपुर साहिब गुरुजी के दरबार में पहुंच गए गुरु जी से विनती कर अपनी आपबीती सुनाई और जालिम औरंगजेब के जुल्म से रक्षा करने का अनुनय विनय किया । कश्मीरी पंडितों ने कहा कि हमको 6 माह में मुसलमान बनना पड़ेगा या हमें कत्ल कर दिया जाएगा ।<br />
कश्मीरी पंडितों की यह दुख भरी व्यथा सुनकर गुरु तेग बहादुर जी खामोश होकर कुछ सोचने लगे गुरुजी गहरी सोच में डुबे हुए थे कि उनके साहिबजादे गोविंद राय जी ने कहा पिताजी आप क्या सोच रहे हैं तब अपने बेटे को कश्मीरी पंडितों की पूरी घटना बताई और कहा कि उनकी रक्षा के लिए किसी महापुरुष को बलिदान देना पड़ेगा । पिताजी के मुख से यह बात सुनकर साहिबजादे ने कहा कि इस समय आपकी तुलना में और कौन महापुरुष है जो इनकी रक्षा कर सके आप ही किसी तरह इनकी रक्षा करें । अपने दिलेर पुत्र की बात सुनकर गुरुजी ने कश्मीरी पंडितों से कहा की जाकर औरंगज़ेब से कहो कि अगर अनंतपुर वासी हमारे गुरु तेग बहादुर जी को मुसलमान बना देगा तो हम सब मुस्लिम बन जाएंगे ।<br />
औरंगजेब ने जैसे ही यह सुना तो सोचा की एक व्यक्ति को मुसलमान बनने से अगर सभी हिंदू मुसलमान बन जाएंगे तो हमें और क्या चाहिए । इस कारण गुरु तेग बहादुर को हर हालत में इस्लाम में लाना जरूरी है । गुरुजी ने औरंगजेब के पास दिल्ली जाने की तैयारी कर ली और अपने साथ छः सिखों को ले लिया और गुरुगद्दी अपने पुत्र गोविंद राय को सौंप दी ।<br />
गुरु जी के दिल्ली जाने की तैयारी कि जानकारी जब लोगो को लगी तो बड़ी संख्या में सिख वहां पहुंच गए उन्होंने गुरुजी के साथ चलने की अनुमति मांगी तब गुरु जी ने धरती पर लकीर खींच दी और कहा कि कोई सिख इस लकीर के आगे नहीं आएगा और गुरु गोविंद राय का ख्याल सभी ने रखना है और उनकी आज्ञा का पालन करने को कहा ।<br />
विदाई के समय गुरु गोविंद राय को अपनी बाहों में कस लिया तब माता नानकी जी ने उदासी दिखाई तो गुरु तेग बहादुर जी ने संदेश दिया कि इस जगत में कोई भी सदा नहीं रहा है और ना ही रहेगा शरीरों का रिश्ता सदा कायम नहीं रहता प्रभु का सिमरन करें ।<br />
गुरुजी दिल्ली के लिए अपने साथ 6 सिख भाइयों को साथ लेकर निकले । जिसमें भाई दयाल जी भाई मतीदास जी भाई सतीश दास जी भाई गुरु दत्ता जी भाई जयेता जी भाई उदय चंद जी जो इतिहास में अमर हैं ।<br />
दिल्ली में क्रूर औरंगजेब ने गुरु जी के साथ भाई दयाल जी भाई मतीदास जी भाई सती दास जी को कैद कर लिया । दिल्ली जाते समय गुरु तेग बहादुर जी ने भाई गुरुदत्ता भाई उदय चंद जी को आगरे में ही रोक दिया था । जिससे सारी जानकारी वह अनंतपुर पहुंचते रहे । उसके बाद में यह दोनों भी दिल्ली पहुंचकर भाई जयता जी के पास ठहर गए ।<br />
गुरु जी के कैद होने पर औरंगजेब ने उनके पास लिखित हुकुम देकर भेजा ।काजी ने गुरुजी से कहा की आप सच्चे पीर हैं तो कोई करामात दिखाओ वर्ना मुसलमान बनो । अगर यह बात स्वीकार नहीं है तो फिर कत्ल होने को तैयार रहो । गुरु तेग बहादुर जी ने फरमाया<br />
* करामत नाम कहर का है जिसे करने में रब के वंदे को शर्म आती है ।<br />
* परमात्मा ने हमें जिस धर्म में पैदा किया है उसे छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाना बहुत बड़ा गुनाह है हम अपने धर्म में ही जीयेंगे अपने धर्म में ही मरेंगे ।<br />
* कत्ल हमें होना खुशी-खुशी स्वीकार है यह सारा जगत ही मुसाफिरखाना है यहां हमेशा किसी को भी नहीं रहना हमें मौत का क्या डर ।<br />
गुरु जी की यह बातें सुनकर उन्हें छोटी कोठरी में कैद किया गया भूखे प्यासे रखा गया । कई प्रकार की यातनाएं दी गई । उसके बाद उनके तीनों सिखों को उनके सामने ही भयानक यातनाएं देकर कत्ल किया गया ताकि उनकी दर्दनाक मौत देखकर गुरुजी धर्म परिवर्तन कर ले ।<br />
सन 1675 में भाई मती दास जी को लकड़ी के बड़े टुकड़ों में बांधकर आरे से दो फाड़ किया गया ।<br />
भाई दयाल जी को उबलते हुए पानी में बिठाकर बलिदान किया ।<br />
भाई सती दास को रुई में लपेटकर आज के हवाले कर दिया गया ।<br />
आखरी सांस तक यह तीनों भाई पाठ करते रहे और मुंह से आह भी नहीं ।<br />
इस प्रकार तीनों भाइयों के बलिदान के बाद क्रूर औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को कत्ल करने का हुक्म जारी किया । उसने पूरे शहर में मुनादी पिटवाया के हिंदुओं के पीर का बीच बाजार कत्ल किया जाएगा ।<br />
काजी ने फिर से गुरु जी को इस्लाम स्वीकार करने को कहा तब गुरु जी ने कठोर शब्दों में इस्लाम स्वीकार करने से मना कर दिया और कहा हम अपने धर्म में ही कत्ल होने को तैयार हैं ।<br />
अगले दिन 24 नवंबर 1675 को कोतवाली से बाहर गुरु जी की इच्छा अनुसार स्नान कराया उसके बाद गुरु जी ने पाठ का भोग करके प्रभु को नमस्कार किया । जल्लाद जलालुद्दीन ने उनके शीश को धड़ से अलग कर दिया । हजारों लोगों की भीड़ ने जब यह नजारा देखा तो चारों तरफ हाहाकार मच गया । हिंदुओं के मन में इन मुस्लिम आतताइयों ने इतनी दहशत भर दी कोई भी गुरु जी का शीश और धड़ उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता था । इसी समय भयानक तूफान आ गया चारों तरफ दिन में अंधेरा हो गया ।<br />
गुरुजी के तीनों खास सेवक भी इस भीड़ में थे वह गुरु जी के बलिदान को अपनी आंखों से देख रहे थे गुरु जी का शीश व धड़ जमीन पर पड़ा था । भाई जयेता जी ने तूफान आने पर अंधेरे को देखकर भाई उदय चंद को इशारा किया भाई उदय चंद चादर लेकर उसके पीछे हो लिया और शीश को चादर में लपेट लिया दोनों बचकर अनंतपुर साहब आ गए । इसी समय गुरुघर का सेवक लखीशाह बंजारा जो मुगल फौजी का ठेकेदार था । किले में सामान रखकर अपनी खाली बैलगाड़ी को लेकर घर जा रहा था उसने गुरु जी के धड़ को जमीन पर पड़ा देखा तो अपने पुत्र व भाई की सहायता से उसे धड़ को अपनी बैलगाड़ी पर रख लिया और घर जाकर घर को ही आग लगाकर गुरु जी का अंतिम संस्कार किया । जिससे मुगल फौज को शंका न हो सके । आज उसी स्थान पर गुरुद्वारा रकाबगंज बना है<br />
भाई जयेता जी ने गुरुजी के पावन शीश को अनंतपुर साहब पहुंच कर बेटे गोविंद राय जी की झोली में डाल दिया । वहां पर चंदन की लकड़ी से चिता तैयार कर बड़े संस्कार से गुरु तेग बहादुर जी के पवन शीश का संस्कार किया गया।<br />
जहां गुरु जी का शीश धड़ से अलग किया गया वहां दिल्ली के चांदनी चौक में गुरुद्वारा शीशगंज साहिब बना है ।<br />
वर्तमान परिस्थितियों में हमको गुरु जी के बलिदान को याद कर उनके बताए मार्ग पर चलते हुए धर्म की रक्षा करने का संकल्प ले यही गुरु को सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।</p>
<p><strong>     लेखक पूर्णकालिक सामाजिक कार्यकर्त्ता हैं           </strong></p>
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		<title>भाऊ साहब राजनीति में आदर्शवाद की जीवंत मूर्ति थे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 17:29:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[भाऊ साहब पोतनीस]]></category>
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					<description><![CDATA[भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व भाऊ साहब पोतनीस की पुण्यतिथि पर भाजपाजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की ग्वालियर 11 नवंबर202 /भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व महापौर, पूर्व विधायक एवं भाजपा के प्रदेश महामंत्री स्व. श्री रघुनाथ शंकर भाऊसाहब पोतनीस की 24वीं पुण्यतिथि पर भाजपा कार्यालय मुखर्जी भवन पर पुण्य स्मरण दिवस पर भाजपाजनों द्वारा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व भाऊ साहब पोतनीस की पुण्यतिथि पर भाजपाजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की</strong></p>
<p>ग्वालियर 11 नवंबर202 /भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व महापौर, पूर्व विधायक एवं भाजपा के प्रदेश महामंत्री स्व. श्री रघुनाथ शंकर भाऊसाहब पोतनीस की 24वीं पुण्यतिथि पर भाजपा कार्यालय मुखर्जी भवन पर पुण्य स्मरण दिवस पर भाजपाजनों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई है।<br />
पूर्व सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर भाऊसाहब पोतनीस का पुण्य संस्मरणों को सुनाते हुए कहा कि भाऊ साहब पोतनीस जी कार्यकर्ताओं से जीवांत संपर्क किया करते थे। वे कार्यकर्ताओं का हालचाल जानने अपने दोपहिया गाड़ी उनके घर सहज ही पहुंच जाया करते थे।</p>
<p style="text-align: center;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59189" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019.jpg" alt="" width="1280" height="650" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019.jpg 1280w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-300x152.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-1024x520.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-768x390.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-827x420.jpg 827w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-696x353.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0019-1068x542.jpg 1068w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /> <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59190" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1928" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-scaled.jpg 2560w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-300x226.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1024x771.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-768x578.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1536x1157.jpg 1536w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-2048x1542.jpg 2048w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-558x420.jpg 558w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-80x60.jpg 80w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-696x524.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1068x804.jpg 1068w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA00151-1920x1446.jpg 1920w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p>श्री शेजवलकर ने कहा कि भाऊसाहब को जब महापौर का चुनाव लड़ने की बात आयी तो तब वे चुनाव लड़ने को तैयार नहीं थे। वे निस्वार्थ रूप से राजनीति में पार्टी का कार्य किया करते थे। उन्होंने कहा कि मैं राजनीति में देरी से आया किंतु पार्टीजनों के कार्य में मदद किया करता था।<br />
उन्होंने कहा कि पोतनीस जी संगठन मंत्री की भूमिका में रहा करते थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि विपक्षी भी उनकी स्वच्छ और ईमानदार छवि पर प्रश्न नहीं उठा पाएं।<br />
श्री शेजवलकर ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि हम राजनीति में काम करना चाहते हैं तो भाऊसाहब पोतनीस की तरह काम करें।<br />
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्री वेदप्रकाश शर्मा ने कहा कि भाऊ साहब पार्टी के प्रति समर्पित थे, किन्तु वे कार्यकर्ताओं के प्रति भी समर्पित थे। भाऊ साहब राजनीति में आदर्शवाद की जीवंत मूर्ति थे। उन्होंने कहा कि भाउसाहब पोतनीस जब विधायक थे, उनसे कार्यकर्ता मिलने भोपाल जाया करते थे। उस दौरान पोतनीस जी मिलने आने कार्यकर्ताओं को बिस्तर पर और स्वयं धरती पर चटाई बिछाकर सो जाया करते थे। वहीं वे सुबह उठकर स्वयं कार्यकर्ताओं के लिए चाय बनाकर पिलाया करते थे।<br />
डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भवन ट्रस्ट के सचिव एवं भाऊसाहब के साथी वेद्य गजेन्द्र गडकर ने कहा कि भाउसाहब को 1986 में जब उन्हें महापौर बनाने की बात आई, तब वे बहुत रोए। उन्होंने कहा कि आपने मुझे कहां फंसा दिया।<br />
इस अवसर पर श्री विवेक जोशी, श्री अजित बरैया ने भी संस्मरण रखे।<br />
इस अवसर पर भाजपा प्रदेश सह मीडिया प्रभारी जवाहर प्रजापति, जिला महामंत्रीद्वय विनय जैन, राजू पलैया, भाजपा वरिष्ठ नेता निर्मल कोठारी, जीडीए के पूर्व अध्यक्ष रविन्द्रसिंह राजपूत, पूर्व सभापति राकेश माहौर, अशोक बांदिल,रमेश सेन, हासानंद आहूजा, ओमप्रकाश जाजौरिया, वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण दुबे, मंगेश पोतनीस, गोपाल गांगिल, राजेन्द्रसिंह कुशवाह, भारत शाक्य, हरीदास अग्रवाल,गौरव वाजपेयी, अमर कुटे, विनोद अष्टैया, डालचंद वर्मा, मनोज मुटाटकर, विवेक पोतनीस, संतोष गोडयाले, अशोक सहगल, किशोर जैन, ओमप्रकाश धनौल, अजय महेन्द्रू, सीताराम बघेल सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।</p>
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		<title>11 नवम्बर पुण्यतिथि विशेष : जब भाऊ साहब ने कहा था हम राजनीति सेवा के लिए करते हैं इनके पैसे से भोपाल आना जाना ठीक नहीं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 13:03:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[भाऊ साहब पोतनीस]]></category>
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					<description><![CDATA[ओमप्रकाश जाजौरिया &#160; भारतीय जनता पार्टी के पितृ पुरुष दो बार के विधायक और ग्वालियर के लोकप्रिय महापौर स्वर्गीय रघुनाथ शंकर भाऊ साहब पोतनीस जिन्हें सभी भाऊ साहब के नाम से संबोधित करते थे 11 नवंबर 2025 को उनकी 24वीं पुण्यतिथि है ऐसी महान प्रतिभा जो  वर्षों वर्ष में एक बार जन्म लेती हैं ऐसी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>ओमप्रकाश जाजौरिया</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी के पितृ पुरुष दो बार के विधायक और ग्वालियर के लोकप्रिय महापौर स्वर्गीय रघुनाथ शंकर भाऊ साहब पोतनीस जिन्हें सभी भाऊ साहब के नाम से संबोधित करते थे 11 नवंबर 2025 को उनकी 24वीं पुण्यतिथि है ऐसी महान प्रतिभा जो  वर्षों वर्ष में एक बार जन्म लेती हैं ऐसी अद्भुत प्रतिभाशाली कर्तव्य निष्ठ व्यक्तित्व के धनी थे भाऊ साहब। बे संगठन में अनेकों पदों पर रहे और छोटे से छोटे और बड़े से बड़े कार्यकर्ता से  लगातार संपर्क और उसकी चिंता उनकी दिनचर्या थी ।कार्यकर्ता के ऊपर आये किसी भी संकट के निवारण के लिए वे हनुमान थे जब वे जिला अध्यक्ष थे तो नित्य भारतीय जनता पार्टी कार्यालय मुखर्जी भवन में 4 घंटे बैठते थे। 1987 में जब पार्टी ने उन्हें स्व गंगाराम बादिलं जी के असमय निधन के बाद उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया उस समय प्रतिद्वंद्वी दल कांग्रेस पार्टी यह मानकर बैठी थी यह वैश्य बहुल क्षेत्र है और यहां से वैश्य समाज का व्यक्ति ही चुनाव जीत सकता है इसलिए उन्होंने हरिश्चंद्र गोयल जो उस समय पार्षद भी थे अपना प्रत्याशी घोषित किया परंतु भाऊ साहब की ईमानदार और स्वच्छ छवि ऐसी थी कि उस समय कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री अपने प्रत्याशी श्री हरिश्चंद्र गोयल के समर्थन में प्रचार करने महाराज बाडा जीवाजी चौक आम सभा को संबोधित कर रहे थे तो उन्हें भी अपने भाषण में यह कहना पड़ा था कि भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी ईमानदार है स्वच्छ छवि वाला है परंतु आपसे निवेदन है वोट कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को ही दें। मोतीलाल बोरा भी गली मोहल्ले में हर तरह के हथकंडे अपनाते हुए मिले। फिर भी कांग्रेस पार्टी का प्रत्याशी पराजित हो गया।</p>
<p>1989 में भाऊ साहब विधानसभा चुनाव लड़े और भारी बहुमत से विजय बने उसे समय उन पर जिला अध्यक्ष की भी जिम्मेवारी थी और चुनाव वाले दिन मैंने उनके साथ था m80 दो पहिया वाहन पर वह चलते थे मैंने देखा उसे समय लश्कर पश्चिम विधानसभा हुआ करती थी जिस पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री शीतल सहाय जी चुनाव लड़ रहे थे और भाऊ साहब पूर्व विधानसभा क्षेत्र से लड़ रहे थे जब मैंने उनसे कहा भाऊ साहब आप अपने क्षेत्र में चलें बोले शीतल सहाय जी का जीतना भी मुझसे ज्यादा जरूरी है मैं जिला अध्यक्ष हूं इसलिए ग्वालियर में जिले की संपूर्ण विधानसभा में चुनाव जिताना मेरी जिम्मेदारी है जब भाऊ साहब महापौर थे तो ग्वालियर जिले का विकास कैसे हो इसके लिए दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दलों से उनके दफ्तर में जाकर ग्वालियर के विकास के लिए उन्होंने कार्य योजना बनाई चंबल का पानी ग्वालियर में आये इसके लिए उन्होंने जमीनी आंदोलन किये। । भाऊ साहब भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के महामंत्री संगठन भी रहे और कुशाभाऊ ठाकरे जी के मार्गदर्शन में उन्होंने मध्य प्रदेश के संगठन को ऊंचाइयों पर पहुंचया।। संगठन में सही आदमी का चयन करने की और उसे मजबूती से बेचारिक रूप से पार्टी से जोड़ने की उनकी दूरदर्शिता के सभी कायल थे।</p>
<p>एक बार की घटना मुझे याद आती है जब सुंदर लाल जी पटवा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और विक्रम वर्मा शिक्षा मंत्री एक कार्यकर्त्ता जो शिक्षक था मेरे पास आए और बोले आप भाऊ साहब से बोल मेरा ट्रांसफर ग्वालियर करा दे। मैं रोजाना गोहद से ग्वालियर अप डाउन करता हूं पारिवारिक स्थिति भी ठीक नहीं थी इसलिए मैं उन्हें भाऊ साहब के पास ले गया भाऊ साहब ने भी तुरंत बोला आप भोपाल आ जाना हम वापस लौटे तो मास्टर साहब बोले आप साथ में चले मैंने उनसे कहा मैं नहीं जा रहा मैं भोपाल देखा भी नहीं है परंतु बे बड़ी भी वेबस होकर जिद्द करने लगे रात में जीटी एक्सप्रेस से जनरल कोच में मैं और मास्टर साहब जमीन पर बैठकर ट्रेन की यात्रा की उस समय ₹50 ट्रेन में किराया था हम वहां पहुंचे विधायक विश्राम ग्रह भाऊ साहब ने विक्रम वर्मा जी से बोलकर मास्टर साहब का तबादला आदेश करवा दिया जब हम वापस लौट रहे थे रात्रि में तो मुझसे पूछा ओमप्रकाश तुम्हारा टिकट किसने लिया था मैं भी सहज भाव में जो सच्चाई थी बता दी पैसे मास्टर साहब ने दिए थे बोले नहीं गलत बात हम राजनीति सेवा के लिए करते हैं इस पैसे से भोपाल आना जाना ठीक नहीं जब लौट कर जाओ तो पैसे मुझे ले जाओ और दोनों टिकट तुम लेना मैंने कहा भाऊ मेरे पास पैसे हैं। और मैंने दोनों टिकट जब ग्वालियर वापसी वाले लिए तो मास्टर साहब यह दोनों आंखों में पानी था इस प्रकार से कार्यकर्ता को नैतिक से मजबूत आत्म बल वाला बनाते थे भाऊ साहब।जो जीवन में किसी भी प्रकार से नैतिक पतन से बचाए रखता था। उनकी 24 वीं पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि और सादर नमन।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>जनहित पार्टी के महामंत्री मनीष काले को मातृ शोक,मृत्यु पूर्व किया था देहदान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Oct 2025 15:37:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
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					<description><![CDATA[इंदौर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक और जनहित पार्टी के महामंत्री  मनीष  काले की माताजी श्रीमती लीला काले जी का आज दोपहर उनके निवास वासुदेव नगर, इन्दौर में निधन हो गया हो गया। वे 92 वर्ष की थीं। उन्होंने देहदान का संकल्प किया था, वह कल 18 अक्टूबर की सुबह पूरा होगा। जानकारी के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इंदौर /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक और जनहित पार्टी के महामंत्री  मनीष  काले की माताजी श्रीमती लीला काले जी का आज दोपहर उनके निवास वासुदेव नगर, इन्दौर में निधन हो गया हो गया।</p>
<p>वे 92 वर्ष की थीं। उन्होंने देहदान का संकल्प किया था, वह कल 18 अक्टूबर की सुबह पूरा होगा। जानकारी के अनुसार आज चोइथराम अस्पताल से एक टीम आई थी त्वचा लेने के लिए और एक टीम एमजीएम मेडिकल कॉलेज से आई थी नेत्र लेने के लिए, दोनों ही काम हो चुके हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें ॐ शांति शांति शांति</p>
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