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	<title>सेहत &#8211; Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
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		<title>World Coconut Day: नारियल का कोई हिस्सा बेकार नहीं, लकड़ी से लेकर कोकोपीट तक, जानें हर हिस्से का</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:54:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[World Coconut day]]></category>
		<category><![CDATA[नारियल]]></category>
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					<description><![CDATA[नारियल कई सारे न्यूट्रिशन से भरा हुआ सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद फल है। नारियल के इसी गुण और महत्व को बताने के लिए भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में हर साल 2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है। विश्व नारियल दिवस दुनिया के सबसे उपयोगी प्राकृतिक उत्पादों में शामिल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नारियल कई सारे न्यूट्रिशन से भरा हुआ सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद फल है। नारियल के इसी गुण और महत्व को बताने के लिए भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में हर साल 2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है।</p>
<p>विश्व नारियल दिवस दुनिया के सबसे उपयोगी प्राकृतिक उत्पादों में शामिल नारियल के आर्थिक, कृषि और सामाजिक महत्व को बताता है। विश्व नारियल दिवस 2026 की थीम “अनिश्चितता के समय में नारियल: भोजन, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा” है। यह थीम बताती है कि बदलते वैश्विक हालात में नारियल खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और रोजगार के लिए कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।</p>
<p>वहीं, देखा जाए तो नारियल केवल एक फल नहीं बल्कि लाखों किसानों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का आधार है। नारियल के पेड़ का लगभग हर हिस्सा किसी न किसी काम आता है। नारियल पानी का इस्तेमाल ताजगी देने वाले पेय के रूप में होता है जबकि नारियल के गूदे से दूध और तेल तैयार किया जाता है। नारियल तेल खाना पकाने के साथ-साथ साबुन, क्रीम, सौंदर्य प्रसाधन और बालों की देखभाल से जुड़े उत्पादों में भी इस्तेमाल होता है।</p>
<p>विश्व नारियल दिवस पहली बार वर्ष 2009 में मनाया गया था। यह दिवस एशियाई और प्रशांत नारियल समुदाय से जुड़ा है, जिसे अब अंतर्राष्ट्रीय नारियल समुदाय के नाम से जाना जाता है। 2 सितंबर की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन इस संगठन की स्थापना हुई थी। इस दिवस का उद्देश्य नारियल के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नारियल क्षेत्र में निवेश, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करना है।दुनिया के लगभग 80 देशों में नारियल की खेती की जाती है और इसकी करीब 150 किस्में बताई जाती हैं। मलेशियन येलो ड्वार्फ, फिजी ड्वार्फ, किंग कोकोनट, वेस्ट कोस्ट टॉल, ईस्ट कोस्ट टॉल, पनामा टॉल, ड्वार्फ ऑरेंज और ग्रीन ड्वार्फ जैसी किस्में अलग-अलग क्षेत्रों में उगाई जाती हैं। भारत, इंडोनेशिया, फिलीपींस सहित कई एशियाई-प्रशांत देश नारियल उत्पादन और इससे जुड़ी आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>&gt;नारियल की खासियत यह है कि इसके किसी भी हिस्से को आसानी से बेकार नहीं माना जाता।<br />
&gt;इसका तना और लकड़ी घरों, फर्नीचर और नावों के निर्माण में इस्तेमाल होती है।<br />
&gt;नारियल के छिलके और रेशे यानी कोयर से रस्सियां, जाल, चटाइयां, ब्रश और दरवाजे के पायदान बनाए जाते हैं।</p>
<p>&gt;नारियल के छिलके से तैयार बोर्ड का इस्तेमाल फर्नीचर और कुछ औद्योगिक उत्पादों में भी किया जाता है।<br />
&gt;नारियल का भूसा यानी कोकोपीट आधुनिक कृषि में भी उपयोगी है।इसे हाइड्रोपोनिक खेती और पौधों को उगाने के लिए माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ऑर्किड और मशरूम जैसी फसलों के उत्पादन में भी इसका उपयोग किया जाता है।</p>
<p>&gt;वहीं, नारियल के खोल से तैयार सक्रिय कार्बन पानी साफ करने वाले फिल्टर में काम आता है।</p>
<p><strong>नारियल के फायदे</strong><br />
नारियल में फाइबर के साथ विटामिन सी, ई और बी समूह के कुछ विटामिन तथा आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और जिंक जैसे खनिज पाए जाते हैं। नारियल पानी लोकप्रिय पेय है जबकि नारियल का गूदा और दूध कई पारंपरिक व्यंजनों, मिठाइयों और खाद्य पदार्थों का हिस्सा हैं। हालांकि नारियल से जुड़े स्वास्थ्य लाभों को व्यक्ति की जरूरत और कुल आहार के संदर्भ में देखना चाहिए।</p>
<p>नारियल को लेकर कई रोचक तथ्य भी प्रचलित हैं। ‘कोकोनट’ शब्द को पुर्तगाली शब्द ‘कोको’ से जोड़ा जाता है, जिसका अर्थ चेहरा है। माना जाता है कि नारियल के तीन छेद चेहरे जैसी आकृति बनाते हैं। नारियल का पेड़ कई दशकों तक फल दे सकता है और अनुकूल परिस्थितियों में एक पेड़ से सालाना बड़ी संख्या में नारियल प्राप्त किए जा सकते हैं।</p>
<p>द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नारियल पानी को आपात परिस्थितियों में शरीर में तरल की कमी पूरी करने के लिए सलाइन के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जाने की घटनाएं भी दर्ज हैं। हालांकि आधुनिक चिकित्सा में यह नियमित अंतःशिरा उपचार का विकल्प नहीं है। वैज्ञानिक रूप से नारियल को वनस्पति विज्ञान में एक प्रकार का फाइब्रोस ड्रूप माना जाता है, इसलिए इसे सामान्य अर्थों में केवल ‘सूखा मेवा’ कहना सही नहीं है। नारियल की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे किसानों को फल, पानी, तेल, कोयर, कोकोपीट और अन्य उत्पादों के माध्यम से आय के अलग-अलग स्रोत मिलते हैं। नारियल आधारित उद्योग रोजगार पैदा करते हैं और प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात से व्यापार को बढ़ावा मिलता है।-</p>
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		<title>जीआर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सफल किडनी ट्रांसप्लांट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Aug 2026 13:24:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[किडनी ट्रांसप्लांट]]></category>
		<category><![CDATA[जीआर मेडिकल कॉलेज]]></category>
		<category><![CDATA[सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल]]></category>
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					<description><![CDATA[पत्नी ने दिया जीवनदान, पति का हुआ सफल किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने करीब साढ़े छह घंटे में सफलतापूर्वक पूरी की किडनी प्रत्यारोपण प्रक्रिया &#160; ग्वालियर, 30 अगस्त 2026/ ग्वालियर के चिकित्सा इतिहास में रविवार को एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। शासकीय गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सफल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पत्नी ने दिया जीवनदान, पति का हुआ सफल किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने करीब साढ़े छह घंटे में सफलतापूर्वक पूरी की किडनी प्रत्यारोपण प्रक्रिया</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ग्वालियर, 30 अगस्त 2026/ ग्वालियर के चिकित्सा इतिहास में रविवार को एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। शासकीय गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। ग्वालियर-चंबल संभाग के किसी शासकीय चिकित्सीय संस्थान में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है।<br />
इस उपलब्धि से ग्वालियर-चंबल अंचल के गंभीर किडनी रोगियों के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के नए द्वार खुल गए हैं। अब उन्हें देश के महानगरों में की तरह अपने शहर ग्वालियर में किडनी के इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी।</p>
<p>पत्नी ने दिया जीवनदान, पति का हुआ सफल किडनी ट्रांसप्लांट</p>
<p>छतरपुर निवासी 60 वर्षीय कृष्णकांत गुप्ता की दोनों किडनियां खराब हो गई थीं। जीवन के इस कठिन दौर में उनकी 55 वर्षीय पत्नी मीना गुप्ता ने पति को अपनी किडनी दान कर जीवनदान देने का निर्णय लिया।<br />
इसके बाद मरीज और डोनर की आवश्यक मेडिकल जांच, काउंसलिंग, अनुकूलता परीक्षण तथा ट्रांसप्लांट से संबंधित सभी जरूरी प्रक्रियाएं निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी की गईं। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद दोनों को 29 अगस्त को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।<br />
रविवार सुबह करीब 8.30 बजे किडनी प्रत्यारोपण की जटिल प्रक्रिया शुरू हुई। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों ने मणिपाल हॉस्पिटल के यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डॉ. विकास जैन के सहयोग से इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को अंजाम दिया।<br />
करीब साढ़े छह घंटे तक चली यह जटिल चिकित्सा प्रक्रिया दोपहर लगभग 3 बजे सफलतापूर्वक पूरी हुई। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज और किडनी दान करने वाली उनकी पत्नी, दोनों की स्थिति स्थिर है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उनकी निरंतर निगरानी कर रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>संक्रमण से सुरक्षा के लिए विशेष आईसीयू</p>
<p>किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को संक्रमण से सुरक्षित रखना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसे ध्यान में रखते हुए सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट मरीज के लिए विशेष आईसीयू की व्यवस्था की गई है।<br />
सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम होने के बावजूद विशेष आईसीयू में अलग से एसी की व्यवस्था की गई है, ताकि संक्रमण के खतरे को न्यूनतम रखा जा सके। मरीज के कक्ष में डॉक्टरों और अधिकृत चिकित्सा स्टाफ के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।<br />
मरीज को आगामी सात दिनों तक मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की विशेष निगरानी में रखा जाएगा। इसके लिए चिकित्सकों और चिकित्सा स्टाफ की राउंड-द-क्लॉक ड्यूटी लगाई गई है।</p>
<p>विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने रचा इतिहास</p>
<p>ग्वालियर में किडनी ट्रांसप्लांट की इस ऐतिहासिक सफलता में मणिपाल हॉस्पिटल के यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डॉ. विकास जैन,डॉ. नीलिमा टंडन, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ. शिवम यादव, डॉ. अंकित शर्मा, डॉ. सीमा शिंदे, डॉ. जिंदल, डॉ. नम्रता जैन, डॉ. कुशल तथा ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर कविता और राहुल सहित पूरी चिकित्सा टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।<br />
विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी टीम के समन्वित प्रयासों से इस जटिल प्रक्रिया को निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार सफलतापूर्वक पूरा किया गया।</p>
<p>परिजनों ने जताया शासन और चिकित्सा टीम के प्रति आभार</p>
<p>मरीज के बेटे सुमित कनकने ने बताया कि ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई और ऑपरेशन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी नहीं आई। उन्होंने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत नि:शुल्क ट्रांसप्लांट होने से परिवार को बड़ी राहत मिली है।<br />
उन्होंने गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आर.के.एस. धाकड़, डॉ. शिवम यादव और डॉ. अंकित शर्मा सहित पूरी चिकित्सा टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से ग्वालियर में यह जटिल ट्रांसप्लांट संभव हो सका।</p>
<p>ग्वालियर में यह सुविधा निरंतर जारी रहनी चाहिए : डॉ. विकास जैन</p>
<p>ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में शामिल मणिपाल हॉस्पिटल के यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डॉ. विकास जैन ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा अधिक से अधिक स्थानों पर उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों और स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि कार्य के दौरान उन्हें ऐसा अनुभव नहीं हुआ कि वे किसी नए सेटअप में पहली बार ट्रांसप्लांट प्रक्रिया कर रहे हैं।<br />
डॉ. जैन ने विश्वास व्यक्त किया कि ग्वालियर में शुरू हुई किडनी ट्रांसप्लांट की यह महत्वपूर्ण सुविधा निरंतर जारी रहेगी और आने वाले समय में बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों को इसका लाभ मिलेगा।</p>
<p>पूरे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि : प्रो. डॉ. आर.के.एस. धाकड़</p>
<p>गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय और पूरे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।</p>
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		<title>स्वर्ग सदन में लगे निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 825 मरीजों को मिला इलाज, हर सप्ताह पहुंचेगी डॉक्टरों की टीम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:29:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[स्वर्ग सदन]]></category>
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					<description><![CDATA[26 मरीज मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए चिन्हित, जिला अस्पताल में होंगे ऑपरेशन ग्वालियर 27 अगस्त 2026/अखिल भारतीय स्वास्थ्य संस्थान के तत्वावधान में वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक द्विवेदी की धर्मपत्नी एवं समाजसेविका स्व. मोनिका द्विवेदी की 19वीं पुण्यतिथि पर गुरुवार को गुढ़ा-गुढ़ी का नाका स्थित आश्रम स्वर्ग सदन में निःशुल्क सुपर स्पेशलिटी हेल्थ शिविर का आयोजन किया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><em>26 मरीज मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए चिन्हित, जिला अस्पताल में होंगे ऑपरेशन</em></strong><br />
ग्वालियर 27 अगस्त 2026/अखिल भारतीय स्वास्थ्य संस्थान के तत्वावधान में वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक द्विवेदी की धर्मपत्नी एवं समाजसेविका स्व. मोनिका द्विवेदी की 19वीं पुण्यतिथि पर गुरुवार को गुढ़ा-गुढ़ी का नाका स्थित आश्रम स्वर्ग सदन में निःशुल्क सुपर स्पेशलिटी हेल्थ शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं देते हुए कुल 825 मरीजों की जांच कर उनका उपचार किया।<br />
शिविर के मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमएस सागर रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक घनश्याम पिरोनिया ने की। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों एवं उपस्थितजनों द्वारा स्व. मोनिका द्विवेदी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।<br />
इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. एमएस सागर ने कहा कि किसी प्रियजन की स्मृति में जरूरतमंदों की सेवा और उनके स्वास्थ्य की चिंता करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने स्वर्ग सदन में रहने वाले लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच एवं उपचार के लिए हर सप्ताह डॉक्टरों की टीम आश्रम भेजने की घोषणा की।<br />
शिविर में वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. बीआर श्रीवास्तव, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पुनीत रस्तोगी, बाल एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गौड़, न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश उदैनिया, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहिता गौड़, डॉ. रीता मिश्रा, डॉ. वीणा प्रधान, चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनुभव गर्ग, मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अजय पाल, डॉ. प्रदीप प्रजापति, डॉ. राघवेंद्र शर्मा, डॉ. आरके राजौरिया, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गजराज गुर्जर, वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अंकित शर्मा, डॉ. नरेंद्र परमार एवं डॉ. सजल गुप्ता सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों ने निःशुल्क सेवाएं दीं।<br />
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गजराज गुर्जर ने मरीजों की आंखों की जांच की। जांच के बाद 26 मरीजों को मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए चिन्हित किया गया, जिनके ऑपरेशन जिला अस्पताल में किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों को आवश्यक जांच और दवाइयां भी निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।<br />
<strong>संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. जयवीर भारद्वाज</strong> ने बताया कि शिविर में 825 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उपचार किया गया। उन्होंने कहा कि डॉ. गजराज गुर्जर अब तक संस्थान के शिविरों के माध्यम से 80 से अधिक मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन करा चुके हैं। वहीं स्वर्ग सदन में अब तक ऐसे करीब 50 जरूरतमंद मरीजों के ऑपरेशन भी शिविरों के माध्यम से कराए जा चुके हैं, जिनका अपना कोई नहीं था।<br />
शिविर का संचालन संयोजक शीन द्विवेदी ने किया तथा आभार आश्रम संचालक विकास गोस्वामी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर शीन द्विवेदी, क्रिश द्विवेदी, पवन सूर्यवंशी, अतर सिंह जाटव, आकाश श्रीवास, सूरज सविता, राहुल पाल, गिर्राज कुशवाह, काजल, छाया सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।</p>
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		<item>
		<title>श्री शरद मेहरोत्रा स्मृति न्यास ग्वालियर द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण शिविर  आयोजित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:56:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[श्री शरद मेहरोत्रा स्मृति न्यास ग्वालियर]]></category>
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					<description><![CDATA[शिविर में 100 मरीजों का किया स्वास्थ्य परीक्षणग्वालियर। ग्वालियर 22 अगस्त 2026/श्री शरद मेहरोत्रा स्मृति न्यास ग्वालियर के तत्वावधान में शनिवार को बिरला नगर स्थित न्यास भवन में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। जिसमें करीब 100 मरीजों का परीक्षण कर उन्हें परामर्श दिया गया। शिविर का शुभारंभ न्यास अध्यक्ष राजेंद्र सिंह घुरैया ने किया। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>शिविर में 100 मरीजों का किया स्वास्थ्य परीक्षणग्वालियर</strong>।</p>
<p>ग्वालियर 22 अगस्त 2026/श्री शरद मेहरोत्रा स्मृति न्यास ग्वालियर के तत्वावधान में शनिवार को बिरला नगर स्थित न्यास भवन में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। जिसमें करीब 100 मरीजों का परीक्षण कर उन्हें परामर्श दिया गया।<br />
शिविर का शुभारंभ न्यास अध्यक्ष राजेंद्र सिंह घुरैया ने किया। शिविर के समापन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्वालियर विभाग सह संघचालक रवि अग्रवाल ने चिकित्सकों को उपहार देकर सम्मानित किया।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा की एम्स में एंजियोप्लास्टी की गई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 14:35:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा की एम्स में एंजियोप्लास्टी की गई]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली 18 अगस्त 2026/केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा की 17 अगस्त को दिल्ली स्थित एम्स में एंजियोप्लास्टी की गई. अस्पताल ने मंगलवार को बताया कि उनकी हालत स्थिर है और उन्हें निगरानी में रखा गया है. एम्स की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, &#8220;केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">नई दिल्ली 18 अगस्त 2026/केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा की 17 अगस्त को दिल्ली स्थित एम्स में एंजियोप्लास्टी की गई.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">अस्पताल ने मंगलवार को बताया कि उनकी हालत स्थिर है और उन्हें निगरानी में रखा गया है.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">एम्स की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, &#8220;केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की 17 अगस्त 2026 को एंजियोप्लास्टी की गई. उनकी हालत स्थिर है और एम्स दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग में निगरानी में रखा गया है.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, गुरुवार को जेपी नड्डा की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया था.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">अस्पताल ने बताया था कि नड्डा को बेचैनी की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था.</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>कहीं आपका कोलेस्ट्रॉल तो नहीं बढ़ा रही है चाय क्या इसका समाधान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 07:48:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[कोलेस्ट्रॉल तो]]></category>
		<category><![CDATA[चाय]]></category>
		<category><![CDATA[समाधान]]></category>
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					<description><![CDATA[चाय के शौकीनों की कोई कमी नहीं है. मेडिकल साइंस में इसको पीने के कोई खास फायदे तो नहीं बताए गए हैं, खासतौर पर दूध वाली चाय के नुकसान काफी हैं, जैसे चाय एसिडिटी करती है और चीनी वाली चाय शुगर भी बढ़ा सकती है, लेकिन क्या चाय पीने से बैड कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है.जिन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>चाय के शौकीनों की कोई कमी नहीं है. मेडिकल साइंस में इसको पीने के कोई खास फायदे तो नहीं बताए गए हैं, खासतौर पर दूध वाली चाय के नुकसान काफी हैं, जैसे चाय एसिडिटी करती है और चीनी वाली चाय शुगर भी बढ़ा सकती है, लेकिन क्या चाय पीने से बैड कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है.जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है क्या उनको चाय नहीं पीनी चाहिए?</p>
<p>एक रिसर्च के मुताबिक चाय और कोलेस्ट्रॉल के बीच के संबंध के बारे में बताया गया है. इस रिसर्च में खासतौर पर ब्लैक टी के बारे में जानकारी दी गई है. रिसर्च में इस सवाल का जवाब ढूंढा गया है कि क्या रोजाना ब्लैक टी पीने से बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम होता है या बढ़ता है? रिसर्च से यह साफ हुआ कि रोज ब्लैक टी पीने से कोलेस्ट्रॉल के लेवल में कोई खास कमी नहीं आई, इससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ा भी नहीं था. वहीं, दूध वाली चाय से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का रिस्क बताया गया है.</p>
<p>मेदांता मेडिसिटी मूलचंद अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार के मुताबिक साधारण चाय सीधे तौर पर बैड कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाती न ही इसको पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है, लेकिन अगर चाय फुल-फैट दूध की और इसमें बहुत अधिक चीनी है, तो लंबे समय में यह कैलोरी और फैट को बढ़ा सकती है, जो कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का एक रिस्क फैक्टर जरूर है.</p>
<p><strong>ब्लैक टी या दूध वाली चाय में क्या है फायदेमंद</strong></p>
<p>दूध वाली चाय से ज्यादा फायदेमंद ब्लैक- टी है. दूध वाली चाय कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकती है, लेकिन ब्लैक- टी में ऐसा नहीं है. अगर चाय पीने का मन है तो ब्लैक टी, ग्रीन- टी पीना शुरू करें. इसके अपने कई फायदे हैं. यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है और हार्ट के लिए ठीक मानी जाती है, हालांकि अगर आपको पेट से संबंधित कोई बीमारी है, बीपी हाई रहता है, रात में नींद न आने की समस्या रहती है तो फिर अपने डॉक्टर की सलाह पर ही आपको चाय पीनी चाहिए.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>डेंगू से रहें सावधान कलेक्टर ने नागरिकों से की अपील</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 15:10:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[डेंगू]]></category>
		<category><![CDATA[नागरिकों से की अपील]]></category>
		<category><![CDATA[रहें सावधान]]></category>
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					<description><![CDATA[बरसात के मौसम में डेंगू से बचाव हेतु नागरिक आवश्यक सावधानी बरतें,कलेक्टर ने जिलेवासियों से की अपील ग्वालियर24 जुलाई 2026/ बरसात के दौरान डेंगू से बचाव के लिये नागरिकों को आवश्यक सावधानियां बरतना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर हम स्वयं, अपने परिवार और पूरे समाज को सुरक्षित रख सकते हैं। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>बरसात के मौसम में डेंगू से बचाव हेतु नागरिक आवश्यक सावधानी बरतें,कलेक्टर ने जिलेवासियों से की अपील</p>
<p>ग्वालियर24 जुलाई 2026/ बरसात के दौरान डेंगू से बचाव के लिये नागरिकों को आवश्यक सावधानियां बरतना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर हम स्वयं, अपने परिवार और पूरे समाज को सुरक्षित रख सकते हैं। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने जिले के निवासियों से अपील की है कि बरसात के मौसम में मलेरिया एवं डेंगू की बीमारी से बचाव के लिये आवश्यक सावधानी अपनाएं। सावधानी ही बीमारियों से सुरक्षा का उपाय है।</p>
<ul>
<li>कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने जिले के निवासियों से कहा है कि डेंगू की रोकथाम में प्रशासन का सहयोग करें। सभी नागरिक सतर्कता और सहभागिता अपनाएं। अपने घरों, दुकानों एवं आसपास के क्षेत्र में पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, टंकियां एवं अन्य जल पात्रों की नियमित सफाई करें तथा सप्ताह में एक दिन सभी जल पात्रों को खाली कर साफ करें। डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है। इसलिये स्वच्छता और सावधानी ही सबसे प्रभावी बचाव है।<br />
कलेक्टर ने यह भी अपील की है कि पूरी बाजू के कपड़े पहनें। मच्छरदानी एवं मच्छररोधी उपाय अपनाएं। बुखार आने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जांच भी कराएं। जिला प्रशासन द्वारा डेंगू से बचाव के लिये सर्वे, फॉगिंग एवं जागरूकता अभियान में भी नागरिक सहयोग करें। डेंगू से बचाव हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर स्वयं को, परिवार को और पूरे समाज को सुरक्षित रखा जा सकता है।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>इंसुलिन लेने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी डेनमार्क की दवा कंपनी ने भारत में लॉन्च की खास तरह की इंसुलिन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 06:47:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[इंसुलिन]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली 10 जुलाई 2026/डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में अवीक्ली नाम की नई इंसुलिन लॉन्च की है। कंपनी का दावा है कि यह हफ्ते में एक बार दिए जाने वाला बेसल इंसुलिन है, जो टाइप- 1 और टाइप-2 डायबिटीज के वयस्क मरीजों के लिए है। भारत में 10 करोड़ से ज्यादा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h5>नई दिल्ली 10 जुलाई 2026<strong>/</strong>डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में अवीक्ली नाम की नई इंसुलिन लॉन्च की है। कंपनी का दावा है कि यह हफ्ते में एक बार दिए जाने वाला बेसल इंसुलिन है, जो टाइप- 1 और टाइप-2 डायबिटीज के वयस्क मरीजों के लिए है। भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि 13.6 करोड़ लोगों को प्री- डायबिटीज है। फिलहाल देश में करीब 60 लाख लोग इंसुलिन थेरेपी ले रहे हैं।</h5>
<h5>एम्स के मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर नीरज निश्चल ने कहा कि हफ्ते में एक बार लगने वाली लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन दुनिया के कुछ देशों में पहले से इस्तेमाल हो रही है। नई साप्ताहिक लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन आने से रोज लगने वाले बेसल इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत कम हो जाएगी। हालांकि, भोजन के बाद लगने वाली शॉर्ट एक्टिंग इंसुलिन की जरूरत कई मरीजों में पहले की तरह बनी रह सकती है</h5>
<h5>प्रो. निश्चल ने कहा कि इस तरह की नई इंसुलिन की शुरुआत के दौरान सही डोज तय करने में कुछ समय लग सकता है। इस दौरान हाइपोग्लाइसीमिया ( ब्लड शुगर बहुत कम होने) का खतरा भी रह सकता है। एम्स दिल्ली के प्रोफेसर नवल विक्रम ने कहा कि हफ्ते में एक बार लगने वाली बेसल इंसुलिन पर कई देशों में अध्ययन हुए हैं और उनमें इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।</h5>
<h5>एम्स के प्रोफेसर ने कहा है कि हर ब्रांड की इंसुलिन की प्रभावशीलता और उसके क्लीनिकल परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भी नई साप्ताहिक इंसुलिन पर जाने का फैसला मरीज को अपने डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। रोज लगने वाली इंसुलिन से साप्ताहिक इंसुलिन पर शिफ्ट करते समय डोज का सही निर्धारण और समय-समय पर उसका एडजस्टमेंट करना पड़ता है</h5>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नीम की दातून छोड़िये आपके दातों को बज्र करने का दम रखता है यह पौधा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 05:17:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[दांत]]></category>
		<category><![CDATA[बज्रदंती]]></category>
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					<description><![CDATA[मुजफ्फरपुर: अगर आप भी लंबे समय से दांतों से जुड़ी समस्याओं से परेशान हैं और इलाज के बाद भी राहत नहीं मिल रही है, तो यह खबर आपके लिए दिलचस्प हो सकती है. मुजफ्फरपुर के गोविंदपुर निवासी श्रीकांत कुशवाहा एक ऐसे औषधीय पौधे का उपयोग करने का दावा कर रहे हैं, जिसे ग्रामीण इलाके में कठ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुजफ्फरपुर:</strong> अगर आप भी लंबे समय से दांतों से जुड़ी समस्याओं से परेशान हैं और इलाज के बाद भी राहत नहीं मिल रही है, तो यह खबर आपके लिए दिलचस्प हो सकती है. मुजफ्फरपुर के गोविंदपुर निवासी श्रीकांत कुशवाहा एक ऐसे औषधीय पौधे का उपयोग करने का दावा कर रहे हैं, जिसे ग्रामीण इलाके में कठ सरइया और आयुर्वेद में बज्रदंती के नाम से जाना जाता है. श्रीकांत पिछले कई वर्षों से अपने बागान में करीब 400 से अधिक औषधीय पौधों का संरक्षण कर रहे हैं. उनका कहना है कि बज्रदंती के पौधे को वह बिहटा के जंगल से लाए थे और अब अपने बगीचे में इसकी खेती कर रहे हैं. उनके अनुसार, इस पौधे के डंठल को सुखाकर उसका पाउडर तैयार किया जाता है. यदि इस पाउडर से नियमित रूप से दांत साफ किए जाएं या इसके डंठल का दातून किया जाए, तो दांतों और मसूड़ों से जुड़ी कई सामान्य समस्याओं में लाभ मिल सकता है.</p>
<p>दावा है कि उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार में इसका इस्तेमाल किया, जहां उन्हें सकारात्मक परिणाम देखने को मिला. इसके बाद उन्होंने गांव के अन्य लोगों को भी इसके बारे में जानकारी दी. आज वह इस पाउडर को करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध करा रहे हैं. उनका कहना है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक है और ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से दातून के रूप में इसका उपयोग होता रहा है.</p>
<p>वह बताते हैं कि नियमित उपयोग से दांतों की सफाई बेहतर होती है और मसूड़ों की देखभाल में भी मदद मिल सकती है. हालांकि, वह यह भी कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को इसका उपयोग नियमित रूप से करना चाहिए, तभी इसका असर देखने को मिलता है.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चमका जीआरएमसी का नाम, ब्रेन स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में चेयरपर्सन बने डॉ. दिनेश उदैनिया</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%9a-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a4%ae%e0%a4%95/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 16:00:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेन स्ट्रोक]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली में हुई इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में निभाई अहम भूमिका, अमेरिका की नई गाइडलाइन पर हुआ मंथन ग्वालियर 31मई 2026/गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. दिनेश उदैनिया ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर ग्वालियर और जीआरएमसी का गौरव बढ़ाया है। नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में डॉ. उदैनिया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली में हुई इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में निभाई अहम भूमिका, अमेरिका की नई गाइडलाइन पर हुआ मंथन</strong></p>
<p>ग्वालियर 31मई 2026/गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. दिनेश उदैनिया ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर ग्वालियर और जीआरएमसी का गौरव बढ़ाया है। नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में डॉ. उदैनिया को चेयरपर्सन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां देश-विदेश के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों ने स्ट्रोक उपचार की नवीनतम तकनीकों और दिशा-निर्देशों पर गहन चर्चा की।</p>
<p>कॉन्फ्रेंस में विशेष रूप से अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन (ASA) द्वारा जारी नई गाइडलाइन पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान स्ट्रोक के त्वरित उपचार, मरीजों की रिकवरी बढ़ाने और मृत्यु दर कम करने के लिए अपनाई जा रही आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।</p>
<p>चेयरपर्सन के रूप में डॉ. दिनेश उदैनिया ने विभिन्न तकनीकी सत्रों का संचालन किया तथा विशेषज्ञों के बीच हुए विमर्श को दिशा प्रदान की। चिकित्सा जगत के प्रतिष्ठित मंच पर उनकी यह भूमिका न केवल उनकी विशेषज्ञता की पहचान है, बल्कि जीआरएमसी की बढ़ती राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का भी प्रमाण मानी जा रही है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रोक आज दुनिया में मृत्यु और दिव्यांगता के प्रमुख कारणों में शामिल है। ऐसे में नई गाइडलाइन के आधार पर उपचार प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। कॉन्फ्रेंस में उन्नत न्यूरो इंटरवेंशन तकनीकों, आपातकालीन प्रबंधन और मरीजों के दीर्घकालिक पुनर्वास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।</p>
<p>डॉ. उदैनिया की इस उपलब्धि को जीआरएमसी और ग्वालियर के चिकित्सा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जीआरएमसी के विशेषज्ञों की बढ़ती भागीदारी से संस्थान की पहचान लगातार मजबूत हो रही है।</p>
<p><strong>स्ट्रोक उपचार की नई दिशा तय करने जुटे विशेषज्ञ</strong></p>
<p>इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो सर्जन और चिकित्सा शोधकर्ता शामिल हुए। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन की नई गाइडलाइन के आधार पर भविष्य की उपचार रणनीतियों और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर मंथन किया गया।</p>
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