<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>प्रमुख खबरें &#8211; Shabd Shakti News</title>
	<atom:link href="https://shabdshaktinews.in/category/news/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://shabdshaktinews.in</link>
	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Fri, 19 Jun 2026 14:56:53 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.5</generator>
	<item>
		<title>भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रस्तुत की सेवा की अनूठी मिसाल 41 परिवारों के 59 बेसहारा बच्चों को लिया गोद</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:56:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[हेमंत खंडेलवाल सेवा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64640</guid>

					<description><![CDATA[बैतूल 19 जून 2026/“मानव सेवा ही माधव सेवा है” के पावन संकल्प को आत्मसात करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल  ने मानवता और संवेदना की एक प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत की है। अपने पूज्य पिताजी, पूर्व सांसद श्रद्वेय श्री विजय कुमार खंडेलवाल जी की स्मृति में संचालित विजय सेवा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>बैतूल 19 जून 2026/“मानव सेवा ही माधव सेवा है” के पावन संकल्प को आत्मसात करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल  ने मानवता और संवेदना की एक प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत की है।</p>
<p>अपने पूज्य पिताजी, पूर्व सांसद श्रद्वेय श्री विजय कुमार खंडेलवाल जी की स्मृति में संचालित विजय सेवा न्यास के माध्यम से उन्होंने 41 परिवारों के 59 बेसहारा बच्चों को गोद लेकर उनकी शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की जिम्मेदारी का संकल्प लिया</p>
<p>प्रदेश अध्‍यक्ष जी ने आज बैतूल में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों की स्कूल फीस के चेक विद्यालय प्रबंधन/प्राचार्यों को प्रदान कर मानवता की मिसाल प्रस्‍तुत की। साथ ही प्रत्येक बच्चे को शैक्षणिक सामग्री हेतु ₹2,000 तथाउनके पालकों एवं परिजनों को ₹20,000 की व्यक्तिगत आर्थिक सहायता भी दी गई।</p>
<p>यह पहल केवल सहायता नहीं, बल्कि उन मासूम सपनों को संबल देने का भावपूर्ण प्रयास है, जो कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा के सहारे अपने भविष्य को संवारने का हौसला रखते हैं। साथ ही परिजनों को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में भी ठोस कदम उठाया गया है।</p>
<p>श्रद्वेय श्री विजय कुमार खंडेलवाल जी के सेवा, समर्पण और संवेदना के आदर्शों को आगे बढ़ाता यह अभियान वास्तव में समाज के अंतिम व्यक्ति तक आशा, सम्मान और सहयोग पहुँचाने की जीवंत मिसाल है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>20 जून का चेपॉक वनडे रोहित शर्मा के करियर का आखिरी मैच होगा</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/20-%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%a8%e0%a4%a1%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%b0/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:48:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[खेल]]></category>
		<category><![CDATA[रोहित शर्मा सन्यास]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64637</guid>

					<description><![CDATA[भारतीय क्रिकेट टीम के &#8216;हिटमैन&#8217; पिछले काफी वक्त से चर्चा में हैं. रोहित शर्मा की चर्चा उनके दमदार प्रदर्शन को लेकर नहीं बल्कि संन्यास को लेकर हो रही है. सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक में यह दावा किया जा रहा है कि शनिवार, 20 जून को चेपॉक में रोहित शर्मा अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारतीय क्रिकेट टीम के &#8216;हिटमैन&#8217; पिछले काफी वक्त से चर्चा में हैं. रोहित शर्मा की चर्चा उनके दमदार प्रदर्शन को लेकर नहीं बल्कि संन्यास को लेकर हो रही है. सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक में यह दावा किया जा रहा है कि शनिवार, 20 जून को चेपॉक में रोहित शर्मा अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेलेंगे. यानी अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरा वनडे उनका आखिरी मैच होगा. यहां जानिए इन दावों में कितनी सच्चाई है.</p>
<p>बता दें कि रोहित शर्मा टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले चुके हैं. अब वह सिर्फ वनडे इंटरनेशनल में ही खेलते हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ धर्मशाला में खेले गए पहले वनडे में रोहित 16 रन पर रन आउट हो गए थे. इसके बाद <a title="लखनऊ" href="https://www.abplive.com/topic/lucknow/amp" target="_top" data-type="interlinkingkeywords" rel="noopener">लखनऊ</a> में खेले गए दूसरे वनडे में हिटमैन के बल्ले से 39 गेंद में 48 रन निकले थे. अब दावा किया जा रहा है कि शनिवार, 20 जून को चेपॉक में खेला जाने वाला तीसरा वनडे उनके करियर का आखिरी मैच होगा.</p>
<p>रोहित शर्मा के संन्यास की खबरें सिर्फ सोशल मीडिया पर ही वायरल नहीं हैं, बल्कि कई वेबसाइट्स और न्यूज चैनलों ने भी इसे चलाया है. कहा जा रहा है कि बीसीसीआई ने आधिकारिक तौर पर रोहित शर्मा को यह संदेश दे दिया है कि वह 2027 वनडे विश्व कप का हिस्सा नहीं होंगे. ऐसे में अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरा वनडे उनके करियर का आखिरी मैच होगा.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विमानतल एवं व्हीआईपी सर्किट हाउस मुरार की पाँच किलोमीटर की परिधि में “नो फ्लाई जोन” घोषित</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a4%b2-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%86%e0%a4%88%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:37:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[नो फ्लाई जोन” घोषित]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64634</guid>

					<description><![CDATA[&#160; ग्वालियर 19 जून 2026/ ग्वालियर एयर फोर्स स्टेशन विमानतल एवं व्हीआईपी सर्किट हाउस मुरार के पाँच किलोमीटर की परिधि के क्षेत्र को 20 जून को दोपहर 2 बजे से 22 जून को शाम 4 बजे तक “नो फ्लाई जोन” घोषित किया गया है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के भ्रमण कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>ग्वालियर 19 जून 2026/ ग्वालियर एयर फोर्स स्टेशन विमानतल एवं व्हीआईपी सर्किट हाउस मुरार के पाँच किलोमीटर की परिधि के क्षेत्र को 20 जून को दोपहर 2 बजे से 22 जून को शाम 4 बजे तक “नो फ्लाई जोन” घोषित किया गया है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के भ्रमण कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह द्वारा इस आशय का प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।<br />
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा नागर विमानन मंत्रालय के राजपत्र में प्रकाशित ड्रोन नियमों के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह आदेश जारी किया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन तिथियों में ग्वालियर विमानतल व व्हीआईपी सर्किट हाउस मुरार के पाँच किलोमीटर की परिधि में ड्रोन, पैराग्लाइडिंग, हॉट एयर बैलून एवं अन्य फ्लाईंग गतिविधियां नहीं की जा सकेंगीं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मेले में बनेगा वॉकिंग ट्रैक,20 जुलाई से लगेगा सावन मेला, सुरक्षा के लिए बनेगी बाउण्ड्रीवॉल</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:31:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर मेला]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64628</guid>

					<description><![CDATA[ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के संचालक मंडल की बैठक में मेला विकास के संबंध में लिए गए महत्वपूर्ण निर्ण ग्वालियर 19 जून 2026/ ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण द्वारा इस वर्ष श्रावण मेले का आयोजन किया जायेगा। यह मेला 20 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक निर्धारित किया गया है। ग्वालियर व्यापार मेले के संचालक मंडल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के संचालक मंडल की बैठक में मेला विकास के संबंध में लिए गए महत्वपूर्ण निर्ण</strong></p>
<p>ग्वालियर 19 जून 2026/ ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण द्वारा इस वर्ष श्रावण मेले का आयोजन किया जायेगा। यह मेला 20 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक निर्धारित किया गया है। ग्वालियर व्यापार मेले के संचालक मंडल की 50वी बैठक शुक्रवार को मेला प्राधिकरण में आयोजित हुई। प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अशोक जदौन की अध्यक्षता में आयोजित हुई इस बैठक में मेले के विकास के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।<br />
ग्वालियर मेला प्राधिकरण कार्यालय में आयोजित बैठक में उपाध्यक्ष श्री उदयवीर सिंह गुर्जर, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, मेला सचिव श्री सुनील त्रिपाठी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align: center;"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64629" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023.jpg 1600w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023-300x225.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023-1024x768.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023-768x576.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023-1536x1152.jpg 1536w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023-560x420.jpg 560w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023-80x60.jpg 80w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023-696x522.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023-1068x801.jpg 1068w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260619-WA0023-265x198.jpg 265w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>संचालक मंडल की बैठक में मेला परिसर में सुरक्षा की दृष्टि से राजमाता उद्यान से संस्कृति गार्डन तथा एमआईटीएस वाली रोड तक बाउण्ड्रीवॉल का प्रस्ताव अनुमोदित किया गया है। इसके साथ ही गोदाम बस्ती के पास वाली भूमि का कॉमर्शियल उपयोग करने के लिये प्रस्ताव तैयार करने एवं एलओआई जारी कर आगामी बैठक में विषय रखने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही मेला आयोजन के दौरान प्रशासनिक भवन तैयार करने का निर्णय भी लिया गया है। मेले के दौरान महिलाओं के लिये पृथक से शौचालय निर्माण कराने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही मेला परिसर में 196 नवीन दुकानों के निर्माण कराने के निर्णय का भी अनुमोदन किया गया है।<br />
मेला परिसर में स्थित एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर की मरम्मत एवं संधारण का कार्य कराने का भी निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही मेला परिसर में सुबह एवं शाम घूमने आने वाले लोगों के लिये वॉकिंग ट्रैक निर्माण कराने का भी निर्णय लिया गया। इसके लिये प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।<br />
उपाध्यक्ष श्री उदयवीर सिंह ने बैठक में पर्यावरण को दृष्टिगत रखते हुए मेला परिसर में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कराने का प्रस्ताव रखा। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने वृहद वृक्षारोपण हेतु प्रस्ताव तैयार करने की बात कही। मेला परिसर में सौर ऊर्जा विकास के माध्यम से सोलर प्लांट लगाने का निर्णय भी लिया गया।</p>
<p>मेला आयोजन के संबंध में सुझाव लिए</p>
<p>ग्वालियर मेला प्रांगण में व्यापारिक संघ के साथ चर्चा कर आगामी मेले को और व्यवस्थित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में व्यापारी संघ द्वारा मेला अवधि 2 माह रखने, मीना बाजार को व्यवस्थित बनाने, मेला परिसर में महिला शौचालय, मेला अवधि में पार्किंग व्यवस्था बेहतर बनाने, साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिये अपने अमूल्य सुझाव दिए गए। जिस पर अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ने अपनी सहमति प्रदान की एवं आगामी मेला को भव्य बनाने का आश्वासन दिया।<br />
मेला व्यापारी संघ की ओर से श्री महेन्द्र भदकारिया, श्री बलवीर सिंह, श्री महेश मुदगल, श्री अनिल पुलियानी, श्री उमेश उप्पल, श्री अनुज गुर्जर, श्री जगदीश उपाध्याय एवं पं. विजय कब्जू उपस्थित थे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बीबीसी का सनसनीखेज खुलासा वीरांगना लक्ष्मीबाई की मौत की खुशी में जयाजीराव सिंधिया ने जनरल रोज़ और हैमिल्टन के सम्मान में ग्वालियर में दिया था भोज</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:51:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[वीरांगना की मौत पर ग्वालियर में भोज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64614</guid>

					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे ग्वालियर 19 जून 2026/वीरांगना लक्ष्मीबाईबलिदान दिवस 18जून को BBC न्यूज़ हिंदी वेब  पोर्टल ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई द्वारा ग्वालियर में अंग्रेजों से किए युद्ध पर आधारित एक लेख शीर्षक&#8220;सिर पर तलवार के वार से मारी गई थीं रानी लक्ष्मीबाई&#8221;  का प्रकाशन किया गया इस लेख में  बीबीसी ने दावा किया है  कि दो [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h5 style="text-align: center;">प्रवीण दुबे</h5>
<h5 style="text-align: left;">ग्वालियर 19 जून 2026/वीरांगना लक्ष्मीबाईबलिदान दिवस 18जून को BBC न्यूज़ हिंदी वेब  पोर्टल ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई द्वारा ग्वालियर में अंग्रेजों से किए युद्ध पर आधारित एक लेख</h5>
<h5 style="text-align: left;"><strong>शीर्षक</strong>&#8220;<strong>सिर पर तलवार के वार से मारी गई थीं रानी लक्ष्मीबाई&#8221;  </strong>का प्रकाशन किया गया इस लेख में  बीबीसी ने दावा किया है  कि दो दिन बाद जयाजीराव सिंधिया ने रानी की मौत और  इस जीत की खुशी में जनरल रोज़ और सर रॉबर्ट हैमिल्टन के सम्मान में ग्वालियर में भोज दिया था ,रानी की मौत के साथ ही  विद्रोहियों का साहस टूट गया था  और ग्वालियर पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हो गया था।</h5>
<h5 dir="auto"></h5>
<h5 dir="auto">लेख में यह भी दावा है कि  अंग्रेज़ों की तरफ़ से कैप्टन रॉड्रिक ब्रिग्स पहला ऐसा  शख़्स था जिसने रानी लक्ष्मीबाई को अपनी आँखों से लड़ाई के मैदान में लड़ते हुए देखा था। लेख में उस लड़ाई में भाग ले रहे जॉन हेनरी सिलवेस्टर की  किताब &#8216;रिकलेक्शंस ऑफ़ द कैंपेन इन मालवा एंड सेंट्रल इंडिया&#8217; का हवाला देते हुए रानी के ग्वालियर. में  अंतिम समय तक किए भीषण युद्ध का आँखों देखा वर्णन्न भी किया गया है जो अपने आप में रोमांचित करने वाला है। लेख में उस लड़ाई के समय की एक अन्य लेखक एंटोनिया फ़्रेज़र की  पुस्तक, &#8216;द वॉरियर क्वीन&#8217; का भी हवाला दिया गया है। इस  लड़ाई में लड़ रहे कैप्टन क्लेमेंट वॉकर हेनीज द्वारा  बाद में रानी के अंतिम क्षणों का वर्णन भी लेख में है।इरा मुखोटी की  किताब &#8216;हीरोइंस&#8217; का हवाला देते हुए रानी के पुत्र के बारे में बताया गया है कि   &#8220;दामोदर ने दो साल बाद 1860 में अंग्रेज़ों के सामने आत्म समर्पण किया. बाद में उसे अंग्रेज़ों ने पेंशन भी दी. 58 साल की उम्र में उनकी मौत हुई। इस लेख में ग्वालियर के सिंधिया राजवंश को लेकर भी एक सनसनी खेज खुलासा किया गया है जिसमें बताया  गया है कि दो दिन बाद जयाजीराव सिंधिया ने रानी की मौत और  इस जीत की खुशी में जनरल रोज़ और सर रॉबर्ट हैमिल्टन के सम्मान में ग्वालियर में भोज दिया,रानी की मौत के साथ ही विद्रोहियों का साहस टूट गया और ग्वालियर पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हो गया.</h5>
<h5 dir="auto"></h5>
<h5 dir="auto"><strong>शब्दशक्ति न्यूज़ #shabdshaktinews.in अपने पाठकों के लिए वीरांगना लक्ष्मीबाई के साहस शौर्य और बलिदान से जुड़े बीबीसी न्यूज़ हिंदी वेब पोर्टल पर प्रकाशित इस लेख को शब्दशः प्रकाशित कर रहे हैं।</strong></h5>
<h5 dir="auto"></h5>
<h1 id="content" class="article-heading css-rqvidu e1j37txl0" tabindex="-1">सिर पर तलवार के वार से मारी गई थीं रानी लक्ष्मीबाई</h1>
<h5 class="css-1qn0xuy"><span role="text"><span data-testid="caption-paragraph">झांसी की रानी लक्ष्मीबाई</span></span></h5>
<h5 class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr"><span class="css-5ku87v">प्रकाशित</span><time class="css-illkbo expmsel0" datetime="2026-06-18">18 जून 2026</time></h5>
<h5 class="css-1rsf0vv" data-testid="read-time"><span class="css-qxza9s">पढ़ने का समय: 8 मिनट</span></h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr"><b>(यह लेख बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर</b><a class="focusIndicatorReducedWidth css-n8oauk e1h2ur550" href="https://www.bbc.com/hindi/india-40327380.amp" target="_blank" rel="noopener"><b> 20 जून 2017 को पहली बार प्रकाशित</b></a><b> हुआ था)</b></p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr"><b>अंग्रेज़ों की तरफ़ से कैप्टन रॉड्रिक ब्रिग्स पहला शख़्स था जिसने रानी लक्ष्मीबाई को अपनी आँखों से लड़ाई के मैदान में लड़ते हुए देखा.</b></p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने घोड़े की रस्सी अपने दाँतों से दबाई हुई थी. वो दोनों हाथों से तलवार चला रही थीं और एक साथ दोनों तरफ़ वार कर रही थीं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उनसे पहले एक और अंग्रेज़ जॉन लैंग को रानी लक्ष्मीबाई को नज़दीक से देखने का मौका मिला था, लेकिन लड़ाई के मैदान में नहीं, उनकी हवेली में.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">जब दामोदर के गोद लिए जाने को अंग्रेज़ों ने अवैध घोषित कर दिया तो रानी लक्ष्मीबाई को झाँसी का अपना महल छोड़ना पड़ा था</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने एक तीन मंज़िल की साधारण सी हवेली &#8216;रानी महल&#8217; में शरण ली थी.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी ने वकील जॉन लैंग की सेवाएं लीं जिसने हाल ही में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ़ एक केस जीता था.</h5>
<h5 id="रानी-महल-में-लक्ष्मी-बाई" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">रानी महल&#8217; में लक्ष्मी बाई</h5>
<h5>लैंग का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था और वो मेरठ में एक अख़बार, &#8216;मुफ़ुस्सलाइट&#8217; निकाला करते थे.</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">लैंग अच्छी ख़ासी फ़ारसी और हिंदुस्तानी बोल लेते थे और ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन उन्हें पसंद नहीं करता था क्योंकि वो हमेशा उन्हें घेरने की कोशिश किया करते थे.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">जब लैंग पहली बार झाँसी आए तो रानी ने उनको लेने के लिए घोड़े का एक रथ आगरा भेजा था.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उनको झाँसी लाने के लिए रानी ने अपने दीवान और एक अनुचर को आगरा रवाना किया.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">अनुचर के हाथ में बर्फ़ से भरी बाल्टी थी जिसमें पानी, बीयर और चुनिंदा वाइन्स की बोतलें रखी हुई थीं. पूरे रास्ते एक नौकर लैंग को पंखा करते आया था.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">झाँसी पहुंचने पर लैंग को पचास घुड़सवार एक पालकी में बैठा कर &#8216;रानी महल&#8217; लाए जहाँ के बगीचे में रानी ने एक शामियाना लगवाया हुआ था.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="मलमल-की-साड़ी" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">मलमल की साड़ी</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी लक्ष्मीबाई शामियाने के एक कोने में एक पर्दे के पीछे बैठी हुई थीं. तभी अचानक रानी के दत्तक पुत्र दामोदर ने वो पर्दा हटा दिया.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">लैंग की नज़र रानी के ऊपर गई. बाद में रेनर जेरॉस्च ने एक किताब लिखी, &#8216;द रानी ऑफ़ झाँसी, रेबेल अगेंस्ट विल.&#8217;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">किताब में रेनर जेरॉस्च ने जॉन लैंग को कहते हुए बताया, &#8216;रानी मध्यम कद की तगड़ी महिला थीं. अपनी युवावस्था में उनका चेहरा बहुत सुंदर रहा होगा, लेकिन अब भी उनके चेहरे का आकर्षण कम नहीं था. मुझे एक चीज़ थोड़ी अच्छी नहीं लगी, उनका चेहरा ज़रूरत से ज़्यादा गोल था. हाँ उनकी आँखें बहुत सुंदर थीं और नाक भी काफ़ी नाज़ुक थी. उनका रंग बहुत गोरा नहीं था. उन्होंने एक भी ज़ेवर नहीं पहन रखा था, सिवाए सोने की बालियों के. उन्होंने सफ़ेद मलमल की साड़ी पहन रखी थी, जिसमें उनके शरीर का रेखांकन साफ़ दिखाई दे रहा था. जो चीज़ उनके व्यक्तित्व को थोड़ा बिगाड़ती थी- वो थी उनकी फटी हुई आवाज़.&#8217;</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="रानी-के-घुड़सवार" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">रानी के घुड़सवार</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">बहरहाल कैप्टन रॉड्रिक ब्रिग्स ने तय किया कि वो ख़ुद आगे जा कर रानी पर वार करने की कोशिश करेंगे.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">लेकिन जब-जब वो ऐसा करना चाहते थे, रानी के घुड़सवार उन्हें घेर कर उन पर हमला कर देते थे. उनकी पूरी कोशिश थी कि वो उनका ध्यान भंग कर दें.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">कुछ लोगों को घायल करने और मारने के बाद रॉड्रिक ने अपने घोड़े को एड़ लगाई और रानी की तरफ़ बढ़ चले थे.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उसी समय अचानक रॉड्रिक के पीछे से जनरल रोज़ की अत्यंत निपुण ऊँट की टुकड़ी ने एंट्री ली. इस टुकड़ी को रोज़ ने रिज़र्व में रख रखा था.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">इसका इस्तेमाल वो जवाबी हमला करने के लिए करने वाले थे. इस टुकड़ी के अचानक लड़ाई में कूदने से ब्रिटिश खेमे में फिर से जान आ गई. रानी इसे फ़ौरन भाँप गईं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उनके सैनिक मैदान से भागे नहीं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी संख्या कम होनी शुरू हो गई.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="ब्रिटिश-सैनिक" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">ब्रिटिश सैनिक</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उस लड़ाई में भाग ले रहे जॉन हेनरी सिलवेस्टर ने अपनी किताब &#8216;रिकलेक्शंस ऑफ़ द कैंपेन इन मालवा एंड सेंट्रल इंडिया&#8217; में लिखा, &#8220;अचानक रानी ज़ोर से चिल्लाई, &#8216;मेरे पीछे आओ.&#8217; पंद्रह घुड़सवारों का एक जत्था उनके पीछे हो लिया. वो लड़ाई के मैदान से इतनी तेज़ी से हटीं कि अंग्रेज़ सैनिकों को इसे समझ पाने में कुछ सेकेंड लग गए. अचानक रॉड्रिक ने अपने साथियों से चिल्ला कर कहा, &#8216;दैट्स दि रानी ऑफ़ झाँसी, कैच हर.'&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी और उनके साथियों ने भी एक मील ही का सफ़र तय किया था कि कैप्टेन ब्रिग्स के घुड़सवार उनके ठीक पीछे आ पहुंचे. जगह थी कोटा की सराय.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">लड़ाई नए सिरे से शुरू हुई. रानी के एक सैनिक के मुकाबले में औसतन दो ब्रिटिश सैनिक लड़ रहे थे. अचानक रानी को अपने बायें सीने में हल्का-सा दर्द महसूस हुआ, जैसे किसी सांप ने उन्हें काट लिया हो.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">एक अंग्रेज़ सैनिक ने जिसे वो देख नहीं पाईं थीं, उनके सीने में संगीन भोंक दी थी. वो तेज़ी से मुड़ीं और अपने ऊपर हमला करने वाले पर पूरी ताकत से तलवार लेकर टूट पड़ीं.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="राइफ़ल-की-गोली" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">राइफ़ल की गोली</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी को लगी चोट बहुत गहरी नहीं थी, लेकिन उसमें बहुत तेज़ी से ख़ून निकल रहा था. अचानक घोड़े पर दौड़ते-दौड़ते उनके सामने एक छोटा-सा पानी का झरना आ गया.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने सोचा वो घोड़े की एक छलांग लगाएंगी और घोड़ा झरने के पार हो जाएगा. तब उनको कोई भी नहीं पकड़ सकेगा.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने घोड़े में एड़ लगाई, लेकिन वो घोड़ा छलाँग लगाने के बजाए इतनी तेज़ी से रुका कि वो क़रीब क़रीब उसकी गर्दन के ऊपर लटक गईं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने फिर एड़ लगाई, लेकिन घोड़े ने एक इंच भी आगे बढ़ने से इंकार कर दिया. तभी उन्हें लगा कि उनकी कमर में बाई तरफ़ किसी ने बहुत तेज़ी से वार हुआ है.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उनको राइफ़ल की एक गोली लगी थी. रानी के बांए हाथ की तलवार छूट कर ज़मीन पर गिर गई.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने उस हाथ से अपनी कमर से निकलने वाले ख़ून को दबा कर रोकने की कोशिश की.</p>
<h2 id="रानी-पर-जानलेवा-हमला" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">रानी पर जानलेवा हमला</h2>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">एंटोनिया फ़्रेज़र अपनी पुस्तक, &#8216;द वॉरियर क्वीन&#8217; में लिखती हैं, &#8220;तब तक एक अंग्रेज़ रानी के घोड़े की बगल में पहुंच चुका था. उसने रानी पर वार करने के लिए अपनी तलवार ऊपर उठाई. रानी ने भी उसका वार रोकने के लिए दाहिने हाथ में पकड़ी अपनी तलवार ऊपर की.&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">&#8220;उस अंग्रेज़ की तलवार उनके सिर पर इतनी तेज़ी से लगी कि उनका माथा फट गया और वो उसमें निकलने वाले ख़ून से लगभग अंधी हो गईं.&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तब भी रानी ने अपनी पूरी ताकत लगा कर उस अंग्रेज़ सैनिक पर जवाबी वार किया. लेकिन वो सिर्फ़ उसके कंधे को ही घायल कर पाई. रानी घोड़े से नीचे गिर गईं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तभी उनके एक सैनिक ने अपने घोड़े से कूद कर उन्हें अपने हाथों में उठा लिया और पास के एक मंदिर में ले लाया. रानी तब तक जीवित थीं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">मंदिर के पुजारी ने उनके सूखे हुए होठों को एक बोतल में रखा गंगा जल लगा कर तर किया. रानी बहुत बुरी हालत में थीं. धीरे-धीरे वो अपने होश खो रही थीं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उधर, मंदिर के अहाते के बाहर लगातार फ़ायरिंग चल रही थी. अंतिम सैनिक को मारने के बाद अंग्रेज़ सैनिक समझे कि उन्होंने अपना काम पूरा कर दिया है.</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="दामोदर-के-लिए" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">दामोदर के लिए&#8230;</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तभी रॉड्रिक ने ज़ोर से चिल्ला कर कहा, &#8220;वो लोग मंदिर के अंदर गए हैं. उन पर हमला करो. रानी अभी भी ज़िंदा है.&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उधर, पुजारियों ने रानी के लिए अंतिम प्रार्थना करनी शुरू कर दी थी. रानी की एक आँख अंग्रेज़ सैनिक की कटार से लगी चोट के कारण बंद थी.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उन्होंने बहुत मुश्किल से अपनी दूसरी आँख खोली. उन्हें सब कुछ धुंधला दिखाई दे रहा था और उनके मुंह से रुक-रुक कर शब्द निकल रहे थे, &#8220;&#8230;.दामोदर&#8230; मैं उसे तुम्हारी&#8230; देखरेख में छोड़ती हूँ&#8230; उसे छावनी ले जाओ&#8230; दौड़ो उसे ले जाओ.&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">बहुत मुश्किल से उन्होंने अपने गले से मोतियों का हार निकालने की कोशिश की. लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाई और फिर बेहोश हो गईं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">मंदिर के पुजारी ने उनके गले से हार उतार कर उनके एक अंगरक्षक के हाथ में रख दिया, &#8220;इसे रखो&#8230; दामोदर के लिए.&#8221;</p>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<h5 id="रानी-का-पार्थिव-शरीर" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">रानी का पार्थिव शरीर</h5>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी की साँसे तेज़ी से चलने लगी थीं. उनकी चोट से ख़ून निकल कर उनके फेफड़ों में घुस रहा था. धीरे-धीरे वो डूबने लगी थीं. अचानक जैसे उनमें फिर से जान आ गई.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">वो बोलीं, &#8220;अंग्रेज़ों को मेरा शरीर नहीं मिलना चाहिए.&#8221; ये कहते ही उनका सिर एक ओर लुड़क गया. उनकी साँसों में एक और झटका आया और फिर सब कुछ शांत हो गया.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपने प्राण त्याग दिए थे. वहाँ मौजूद रानी के अंगरक्षकों ने आनन-फ़ानन में कुछ लकड़ियाँ जमा की और उन पर रानी के पार्थिव शरीर को रख आग लगा दी थी.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">उनके चारों तरफ़ रायफ़लों की गोलियों की आवाज़ बढ़ती चली जा रही थी. मंदिर की दीवार के बाहर अब तक सैकड़ों ब्रिटिश सैनिक पहुंच गए थे.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">मंदिर के अंदर से सिर्फ़ तीन रायफ़लें अंग्रेज़ों पर गोलियाँ बरसा रही थीं. पहले एक रायफ़ल शांत हुई&#8230; फिर दूसरी और फिर तीसरी रायफ़ल भी शांत हो गई.</p>
<h2 id="चिता-की-लपटें" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">चिता की लपटें</h2>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">जब अंग्रेज़ मंदिर के अंदर घुसे तो वहाँ से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी. सब कुछ शांत था. सबसे पहले रॉड्रिक ब्रिग्स अंदर घुसे.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">वहाँ रानी के सैनिकों और पुजारियों के कई दर्जन रक्तरंजित शव पड़े हुए थे. एक भी आदमी जीवित नहीं बचा था. उन्हें सिर्फ़ एक शव की तलाश थी.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तभी उनकी नज़र एक चिता पर पड़ी जिसकीं लपटें अब धीमी पड़ रही थीं. उन्होंने अपने बूट से उसे बुझाने की कोशिश की.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तभी उसे मानव शरीर के जले हुए अवशेष दिखाई दिए. रानी की हड्डियाँ क़रीब-क़रीब राख बन चुकी थीं.</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">इस लड़ाई में लड़ रहे कैप्टन क्लेमेंट वॉकर हेनीज ने बाद में रानी के अंतिम क्षणों का वर्णन करते हुए लिखा, &#8220;हमारा विरोध ख़त्म हो चुका था. सिर्फ़ कुछ सैनिकों से घिरी और हथियारों से लैस एक महिला अपने सैनिकों में कुछ जान फूंकने की कोशिश कर रही थी.&#8221;</p>
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">&#8220;बार-बार वो इशारों और तेज़ आवाज़ से हार रहे सैनिकों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास करती थी, लेकिन उसका कुछ ख़ास असर नहीं पड़ रहा था. कुछ ही मिनटों में हमने उस महिला पर भी काबू पा लिया. हमारे एक सैनिक की कटार का तेज़ वार उसके सिर पर पड़ा और सब कुछ समाप्त हो गया. बाद में पता चला कि वो महिला और कोई नहीं स्वयं झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई थी.&#8221;</p>
<h2 id="तात्या-टोपे" class="css-1ss4bqt emoh99e1" tabindex="-1">तात्या टोपे</h2>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी के बेटे दामोदर को लड़ाई के मैदान से सुरक्षित ले जाया गया. इरा मुखोटी अपनी किताब &#8216;हीरोइंस&#8217; में लिखती हैं, &#8220;दामोदर ने दो साल बाद 1860 में अंग्रेज़ों के सामने आत्म समर्पण किया. बाद में उसे अंग्रेज़ों ने पेंशन भी दी. 58 साल की उम्र में उनकी मौत हुई. जब वो मरे तो वो पूरी तरह से कंगाल थे. उनके वंशज अभी भी इंदौर में रहते हैं और अपने आप को &#8216;झाँसीवाले&#8217; कहते हैं.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">दो दिन बाद जयाजीराव सिंधिया ने इस जीत की खुशी में जनरल रोज़ और सर रॉबर्ट हैमिल्टन के सम्मान में ग्वालियर में भोज दिया.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">रानी की मौत के साथ ही विद्रोहियों का साहस टूट गया और ग्वालियर पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हो गया.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">नाना साहब वहाँ से भी बच निकले, लेकिन तात्या टोपे के साथ उनके अभिन्न मित्र नवाड़ के राजा ने ग़द्दारी की.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr">तात्या टोपे पकड़े गए और उन्हें ग्वालियर के पास शिवपुरी ले जा कर एक पेड़ से फाँसी पर लटका दिया गया.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="css-d8mtc1 eea635z0" dir="ltr"><b>बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.</b></p>
</div>
<h5>https://www.bbc.com/hindi/articles/cvgqv5x74पज्जोतो</h5>
<h5><strong>इस लिंक पर क्लिक करके भी आप सीधे बीबीसी पर जाकर उपरोक्त लेख पढ़ सकते हैं </strong></h5>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p><strong><span style="color: #993300;">अस्वीकरण: इस समाचार में व्यक्त विचार, आरोप, दावे एवं कथन संबंधित व्यक्तियों, संगठनों या स्रोतों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। इन तथ्यों एवं बयानों की स्वतंत्र पुष्टि या उनसे सहमति व्यक्त करना शब्द शक्ति न्यूज़ का उद्देश्य नहीं है। किसी भी प्रकार की त्रुटि, विवाद या दावे के लिए संबंधित पक्ष स्वयं उत्तरदायी होगा।</span></strong></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राहुल गांधी के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई जानिए क्या लिखा</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 07:13:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[राहुल गांधी पीएम मोदी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64610</guid>

					<description><![CDATA[नई दिल्ली19 जून 2026/लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का आज जन्मदिन है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। उन्होंने आगे कहा कि वे [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली19 जून 2026/</strong>लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का आज जन्मदिन है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। उन्होंने आगे कहा कि वे राहुल गांधी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करते हैं। बता दें कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज 56 साल के हो गए हैं। 19 जून साल 1970 में दिल्ली के होली फैमिली हॉस्पिटल में हुआ था। पीएम मोदी के अलावा कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने भी राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्रांतिकारी सुखदेव के वंशज “क्रांतिवीर परिजन सम्मान” से विभूषित देर रात तक देशभक्ति से सराबोर हुई वीरांगना बलिदान स्थली</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%82/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:43:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान मेला आयोजन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64604</guid>

					<description><![CDATA[देश की रक्षा में शहीद हुए चंबल के सपूत अनूप कुमार के माता-पिता का भी हुआ सम्मान उप मुख्यमंत्री  देवड़ा के मुख्य आतिथ्य में हुआ भव्य आयोजन उपमुख्यमंत्री ने की घोषणा बलिदान मेले की तर्ज पर अन्य जिलों में महानाट्य का मंचन कराया जायेगा  महानाट्य से बलिदान मेले में उठीं देशभक्ति की हिलोरें, कवि सम्मेलन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>देश की रक्षा में शहीद हुए चंबल के सपूत अनूप कुमार के माता-पिता का भी हुआ सम्मान</strong></p>
<p><strong>उप मुख्यमंत्री  देवड़ा के मुख्य आतिथ्य में हुआ भव्य आयोजन</strong></p>
<p><strong>उपमुख्यमंत्री ने की घोषणा बलिदान मेले की तर्ज पर अन्य जिलों में महानाट्य का मंचन कराया जायेगा </strong></p>
<p><strong>महानाट्य से बलिदान मेले में उठीं देशभक्ति की हिलोरें, कवि सम्मेलन भी हुआ</strong></p>
<p>ग्वालियर 18 जून 2026/ वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान मेला आयोजन समिति द्वारा इस वर्ष आयोजित किए गए 27वे बलिदान मेले में महान क्रांतिकारी अमर शहीद सुखदेव के वंशज श्री अनुज थापर को “क्रांतिवीर परिजन सम्मान” से सम्मानित किया गया। साथ ही अदम्य साहस का परिचय देकर चार आतंकियों को मारकर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले भिण्ड जिले की अटेर तहसील के ग्राम बड़ेरी निवासी शौर्य चक्र से सम्मानित शहीद अनूप कुमार शर्मा की माताश्री राजेंद्री शर्मा व पिता श्री रामशंकर शर्मा को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री एवं वित्त वाणिज्यकर मंत्री श्री जगदीश देवड़ा एवं बलिदान मेले के संस्थापक अध्यक्ष व राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया सहित अन्य अतिथियों ने सम्मान प्रदान किए। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी मंचासीन थे।</p>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64607" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0083.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0083.jpg 1280w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0083-300x200.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0083-1024x682.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0083-768x512.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0083-630x420.jpg 630w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0083-696x464.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0083-1068x712.jpg 1068w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64608" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0077.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0077.jpg 1280w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0077-300x200.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0077-1024x682.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0077-768x512.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0077-630x420.jpg 630w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0077-696x464.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0077-1068x712.jpg 1068w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>बलिदान मेले में महारानी लक्ष्मीबाई पर केन्द्रित महानाट्य के रोमांचकारी मंचन से बड़ी संख्या में मौजूद शहरवासियों के दिलों में देशभक्ति का जज्बा हिलोरे लेने लगा। ज्ञात हो पिछले 27 सालों से बलिदान मेले के संस्थापक अध्यक्ष एवं राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया के प्रयासों से वीरांगना लक्ष्मीबाई की समाधि के सामने वाले मैदान पर बलिदान मेले का आयोजन हो रहा है।<br />
उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत माता का स्वाभिमान व गौरव बनाए रखने के लिये महारानी लक्ष्मीबाई ने अपने प्राणों की आहुति दी। उनकी याद में ग्वालियर में बलिदान मेले का आयोजन सराहनीय पहल है। उन्होंने बलिदान मेला आयोजित करने के लिये राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री पवैया के प्रति साधुवाद व्यक्त किया। बलिदान मेला में आयोजित हुए “खूब लड़ी मर्दानी” महानाट्य की उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने प्रशंसा की। साथ ही कहा कि इस महानाट्य का मंचन प्रदेश के अन्य जिला मुख्यालयों पर कराने के प्रयास पूरी गंभीरता से किए जायेंगे, जिससे युवा पीढ़ी महारानी लक्ष्मीबाई के जीवन चरित्र से परिचित हो और उसे देशभक्ति की प्रेरणा मिले। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि महानाट्य के हर जिले में मंचन के सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा की जायेगी।<br />
उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने वीरांगना लक्ष्मीबाई की शहादत को नमन करते हुए कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के दांत खट्टे करते हुए वर्ष 1858 में 01 से 16 जून तक ग्वालियर पर राज किया। इसके बाद अदम्य साहस व शौर्य का परिचय देकर देश की बलिवेदी पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।<br />
बलिदान मेला के संस्थापक अध्यक्ष एवं राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि ग्वालियर का बलिदान मेला केवल एक मेला भर नहीं है, यह संस्कारों की भागवत और देश पर मर-मिट जाने की प्रेरणा का अनुष्ठान है। उन्होंने कहा ग्वालियर की इसी पावन धरा पर वीरांगना लक्ष्मीबाई ने भारत माता के श्रीचरणों में अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस आयोजन के माध्यम से उन सब शहीदों को जिन्होंने अपने प्राणों की आहूति इस राष्ट्र की रक्षा और निर्माण के लिये दे दी है, उनके प्रति हम सब कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं। श्री पवैया ने बलिदान मेला आयोजन में ग्वालियर शहरवासियों की सक्रिय भागीदारी पर भी हर्ष और आभार व्यक्त किया। श्री पवैया ने कहा कि वीरांगना लक्ष्मीबाई ने सरल रास्ता न चुनकर स्वाभिमान व देशभक्ति का रास्ता चुना।<br />
बलिदान मेले के मंच पर संत दंदरौआ महाराज व संत श्री अनिरूद्ध जी महाराज, नगर निगम सभापति श्री मनोज तोमर, ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री मधुसूदन भदौरिया, मेला अध्यक्ष श्री अशोक शर्मा, जीडीए के उपाध्यक्ष श्री सुधीर गुप्ता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री शैलेन्द्र बरूआ, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया एवं श्री रामबरन गुर्जर व श्री अभय चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण मंचासीन थे। साथ ही कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस आयोजन में शामिल हुए। महारानी लक्ष्मीबाई के शहादत दिवस 18 जून की सांध्य बेला में आयोजित हुए बलिदान मेले में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण एवं शहरवासी शामिल हुए।<br />
आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बलिदान मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज गणेश वंदना के साथ हुआ। क्रांतिवीर सम्मान समारोह में डॉ. हरिमोहन पुरोहित ने शहीदों का प्रशस्ति वाचन किया।</p>
<p><strong>महानाट्य से बलिदान मेले में उठीं देशभक्ति की हिलोरें, कवि सम्मेलन भी हुआ</strong></p>
<p>देशभक्ति से ओतप्रोत गरिमापूर्ण बलिदान मेला में सजीव घोड़ों व ऊंटों के साथ शहर के वंदे मातरम् ग्रुप द्वारा वीरांगना लक्ष्मीबाई पर केन्द्रित महानाट्य की प्रस्तुति दी गई। जिसे दर्शकों द्वारा बेहद सराहा गया। इस महानाट्य का मंचन लगभग 250 कलाकारों द्वारा किया गया। कलाकारों की भावों से भरी प्रस्तुति ने बलिदान मेले में बड़ी संख्या में मौजूद शहरवासियों के दिलों में देशभक्ति का जज्बा हिलोरे लेने लगा। साथ ही बहुत से लोगों की आँखे नम हो गईं। ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा मुगल सम्राट से भारत में व्यापार की अनुमति से शुरू हुए इस महानाट्य में वीर शिवाजी की पादशाही, अंग्रेजों के अत्याचार, अमर शहीद मंगल पाण्डे की शहादत, वीरांगना लक्ष्मीबाई का विवाह एवं उसके बाद झांसी राज्य की बागडोर संभालने से लेकर ग्वालियर में देश की बलिवेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने का सजीव चित्रण दिखाया गया। खचाखच भरा बलिदान मेला मैदान महानाट्य के मंचन से उठी देश भक्ति की हिलोरों से सराबोर हो गया।<br />
कार्यक्रम के अंत में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें राष्ट्रभक्ति व हास्य व्यंग से ओतप्रोत कविताओं से प्रांगण गुंजायमान हो उठा। देर रात तक सुधीय नागरिक काव्यपाठ का आनंद लेते रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्वयंसेवकों ने किया वीरांगना को नमन कृष्णा रावत बोलीं स्त्री अबला नहीं, सबला है</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:37:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धाजंलि]]></category>
		<category><![CDATA[वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस ग्वालियर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64597</guid>

					<description><![CDATA[ग्वालियर18 जून 2026/वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। कई महिलाएं कुछ कार्यों को पुरुषों का क्षेत्र मानती हैं, जबकि झांसी की रानी हर महिला के लिए साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण हैं। लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर18 जून 2026/वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। कई महिलाएं कुछ कार्यों को पुरुषों का क्षेत्र मानती हैं, जबकि झांसी की रानी हर महिला के लिए साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण हैं। लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र को पीठ पर बांधकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।<br />
यह बात कथा वाचक कृष्णा रावत ने लक्ष्मीबाई समाधि के सामने गुरुवार को लक्ष्मीबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ता की आसंदी से कही।</p>
<p style="text-align: center;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64599" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047.jpg 1600w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-300x200.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-1024x682.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-768x512.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-1536x1023.jpg 1536w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-630x420.jpg 630w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-696x464.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0047-1068x712.jpg 1068w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महानगर ग्वालियर के तत्वावधान में वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी मंचासीन रहे। इस अवसर पर संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ.मनमोहन वैद्य भी विशेषरूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर स्वयंसेवकों ने झांसी की रानी को प्रणाम किया। मुख्य वक्ता सुश्री रावत ने रानी लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्त्री अबला नहीं सबला है। लक्ष्मीबाई इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं। उन्होंने परिवार के साथ समाज और देशहित में काम किया। रानी लक्ष्मीबाई का जीवन जोश, जज्बा और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण था। वे बचपन से ही घुड़सवारी और तलवारबाजी में निपुण थीं। जब अंग्रेजों ने दामोदर राव को दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार करने से इंकार करते हुए झांसी को अंग्रेजी शासन में मिलाने की घोषणा की, तब उन्होंने दृढ़ता से कहा था, ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।’ इसके बाद उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया। कृष्णा रावत ने कहा कि लक्ष्मीबाई केवल पराक्रमी योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल संगठक और दयालु व्यक्तित्व की धनी भी थीं। उनका संपूर्ण जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा तथा आज भी सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। अबला नहीं, सबला है; लक्ष्मीबाई इसका सर्वोत्तम उदाहरण : कृष्णा रावत<br />
-स्वयंसेवकों ने किया वीरांगना को प्रणाम<br />
ग्वालियर। वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। कई महिलाएं कुछ कार्यों को पुरुषों का क्षेत्र मानती हैं, जबकि झांसी की रानी हर महिला के लिए साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण हैं। लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र को पीठ पर बांधकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।<br />
यह बात कथा वाचक कृष्णा रावत ने लक्ष्मीबाई समाधि के सामने गुरुवार को लक्ष्मीबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ता की आसंदी से कही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महानगर ग्वालियर के तत्वावधान में वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी मंचासीन रहे। इस अवसर पर संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ.मनमोहन वैद्य भी विशेषरूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर स्वयंसेवकों ने झांसी की रानी को प्रणाम किया। मुख्य वक्ता सुश्री रावत ने रानी लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्त्री अबला नहीं सबला है। लक्ष्मीबाई इसका सर्वोत्तम उदाहरण हैं। उन्होंने परिवार के साथ समाज और देशहित में काम किया। रानी लक्ष्मीबाई का जीवन जोश, जज्बा और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण था। वे बचपन से ही घुड़सवारी और तलवारबाजी में निपुण थीं। जब अंग्रेजों ने दामोदर राव को दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार करने से इंकार करते हुए झांसी को अंग्रेजी शासन में मिलाने की घोषणा की, तब उन्होंने दृढ़ता से कहा था, ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।’ इसके बाद उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया। कृष्णा रावत ने कहा कि लक्ष्मीबाई केवल पराक्रमी योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल संगठक और दयालु व्यक्तित्व की धनी भी थीं। उनका संपूर्ण जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा तथा आज भी सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हजारों महिलाओं ने निकाली मातृ शक्ति शौर्य यात्रा,झांकियां बनी आकर्षण का केंद्र</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:24:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[मातृ शक्ति शौर्य यात्रा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64590</guid>

					<description><![CDATA[&#8211;भारत माता, राम दरबार और लक्ष्मीबाई की झांकियों ने मन मोह लिया ग्वालियर18 जून 2026/वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर गुरुवार को,भव्य मातृ शक्ति शौर्य यात्रा निकाली गई। बैजाताल से शुरू हुई यह यात्रा लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर संपन्न हुई, जहां मातृशक्ति ने भारत माता की आरती कर झांसी की रानी को श्रद्धासुमन अर्पित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&#8211;<strong>भारत माता, राम दरबार और लक्ष्मीबाई की झांकियों ने मन मोह लिया</strong><br />
ग्वालियर18 जून 2026/वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर गुरुवार को,भव्य मातृ शक्ति शौर्य यात्रा निकाली गई। बैजाताल से शुरू हुई यह यात्रा लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर संपन्न हुई, जहां मातृशक्ति ने भारत माता की आरती कर झांसी की रानी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।<br />
यात्रा में बग्घी में सवार भारत माता की जीवंत झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।</p>
<p style="text-align: center;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64592" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA00491.jpg" alt="" width="1599" height="1066" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA00491.jpg 1599w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA00491-300x200.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA00491-1024x683.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA00491-768x512.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA00491-1536x1024.jpg 1536w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA00491-630x420.jpg 630w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA00491-696x464.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA00491-1068x712.jpg 1068w" sizes="auto, (max-width: 1599px) 100vw, 1599px" /> <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64593" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0050.jpg" alt="" width="1599" height="1066" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0050.jpg 1599w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0050-300x200.jpg 300w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0050-1024x683.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0050-768x512.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0050-1536x1024.jpg 1536w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0050-630x420.jpg 630w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0050-696x464.jpg 696w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0050-1068x712.jpg 1068w" sizes="auto, (max-width: 1599px) 100vw, 1599px" /> <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64594" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0048.jpg" alt="" width="1066" height="1599" srcset="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0048.jpg 1066w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0048-200x300.jpg 200w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0048-683x1024.jpg 683w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0048-768x1152.jpg 768w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0048-1024x1536.jpg 1024w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0048-280x420.jpg 280w, https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260618-WA0048-696x1044.jpg 696w" sizes="auto, (max-width: 1066px) 100vw, 1066px" /></p>
<p>इसके पीछे हजारों की संख्या में शामिल मातृशक्ति हाथों में भगवा ध्वज लेकर राष्ट्रभक्ति के नारों के साथ आगे बढ़ रही थी। देश की रक्षा कौन करेगा, हम करेंगे सब करेंगे, देश की सेवा कौन करेगा, हम करेंगे सब करेंगे, भारत माता की जय, वंदे मातरम्, जिस हिंदू का खून न खौले, खून नहीं वो पानी है, अगर देश के काम न आए तो बेकार जवानी है, जय शिवाजी, जय भवानी जैसे उद्घोषों से पूरा वातावरण राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत हो उठा।<br />
शौर्य यात्रा में राम दरबार की आकर्षक झांकी, घोड़े पर सवार महारानी लक्ष्मीबाई झांकी तथा राजपूताना वेशभूषा में मातृशक्ति की टुकडिय़ों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। राष्ट्रभक्ति गीतों के साथ आगे बढ़ रहीं महिलाओं ने महारानी लक्ष्मीबाई के साहस, स्वाभिमान, त्याग और राष्ट्रभक्ति के आदर्श और सांस्कृतिक गौरव को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। यात्रा के माध्यम से महिलाओं को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जागरण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश भी दिया गया।<br />
<strong>स्वच्छता का भी दिया संदेश</strong><br />
मातृशक्ति ने इस अवसर पर नागरिक कर्तव्य के प्रति जागरूकता का परिचय भी दिया। यात्रा के समापन पर मातृशक्ति को ठंडाई वितरित की गई। इसके बाद कार्यक्रम स्थल की सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का संगम बनी यह शौर्य यात्रा शहरवासियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चेम्बर चुनाव : व्हाइट हाउस को एक और झटका अब ओमप्रकाश अग्रवाल लल्ला हुए बागी संयुक्त अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने का किया ऐलान</title>
		<link>https://shabdshaktinews.in/%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%b8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:25:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[चेम्बर चुनाव ओमप्रकाश लल्ला]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shabdshaktinews.in/?p=64586</guid>

					<description><![CDATA[ग्वालियर 18 जून 2026/डॉ प्रवीण अग्रवाल के व्हाइट हाउस से बगावत करने के बाद आज व्हाइट हाउस के एक और मजबूत स्तम्भ माने जाने वाले व्यापारी ओमप्रकाश अग्रवाल  लल्ला भैया  ने व्हाइट हाउस को अलविदा करते हुए संयुक्त अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की घोषणा करके सनसनी फैला दी। इस प्रकार व्हाइट हाउस की एकता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ग्वालियर 18 जून 2026/डॉ प्रवीण अग्रवाल के व्हाइट हाउस से बगावत करने के बाद आज व्हाइट हाउस के एक और मजबूत स्तम्भ माने जाने वाले व्यापारी ओमप्रकाश अग्रवाल  लल्ला भैया  ने व्हाइट हाउस को अलविदा करते हुए संयुक्त अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की घोषणा करके सनसनी फैला दी। इस प्रकार व्हाइट हाउस की एकता अब पूरी तरह से तार तार होती नजर आ रही है।</p>
<div dir="auto">उल्लेखनीय है कि डॉ प्रवीण अग्रवाल जो कि वर्तमान में चेम्बर के अध्यक्ष भी हैं उन्हें व्यापारियों का मजबूत समर्थन हासिल होने के बावजूद उनके व्हाइट हाउस के प्रमुख अरविन्द अग्रवाल ने अध्यक्ष पद का टिकिट काटकर एक अन्य व्यापारी पारस जैन को दे दिया था इसके बाद से ही व्हाइट हाउस में व्यापारियों के बीच आक्रोश व्याप्त हो गया था इसी के चलते बुधवार को डॉ प्रवीण अग्रवाल ने अपने समर्थक व्यापारियों की भारी भीड़ के बीच व्हाइट हाउस से बगावत करते हुए खुद के निर्दलीय रूप से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था।</div>
<div dir="auto">अब आज व्हाइट हाउस के ही ओमप्रकाश अग्रवाल  लल्ला भैया ने इस हाउस से अलग होकर संयुक्त अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने का निर्णय लेकर चुनावी  माहौल को और गरमा दिया है।</div>
<div dir="auto">उल्लेखनीय है कि ओमप्रकाश लल्ला को प्रवीण अग्रवाल का नजदीकी माना जाता है अतः अब संभावना है कि फिलहाल निर्दलीय चुनाव लड़ रहे डॉ अग्रवाल भी ओमप्रकाश साथ आकर कोई नए हाउस की घोषणा करके  एक पूरे  पैनल को ही मैदान में उतार दें फिलहाल तो यह कयास है और वर्तमान में सबसे बड़े  संकट में  व्हाइट हाउस घिरता नजर आ रहा है। उल्लेखनीय है कि चेम्बर चुनाव के लिए 17 जुलाई को वोट डाले जाने हैं और अभी प्रत्यासिओं की घोषणाएं की जा रही हैं।</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
