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	<title>सेहत &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Sun, 31 May 2026 16:02:05 +0000</lastBuildDate>
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		<title>अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चमका जीआरएमसी का नाम, ब्रेन स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में चेयरपर्सन बने डॉ. दिनेश उदैनिया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 16:00:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेन स्ट्रोक]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली में हुई इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में निभाई अहम भूमिका, अमेरिका की नई गाइडलाइन पर हुआ मंथन ग्वालियर 31मई 2026/गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. दिनेश उदैनिया ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर ग्वालियर और जीआरएमसी का गौरव बढ़ाया है। नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में डॉ. उदैनिया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली में हुई इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में निभाई अहम भूमिका, अमेरिका की नई गाइडलाइन पर हुआ मंथन</strong></p>
<p>ग्वालियर 31मई 2026/गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. दिनेश उदैनिया ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर ग्वालियर और जीआरएमसी का गौरव बढ़ाया है। नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में डॉ. उदैनिया को चेयरपर्सन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां देश-विदेश के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों ने स्ट्रोक उपचार की नवीनतम तकनीकों और दिशा-निर्देशों पर गहन चर्चा की।</p>
<p>कॉन्फ्रेंस में विशेष रूप से अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन (ASA) द्वारा जारी नई गाइडलाइन पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान स्ट्रोक के त्वरित उपचार, मरीजों की रिकवरी बढ़ाने और मृत्यु दर कम करने के लिए अपनाई जा रही आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।</p>
<p>चेयरपर्सन के रूप में डॉ. दिनेश उदैनिया ने विभिन्न तकनीकी सत्रों का संचालन किया तथा विशेषज्ञों के बीच हुए विमर्श को दिशा प्रदान की। चिकित्सा जगत के प्रतिष्ठित मंच पर उनकी यह भूमिका न केवल उनकी विशेषज्ञता की पहचान है, बल्कि जीआरएमसी की बढ़ती राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का भी प्रमाण मानी जा रही है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रोक आज दुनिया में मृत्यु और दिव्यांगता के प्रमुख कारणों में शामिल है। ऐसे में नई गाइडलाइन के आधार पर उपचार प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। कॉन्फ्रेंस में उन्नत न्यूरो इंटरवेंशन तकनीकों, आपातकालीन प्रबंधन और मरीजों के दीर्घकालिक पुनर्वास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।</p>
<p>डॉ. उदैनिया की इस उपलब्धि को जीआरएमसी और ग्वालियर के चिकित्सा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जीआरएमसी के विशेषज्ञों की बढ़ती भागीदारी से संस्थान की पहचान लगातार मजबूत हो रही है।</p>
<p><strong>स्ट्रोक उपचार की नई दिशा तय करने जुटे विशेषज्ञ</strong></p>
<p>इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो सर्जन और चिकित्सा शोधकर्ता शामिल हुए। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन की नई गाइडलाइन के आधार पर भविष्य की उपचार रणनीतियों और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर मंथन किया गया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>भीषण गर्मी पर पीएम मोदी की सलाह यदि संभव हो, तो किसी प्यासे व्यक्ति को एक गिलास पानी अवश्य दें,बीमारों को ओआरएस दें खुद पानी लेकर निकलें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 07:57:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[भीषण गर्मी पी एम सलाह]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली 27 मई 2026/भारत के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते तापमान को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, &#8220;देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही दैनिक जीवन में गर्मी से होने वाली [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">नई दिल्ली 27 मई 2026/भारत के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते तापमान को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की है.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म <a class="focusIndicatorReducedWidth css-n8oauk e1h2ur550" href="https://x.com/narendramodi/status/2059504933167304712" target="_blank">एक्स पर लिखा</a>, &#8220;देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही दैनिक जीवन में गर्मी से होने वाली कई कठिनाइयां भी बढ़ रही हैं. मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि जितनी अधिक सावधानी बरत सकें, अवश्य बरतें.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">पीएम मोदी ने लिखा, &#8220;ख़ुद को हाइड्रेटेड रखें, घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखें. ऐसे मौसम में आपकी संवेदनशीलता भी बहुत बड़ा सहारा बन जाती है. यदि संभव हो, तो किसी प्यासे व्यक्ति को एक गिलास पानी अवश्य दें. मैं ऐसे लोगों की सराहना भी करूंगा जो अपने घरों और दुकानों के बाहर मटके में जल रखते हैं ताकि कोई भी उनसे पानी पी सके.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">पीएम मोदी ने गर्मी से बीमार पड़े लोगों को ओआरएस देने की अपील की. साथ ही बच्चों, बुज़ुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों से विशेष ध्यान रखने के लिए कहा है.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">पीएम मोदी की इस अपील के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ख़ड़गे ने तंज कसते हुए कहा कि गर्मी तो झेल लेंगे, लेकिन महंगाई से जनता के पसीने छूट रहे हैं.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">उन्होंने <a class="focusIndicatorReducedWidth css-n8oauk e1h2ur550" href="https://x.com/kharge/status/2059511938443579832" target="_blank">एक्स पोस्ट में लिखा</a>, &#8220;गर्मी तो झेल लेंगे, पर भाजपा प्रायोजित महंगाई की आग से आम जनता के पसीने छूट रहे हैं. अपनी सरकार की लूट पर भी कभी कुछ बोलिए, मोदी जी?&#8221;</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रचंड गर्मी में जानिए 48 डिग्री का हॉट अटैक जला सकता है आपका शरीर क्या होता है 43 से 44 डिग्री सेल्सियस पर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 May 2026 08:23:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[भीषण गर्मी]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रचंड गर्मी और बेतहाशा तपिश से इंसान, जानवरों और पक्षियों का हाल बेहाल कर रखा है. न दिन में सुकून है और न रात में चैन. हर तरफ गर्मी है.मध्यप्रदेश के खजुराहो  बुंदेलखंड यूपी के बांदा में पारा 49 डिग्री के करीब पहुंच गया था. यूपी, बिहार, एमपी, राजस्थान में सूरज से मानो आग बरस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रचंड गर्मी और बेतहाशा तपिश से इंसान, जानवरों और पक्षियों का हाल बेहाल कर रखा है. न दिन में सुकून है और न रात में चैन. हर तरफ गर्मी है.मध्यप्रदेश के खजुराहो  बुंदेलखंड यूपी के बांदा में पारा 49 डिग्री के करीब पहुंच गया था. यूपी, बिहार, एमपी, राजस्थान में सूरज से मानो आग बरस रही हो. ऐसे में, आपके मन में सवाल उठता होगा कि हमारा शरीर कितना तापमान या कहिए कि गर्मी सहन कर पाएगा? इस पर की गई एक रिसर्च में चौंकाने वाली जानकारी पता चली है.</p>
<p>जी हां, PubMed डेटाबेस पर मौजूद एक स्टडी में बताया गया है कि सामान्य रूप से इंसान की त्वचा 43 डिग्री (109.4 डिग्री फारेनहाइट) तक का अधिकतम तापमान सह सकती है. इस तापमान तक शरीर में रक्त के प्रवाह में कोई रुकावट नहीं आएगी. ऐसा करीब 8 घंटे तक सहन किया जा सकता है. सरल शब्दों में थोड़ी सावधानी बरतते हुए 43 डिग्री या उससे कम तापमान में व्यक्ति धूप में काम कर सकता</p>
<p>हालांकि, इसके बाद तापमान में एक डिग्री की भी बढ़ोतरी हालात को मुश्किल बना सकती है. इतनी गर्मी में सुरक्षित रहने का समय घटकर आधे से भी कम हो जाता है. जी हां, त्वचा का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस होने पर, 8 घंटे के भीतर त्वचा गंभीर रूप से झुलस सकती है. अगर रक्त प्रवाह में अड़चन पैदा हुई, तो बिना किसी चोट के गर्मी सहने का समय और भी घट जाएगा.</p>
<p>अब मौसम विभाग की ओर से जारी किए जाने वाले रेड मैप (जहां-जहां ज्यादा गर्मी है) को देखकर आपको लगेगा कि अगर तापमा 45, 46, 47 या 48 डिग्री को पार कर रहा हो, तो क्या इंसान का शरीर जल सकता है? इस हिसाब से अलग-अलग तापमान का शरीर पर पड़ने वाले असर को जानना जरूरी हो जाता है.</p>
<p><strong>43 से 44 डिग्री सेल्सियस- </strong></p>
<p>अगर इतना तापमान है, तो हमारी त्वचा को काफी जलन महसूस होगी. धूप आग-जैसी महसूस होगी. कई घंटे तक अगर धूप में रहे, या बाहर काम करते रहे तो त्वचा बुरी तरह झुल सकती है और &#8216;सेल डेथ&#8217; भी संभव है.</p>
<p><strong>48 डिग्री तापमान- </strong></p>
<p>दर्द बहुत तेज होगा. इतने तापमान में कुछ ही मिनट की तपिश त्वचा सहन कर पाएगी. घंटेभर रहे, तो त्वचा जल सकती है.</p>
<p><strong>50 डिग्री</strong></p>
<p><strong>&#8211;</strong> इस तापमान में एसी काम करना बंद कर सकती है. इतनी गर्मी में अगर कोई पांच मिनट भी रहा, सेकेंड-डिग्री बर्न हो सकता है. इससे त्वचा की नीचे वाली भीतरी परत भी झुलस सकती है.</p>
<p><strong>55 डिग्री- </strong></p>
<p>दुआ कीजिए कि इतनी गर्मी किसी को भी न झेलनी पड़े. पेड़ लगाइए. पानी बचाइए. धरती को बचाना होगा. अगर इतना तापमान हुआ तो 10 सेकेंड की तपिश भी त्वचा को बुरी तरह जला देगी.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आरोग्यधाम के नए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की नई ओपीडी सोमवार से होगी शुरू, पहले दिन निशुल्क सुविधा</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%87/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 May 2026 16:47:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी अस्पताल]]></category>
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					<description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे अवलोकन, मरीजों को मिलेगी सस्ती व आधुनिक उपचार सुविधा ग्वालियर 3 मई 2026/गोला का मंदिर क्षेत्र में एमआईटीएस महाविद्यालय के सामने निर्माणाधीन आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की ओपीडी सेवाएं 4 मई से प्रारंभ होंगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर 3:40 बजे नई ओपीडी का अवलोकन करेंगे। अस्पताल प्रबंधन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे अवलोकन, मरीजों को मिलेगी सस्ती व आधुनिक उपचार सुविधा</strong></p>
<p>ग्वालियर 3 मई 2026/गोला का मंदिर क्षेत्र में एमआईटीएस महाविद्यालय के सामने निर्माणाधीन आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की ओपीडी सेवाएं 4 मई से प्रारंभ होंगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर 3:40 बजे नई ओपीडी का अवलोकन करेंगे। अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन ने इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं।<br />
आम जनता को सस्ता और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आरोग्यधाम अस्पताल का संचालन वर्तमान में सिटी सेंटर स्थित एजी ऑफिस पुल के समीप किया जा रहा है। यहां प्रतिदिन लगभग 700 से 800 मरीज ओपीडी सेवाओं का लाभ ले रहे हैं और करीब 200 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल के विस्तार की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।<br />
इसी क्रम में गोला का मंदिर स्थित एमआईटीएस के सामने शासन द्वारा आवंटित भूमि पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। निर्माण स्थल पर फिलहाल ओपीडी संचालन के लिए छह कक्ष तैयार कर लिए गए हैं, जहां से प्रारंभिक सेवाएं शुरू की जा रही हैं। नई ओपीडी के शुरू होने से क्षेत्र के मरीजों को नजदीक ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।</p>
<p><strong>ओपीडी में मिलेंगी ये सुविधाएं</strong></p>
<p>नई ओपीडी में मरीजों का परीक्षण विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किया जाएगा। यहां जनरल मेडिसिन, सर्जरी, टीबी, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, ऑर्थोपेडिक, डर्मेटोलॉजी और नेत्र रोग विभाग की सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। साथ ही पैथोलॉजी एवं कलेक्शन सेंटर भी संचालित रहेगा, जहां ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट सहित अन्य आवश्यक जांचें एक ही स्थान पर की जा सकेंगी।</p>
<p><strong>ढाई साल में तैयार होगा 620 बिस्तरों का अस्पताल</strong></p>
<p>गोला का मंदिर क्षेत्र में बन रहे इस अत्याधुनिक अस्पताल में 620 बिस्तरों की सुविधा विकसित की जाएगी। लगभग 5०0 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह अस्पताल 1३ मंजिला रहेगा। निर्माण कार्य तेजी से जारी है और इसे लगभग ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।</p>
<p><strong>भर्ती मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था</strong></p>
<p>ओपीडी में परामर्श के बाद यदि किसी मरीज को भर्ती या ऑपरेशन की आवश्यकता होती है, तो उसे नि:शुल्क एंबुलेंस के माध्यम से सिटी सेंटर स्थित मुख्य अस्पताल भेजा जाएगा। इससे मरीजों को बिना किसी परेशानी के समय पर उपचार मिल सकेगा और चिकित्सा सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहेंगी।</p>
<p><strong>पहले दिन नि:शुल्क रहेगी ओपीडी सेवा</strong></p>
<p>नई ओपीडी में 4 मई को मरीजों को पूरी तरह नि:शुल्क परामर्श सुविधा दी जाएगी। ओपीडी का समय प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसके बाद नियमित रूप से ओपीडी शुल्क 100 रुपए रखा जाएगा, जिससे मरीजों को कम शुल्क में बेहतर चिकित्सा परामर्श मिल सकेगा। साथ ही दवाएं भी उचित दरों पर उपलब्ध कराई जाएंगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अब नहीं चलेगी डाक्टरों की मनमानी, योग्यता से लेकर फीस तक सब कुछ करना होगा डिस्प्ले</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/63546-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 05:48:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[डॉक्टर रजिस्ट्रेशन]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली 2 मई 2026/केंद्र सरकार निजी क्लिनिकों और डॉक्टरों की सेवाओं में पारदर्शिता लाने की तैयारी में है। इसके तहत, डॉक्टरों की योग्यता से लेकर फीस तक सब कुछ डिस्प्ले करना होगा। यह जानकारी अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषा में भी लिखनी होगी, ताकि मरीजों को पहले से पता चल जाए कि इलाज का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 2 मई 2026/केंद्र सरकार निजी क्लिनिकों और डॉक्टरों की सेवाओं में पारदर्शिता लाने की तैयारी में है। इसके तहत, डॉक्टरों की योग्यता से लेकर फीस तक सब कुछ डिस्प्ले करना होगा। यह जानकारी अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषा में भी लिखनी होगी, ताकि मरीजों को पहले से पता चल जाए कि इलाज का खर्च कितना आएगा। इससे मरीजों के परिजनों को फैसला लेने में आसानी होगी।</p>
<p>सरकार चाहती है कि मरीजों को डाक्टरों की योग्यता रजिस्ट्रेशन नंबर और सेवा का समय भी दिखाई दे। यानी मरीज को यह जानने के लिए पूछताछ न करनी पड़े कि डॉक्टर कितनी फीस लेते हैं या उनकी योग्यता क्या है?</p>
<p>इसके अलावा क्लिनिक, पॉलीक्लिनिक, सैंपल कलेक्शन सेंटर और मॉर्च्युरी के लिए न्यूनतम मानक भी तय करने का प्रस्ताव है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स के लिए नए ड्राफ्ट मानकों पर राज्यों, मेडिकल संस्थाओं और आम लोगों से सुझाव मांगे हैं।</p>
<p>प्रस्ताव में यह भी है कि क्लिनिकों में कुछ जरूरी इमरजेंसी दवाएं हमेशा रहें। इनमें हार्ट अटैक, एलर्जी, घबराहट, दौरे की दवाएं शामिल होंगी। नए नियमों के तहत, क्लिनिकों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी अनिवार्य की जा सकती है। जैसे परामर्श कक्ष का न्यूनतम आकार 70 वर्ग फुट रखा जा सकता है। रिसेप्शन और वेटिंग एरिया के लिए भी अलग जगह तय होगी। अगर कोई क्लिनिक मरीजों को कुछ घंटों के लिए भर्ती करता है, तो प्रति बेड कम से कम 65 वर्ग फुट जगह देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा साफ पानी, अच्छी रोशनी, वेटिलेशन का इतजाम और फिसलन-रहित फर्श जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य होंगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी द्वारा नीड़म् ग्वालियर के माध्यम से 10 दिवसीय निशुल्क योग सत्र का आयोजन 1 मई से</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:23:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[निशुल्क योग विवेकानंद नीडम]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर 30 अप्रैल 2026/विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी प्रकल्प नीड़म् ग्वालियर के माध्यम से 10 दिवसीय योग सत्र का आयोजन 01 मई 2026 से 10 मई 2026 तक लोटस विला अपार्टमेंट पार्क में सुबह 06 बजे से 07:30 बजे तक किया जाएगा।विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी प्रकल्प नीड़म् ग्वालियर के माध्यम से आयोजित इस 10 दिवसीय योग सत्र में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर 30 अप्रैल 2026/विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी प्रकल्प नीड़म् ग्वालियर के माध्यम से 10 दिवसीय योग सत्र का आयोजन 01 मई 2026 से 10 मई 2026 तक लोटस विला अपार्टमेंट पार्क में सुबह 06 बजे से 07:30 बजे तक किया जाएगा।विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी प्रकल्प नीड़म् ग्वालियर के माध्यम से आयोजित इस 10 दिवसीय योग सत्र में योगार्थी भाग ले सकते हैं। इस योग सत्र के प्रभारी श्री प्रमोद गौतम जी ने जानकारी देते हुए बताया कि ये सत्र निःशुल्क रहेगा जिसमें विवेकानन्द केंद्र के योग प्रशिक्षकों द्वारा योग का अभ्यास (सूक्ष्म व्यायाम, सूर्य नमस्कार, आसान, प्राणायाम, ध्यान,) एवं व्यावहारिक ज्ञान(योग जीवन शैली, कर्म योग, भक्ति योग, राज योग, ज्ञान योग, आहार, दिनचर्या) प्रदान किया जाएगा सत्र में पंजीयन के लिए लोटस विला अपार्टमेंट मे श्री गौतम  से संपर्क कर सकते हैं</p>
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		<title>अब लगेगा बुढ़ापे पर ब्रेक हमेशा रहेंगे जवान</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/63440-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 13:27:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
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					<description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस, बुढ़ापे को रोकने वाली वैक्सीन बनाने पर काम कर रहा है। वैज्ञानिक जीन थेरेपी दवा बना रहे हैं जिसका मकसद शरीर में उम्र से जुड़े बदलाव वाले रिसेप्टर को रोककर कोशिकाओं के बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करना है। रूस के उप विज्ञान और उच्च शिक्षा मंत्री डेनिस सेकिरिंस्की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस, बुढ़ापे को रोकने वाली वैक्सीन बनाने पर काम कर रहा है। वैज्ञानिक जीन थेरेपी दवा बना रहे हैं जिसका मकसद शरीर में उम्र से जुड़े बदलाव वाले रिसेप्टर को रोककर कोशिकाओं के बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करना है।</p>
<p>रूस के उप विज्ञान और उच्च शिक्षा मंत्री डेनिस सेकिरिंस्की ने 23 अप्रैल को बताया कि यह प्रायोगिक इलाज RAGE रिसेप्टर को टारगेट करेगा। यही रिसेप्टर सक्रिय होकर कोशिकाओं के बुढ़ापे की प्रक्रिया को शुरू कर देता है। इसपर कंट्रोल करके कोशिकाओं को लंबे समय तक जवां बनाए रखा जा सकता है।</p>
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		<title>होली के बाद पेट फूल गया है और आप हैं परेशान तो आजमाइए यह उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 04:58:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[पेट खराब]]></category>
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					<description><![CDATA[होली का त्योहार हो और गुजिया तथा अन्य पकवान की बात न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता! लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब &#8216;एक और बस आखिरी&#8217; कहते-कहते हम पूरी प्लेट साफ कर देते हैं. नतीजा? होली के दूसरे दिन सुबह-सुबह पेट में भारीपन, एसिडिटी&#8230; ऐसा लगता है जैसे पेट फूलकर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>होली का त्योहार हो और गुजिया तथा अन्य पकवान की बात न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता! लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब &#8216;एक और बस आखिरी&#8217; कहते-कहते हम पूरी प्लेट साफ कर देते हैं. नतीजा? होली के दूसरे दिन सुबह-सुबह पेट में भारीपन, एसिडिटी&#8230; ऐसा लगता है जैसे पेट फूलकर कुप्पा हो गया है. अगर आपके साथ भी यही हुआ है, तो घबराइए मत.  किचन में ही मौजूद कुछ चीजों से आप अपने पेट को वापस &#8216;ट्रैक&#8217; पर ला सकते हैं.</p>
<p><strong>गुनगुना पानी</strong><br />
ज्यादा घी और चीनी वाली चीजें खाने के बाद ठंडा पानी पीना आग में घी डालने जैसा है. इससे फैट जम जाता है और डाइजेशन धीमा हो जाता है. इसके लिए हर एक घंटे में गुनगुना पानी पिएं. यह आपके सिस्टम को डिटॉक्स करने में मदद करेगा.</p>
<p><strong>अजवाइन और काला नमक का जादू</strong><br />
दादी-नानी का यह नुस्खा कभी फेल नहीं होता. अजवाइन में &#8216;थायमोल&#8217; होता है जो पाचन के रस (digestive juices) को एक्टिव करता है. आप आधा चम्मच अजवाइन और एक चुटकी काला नमक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ फांक सकते हैं. 15 मिनट में राहत महसूस होगी.</p>
<p><strong>अदरक वाली चाय (बिना दूध की!)</strong><br />
दूध वाली चाय एसिडिटी बढ़ा सकती है, इसलिए अदरक का पानी या हर्बल टी बेहतर है. सबसे पहले पानी में अदरक कूटकर उबालें, थोड़ा नींबू और शहद मिलाएं. यह पेट की सूजन और भारीपन को तुरंत कम करता है.</p>
<p><strong>छाछ (Buttermilk) है रामबाण</strong><br />
अगर पेट में जलन हो रही है, तो छाछ से बेहतर कुछ नहीं.  इसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं जो पेट के फायदेमंद बैक्टीरिया (गुड बैक्टीरिया) को बढ़ाने में मदद करते हैं. छाछ में भुना हुआ जीरा पाउडर और काला नमक जरूर डालें.</p>
<p><strong>थोड़ा टहलना भी जरूरी हैगुजिया </strong>खाकर सो जाने से डाइजेशन पूरी तरह रुक जाता है. घर के अंदर या बालकनी में ही 15-20 मिनट की वॉक (Vajrasana भी ट्राई कर सकते हैं) करें. इससे गैस पास होने में मदद मिलती है और भारीपन कम होता है.</p>
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		<title>जरा संभलकर! सिंथेटिक रंगों की होली से बढ़ेगा बीमारियों का खतरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 05:01:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[होली सिंथेटिक रंग]]></category>
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					<description><![CDATA[नेत्र संक्रमण, स्किन एलर्जी, सांस व पेट के हो सकते हैं रोग,बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर                             धीरेंद्र उपाध्याय  &#160; देशभर में होली का उत्साह हर साल की तरह इस बार भी है, लेकिन रंगों के इस त्योहार के साथ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नेत्र संक्रमण, स्किन एलर्जी, सांस व पेट के हो सकते हैं रोग,</strong><strong>बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर</strong></p>
<p><strong>                          </strong></p>
<p style="text-align: center;"><strong>  धीरेंद्र उपाध्याय </strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>देशभर में होली का उत्साह हर साल की तरह इस बार भी है, लेकिन रंगों के इस त्योहार के साथ सेहत पर मंडराते खतरे को लेकर डॉक्टरों ने गंभीर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में बिकने वाले कई सिंथेटिक और रासायनिक रंगों में ऐसे हानिकारक तत्व होते हैं, जो त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इन रंगों के संपर्क में आने से नेत्र संक्रमण, कॉर्निया को नुकसान, स्किन एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं सूखे रंगों से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में तकलीफ होने का खतरा भी बढ़ जाता है। कई मामलों में दूषित रंग या पानी पेट में जाने से उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों पर इन रासायनिक रंगों का असर सबसे ज्यादा पड़ता है इसलिए होली खेलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।<br />
होली का त्योहार रंगों और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। लेकिन बाजार में उपलब्ध सिंथेटिक रंगों के बढ़ते इस्तेमाल ने इस उत्सव को जोखिम भरा बना दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रासायनिक रंग त्वचा, आंखों, बालों और सांस संबंधी कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, होली में सबसे अधिक नुकसान आंखों को होता है। डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल की कॉर्निया व मोतियाबिंद विशेषज्ञ डॉ. मीनल कान्हेरे बताती हैं कि बाजार में बिक रहे कई रंगों में सीसा, क्रोमियम और अन्य हानिकारक रसायन पाए जाते हैं। ये रंग आंखों में चले जाने पर जलन, एलर्जी और संक्रमण का कारण बन सकते हैं। कॉर्निया को खतरा भी बना रहता है।<br />
<strong>ये हो सकती हैं समस्याएं</strong><br />
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलाकर जावले के मुताबिक, इन रंगों से त्वचा में रूखापन, खुजली, जलन और लाल चकते जैसी समस्याएं हो सकती हैं, वहीं केमिकल रंग बालों के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल सिंघल ने कहा कि सूखे रंग सांस के साथ अंदर जाने पर श्वसन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। खासकर अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति और खतरनाक हो सकती है। ब्रोंकाइटिस, सांस लेने में तकलीफ और गले में जलन जैसी समस्याएं होती हैं। इसके अलावा दूषित पानी या रंगों के शरीर में चले जाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वाह भाई वाह क्या कहने इस खजले के&#8230;..</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%96%e0%a4%9c/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 13:01:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[खजला]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्वालियर 02 जनवरी 2026/ आधुनिकता की दौड़ में भले ही चीनी, थाई व अन्य विदेशी फास्ट फूड युवाओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं, पर खासतौर पर मेलों में बिकने वाले खजला व पापड़ जैसे पारंपरिक व्यंजनों की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। इन व्यंजनों का स्वाद लेने का मजा ही कुछ और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर 02 जनवरी 2026/ आधुनिकता की दौड़ में भले ही चीनी, थाई व अन्य विदेशी फास्ट फूड युवाओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं, पर खासतौर पर मेलों में बिकने वाले खजला व पापड़ जैसे पारंपरिक व्यंजनों की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। इन व्यंजनों का स्वाद लेने का मजा ही कुछ और है। मेले में सजी-धजी दुकानों पर बैठकर सैलानी बड़े चाव के साथ खजला-पापड़ का लुत्फ उठाते हैं। साथ ही इसकी भीनी-भीनी ताजगी व खुशबू भी महसूस करते हैं। ऐतिहासिक श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेला में भी खजले की दुकानें सदैव से आकर्षण का केन्द्र रही हैं। इस बार के मेले में भी विभिन्न प्रकार के लजीज खजले व पापड़ की कई दुकानें सजीं हैं।</p>
<p>मेले के झूला सेक्टर की तरफ अंजलि खजला-पापड़ के नाम से अपनी दुकान लगी है। इस दुकान के संचालक के अनुसार लगभग 60 सालों से ग्वालियर मेले में उनका परिवार दुकान लगाता आया है। पहले प्रमोद कुमार यादव खजले की दुकान लगाते थे, अब उनके बेटे अजय कुमार व सूरज कुमार यादव अपनी पुस्तैनी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यादव परिवार के सदस्यों सहित कुल मिलाकर लगभग 50 कर्मचारी खजले व चाट की यह दुकान चला रहे हैं। खजला-पापड़ की दुकान पर रबड़ी खजला, मलाई खजला, खोए का खजला व दूध का खजला सहित नमकीन व कम मीठे खजले भी खूब बिकते हैं। इसके अलावा पापड़, छोले भटूरे व आलू चाट भी चटपटी चटनी, दही और खट्टे-मीठे व तीखे मसालों के साथ परोसी जाती है।<br />
खजला दुकानदार बताते हैं कि ग्वालियर मेले में आने वाले सैलानी दुकान पर बैठकर तो खजला व चाट का आनंद लेते ही हैं। साथ ही अपने स्वजनों व नाते-रिश्तेदारों के लिये भी खजला पैक कराकर ले जाते हैं, क्योंकि खजला आमतौर पर बाजार में उपलब्ध नहीं होता। खजला ज्यादातर मेलों में ही मिलता व बिकता है। ग्वालियर मेले में लगी खजले की एक बड़ी दुकान के मालिक ने बताया कि औसतन 50 से 60 लाख रूपए की बिक्री हमारी दुकान से हो जाती है।</p>
<p>मेलों में ही गुजरती है पूरी साल</p>
<p>समय के साथ खान-पान में आए बदलाव के बाबजूद भारतीय पारंपरिक व्यंजन खजले की प्रासंगिकता प्रभावित नहीं हुई है। देश भर के मेलों में आज भी खजले की मांग रहती है। खजला दुकानदार बताते हैं ग्वालियर मेला ही नहीं अन्य बड़े-बड़े मेलों मसलन औरंगाबाद महाराष्ट्र, देवधर (बैजनाथ धाम) झारखंड व भरतपुर राजस्थान के मेले सहित देश के अन्य मेलों में भी हम खजले की दुकान लगाते हैं। इस दौरान मेरे माता-पिता सहित पूरा परिवार साथ में चलता है। इस प्रकार हमारे परिवार का अधिकांश वक्त मेलों में ही गुजरता है।</p>
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