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	<title>Shabd Shakti News</title>
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	<description>Every News Speaks</description>
	<lastBuildDate>Sat, 19 Sep 2026 04:35:02 +0000</lastBuildDate>
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		<title>पहले टीएमसी कैंडिडेट का नामांकन वापस अब कांग्रेस  कैंडिडेट  गिरफ़्तार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2026 16:42:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
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					<description><![CDATA[नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को &#8220;पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ़्तार&#8221; कर लिया है. कांग्रेस ने xपर एक पोस्ट में लिखा, &#8220;पश्चिम बंगाल में बीजेपी और इलेक्शन कमीशन मिलकर चुनाव को लूटने में लगे हैं. नंदीग्राम उपचुनाव से पहले आज जो घटनाक्रम हुआ, वो लोकतंत्र के लिए काला धब्बा है.&#8221; &#8220;पहले ममता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr" style="text-align: left;"><b>नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को &#8220;पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ़्तार&#8221; कर लिया है.</b></p>
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">कांग्रेस ने xपर एक पोस्ट में लिखा, &#8220;पश्चिम बंगाल में बीजेपी और इलेक्शन कमीशन मिलकर चुनाव को लूटने में लगे हैं. नंदीग्राम उपचुनाव से पहले आज जो घटनाक्रम हुआ, वो लोकतंत्र के लिए काला धब्बा है.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">&#8220;पहले ममता बनर्जी जी के कैंडिडेट को डरा-धमकाकर नामांकन वापस करवाया गया और अब कांग्रेस के कैंडिडेट मिलन प्रधान जी को 19 साल पुराने केस में गिरफ़्तार कर लिया गया है.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">कांग्रेस ने आरोप लगाया, &#8220;नरेंद्र मोदी और ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र को पूरी तरह से ख़त्म करने में लगे हैं. ये सारी साजिशें उसी का सबूत है.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष <a class="focusIndicatorReducedWidth css-n8oauk e1h2ur550" href="https://x.com/PTI_News/status/2100959936436191657?s=20" target="_blank">शुभांकर सरकार ने कहा</a>, &#8220;हमारे नेता राहुल गांधी ने कहा है कि किसी को डराओ मत और डरो मत. हमारे उम्मीदवार मिलन प्रधान को गिरफ़्तार करने के साथ ही ये मालूम हो गया कि बीजेपी डर गई है.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">उन्होंने दावा किया, &#8220;मुख्यमंत्री (शुभेंदु अधिकारी) को नंदीग्राम से भागकर भवानीपुर जाना पड़ा, क्योंकि उन्हें पता है कि नंदीग्राम की जनता उनके साथ नहीं है.&#8221;</p>
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि &#8220;हमने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की और इसके कुछ ही मिनटों बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. यह टाइमिंग बीजेपी फ़ार्मुला पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि कोई पुराना केस ढूंढो.&#8221;</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">इससे पहले नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन की घोषणा की थी.</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
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		<title>वीडियो : हनुमान अंश के गायक  साधु तिवारी को पवैया ने  विशाल गदा भेंट कर  किया अभिनंदन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2026 15:21:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Video]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[हनुमान अंश]]></category>
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					<description><![CDATA[हनुमान अंश के सुपरहिट गायक श्री साधु तिवारी पहुँचे वित्त आयोग अध्यक्ष श्री पवैया के आवास &#160; ग्वालियर 18 सितम्बर 2026/ “हनुमान अंश” फ़िल्म के अति लोकप्रिय गीत “जब ज़िद पर अड़ गयीं पार्वती” के गायक श्री साधु तिवारी ने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया के आवास “सेवापथ” पहुँच कर उनसे [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हनुमान अंश के सुपरहिट गायक श्री साधु तिवारी पहुँचे वित्त आयोग अध्यक्ष श्री पवैया के आवास</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ग्वालियर 18 सितम्बर 2026/ “हनुमान अंश” फ़िल्म के अति लोकप्रिय गीत “जब ज़िद पर अड़ गयीं पार्वती” के गायक श्री साधु तिवारी ने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया के आवास “सेवापथ” पहुँच कर उनसे मुलाकात की । श्री पवैया ने उनका अंगवस्त्र व विशाल गदा भेंट कर अभिनंदन किया ।</p>
<p><iframe title="हनुमान अंश के  गायक साधु तिवारी पहुँचे  पवैया के आवास पास बैठाकर यूं गाया चर्चित भजन " width="696" height="392" src="https://www.youtube.com/embed/cf1CyUfrrT4?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p>श्री तिवारी मुंबई विमान से आकर सीधे श्री पवैया के ग्वालियर स्थित भगत सिंह नगर स्थित घर पहुँचे । बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही “हनुमान अंश” मूवी के सुपर हिट गीत “पार्वती .. पार्वती” के नवोदित गायक श्री साधु तिवारी ने गीत गाकर सभी से मिले प्यार के लिये आभार माना ।<br />
पूर्व सांसद व वित्त आयोग अध्यक्ष श्री पवैया ने श्री साधु तिवारी के कंठ की सराहना करते हुए कहा कहा कि उन्होंने ग्वालियर में पंचमहल अंचल के बेटा होने के नाते चीनौर क्षेत्र का नाम भारत में रोशन किया है । हनुमान अंश की सफलता वास्तव में हनुमान जी व उनके परम भक्त बाबा नीम करौरी जी का चमत्कार ही है और प्रत्येक कलाकार को प्रभु राम की सेवा का अवसर उनके जीवन का परम सौभाग्य है । श्री पवैया ने कहा कि इस फिल्म से यह सिद्ध हो गया कि भारत का जन मानस क्या देखना चाहता है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>जरा संभलकर… मत भूलो कि हम कौन हैं, लोग यूं ही हमें महाराज नहीं कहते !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2026 13:29:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Video]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया]]></category>
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					<description><![CDATA[गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने सड़क की समस्या लेकर पहुंचे एक व्यक्ति की बात और सिंधिया के जवाब का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सड़क ठीक कराने के लिए ज्ञापन देने पहुंचे व्यक्ति ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि यदि सड़क ठीक नहीं हुई तो वह चुनाव में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने सड़क की समस्या लेकर पहुंचे एक व्यक्ति की बात और सिंधिया के जवाब का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।</p>
<p>सड़क ठीक कराने के लिए ज्ञापन देने पहुंचे व्यक्ति ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि यदि सड़क ठीक नहीं हुई तो वह चुनाव में वोट नहीं डालेगा। इस पर सिंधिया ने उसे रोकते हुए कहा कि “इस भाषा का इस्तेमाल मेरे साथ कभी नहीं करना, आप निवेदन कीजिए।”</p>
<div class="youtube-embed" data-video_id=""><iframe title="जरा संभलकर… मत भूलो कि हम कौन हैं। लोग यूं ही हमें महाराज नहीं कहते !" width="563" height="1000" src="https://www.youtube.com/embed/NZkR5fMlL0w?feature=oembed&#038;enablejsapi=1" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></div>
<p>बस… यहीं से शुरू हो गया सवाल—जनता सड़क के लिए निवेदन करे या अपने वोट के अधिकार की बात भी न करे?<br />
अब लोग इसे व्यंग्यात्मक लहजे में चर्चा कर रहे हैं</p>
<p>महाराज से निवेदन किया जाता है, गुहार लगाई जाती है।<br />
सड़क चाहिए तो निवेदन कीजिए, बिजली चाहिए तो निवेदन कीजिए, पानी चाहिए तो निवेदन कीजिए… और उम्मीद रखिए कि महाराज आपकी समस्या सुनेंगे।<br />
लेकिन लोकतंत्र में एक छोटा-सा सवाल है—निवेदन करना जनता की जिम्मेदारी है या व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाना जनप्रतिनिधियों की?<br />
सिंधिया की इस बात की तारीफ की जा सकती है कि उन्होंने समस्या को लेकर निवेदन करने और जिम्मेदारी निभाने की बात कही। लेकिन सवाल यह भी है कि अगर जनता को सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए बार-बार निवेदन करना पड़े, तभी जिम्मेदारी सक्रिय होगी तो फिर जनता सवाल कब पूछेगी?<br />
और जब जनता कहती है—“सड़क ठीक नहीं हुई तो वोट नहीं देंगे”, तो वह कोई एहसान नहीं मांग रही। वह अपने लोकतांत्रिक अधिकार की बात कर रही है।<br />
चुनाव में वोट देना मतदाता का अधिकार है और किसे वोट देना है, यह उसका फैसला है। इसलिए सड़क की मांग को वोट से जोड़ना भी लोकतंत्र की राजनीति का हिस्सा है।</p>
<p>काश! सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए निवेदन करने से पहले ही जिम्मेदारी समझ ली जाती।</p>
<p>फिर शायद न जनता को अपनी परेशानी लेकर ‘महाराज’ के दरबार में पहुंचना पड़ता, न वोट की बात करनी पड़ती और न ही उसे यह नसीहत सुननी पड़ती कि “इस भाषा का इस्तेमाल मत कीजिए।”<br />
आखिर सवाल सिर्फ भाषा का नहीं है।<br />
सवाल यह है कि जनता की भाषा—‘सड़क चाहिए’—कब सुनी जाएगी?<br />
और हां महाराज…<br />
निवेदन जनता कर देगी, गुहार भी लगा देगी, लेकिन लोकतंत्र में अपनी बात कहने का अधिकार भी जनता के पास ही रहेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>जापान को हराकर भारत की महिला क्रिकेट टीम एशियन गेम्स  क्वार्टर फ़ाइनल में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2026 11:49:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[खेल]]></category>
		<category><![CDATA[एशियन गेम्स महिला क्रिकेट]]></category>
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					<description><![CDATA[एशियन गेम्स 2026 में भारत ने महिला क्रिकेट के आख़िरी क्वार्टर फ़ाइनल में जापान को हरा दिया. उसने शुक्रवार को खेले गए क्वार्टर फ़ाइनल में जापान को आठ विकेट से हराया. जापान की टीम पहले बल्लेबाज़ी करते हुए सिर्फ 57 रन ही बना सकी. जबकि भारत ने ये टारगेट पांच ओवरों में हासिल कर लिया. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">एशियन गेम्स 2026 में भारत ने महिला क्रिकेट के आख़िरी क्वार्टर फ़ाइनल में जापान को हरा दिया.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">उसने शुक्रवार को खेले गए क्वार्टर फ़ाइनल में जापान को आठ विकेट से हराया.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">जापान की टीम पहले बल्लेबाज़ी करते हुए सिर्फ 57 रन ही बना सकी. जबकि भारत ने ये टारगेट पांच ओवरों में हासिल कर लिया. हालांकि उसे दो विकेट खोने पड़ा.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">भारत की ओर शेफाली ने 14 गेंदों पर छह चौके और दो छक्कों की मदद से 40 रन बनाए. वहीं रिचा घोष ने छह गेंदों पर 12 रन बनाए. दोनों नॉट आउट रहीं.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">इससे पहले दूसरे ओवर में भारत ने कामिलिनी का विकेट खोया. वो बिना खाते खोले आउट हो गईं.</p>
</div>
<div class="css-1k9op6x e17x9cvu0" dir="ltr">
<p class="postStyles css-oe7toe eea635z0" dir="ltr">तीसरे ओवर में भारत का एक और विकेट गिरा.</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>18 सितम्बर 1948 हैदराबाद भारत का अंग बना : 329 सैनिकों का बलिदान,साम्प्रदायिक हिंसा में 25 हजार हत्याएँ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2026 06:37:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[लेख]]></category>
		<category><![CDATA[18 सितम्बर 1948]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[हैदराबाद]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8211;रमेश शर्मा 108 घंटे लगे थे सैन्य अभियान &#8220;आपरेशन पोलो&#8221; में पूरे संसार में केवल भारत ऐसा देश हैं जहां स्वतंत्रता के बाद भी स्वतंत्रता का स्वरूप लेने के लिये भी लाखों बलिदान हुये और करोड़ो लोग बेघर हुये। जिन स्थानों पर स्वतंत्रता के बाद भी भारी हिंसा और संघर्ष हुआ उनमें एक हैदराबाद रियासत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">&#8211;रमेश शर्मा</p>
<p><strong>108 घंटे लगे थे सैन्य अभियान &#8220;आपरेशन पोलो&#8221; में</strong></p>
<p>पूरे संसार में केवल भारत ऐसा देश हैं जहां स्वतंत्रता के बाद भी स्वतंत्रता का स्वरूप लेने के लिये भी लाखों बलिदान हुये और करोड़ो लोग बेघर हुये। जिन स्थानों पर स्वतंत्रता के बाद भी भारी हिंसा और संघर्ष हुआ उनमें एक हैदराबाद रियासत भी रही है। जहाँ सेना के हस्तक्षेप के बाद ही हिंसा रुक सकी और और वह भूभाग भारतीय गणतंत्र का अंग बन सका। सेना ने 13 सितम्बर को हैदराबाद में प्रवेश किया, 17 सितम्बर की शाम को हैदराबाद के निजाम ने समर्पण कर दिया था। इसलिए हैदराबाद मुक्ति दिवस 17 सितम्बर को मनाया जाता है। लेकिन 18 सितम्बर को विलीनीकरण दस्तावेज पर हैदराबाद के शासक निजाम के हस्ताक्षर हुये ।<br />
स्वतंत्रता के पूर्व भारत में तीन प्रकार का प्रशासनिक स्वरूप था । एक जो सीधा अंग्रेजों के आधिपत्य में था, दूसरा वह अंग्रेजों का ध्वज और दासता तो थी किंतु निचले स्तर पर किसी राजा या नबाब का शासन था । और तीसरा डच या फ्रांसीसी सत्ता के हाथ । जून 1947 में वायसराय माउंटवेटन द्वारा बनाये गये फार्मूले से 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता तो मिली पर यह स्वतंत्रता केवल ब्रिटिश आधिपत्य वाले क्षेत्रों तक ही सीमित थी । अंग्रेज जा तो रहे थे लेकिन वे एक ऐसे भारत की नींव बनाकर जा रहे थे जो सतत गृह कलह और रक्तपात में ही उलझा रहे । उन्होंने एक चाल चली । अंग्रेजों ने भारतीय रियासतों को भी स्वतंत्रता दी थी और उनसे कहा था कि वे चाहें तो स्वतंत्र रहें अथवा भारत या पाकिस्तान किसी में मिल लें । इसका लाभ कुछ रियासतों ने उठाया उसमें हैदराबाद भी थी । सभी रियासतों को जून 1947 में ही इस फार्मूले की सूचना मिल गयी थी । सूचना मिलते ही जून 1947 में हैदराबाद के शासक निजाम ने स्वयं को स्वतंत्र रहने का पत्र भेज दिया था और स्वतंत्र रहने की तैयारी आरंभ कर दी थी । निजाम को इस काम में अंग्रेजों का मौन और मोहम्मद अली जिन्ना का खुला समर्थन मिल गया था । लेकिन हैदराबाद रियासत की जनता निजाम शासन से मुक्ति चाहती थी । वह भारतीय गणतंत्र का हिस्सा बनना चाहती थी । इसका कारण हैदराबाद के शासकों का समाज पर दमन और अत्याचार करना था । हैदराबाद रियासत में बहुमत तो हिन्दु परंपरा को मानने वालों का था लेकिन वहां कानून इस्लामिक शरीयत के अनुसार चलता था । यह कानून हैदराबाद में 1720 से ही लागू हो गया था । यह निजाम शाही के आरंभ होने का वर्ष था । और जब 1798 में निजाम अंग्रेजों के आधीन हो गया तब भी आतंरिक शासन व्यवस्था में कोई अंतर न आया । हैदराबाद में धार्मिक सत्ता के अधिकारों का दुरुपयोग, बहुसंख्यक समाज का शोषण और उत्पीड़न का क्रम बना रहा । इसलिये हैदराबाद का बहुसंख्यक निजाम से मुक्ति चाहता था ।<br />
हैदराबाद के नबाब को &#8220;निजाम-उल-मुल्क&#8221; की उपाधि मुगल बादशाह ने दी थी जिससे हैदराबाद का हर नबाब निजाम कहलाया । रियासत का आधिकारिक धर्म ही इस्लामिक प्रावधानों के अनुसार नहीं था अपितु अधिकांश शासकीय पदों पर भर्ती भी मुस्लिम समाज के लोगों की जाती थी । शीर्ष पदों पर तो एक भी गैर मुस्लिम नहीं था । रियासत को अंग्रेजों ने अपने आधीन तो कर लिया था पर रियासत के अदरूनी व्यवस्था में कोई हस्तक्षेप नहीं किया था । इसका कारण यह था कि अंग्रेजों को शासन व्यवस्था में कोई रूचि न थी । उनके केवल दो उद्देश्य थे । एक तो हैदराबाद रियासत से सालाना पैसा मिले और दूसरा आवश्यकता पड़ने पर निजाम उनकी सहायता के लिये अपने खर्चे पर सेना भेजे । निजाम इस काम को सहर्ष कर रहा था । अंग्रेजों को निजाम की जरूरत मराठों के विरुद्ध अभियान शुरु करने के लिये पड़ती थी । इसलिए उन्होने निजाम को कुछ विशेष अधिकार भी दे रखे थे । निजाम के मन में मराठा शासन के प्रति कितनी कटुता थी इस बात का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब मराठों ने भोपाल में अभियान चलाया तो भोपाल नबाब की मदद करने के लिये निजाम की फौज भोपाल आई थी । यह अलग बात है कि भोपाल के युद्ध में इस संयुक्त फौज को भी पराजय का मुंह देखना पड़ा । निजाम इससे पूर्व भी मराठों से पराजित हो चुका था इसलिये उसने अंग्रेजों से संधि कर ली थी । निजाम का सोच कितना साम्प्रदायिक था इसका एक उदाहरण यह भी है कि हैदराबाद रियासत में मुस्लिम आबादी केवल 11% प्रतिशत थी लेकिन रियासत की तीस प्रतिशत भूमि पर मुसलमानों का अधिकार था । इसके साथ वहां हिन्दुओं को हथियार रखने का अधिकार न था जबकि मुस्लिम समाज के पास हथियारों का जखीरा रहता था ।<br />
हैदराबाद की इस विशिष्ट विचार और कार्य शैली कटुता और आक्रामकता 1921 के बाद और बढ़ी। यद्धपि रियासत के अधिकांश मुसलमान धर्मान्तरित थे उन्हे इसका आभास भी था लेकिन खिलाफत आँदोलन के बाद मुसलमानों में संगठन और आक्रामकता दोनों बढ़ी। अनेक स्थानों पर साम्प्रदायिक दंगे भी हुये। इसमें तेजी 1927 के बाद और बढ़ी इस वर्ष रियासत में एक संस्था &#8220;मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन&#8221; का गठन हुआ। इसका नेतृत्व सैय्यद कासिम रिजवी के हाथ में था। इस संस्था ने सशस्त्र समूह बनाया इसे &#8220;रजाकारों का संगठन&#8221; कहा गया। &#8220;रजाकार&#8221; मुस्लिम आर्म गार्ड थे। जिन्होंने हिन्दुओं की सामुहिक हत्याएँ कीं, संपत्ति छीनी, स्त्रियों से बलात्कार किये। 1946 में इस संगठन द्वारा &#8220;डायरेक्ट ऐक्शन&#8221; हैदराबाद में जो किया वह इतिहास के पन्नों में स्पष्ट है। 1946 के बाद निजाम इसी संगठन पर निर्भर हो गये थे । जून 1947 से हैदराबाद निजाम ने स्वयं को स्वतंत्र रहने की तैयारी आरंभ करली। 15 अगस्त 1947 को निजाम ने स्वयं को स्वतंत्र होने की और कासिम रिजवी ने इसे इस्लामिक देश होने की घोषणा कर दी। इस घोषणा के साथ हैदराबाद रियासत में हिंसा की शुरुआत हो गयी। रजाकारों और रियासत की सेना मिलाकर यह संख्या लगभग दो लाख थी जो हथियारों से युक्त थी। अनेक स्थानों पर दमन लूटपाट, हत्या, बलात्कार और धर्मान्तरण का सिलसिला चल पड़ा। सैकड़ो हजारों परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। आरंभ में भारत सरकार कश्मीर पर पाकिस्तान का हमला विभाजन के साथ बढ़ती हिंसा और शरणार्थियों की समस्या से जूझ रही थी इस कारण हैदराबाद की ओर ध्यान कम गया। तभी 1948 के आरंभ में यह सूचना मिली कि हैदराबाद में पाकिस्तान से सशस्त्र सैनिक आ रहे हैं उन्हें बसाया जा रहा है और रियासत हथियारों की खरीद के लिये आस्ट्रेलिया और चेकोस्लोवाकिया से 30 लाख पाउंड के हथियार खरीदने के आर्डर दे दिया गया है। तब तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने निजाम से बातचीत की किंतु निजाम के रवैये में कोई अंतर न आया उल्टे रिजवी की रजाकारों की गतिविधियां और बढ़ी । सरदार पटेल ने अंततः 9 सितम्बर 1948 को चेतावनी पत्र जारी किया। लेकिन निजाम न माना। 11 सितम्बर को हैदराबाद में सैन्य अभियान का निर्णय हुआ। इस अभियान को &#8220;आपरेशन पोलो&#8221; नाम दिया गया । 12 सितम्बर को सेना को कूच करने का आदेश दिया। 13 सितम्बर को सेना ने हैदराबाद आपरेशन आरंभ किया, 17 सितम्बर की शाम को निजाम ने समर्पण का प्रस्ताव दिया और 18 सितम्बर को विलीनीकरण दस्तावेज पर हस्ताक्षर हुये। सेना को इस अभियान में कुल 108 घंटे लगे। इस 108 घंटे के अभियान में सेना के कुल 329 जवानों के प्राणों का बलिदान हुआ। दूसरी तरफ निजाम सेना के 807और 1647 अन्य लोगों की मौत हुई । जून 1947 से सितम्बर 1948 के बीच इस लगभग सवा साल की अवधि में 22 से 30 हजार तक लोग मारे गये और एक लाख से अधिक लोग बेघर हुये। इस हिंसा पर विराम भारत सरकार की सक्रियता के साथ लगी। भारत सरकार ने कासिम रिजवी को गिरफ्तार कर लिया और उसकी संस्था मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन यनि MIM पर पाबंदी लगा दी। आगे कासिम रिजवी पाकिस्तान चला गया। वह इस संस्था की कमान अपने समय के मशहूर वकील अब्दुल वहाद औबेसी को सौंप गया था। वे इस समय के आक्रामक नेता औबेसुद्दीन औवेसी के पितामह थे।<br />
हैदराबाद रियासत कि क्षेत्रफल लगभाग 82 हजार वर्ग मील था । जो इंग्लैंड जैसे देश से भी अधिक है । तब इस रियासत की आबादी लगभग 1.6 करोड़ थी इसमें 85%हिन्दु, 11% मुसलमान और 4% अन्य थे । रियासत की वार्षिक आय लगभग 26 करोड़ वार्षिक थी। यह देश की दूसरी बड़ी रियासत मानी जाती थी। हैदराबाद के भारतीय गणतंत्र में विलीन होने के बाद भारत सरकार इन सारी घटनाओं की जाँच के लिये &#8220;सुन्दर लाल समिति&#8221; भी बनाई लेकिन राजनैतिक कारणों से यह रिपोर्ट सामने न आ सकी। इसे सार्वजनिक करने से रोक दिया गया था । इसके कुछ अश 2014 में ही सामने आ सके। हैदराबाद के विलीनीकरण के बाद भी किसी के पास इस प्रश्न का उत्तर न था उन निहत्थे सामान्य लोगों ने किसका क्या बिगाड़ना था जिन्हें हैदराबाद के आक्रामक जुनीनी लोगों ने लूटा, सब कुछ छीना, महिलाओं से बलात्कार किया और कुछ को मौत के घाट उतार दिया ।</p>
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		<title>अब दवा की दुकानों की सीसीटीवी से निगरानी  रखने की तैयारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 15:38:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[दवा दुकान]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं की बिक्री पर निगरानी मजबूत करने के लिए दवा नियमावली, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत दवा की दुकानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया जा सकता है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य अनुसूची एच, एच1 और एक्स में शामिल दवाओं की बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली:</strong> केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं की बिक्री पर निगरानी मजबूत करने के लिए दवा नियमावली, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत दवा की दुकानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया जा सकता है।</p>
<p>प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य अनुसूची एच, एच1 और एक्स में शामिल दवाओं की बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के अनधिकृत बिक्री और उन तक अनधिकृत पहुंच को रोकना है। मंत्रालय ने आठ सितंबर को प्रस्तावित बदलावों से संबंधित प्रारूप राजपत्र अधिसूचना जारी की थी।</p>
<h3>प्रस्ताव को मंजूरी देने की सिफारिश</h3>
<p>इस प्रस्ताव पर सबसे पहले औषधि परामर्श समिति में चर्चा हुई। इसके बाद इसे विचार के लिए औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) के सदस्यों के बीच भेजा गया। विचार-विमर्श के बाद डीटीएबी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने की सिफारिश की।</p>
<p>दवा की दुकानों पर अनिवार्य सीसीटीवी निगरानी को अनुसूची एच, एच1 और एक्स में शामिल दवाओं की बिक्री और वितरण पर निगरानी मजबूत करने के लिए एक अतिरिक्त नियामकीय सुरक्षा उपाय के रूप में प्रस्तावित किया गया है।</p>
<h3>दवाओं की अनिधिकृत बिक्री पर रोक में मदद की उम्मीद</h3>
<p>मंत्रालय ने कहा कि इस कदम से ऐसी दवाओं की अनधिकृत बिक्री और उस तक पहुंच पर रोक लगाने तथा दवा आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और नियामकीय निगरानी को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधन पर हितधारकों और आम जनता से आपत्तियां एवं सुझाव मांगे हैं।</p>
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		<title>ग्वालियरवासी मानवता की सेवा के लिये आगे आए, 535 यूनिट रक्तदान किया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 13:06:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर रक्तदान]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; जनप्रतिनिधियों, शासकीय सेवकों और सेवाभावी नागरिकों ने रक्तदान कर,लिया मानवता की सेवा का संकल्प ग्वालियर, 17 सितम्बर 2026/ ग्वालियर जिले में ‘सेवा-संकल्प अभियान’ का शुभारंभ दिवस मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में 17 सितम्बर को जिले में पाँच स्थानों पर विशेष रक्तदान शिविर आयोजित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों, शासकीय सेवकों और सेवाभावी नागरिकों ने रक्तदान कर</strong>,<strong>लिया मानवता की सेवा का संकल्प</strong></p>
<p>ग्वालियर, 17 सितम्बर 2026/ ग्वालियर जिले में ‘सेवा-संकल्प अभियान’ का शुभारंभ दिवस मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में 17 सितम्बर को जिले में पाँच स्थानों पर विशेष रक्तदान शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में जनप्रतिनिधियों, सेवाभावी नागरिकों और शासकीय सेवकों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान कर जरूरतमंदों की सेवा का संकल्प लिया। अभियान के पहले दिन जिले में लगभग 535 यूनिट रक्त संग्रहण किया गया।<br />
जिला चिकित्सालय मुरार में आयोजित रक्तदान शिविर में संभागीय आयुक्त श्री मनोज खत्री और कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान सहित जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने रक्तदान किया। उन्होंने स्वयं रक्तदान कर समाज को मानवता की सेवा और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आने का प्रेरक संदेश दिया।<br />
सिटी सेंटर निवासी श्री रविन्द्र यादव ने भी जिला चिकित्सालय में आयोजित शिविर में रक्तदान किया। उनके द्वारा किया गया यह 35वाँ रक्तदान था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर पीड़ित मानवता की सेवा के लिए रक्तदान करने का अवसर मिलना उनके लिए खुशी की बात है।<br />
13वीं बटालियन में पदस्थ विशेष सशस्त्र बल के जवानों और सेवाभावी नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक रक्तदान किया। बटालियन के जवान श्री संतोष धाकड़, श्री पुरुषोत्तम प्रजापति और श्री दीपक नरवरिया ने सेवाभाव के साथ रक्तदान करते हुए नागरिकों से भी रक्तदान के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान के माध्यम से हम किसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने में सहभागी बन सकते हैं।</p>
<p>इन स्थानों पर लगे रक्तदान शिविर</p>
<p>‘सेवा-संकल्प अभियान’ के तहत 17 सितम्बर को जिला चिकित्सालय मुरार में आयोजित शिविर में लगभग 80 यूनिट रक्तदान हुआ। महावीर भवन कम्पू में आयोजित शिविर में लगभग 405 यूनिट, वृंदावन गार्डन पुरानी छावनी में 24 यूनिट, कैंसर हॉस्पिटल में 10 यूनिट तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डबरा में 17 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया।</p>
<p>मंत्री श्री नारायण सिंह और सांसद श्री कुशवाह ने रक्तदाताओं का बढ़ाया उत्साह</p>
<p>सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह, नगर निगम सभापति श्री मनोज तोमर और भाजपा जिला अध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया सहित जिले के अन्य जनप्रतिनिधिगण ‘सेवा-संकल्प अभियान’ के तहत महावीर भवन कम्पू में आयोजित रक्तदान शिविर में पहुँचे। उन्होंने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया और रक्तदान के लिए आगे आए सेवाभावी नागरिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। विभिन्न शिविरों में जनप्रतिनिधियों ने स्वयं भी रक्तदान कर समाज को सेवा और संवेदनशीलता का संदेश दिया।</p>
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		<item>
		<title>वीडियो :कलेक्टर  रुचिका चौहान ने किया रक्तदान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 09:28:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ग्वालियर अंचल]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान]]></category>
		<category><![CDATA[रक्तदान]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; ग्वालियर 17सितंबर 2026/सेवा–संकल्प अभियान के तहत जिला चिकित्सालय मुरार में कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने स्वयं रक्तदान कर मानवता की सेवा का प्रेरक संदेश दिया। उनका यह कदम केवल रक्तदान तक सीमित नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने में अपना योगदान दे सकता है। कलेक्टर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>ग्वालियर 17सितंबर 2026/सेवा–संकल्प अभियान के तहत जिला चिकित्सालय मुरार में कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने स्वयं रक्तदान कर मानवता की सेवा का प्रेरक संदेश दिया।<br />
उनका यह कदम केवल रक्तदान तक सीमित नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने में अपना योगदान दे सकता है।</p>
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<video class="wp-video-shortcode" id="video-67117-1" width="696" height="392" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260917-WA0016.mp4?_=1" /><a href="https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260917-WA0016.mp4">https://shabdshaktinews.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260917-WA0016.mp4</a></video></div>
<p>कलेक्टर ने शासकीय सेवकों से भी आगे बढ़कर रक्तदान करने और इस पुनीत कार्य में सहभागी बनने का आह्वान किया।<br />
आपका रक्तदान किसी के जीवन में नई उम्मीद बन सकता है।<br />
आइए, सेवा को संकल्प बनाएं और मानवता के लिए रक्तदान करें।</p>
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		<title>यूजीसी नियमों पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान से उठे सवाल क्या संघ की राय स्पष्ट है ? भाजपा और केंद्र सरकार की भूमिका पर भी चर्चा तेज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 07:21:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[विश्लेषण]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[केंद्र सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[भाजपा]]></category>
		<category><![CDATA[मोहन भागवत]]></category>
		<category><![CDATA[यूजीसी नियम]]></category>
		<category><![CDATA[संघ]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रवीण दुबे  नई दिल्ली/भीलवाड़ा/ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव से जुड़े नए नियमों को लेकर चल रही बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की आचार्य पुलक सागर महाराज से बातचीत में कही गई बात ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर चर्चा के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto" style="text-align: center;"><strong><span style="color: #993366;">प्रवीण दुबे </span></strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">नई दिल्ली/भीलवाड़ा/ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव से जुड़े नए नियमों को लेकर चल रही बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की आचार्य पुलक सागर महाराज से बातचीत में कही गई बात ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।</div>
<div dir="auto">आचार्य पुलक सागर महाराज के अनुसार, मोहन भागवत ने उनसे बातचीत के दौरान कहा— “अभी केवल प्रस्ताव आया है, पास नहीं हुआ, न यह कानून बना है और न बनेगा।” मीडिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि बातचीत के दौरान इस विषय के न्यायालय में विचाराधीन होने का उल्लेख हुआ।</div>
<div dir="auto">भागवत की इस कथित टिप्पणी के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इस बयान का वास्तविक आशय क्या है और इसे UGC नियमों की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में कैसे समझा जाए?</div>
<div dir="auto">बयान का पहला हिस्सा स्पष्ट, दूसरा हिस्सा सवालों के घेरे में</div>
<div dir="auto">यह कहना कि किसी प्रस्ताव के आने और उसके अंतिम रूप से लागू होने में अंतर होता है, अपने आप में तथ्यात्मक रूप से स्पष्ट बात है। किसी प्रस्ताव का अंतिम स्वरूप संबंधित प्रक्रिया, निर्णय और आवश्यकता पड़ने पर न्यायिक हस्तक्षेप के बाद ही तय होता है।</div>
<div dir="auto">लेकिन बयान का दूसरा हिस्सा—“न कानून बना है और न बनेगा”—बहस को एक अलग दिशा देता है।</div>
<div dir="auto">यही वह वाक्य है जिसको लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। यदि यह बात आचार्य पुलक सागर महाराज के माध्यम से सही रूप में सामने आई है तो स्वाभाविक रूप से यह जानने की जरूरत महसूस होती है कि “न बनेगा” से आशय क्या है? क्या यह केवल वर्तमान स्थिति का आकलन था, या संघ की ओर से इन नियमों को लेकर कोई स्पष्ट दृष्टिकोण व्यक्त किया गया था?</div>
<div dir="auto">यही कारण है कि इस संवेदनशील विषय पर मोहन भागवत की ओर से स्वयं स्पष्टीकरण सामने आने की मांग और चर्चा दोनों बढ़ सकती हैं।</div>
<div dir="auto">UGC की वर्तमान स्थिति को भी समझना जरूरी</div>
<div dir="auto">यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि UGC की आधिकारिक वेबसाइट पर University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित नए नियमों में सूचीबद्ध किया गया है। इसलिए पूरे विषय को केवल “एक प्रस्ताव आया है” कहकर समझना वर्तमान आधिकारिक रिकॉर्ड की पूरी तस्वीर नहीं देता।</div>
<div dir="auto">यानी बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि जिस प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग पक्ष “प्रस्ताव”, “नियम” और “कानून” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनकी कानूनी स्थिति क्या है और न्यायालय की कार्यवाही के बाद इनका अंतिम प्रभाव क्या होगा।</div>
<div dir="auto">क्या बयान से संघ का रुख समझा जाए?</div>
<div dir="auto">यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील पहलू है।</div>
<div dir="auto">मोहन भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक हैं। भाजपा और RSS के बीच वैचारिक संबंध सार्वजनिक रूप से चर्चित रहे हैं, लेकिन किसी एक संगठन के पदाधिकारी के बयान को स्वतः केंद्र सरकार या भाजपा का औपचारिक निर्णय मान लेना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।</div>
<div dir="auto">फिर भी, राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषण के स्तर पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि संघ प्रमुख की ओर से यह कहा गया है कि “न कानून बना है और न बनेगा”, तो क्या इसे इस मुद्दे पर संघ की असहमति या आपत्ति के संकेत के रूप में देखा जाए?</div>
<div dir="auto">इसका निश्चित उत्तर तभी सामने आएगा जब RSS, भाजपा, केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय इस विषय पर औपचारिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करें।</div>
<div dir="auto">क्या भाजपा या केंद्र सरकार ने निर्णय कर लिया है?</div>
<div dir="auto">फिलहाल भागवत के कथित बयान को केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय के रूप में प्रस्तुत करना जल्दबाजी होगी।</div>
<div dir="auto">सरकार की ओर से किसी प्रस्ताव को वापस लेने, उसमें बदलाव करने या उसे लागू नहीं करने का औपचारिक निर्णय और संघ प्रमुख की बातचीत में कही गई बात—दो अलग चीजें हैं।</div>
<div dir="auto">हालांकि, राजनीतिक चर्चा में दोनों को जोड़कर देखा जाना स्वाभाविक है। खासकर इसलिए क्योंकि केंद्र में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार है और RSS तथा भाजपा के वैचारिक संबंधों को देखते हुए संघ से आने वाले महत्वपूर्ण संकेतों पर राजनीतिक हलकों में विशेष ध्यान दिया जाता है।</div>
<div dir="auto">लेकिन जब तक केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय की ओर से औपचारिक निर्णय सामने नहीं आता, तब तक इसे सरकार का फैसला कहना उचित नहीं होगा।</div>
<div dir="auto">सुप्रीम कोर्ट में मामला होने के बावजूद टिप्पणी पर सवाल क्यों?</div>
<div dir="auto">इस पूरे प्रकरण का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू न्यायिक प्रक्रिया है।</div>
<div dir="auto">यदि किसी विषय पर मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, तो उस पर सार्वजनिक चर्चा और राजनीतिक टिप्पणी को लेकर स्वाभाविक रूप से सावधानी की अपेक्षा की जाती है। हालांकि, किसी लंबित मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है।</div>
<div dir="auto">इसी कारण यहां मूल सवाल यह है कि भागवत के कथित बयान का उद्देश्य न्यायालय के विचाराधीन मामले पर कोई निष्कर्ष देना था या केवल यह बताना था कि मौजूदा स्थिति को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।</div>
<div dir="auto">यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि न्यायालय अपना निर्णय स्वतंत्र रूप से करता है और किसी सामाजिक या राजनीतिक व्यक्ति की टिप्पणी न्यायालय के निर्णय का विकल्प नहीं होती।</div>
<div dir="auto"><strong>अब भागवत के स्पष्टीकरण की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?</strong></div>
<div dir="auto">पूरे विवाद में सबसे अहम बात यही है कि यह बयान आचार्य पुलक सागर महाराज के हवाले से सामने आया है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में भागवत की ओर से इस कथन पर अलग से विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं दिखता।</div>
<div dir="auto">ऐसे में यदि मोहन भागवत स्वयं स्पष्ट कर दें कि उन्होंने “न कानून बना है और न बनेगा” किस संदर्भ में कहा था, तो कई सवालों का जवाब मिल सकता है।</div>
<div dir="auto">क्या उनका आशय था कि मौजूदा प्रस्ताव अंतिम रूप में लागू नहीं होगा?</div>
<div dir="auto">क्या उनका आशय केवल यह था कि अभी इसे कानून का दर्जा नहीं मिला है?</div>
<div dir="auto">या वे यह संकेत दे रहे थे कि संघ इस व्यवस्था के मौजूदा स्वरूप का समर्थन नहीं करता?</div>
<div dir="auto">इन तीनों अर्थों में काफी अंतर है।</div>
<div dir="auto">बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया</div>
<div dir="auto">UGC नियमों को लेकर पहले से ही छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं। अब भागवत के कथित बयान ने बहस में एक नया आयाम जोड़ दिया है।</div>
<div dir="auto">एक तरफ इसे उन लोगों द्वारा महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो इन नियमों के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर, यह प्रश्न भी उठ रहा है कि जब विषय न्यायालय और नियामकीय प्रक्रिया से जुड़ा है, तब किसी अंतिम परिणाम की बात किस आधार पर कही गई।</div>
<div dir="auto"> <strong>अब निगाह आधिकारिक स्पष्टीकरण पर</strong></div>
<div dir="auto">मोहन भागवत और आचार्य पुलक सागर महाराज के बीच हुई बातचीत से सामने आई यह बात निश्चित रूप से चर्चा का विषय बन गई है। लेकिन इसके आधार पर केंद्र सरकार या भाजपा के अंतिम निर्णय की घोषणा मान लेना अभी उचित नहीं होगा।</div>
<div dir="auto">सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि “न कानून बना है और न बनेगा” कहने के पीछे मोहन भागवत का वास्तविक आशय क्या था।</div>
<div dir="auto">यदि यह संघ की स्पष्ट नीति का संकेत है तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। और यदि यह केवल वर्तमान कानूनी एवं प्रक्रियागत स्थिति को लेकर की गई टिप्पणी थी, तो उसका भी स्पष्टीकरण आवश्यक है।</div>
<div dir="auto">क्योंकि UGC से जुड़े नियम केवल शिक्षा व्यवस्था का विषय नहीं हैं। इनके साथ सामाजिक समानता, भेदभाव, आरक्षण, विद्यार्थियों के अधिकार और संस्थागत शिकायत निवारण जैसे संवेदनशील प्रश्न जुड़े हैं। ऐसे विषय पर शब्दों की स्पष्टता ही भ्रम और राजनीतिक अटकलों के बीच अंतर पैदा कर सकती है।</div>
<div dir="auto">फिलहाल देश की नजर तीन स्तरों पर है—UGC की आगे की कार्रवाई, न्यायालय की कार्यवाही और केंद्र सरकार की आधिकारिक स्थिति। इन्हीं से यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा नियमों का अंतिम स्वरूप क्या होगा और मोहन भागवत की टिप्पणी का वास्तविक संदर्भ क्या था।</div>
<div dir="auto"></div>
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		<title>देव श्रीमाली क़ो मिला पत्रकारिता का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Praveen Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 05:25:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देव श्रीमाली]]></category>
		<category><![CDATA[पत्रकारिता लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; ग्वालियर ./भोपाल /17 सितंबर 2026/ सेन्ट्रल इंडिया प्रेस क्लब द्वारा भोपाल के कुशभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मे आयोजित एक भव्य और गरिमापूर्ण समारोह मे ग्वालियर चंबल अंचल के वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली सहित मध्यप्रदेश के चुनिंदा वरिष्ठ पत्रकारों और पूर्व मे मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क विभाग की सफलता पूर्वक कमान संभाल चुके जनसम्पर्क विभाग के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>ग्वालियर ./भोपाल /17 सितंबर 2026/</p>
<p>सेन्ट्रल इंडिया प्रेस क्लब द्वारा भोपाल के कुशभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मे आयोजित एक भव्य और गरिमापूर्ण समारोह मे ग्वालियर चंबल अंचल के वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली सहित मध्यप्रदेश के चुनिंदा वरिष्ठ पत्रकारों और पूर्व मे मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क विभाग की सफलता पूर्वक कमान संभाल चुके जनसम्पर्क विभाग के पूर्व आयुक्तों क़ो लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया.</p>
<p>इस अवार्ड समारोह के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यवक्ता पूर्व राजयपाल प्रो कप्तान सिंह सोलंकी, विशिष्ठ अतिथि मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, मंत्री विश्वास सारंग, पूर्व रक्षामंत्री सुरेश पचौरी, वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव दिल्ली, महेश श्रीवास्तव, राजेंद्र शर्मा, रामभुवन सिंह कुशवाह, इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविन्द तिवारी थे. इन समेत अनेक पत्रकारों क़ो पत्रकारिता के क्षेत्र मे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया. अवार्ड पाने वालों मे ग्वालियर के वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल और डॉ राकेश पाठक भी शामिल रहे. कार्यक्रम के प्रारम्भ मे स्वागत भाषण संगठन के अध्यक्ष विजय कुमार दास ने किया.</p>
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